# राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में प्रसवोत्तर स्वास्थ्य संकट गहराया, जयपुर में किडनी खराब होने पर प्रसूता एसएमएस रेफर

> जयपुरिया अस्पताल में प्रसव के बाद महिला की किडनी खराब होने और विशेषज्ञ न मिलने के कारण उसे सवाई मानसिंह अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया है। राज्य के कोटा, जोधपुर और बीकानेर में भी ऐसे मामले सामने आने से स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-09-02 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-ke-sarakari-aspatalon-men-prasavottara-svasthya-snkata-gaharaya-jaipur-men-kidani-kharaba-hone-para-prasuta-sms-rephara-26135 · **Language:** Hindi
**Tags:** जयपुरिया अस्पताल, सवाई मानसिंह अस्पताल, प्रसवोत्तर जटिलता, किडनी फेल्योर, राजस्थान स्वास्थ्य विभाग, नेफ्रोलॉजिस्ट, कोटा प्रसूता मौत, जयपुर

राजस्थान के सरकारी चिकित्सा संस्थानों में प्रसव के बाद महिलाओं के शरीर के प्रमुख अंगों के प्रभावित होने की समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं। कोटा, जोधपुर तथा बीकानेर के बाद अब राज्य की राजधानी जयपुर स्थित जयपुरिया अस्पताल में एक महिला की प्रसवोत्तर स्थिति अत्यंत चिंताजनक हो गई। अस्पताल परिसर में बुनियादी सुपरस्पेशलिटी चिकित्सा सुविधाओं की अनुपस्थिति के कारण प्रसूता का सही समय पर विशेषज्ञ उपचार नहीं हो सका, जिससे उसकी हालत बिगड़ती चली गई और अंततः उसे सवाई मानसिंह अस्पताल के गहन चिकित्सा इकाई (मेडिकल आईसीयू) में भर्ती कराना पड़ा।

 

## जयपुरिया अस्पताल में प्रसूता की बिगड़ी स्थिति और आपातकालीन रेफरल

जयपुरिया अस्पताल के प्रसूति विभाग में 25 अगस्त को भर्ती कराई गई मरीज प्रीति शर्मा का प्रसव कराया गया था। शिशु के जन्म के ठीक दो दिन बीतने पर अचानक महिला का मूत्र उत्सर्जन (यूरिन आउटपुट) पूर्ण रूप से बंद हो गया। इस गंभीर शारीरिक बदलाव के कारण महिला का स्वास्थ्य तेजी से बिगड़ने लगा और उसकी किडनी की कार्यप्रणाली प्रभावित हो गई। अस्पताल प्रशासन के पास गुर्दा रोग विशेषज्ञ (नेफ्रोलॉजिस्ट) का कोई स्थायी पद या चिकित्सक उपलब्ध नहीं था। ऐसी स्थिति में डॉक्टरों ने मरीज को सामान्य मेडिसिन वार्ड में रखकर चार दिनों तक लगातार डायलिसिस प्रक्रिया पर रखा। निरंतर चार दिन डायलिसिस दिए जाने के बावजूद महिला के स्वास्थ्य मानकों में सुधार दर्ज नहीं किया गया और उसकी स्थिति लगातार नाजुक बनी रही। परिणाम स्वरूप जयपुरिया अस्पताल के चिकित्सकों ने प्रसूता को सवाई मानसिंह (एसएमएस) अस्पताल स्थानांतरित करने का फैसला किया। वर्तमान में महिला एसएमएस अस्पताल के मेडिकल आईसीयू में विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उपचाराधीन है, जहां उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है।

 

## प्रदेश भर में बढ़ता प्रसवोत्तर किडनी संकट और प्रशासनिक निष्फलता

राजस्थान के विभिन्न जिलों के सरकारी अस्पतालों में प्रसव के उपरांत प्रसूताओं की किडनी तथा लिवर की कार्यक्षमता अचानक ठप होने की घटनाओं में तेजी आई है। बीते 2 से 3 महीनों की समयावधि के दौरान अकेले कोटा जिले में ही इस प्रकार की जटिलताओं के चलते 4 से अधिक महिलाओं की जान जा चुकी है। कोटा में हुई मौतों के बाद राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने उच्च स्तरीय जांच समितियों का गठन किया था। हालांकि इन कमेटियों की बैठकों और निर्देशों के बावजूद राज्य के अन्य जिलों में ऐसी गंभीर घटनाओं पर रोक नहीं लग सकी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों, चिकित्सा कर्मियों तथा पीड़ित परिवारों के बीच यह प्रश्न बना हुआ है कि आखिर प्रसव प्रक्रिया पूरी होने के बाद महिलाओं के महत्वपूर्ण आंतरिक अंग अचानक काम करना क्यों बंद कर रहे हैं।

 

## दीवारों पर सुपरस्पेशलिटी के दावे और धरातल पर सुविधाओं का अकाल

राजधानी के जयपुरिया अस्पताल में रोजाना सैकड़ों की संख्या में प्रसूति और आपातकालीन श्रेणी के मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। अस्पताल के नवनिर्मित भवन के दीवारों और सूचना बोर्डों पर सुपरस्पेशलिटी स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता के बड़े-बड़े दावे लिखे गए हैं। इसके विपरीत वास्तविक स्थिति यह है कि अस्पताल में नेफ्रोलॉजिस्ट, कार्डियोलॉजिस्ट (हृदय रोग विशेषज्ञ) और न्यूरोसर्जन (तंत्रिका तंत्र विशेषज्ञ) जैसे जीवनरक्षक विशेषज्ञों का भारी अभाव बना हुआ है। इसके अतिरिक्त अस्पताल परिसर में निर्मित नया ओपीडी ब्लॉक और सेंट्रल लैब पिछले 6 महीने से बनकर पूरी तरह तैयार है, लेकिन केवल बिजली से जुड़ा कार्य अधूरा रहने के कारण इसे चालू नहीं किया जा सका है। इस बुनियादी कमी के चलते रोजाना आने वाले आम मरीजों को जांच कराने और पर्ची बनवाने के लिए घंटों तक लंबी कतारों में खड़ा रहना पड़ता है।

## इसका आप पर असर
राजस्थान के सरकारी स्वास्थ्य ढांचे में सुपरस्पेशलिटी सेवाओं और डॉक्टरों की कमी आम मरीजों तथा गर्भवती महिलाओं के जीवन पर सीधा असर डालती है।

- **भारत में:** सरकारी प्राथमिक और जिला अस्पतालों में सुपरस्पेशलिटी डॉक्टरों की कमी होने से गंभीर मरीजों को बड़े मेडिकल कॉलेजों में रेफर करना पड़ता है। इससे आपातकालीन स्थिति में मरीज का महत्वपूर्ण इलाज समय पर शुरू होने में देरी होती है।

- **जयपुर और राजस्थान में:** जयपुरिया अस्पताल में नेफ्रोलॉजिस्ट न होने के कारण प्रसूताओं को एसएमएस अस्पताल रेफर होना पड़ रहा है। इससे जयपुर सहित आसपास के जिलों से आने वाले प्रसूति मरीजों पर स्वास्थ्य जोखिम बढ़ जाता है।

- **प्रसूति सुरक्षा पर असर:** प्रसव के बाद यूरिन आउटपुट बंद होने या अंग प्रभावित होने पर तुरंत नेफ्रोलॉजिस्ट की देखरेख जरूरी होती है। सामान्य वार्ड में उपचार की वजह से मरीज की स्थिति अधिक बिगड़ने का खतरा रहता है।

- **जांच और पर्ची के लिए कतारें:** 6 महीने से नया ओपीडी ब्लॉक और सेंट्रल लैब शुरू न होने से मरीजों को छोटी-छोटी जांचों के लिए घंटों कतार में लगना पड़ता है। इससे बुजुर्गों और गंभीर मरीजों को खासी परेशानी होती है।

- **मरीजों के लिए कदम:** डिलीवरी के बाद किसी भी तरह के असामान्य लक्षण दिखते ही तुरंत उच्च चिकित्सा केंद्र में विशेषज्ञ की सलाह लें। केवल प्राथमिक अस्पताल के भरोसे रहने के बजाय मरीज की स्थिति पर लगातार नजर रखें।

## सवाल-जवाब

### 1. जयपुरिया अस्पताल से प्रसूता को एसएमएस अस्पताल क्यों रेफर किया गया?
प्रसव के दो दिन बाद प्रसूता प्रीति शर्मा का यूरिन आउटपुट बंद हो गया था। जयपुरिया अस्पताल में स्थायी नेफ्रोलॉजिस्ट न होने और चार दिन डायलिसिस के बाद भी सुधार न होने पर उसे सवाई मानसिंह अस्पताल रेफर किया गया।

### 2. प्रसूता प्रीति शर्मा की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति कैसी है?
मरीज प्रीति शर्मा को सवाई मानसिंह (एसएमएस) अस्पताल के मेडिकल आईसीयू में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों के अनुसार उसकी हालत फिलहाल स्थिर बनी हुई है।

### 3. राजस्थान के किन अन्य जिलों में प्रसव के बाद महिलाओं की किडनी खराब होने के मामले आए हैं?
जयपुर के अलावा कोटा, जोधपुर और बीकानेर के सरकारी अस्पतालों से भी प्रसव के बाद महिलाओं की किडनी और लिवर प्रभावित होने के मामले सामने आ चुके हैं।

### 4. कोटा में प्रसवोत्तर जटिलताओं के कारण कितनी महिलाओं की मौत हुई है?
पिछले 2 से 3 महीनों के दौरान कोटा के अस्पताल में प्रसव के बाद अंग ठप होने की जटिलताओं की वजह से 4 से अधिक महिलाओं की मृत्यु हो चुकी है।

### 5. जयपुरिया अस्पताल में नया ओपीडी ब्लॉक और लैब चालू क्यों नहीं हो पा रही है?
जयपुरिया अस्पताल का नया ओपीडी ब्लॉक और सेंट्रल लैब 6 महीने से पूरी तरह तैयार है, लेकिन इलेक्ट्रिकल वर्क अधूरा रहने के कारण इसे चालू नहीं किया जा सका है।

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