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  "type": "article",
  "title": "राजस्थान के सीमावर्ती जिले में विदेशी पैसों की अवैध आवक पर प्रवर्तन निदेशालय का छापा, करोड़ों के लेनदेन का खुलासा",
  "summary": "प्रवर्तन निदेशालय ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम के उल्लंघन के तहत जैसलमेर में दो ठिकानों पर तलाशी ली, जहां बिना जरूरी अनुमति के बेल्जियम से 5.10 करोड़ रुपये मंगाने का मामला सामने आया है।",
  "content": "राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्र जैसलमेर में विदेशी धन के संदिग्ध प्रवाह और उससे जुड़ी गतिविधियों को लेकर वित्तीय जांच एजेंसी ने सख्त रुख अपनाया है। प्रवर्तन निदेशालय के जयपुर आंचलिक कार्यालय ने 19 सितंबर को जैसलमेर शहर के दो अलग-अलग ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। यह पूरी कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम यानी FEMA के प्रावधानों के अंतर्गत की गई है। तलाशी के दौरान जांच अधिकारियों के हाथ कई अहम दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड लगे हैं, जिनसे सीमावर्ती जिले में लंबे समय से चल रहे संदिग्ध वित्तीय तंत्र की परतें खुल रही हैं।\n\nबैंक खातों में पहुंचे 5.10 करोड़ रुपये, बेल्जियम से जुड़ा सीधा तार\nवित्तीय जांच में सामने आया है कि जैसलमेर निवासी देऊ राम और उसके सहयोगी ज्ञान चंद के निजी बैंक खातों में पिछले कुछ वर्षों के भीतर लगभग 5.10 करोड़ रुपये की भारी-भरकम विदेशी धनराशि जमा करवाई गई। जांच एजेंसी के अनुसार, इस पूरी रकम का सबसे बड़ा हिस्सा बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स में स्थित 'अमर एएसबीएल' नामक संस्था के जरिए भेजा गया था। भारत में विदेशी अंशदान प्राप्त करने के लिए निर्धारित वैधानिक नियमों और विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम यानी FCRA की पूर्व मंजूरी लिए बिना ही यह रकम निजी खातों में मंगवाई गई, जो कानूनी नियमों का सीधा उल्लंघन है।\n\nकागजों में पढ़ाई और परिवार का खर्च, जमीन पर मिले निजी इस्तेमाल के प्रमाण\nबैंक खातों के शुरुआती विश्लेषण से पता चला है कि विदेश से आने वाले धन को कानूनी और सामाजिक रूप से वैध दिखाने के लिए कई तरह के बहानों का सहारा लिया गया था। खातों में दर्ज विवरणों में इस पैसे को बच्चों की स्कूली शिक्षा, शिक्षण सहायता, सांस्कृतिक आयोजन, पारिवारिक भरण-पोषण तथा निजी बचत के रूप में दर्शाया गया था। हालांकि, जब जांच अधिकारियों ने इन दावों का जमीनी सत्यापन किया, तो इन उद्देश्यों के अनुरूप वास्तविक खर्च या जमीनी गतिविधियों का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला। इसके विपरीत, यह तथ्य सामने आया कि विदेशी पैसे का इस्तेमाल संस्था के अनौपचारिक कामकाज के साथ-साथ निजी जरूरतों को पूरा करने में किया गया।\n\n2.60 करोड़ रुपये की भारी नकदी निकासी पर गहराया संदेह\nवित्तीय लेनदेन की पड़ताल के दौरान जांचकर्ताओं को देऊ राम के खातों से बड़े पैमाने पर नकदी निकाले जाने के सबूत मिले हैं। रिकॉर्ड के अनुसार, कुल आई राशि में से लगभग 2.60 करोड़ रुपये नकद रूप में आहरित कर लिए गए। इतनी बड़ी मात्रा में नकदी निकाले जाने के बावजूद उसका कोई पुख्ता लेखा-जोखा, रसीद या वित्तीय रिकॉर्ड पेश नहीं किया जा सका। अब जांच दल इस बात की कड़ियां जोड़ रहा है कि बैंकों से निकाली गई यह नकदी किन-किन व्यक्तियों तक पहुंचाई गई, इसके पीछे किस प्रकार के बिचौलिए सक्रिय थे और इस पैसे को असल में किन कामों में लगाया गया।\n\nभारत में बिना पंजीकरण के 15 साल से सक्रिय थी विदेशी संस्था\n'अमर एएसबीएल' की पृष्ठभूमि खंगालने पर पता चला है कि इसकी स्थापना वर्ष 2011 में बेल्जियम के ब्रसेल्स में की गई थी। इस संगठन का संचालन बेल्जियम के नागरिक जोसेफ गोफिनेट और उनके पुत्र सैलियन गोफिनेट करते हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इस संस्था की गतिविधियां जैसलमेर में बीते 14 से 15 वर्षों से लगातार संचालित की जा रही थीं, जबकि भारत में 'अमर एएसबीएल' नाम से किसी भी प्रकार का कोई चैरिटेबल ट्रस्ट या गैर-सरकारी संगठन पंजीकृत ही नहीं है। बिना किसी कानूनी पंजीकरण और अनुमति के देऊ राम और ज्ञान चंद के जरिए इस अनौपचारिक नेटवर्क को चलाया जा रहा था।\n\nसालाना दौरे, धार्मिक सभाएं और कमजोर तबकों को प्रभावित करने के आरोप\nजांच एजेंसी के अनुसार, जोसेफ गोफिनेट और सैलियन गोफिनेट हर साल नियमित रूप से बेल्जियम से जैसलमेर आते थे। वे यहां कम से कम दो से तीन सप्ताह का समय बिताते थे। अपने प्रवास के दौरान वे स्थानीय बच्चों के परिजनों, रिश्तेदारों से संपर्क साधते थे और विशेष बैठकें व धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करते थे। जांच दल का आरोप है कि इन आयोजनों के माध्यम से इलाके के सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक मान्यताओं को प्रभावित करने के साथ-साथ धर्मांतरण कराने के प्रयास किए जा रहे थे।\n\nखातों पर रोक लगने के बाद दूसरों के नाम का किया गया इस्तेमाल\nजब भारतीय बैंकिंग तंत्र में सतर्कता बरतते हुए देऊ राम और ज्ञान चंद के खातों में आ रही विदेशी रकम पर रोक लगाई गई, तो इस नेटवर्क ने दूसरा रास्ता निकाल लिया। जांच में यह तथ्य सामने आया है कि मुख्य खातों के बाधित होने के बाद अन्य स्थानीय लोगों के निजी बैंक खातों का उपयोग कर विदेश से रकम मंगवाने का सिलसिला जारी रखा गया। प्रवर्तन निदेशालय अब उन सभी तीसरे पक्ष के खातों, उनमें हुए लेन-देन और इस पूरे विदेशी नेटवर्क से जुड़े अन्य स्थानीय संपर्कों की गहन छानबीन कर रहा है। मामले में आगे की कानूनी जांच जारी है।\n\nइसका आप पर असर\nसीमावर्ती क्षेत्रों में बिना अनुमति विदेशी धन के लेनदेन और नियामक जांच से स्थानीय नागरिकों तथा गैर-सरकारी कार्यों पर सीधा प्रभाव पड़ेगा।\n\n• भारत में: देश भर में बिना वैध FCRA अनुमति के विदेशी धन प्राप्त करने वाले व्यक्तिगत बैंक खातों और अनौपचारिक संस्थाओं पर निगरानी और सख्त होगी। यदि कोई व्यक्ति अपने निजी बैंक खाते में विदेशी संस्थाओं से रकम मंगाता है, तो कानूनी जांच और खाता फ्रीज होने का जोखिम बढ़ जाएगा।\n• राजस्थान में: जैसलमेर और पश्चिमी राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय सामाजिक संगठनों और निजी खातों के लेन-देन की कड़ी बैंकिंग जांच होगी। स्थानीय लोगों को किसी भी विदेशी व्यक्ति या गैर-पंजीकृत संस्था के साथ वित्तीय लेन-देन करने से पहले कानूनी दस्तावेजों की पुष्टि करनी होगी।\n• सावधानी: आम नागरिकों को अपने निजी बैंक खातों का उपयोग किसी अन्य व्यक्ति या विदेशी संस्था के पैसे प्राप्त करने के लिए बिल्कुल नहीं करना चाहिए। प्रॉक्सी खाताधारक बनने पर भी कानूनी दायित्व और वित्तीय अपराध की जांच का सामना करना पड़ सकता है।\n• पंजीकरण: विदेश से आने वाली किसी भी सहायता या अनुदान के लिए निर्धारित सरकारी नियमों और आधिकारिक पंजीकरण का पालन अनिवार्य है। वैध दस्तावेजों और अनुमति के बिना विदेशी फंड प्राप्त करना गैर-कानूनी घोषित है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह कार्रवाई जैसलमेर के दो व्यक्तियों के निजी खातों में बेल्जियम से बिना पूर्व सरकारी मंजूरी के लगातार विदेशी मुद्रा भेजे जाने के कारण शुरू हुई। जांच एजेंसी ने पाया कि सामाजिक सहायता की आड़ में आए पैसों का उपयोग अनधिकृत गतिविधियों और निजी खर्चों में किया जा रहा था।\n\n• नियमों का उल्लंघन: भारत में विदेश से धन प्राप्त करने के लिए FCRA अनुमति आवश्यक होती है, जिसका यहां पालन नहीं किया गया। बिना किसी विनियामक अनुमति के निजी खातों में 5.10 करोड़ रुपये की विदेशी राशि हस्तांतरित की गई।\n• नकदी की भारी निकासी: बैंक खातों से लगभग 2.60 करोड़ रुपये की बड़ी रकम नकद निकाली गई, जिसका कोई पुख्ता रिकॉर्ड या हिसाब नहीं मिला। इतनी बड़ी नकदी निकासी ने वित्तीय जांच एजेंसियों का संदेह और गहरा कर दिया।\n• अनपंजीकृत संस्था का संचालन: बेल्जियम की संस्था 'अमर एएसबीएल' पिछले 14-15 वर्षों से भारत में बिना किसी आधिकारिक पंजीकरण के सक्रिय थी। उसके संचालकों के सालाना दौरों और बैठकों से संवेदनशील सीमावर्ती इलाके में अवांछित गतिविधियों की आशंका उत्पन्न हुई।\n• प्रॉक्सी खातों का इस्तेमाल: मूल खातों पर बैंकिंग रोक लगने के बाद अन्य लोगों के बैंक खातों के जरिए धन मंगाने का प्रयास किया गया। इस तरीके ने मामले को सुनियोजित विदेशी मुद्रा उल्लंघन का रूप दे दिया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. प्रवर्तन निदेशालय ने जैसलमेर में किस कानून के तहत कार्रवाई की है?\nप्रवर्तन निदेशालय ने जैसलमेर के दो ठिकानों पर विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत 19 सितंबर को तलाशी अभियान चलाया।\n\n2. किन व्यक्तियों के बैंक खातों में विदेशी धन आने की बात सामने आई है?\nजांच के अनुसार जैसलमेर के देऊ राम और उसके सहयोगी ज्ञान चंद के खातों में करीब 5.10 करोड़ रुपये की विदेशी रकम पहुंची थी।\n\n3. यह विदेशी धनराशि किस देश और संस्था से भेजी गई थी?\nइस रकम का अधिकांश हिस्सा बेल्जियम के ब्रसेल्स स्थित 'अमर एएसबीएल' नामक संस्था द्वारा भेजा गया था।\n\n4. संस्था को कौन संचालित करता है और उनका जैसलमेर से क्या संबंध है?\nसंस्था का संचालन बेल्जियम निवासी जोसेफ गोफिनेट और उनके बेटे सैलियन गोफिनेट करते हैं, जो हर साल जैसलमेर आकर बैठकें करते थे।\n\n5. बैंक खातों से कितनी नकदी निकाले जाने का खुलासा हुआ है?\nजांच में देऊ राम के बैंक खातों से लगभग 2.60 करोड़ रुपये नकद निकाले जाने की बात सामने आई है, जिसका कोई ठोस हिसाब नहीं मिला।\n\n6. बैंकों द्वारा खाते रोके जाने के बाद क्या किया गया?\nजब मुख्य खातों में विदेशी धन आने पर बैंकों ने रोक लगाई, तब इस नेटवर्क ने अन्य स्थानीय लोगों के बैंक खातों के जरिए रकम मंगाना शुरू किया।",
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  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-09-22",
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    "जैसलमेर",
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