# राजस्थान के परबतसर चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार कैलाश चंद्र को मिला केवल एक वोट, पत्नी और माता-पिता ने भी नहीं दिया साथ

> राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले में नगर पालिका चुनाव के दौरान बीजेपी प्रत्याशी कैलाश चंद्र को सिर्फ एक वोट मिला, जिससे साफ है कि उनके परिवार ने भी उनका साथ नहीं दिया।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-09-14 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-ke-parbatsar-chunava-men-bjp-ummidavara-kailash-chandra-ko-mila-kevala-eka-vota-patni-aura-mata-pita-ne-bhi-nahin-diya-s-32240 · **Language:** Hindi
**Tags:** राजस्थान निकाय चुनाव, परबतसर नगर पालिका, कैलाश चंद्र, बीजेपी, कांग्रेस, डीडवाना कुचामन, चुनावी नतीजे

राजस्थान के स्थानीय निकाय चुनावों के हालिया नतीजों के बीच से एक बेहद ही हैरान कर देने वाला और अनोखा वाकया सामने आया है। डीडवाना-कुचामन जिले के अंतर्गत आने वाली परबतसर नगर पालिका के चुनावों में एक प्रत्याशी को मिले मतों की संख्या ने पूरे प्रशासनिक अमले और आम जनता को गहरे अचंभे में डाल दिया है। यहां भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अधिकृत उम्मीदवार कैलाश चंद्र को मतदान के बाद केवल एक ही वोट प्राप्त हुआ है। इस अप्रत्याशित चुनावी परिणाम को देखकर खुद उम्मीदवार, उनके समर्थक और राजनीतिक विश्लेषक पूरी तरह से दंग रह गए हैं।

## परिवार और अपनों से नहीं मिला साथ
परबतसर नगर पालिका के वार्ड नंबर 13 से बीजेपी के अधिकृत प्रत्याशी के रूप में कैलाश चंद्र ने पूरे उत्साह और चुनावी तैयारियों के साथ अपनी दावेदारी पेश की थी। अपने चुनाव अभियान के दौरान उन्हें पूरा विश्वास था कि पार्टी के मजबूत सिंबल और उनके बड़े परिवार का सामूहिक समर्थन उन्हें जीत की दहलीज तक आसानी से ले जाएगा। लेकिन जब मतगणना के दिन EVM खुली, तो सामने आए परिणामों ने कैलाश चंद्र के पैरों तले से जमीन ही खिसका दी। उन्हें पूरे वार्ड से कुल मिलाकर केवल एक ही मत प्राप्त हुआ था।

यह चुनावी परिणाम केवल एक सामान्य राजनीतिक पराजय नहीं है, बल्कि एक ऐसा कड़वा सच भी है जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। इस मतदान के अंतिम आंकड़ों से यह पूरी तरह साफ हो गया है कि उम्मीदवार कैलाश चंद्र को उनकी अपनी पत्नी, उनके माता-पिता और अन्य सगे-संबंधियों तक का वोट नहीं मिला। जिस परिवार के नैतिक और चुनावी समर्थन के दम पर वे इस चुनावी समर में ताल ठोक रहे थे, उसी कुनबे ने ऐन वक्त पर उन्हें मतदान केंद्र में जाकर दगा दे दिया।

## विपक्षी उम्मीदवारों को मिले भारी मत
वार्ड संख्या 13 के चुनावी नतीजे विपक्षी खेमे के लिए पूरी तरह से एकतरफा और उत्साहजनक रहे। इस सीट पर कांग्रेस की प्रत्याशी हिना खानम ने शानदार चुनावी प्रदर्शन करते हुए कुल 376 वोट हासिल किए और एक बड़ी एकतरफा जीत अपने नाम दर्ज कराई। वहीं दूसरी ओर, निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरे रसीद खां भी मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने में काफी हद तक सफल रहे और उन्होंने 195 वोट अपने खाते में जोड़ लिए। हालांकि, इस पूरे जिले में चर्चा हिना खानम की शानदार जीत से कहीं ज्यादा बीजेपी उम्मीदवार कैलाश चंद्र को मिले उस इकलौते वोट की हो रही है, जिसने रिश्तों और राजनीति के समीकरणों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस चुनावी रण में उनके साथ जो घटित हुआ, उसकी उम्मीद शायद खुद इस उम्मीदवार ने भी सपने में नहीं की होगी।

## इसका आप पर असर
यह परिणाम भारतीय लोकतंत्र में व्यक्तिगत स्वतंत्र इच्छा और चुनावी लोकतंत्र के एक विशेष पहलू को दर्शाता है।

- **भारत में:** यह घटना देश भर के मतदाताओं को यह संदेश देती है कि लोकतंत्र में गुप्त मतदान की प्रक्रिया बेहद मजबूत और सुरक्षित है। कोई भी व्यक्ति बिना किसी पारिवारिक दबाव के अपनी मर्जी से वोट डालने के लिए स्वतंत्र है।
- **राजस्थान में:** डीडवाना-कुचामन और परबतसर के निवासियों के लिए यह स्थानीय राजनीति में उम्मीदवारों के वास्तविक घरेलू प्रभाव को समझने का जरिया है। इससे स्थानीय मतदाता चुनावी दावों के प्रति अधिक जागरूक होंगे।
- **राजनीतिक दलों के लिए:** यह दिखाता है कि दलों को उम्मीदवारों का चयन करते समय केवल उनके बाहरी दावों पर नहीं बल्कि जमीनी पकड़ पर ध्यान देना चाहिए। इससे टिकट वितरण की प्रक्रिया में अधिक सावधानी बरती जाएगी।
- **आम मतदाताओं के लिए:** यह मामला यह साबित करता है कि हर एक मत का मूल्य स्वतंत्र और महत्वपूर्ण है। मतदाता यह समझ सकते हैं कि उनका वोट पूरी तरह से गोपनीय रहता है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह अनोखा चुनावी नतीजा उम्मीदवार के व्यक्तिगत स्तर पर समर्थन की भारी कमी और विपक्ष की मजबूत पकड़ के कारण हुआ है।

- **पारिवारिक समर्थन की कमी:** बीजेपी उम्मीदवार कैलाश चंद्र को उनके खुद के परिवार से भी वोट नहीं मिल सका, जिसमें उनके माता-पिता और पत्नी शामिल हैं। इसका साफ मतलब है कि उम्मीदवार के निकटतम लोग भी उनकी उम्मीदवारी या नीतियों से सहमत नहीं थे।
- **विपक्षी उम्मीदवारों का बेहतर प्रभाव:** वार्ड संख्या 13 में कांग्रेस प्रत्याशी हिना खानम ने 376 वोट और निर्दलीय प्रत्याशी रसीद खां ने 195 वोट हासिल किए। यह स्पष्ट करता है कि इन उम्मीदवारों का जनता के साथ मजबूत संपर्क था।
- **कमजोर स्थानीय अभियान:** यह परिणाम दिखाता है कि केवल बड़ी पार्टी का सिंबल होना ही जीत की गारंटी नहीं है। उम्मीदवार स्थानीय स्तर पर व्यक्तिगत मतदाता आधार तैयार करने में पूरी तरह असफल रहे।

## सवाल-जवाब

### 1. कैलाश चंद्र किस वार्ड और नगर पालिका से चुनाव लड़ रहे थे?
वे डीडवाना-कुचामन जिले की परबतसर नगर पालिका के वार्ड नंबर 13 से चुनाव लड़ रहे थे।

### 2. कैलाश चंद्र को मतगणना में कुल कितने वोट मिले?
उन्हें इस स्थानीय निकाय चुनाव में कुल मिलाकर केवल 1 वोट प्राप्त हुआ।

### 3. वार्ड नंबर 13 से किस उम्मीदवार ने जीत हासिल की?
कांग्रेस पार्टी की प्रत्याशी हिना खानम ने 376 वोट हासिल करके एकतरफा जीत दर्ज की।

### 4. इस चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी को कितने वोट मिले?
निर्दलीय उम्मीदवार रसीद खां को इस वार्ड से कुल 195 वोट मिले।

### 5. क्या कैलाश चंद्र के परिवार ने उनके पक्ष में मतदान किया?
नहीं, चुनाव नतीजों से साफ है कि उनकी पत्नी, माता-पिता और करीबी रिश्तेदारों ने भी उन्हें वोट नहीं दिया।

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