# राजस्थान के पुष्कर में स्थित जयपुर घाट पर्यटकों और श्रद्धालुओं को क्यों लुभा रहा है

> अजमेर जिले के पुष्कर सरोवर किनारे बने 52 घाटों में जयपुर घाट अपनी शांति, ऐतिहासिक पहचान और खूबसूरती के कारण देशी-विदेशी सैलानियों का पसंदीदा केंद्र बन चुका है.

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-11-03 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-ke-pushkar-men-sthita-jaipur-ghat-paryatakon-aura-shraddhaluon-ko-kyon-lubha-raha-hai-55560 · **Language:** Hindi
**Tags:** पुष्कर, जयपुर घाट, अजमेर, पुष्कर मेला, राजस्थान पर्यटन, पुष्कर सरोवर

राजस्थान के अजमेर जिले में स्थित पुष्कर अपने प्राकृतिक सौंदर्य और गहरी आध्यात्मिक पहचान के लिए दुनिया भर में पहचाना जाता है. यहां स्थित पवित्र पुष्कर सरोवर के चारों ओर कुल 52 घाट बने हुए हैं, जो तीर्थयात्रियों और घूमने आने वाले सैलानियों के आकर्षण का मुख्य केंद्र रहते हैं. इन्हीं प्रमुख घाटों में शामिल जयपुर घाट अपने पुराने ऐतिहासिक महत्व, शांत परिवेश और सरोवर के विहंगम दृश्यों के कारण अपनी अलग पहचान बनाए हुए है. धार्मिक आस्था के साथ-साथ यह स्थान अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के बीच भी बेहद लोकप्रिय साबित हो रहा है, जहां लोग सरोवर के शांत जल और आसपास बने देवालयों के बीच सुकून भरे पल बिताने पहुंचते हैं.

## भक्ति भाव और विदेशी सैलानियों की पसंदीदा जगह
जयपुर घाट पर सुबह से लेकर शाम तक श्रद्धालुओं की निरंतर आवाजाही बनी रहती है. श्रद्धालु यहां सरोवर के दर्शन लाभ लेने और पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करने के लिए हाजिरी लगाते हैं. घाट का शांत और स्वच्छ वातावरण पर्यटकों को अपनी ओर खींचता है. इस जगह की सबसे खास बात यह है कि यहां भारतीय श्रद्धालुओं के अलावा भारी तादाद में विदेशी सैलानी भी आते हैं. वे घाट की सीढ़ियों पर बैठकर प्राकृतिक दृश्यों का आनंद लेते हैं और अपने कैमरों से यहां की वादियों व सरोवर की खूबसूरत तस्वीरें खींचते दिखाई देते हैं.

## वार्षिक मेले के दौरान उमड़ता है सैलानियों का सैलाब
पुष्कर में हर साल आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय पुष्कर मेले के समय इस घाट का माहौल और भी ज्यादा जीवंत हो उठता है. देश और दुनिया के कोने-कोने से आने वाले यात्री पुष्कर सरोवर के मनमोहक दृश्यों और यहां के शांत वातावरण में समय बिताने के लिए जयपुर घाट का रुख करते हैं. मेले के दौरान खासकर विदेशी आगंतुकों का बड़ा जमावड़ा यहां देखने को मिलता है. इस बार इस अंतरराष्ट्रीय पुष्कर मेले की शुरुआत 10 नवंबर से होने जा रही है, जिसको लेकर तैयारियां जोरों पर हैं.

## शाम के समय रेस्टोरेंट और कैफे में जमती है महफिल
जयपुर घाट के आसपास संचालित होने वाले कैफे और रेस्टोरेंट भी यहां आने वाले मुसाफिरों के आकर्षण का बड़ा केंद्र हैं. दिन ढलते ही शाम के वक्त इन खान-पान के ठिकानों पर पर्यटकों की खासी भीड़ जुट जाती है. लोग कैफे की बालकनियों या रूफटॉप पर बैठकर गरमा-गरम चाय, कॉफी और स्थानीय व्यंजनों का स्वाद लेते हुए पुष्कर सरोवर के बदलते रंगों को निहारते हैं. दिन के मुकाबले शाम के वक्त ढलते सूरज और जलती रोशनियों के बीच यहां का नजारा बेहद दर्शनीय और सम्मोहक बन जाता है.

## इसका आप पर असर
पुष्कर और जयपुर घाट पर पर्यटन व धार्मिक गतिविधियों से स्थानीय आतिथ्य सत्कार और यात्रा व्यवस्था पर सीधा प्रभाव पड़ता है.

- **भारत में:** आगामी 10 नवंबर से आयोजित होने वाले पुष्कर मेले में शामिल होने वाले देश भर के यात्रियों को समय रहते होटल और परिवहन बुकिंग पूरी कर लेनी चाहिए. मेले के दौरान भीड़ बढ़ने से ठहरने और यात्रा के विकल्पों की उपलब्धता सीमित हो जाती है.
- **अजमेर और पुष्कर में:** स्थानीय कैफे, रेस्टोरेंट, हस्तशिल्प व्यापारियों और पूजा सामग्री विक्रेताओं के कारोबार में भारी उछाल आने की उम्मीद है. पर्यटन सीजन और मेले के आगमन से स्थानीय निवासियों के लिए आय और रोजगार के नए अवसर तैयार होंगे.
- **विदेशी पर्यटकों के लिए:** शांत माहौल और फोटोग्राफी के शौकीन अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए जयपुर घाट सरोवर दर्शन और सुकून भरे पलों का बेहतरीन ठिकाना बना हुआ है. शाम के समय यहां के कैफे संस्कृति का अनुभव लेने के लिए सैलानी पहले से समय निकाल कर पहुंच सकते हैं.
- **श्रद्धालुओं के लिए:** पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए सुबह और शाम का समय सबसे अनुकूल रहता है. शांत वातावरण में सरोवर दर्शन करने के इच्छुक भक्तों को भीड़ से बचने के लिए तड़के घाट पर पहुंचना चाहिए.

## ऐसा क्यों हुआ
जयपुर घाट अपनी विशिष्ट ऐतिहासिक बनावट, शांतिपूर्ण परिवेश और पुष्कर के जीवंत कैफे कल्चर के संगम के चलते लोकप्रिय बना हुआ है.

- **शांत वातावरण और प्राकृतिक सुंदरता:** पुष्कर सरोवर के 52 घाटों में से कई घाटों पर भारी भीड़ रहती है, जबकि जयपुर घाट अपने शांत पानी और खुले दृश्यों के कारण सुकून चाहने वालों को आकर्षित करता है. यहां की सीढ़ियों से सरोवर और आसपास के मंदिरों का मनोरम दृश्य साफ दिखाई देता है.
- **धार्मिक और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:** यह घाट पुष्कर के सबसे पुराने घाटों में गिना जाता है, जहां लंबे समय से पारंपरिक अनुष्ठान होते आ रहे हैं. इसकी प्राचीन वास्तुकला और धार्मिक महत्ता श्रद्धालुओं को अपनी परंपराओं से जोड़ती है.
- **कैफे संस्कृति और शाम का आकर्षण:** घाट के निकटवर्ती क्षेत्र में विकसित हुए आधुनिक कैफे और खान-पान के केंद्र विदेशी व युवा पर्यटकों को लुभाते हैं. शाम के वक्त ढलते सूरज की रोशनी में सरोवर का नजारा देखना यहां आने वालों के लिए मुख्य आकर्षण बन चुका है.
- **आगामी मेले का अवसर:** सालाना अंतरराष्ट्रीय पुष्कर मेले का आयोजन 10 नवंबर से होना निर्धारित है, जिससे इस पूरे क्षेत्र में उत्सव का माहौल बनने लगा है. मेले की चहल-पहल से पहले ही पर्यटक और शोधार्थी घाटों की ओर आकर्षित हो रहे हैं.

## सवाल-जवाब

### 1. जयपुर घाट राजस्थान के किस जिले में स्थित है?
जयपुर घाट राजस्थान के अजमेर जिले के प्रसिद्ध धार्मिक कस्बे पुष्कर में स्थित है.

### 2. पुष्कर सरोवर के किनारे कुल कितने घाट बने हुए हैं?
पवित्र पुष्कर सरोवर के चारों ओर कुल 52 घाट बने हुए हैं.

### 3. विदेशी पर्यटक जयपुर घाट पर मुख्य रूप से क्या करना पसंद करते हैं?
विदेशी सैलानी यहां शांत पानी और प्राकृतिक नजारों के बीच सुकून के पल बिताने और फोटोग्राफी करने आते हैं.

### 4. इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय पुष्कर मेले का आयोजन कब से शुरू हो रहा है?
इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय पुष्कर मेले का आयोजन 10 नवंबर से शुरू हो रहा है.

### 5. शाम के समय जयपुर घाट के आसपास सैलानी कहां एकत्र होते हैं?
शाम के वक्त पर्यटक घाट के पास बने कैफे और रेस्टोरेंट में चाय-कॉफी का आनंद लेते हुए सरोवर के खूबसूरत नजारे देखते हैं.

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