{
  "type": "article",
  "title": "राजस्थान के स्थानीय निकाय चुनावों से पहले तेज हुई राजनीतिक जंग, अशोक गहलोत और गोविंद सिंह डोटासरा ने लगाए संगीन आरोप",
  "summary": "राजस्थान में 309 नगर निकायों के प्रमुखों के चुनाव से पहले सियासी घमासान तेज हो गया है, जहां कांग्रेस ने बीजेपी पर पार्षदों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया है तो वहीं बीजेपी ने इन दावों को सिरे से खारिज किया है।",
  "content": "राजस्थान के स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर सियासी पारा अपने चरम पर पहुंच गया है। राज्य के 309 नगर निकायों के अध्यक्षों के चुनाव 21 सितंबर को होने हैं, लेकिन मतदान से पहले ही प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच शह-मात का खेल तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और कांग्रेस दोनों ही पार्टियां स्थानीय निकायों पर अपना कब्जा जमाने के लिए पूरी ताकत झोंक रही हैं। इस चुनावी मुकाबले के बीच पार्षदों की बाड़ेबंदी, खरीद-फरोख्त के संगीन आरोप और पुलिस की कानूनी कार्रवाईयों ने इस पूरे मामले को एक बड़ा राजनीतिक विवाद बना दिया है। दोनों ही दल एक-दूसरे पर लोकतांत्रिक मर्यादाओं को ताक पर रखने का आरोप लगा रहे हैं।\n\nपार्षदों की खरीद-फरोख्त और दबाव के गंभीर आरोप\nकांग्रेस पार्टी ने सत्तारूढ़ बीजेपी पर पार्षदों को प्रलोभन देने और सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करने के बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का दावा है कि उनके पार्षदों को पाला बदलने के लिए 2-2 करोड़ रुपये तक के भारी-भरकम ऑफर दिए जा रहे हैं। विपक्ष का यह भी आरोप है कि पुलिस प्रशासन का इस्तेमाल कर कांग्रेस और निर्दलीय पार्षदों को डराया-धमकाया जा रहा है ताकि वे दबाव में आकर वोट करें। दूसरी तरफ, बीजेपी ने कांग्रेस के इन आरोपों को पूरी तरह से मनगढ़ंत बताया है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि कांग्रेस अपनी अंदरूनी कलह और संभावित हार को देखते हुए पहले से ही बहाने तलाश रही है।\n\nनागौर के रिजॉर्ट में आधी रात को पुलिस की दबिश और हंगामा\nइस सियासी जंग का सबसे बड़ा ड्रामा नागौर जिले के कुचेरा में देखने को मिला, जहां कांग्रेस पार्षदों की बाड़ेबंदी वाले एक रिजॉर्ट में पुलिस टीम जांच के लिए जा पहुंची। पुलिस के इस कदम से मौके पर हड़कंप मच गया और कांग्रेस के अध्यक्ष पद के दावेदार तेजपाल मिर्धा व पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी बहस हो गई।\n\nदरअसल, पुलिस की यह कार्रवाई कांग्रेस पार्षद लिंबाराम के साले महेंद्र द्वारा दर्ज कराई गई एक शिकायत के बाद हुई थी। महेंद्र ने पुलिस में शिकायत दी थी कि लिंबाराम और उनकी पत्नी का अपहरण कर लिया गया है और उन पर दबाव बनाकर जबरन वोट डलवाने की साजिश रची जा रही है। इस शिकायत पर कार्रवाई करते हुए पुलिस रिजॉर्ट पहुंची थी। हालांकि, स्थिति तब और बदल गई जब कांग्रेस ने लिंबाराम का एक वीडियो जारी कर दिया। इस वीडियो संदेश में लिंबाराम ने स्पष्ट किया कि वह पूरी तरह सुरक्षित हैं और अपनी मर्जी से रिजॉर्ट में रुके हुए हैं।\n\nकांग्रेस नेतृत्व के तीखे हमले और अशोक गहलोत के आरोप\nकुचेरा की इस घटना के बाद कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने सरकार और पुलिस प्रशासन को आड़े हाथों लिया। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट लिखकर कई गंभीर आरोप लगाए। डोटासरा का दावा था कि इससे पहले कांग्रेस के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार तेजपाल मिर्धा की गाड़ी को जानबूझकर टक्कर मारने की कोशिश की गई थी। इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री शकुंतला रावत की एक चैट का स्क्रीनशॉट भी साझा किया, जिसमें उन्होंने पुलिस द्वारा पीछा किए जाने की बात कही थी।\n\nइस मामले में राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी मोर्चा संभाला और सीधे तौर पर बीजेपी पर निशाना साधा। गहलोत ने आरोप लगाया कि बीजेपी अपने बोर्ड बनाने के लिए सरकारी अधिकारियों, विशेषकर जिला कलेक्टरों पर अनुचित दबाव बना रही है। उन्होंने कहा कि पार्षदों को खरीदने के लिए 2-2 करोड़ रुपये के लालच दिए जा रहे हैं ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित किया जा सके।\n\nबीजेपी का पलटवार और कांग्रेस की गुटबाजी पर सवाल\nबीजेपी के वरिष्ठ नेता अरुण चतुर्वेदी ने कांग्रेस के इन सभी आरोपों का मजबूती से खंडन किया। चतुर्वेदी ने कहा कि खरीद-फरोख्त के सारे आरोप झूठे हैं और कांग्रेस अपनी कमजोरियों को छिपाने की कोशिश कर रही है। उनका दावा है कि कई कांग्रेस और निर्दलीय पार्षद अपने क्षेत्रों में विकास कार्य करवाने की मंशा से खुद आगे आकर बीजेपी के बोर्ड का समर्थन करना चाहते हैं।\n\nचतुर्वेदी ने कुचेरा रिजॉर्ट में पुलिस की कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि कानून अपना काम कर रहा था। उन्होंने तर्क दिया कि जब किसी जनप्रतिनिधि के परिवार का सदस्य उनके लापता या अपहृत होने की शिकायत दर्ज कराता है, तो पुलिस का यह वैधानिक कर्तव्य है कि वह मामले की जांच करे। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर पुलिस शिकायत के आधार पर जांच के लिए गई थी, तो कांग्रेस नेताओं को इससे क्या परेशानी थी? इसके अलावा, बीजेपी नेता ने पूर्व मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोलते हुए पूछा कि क्या अशोक गहलोत के कार्यकाल के दौरान हुए पिछले निकाय चुनाव भी पुलिस के दम पर ही जीते गए थे? उन्होंने कहा कि कांग्रेस में चल रही आपसी गुटबाजी के कारण ही उनके पार्षद उनका साथ छोड़ रहे हैं।\n\n21 सितंबर को होने वाले चुनाव पर टिकीं नजरें\nइस भारी घमासान के बीच भी बीजेपी कई जगहों पर बढ़त बनाने में सफल रही है। प्रदेश के कुल 309 नगर निकायों में से 25 निकायों में बीजेपी निर्विरोध अपना बोर्ड बनाने में कामयाब हो चुकी है। इसमें भरतपुर नगर निगम भी शामिल है, जो काफी चर्चा में रहा। भरतपुर में निर्दलीय पार्षदों की संख्या कांग्रेस और बीजेपी दोनों से अधिक थी, लेकिन बीजेपी रणनीति के तहत निर्दलीय उम्मीदवार को अपना नामांकन वापस लेने के लिए मनाने में सफल रही, जिससे वहां उसकी राह आसान हो गई।\n\nअब सभी राजनीतिक विश्लेषकों और जनता की निगाहें 21 सितंबर को होने वाले मतदान पर टिकी हैं। इसी दिन राजस्थान के सभी शेष नगर निकायों के अध्यक्षों का चुनाव होगा, जिससे यह साफ हो जाएगा कि इस बाड़ेबंदी और सियासी खींचतान के खेल में अंततः किस पार्टी का पलड़ा भारी रहता है और किसे सबसे अधिक पार्षदों का समर्थन हासिल होता है।\n\nइसका आप पर असर\nइन नगर निकाय चुनावों के नतीजे राजस्थान भर में स्थानीय शासन और शहरी विकास की दिशा तय करेंगे।\n\n• भारत में: स्थानीय स्तर पर जारी यह राजनीतिक टकराव दर्शाता है कि किस प्रकार जमीनी स्तर का प्रशासन राज्य स्तर की दलीय राजनीति से प्रभावित होता है। इससे यह भी पता चलता है कि अक्सर बुनियादी विकास के मुद्दों के मुकाबले राजनीतिक रस्साकशी को अधिक प्राथमिकता मिल जाती है।\n• राजस्थान में: राज्य के 309 शहरी क्षेत्रों के निवासियों को 21 सितंबर के चुनाव के बाद नया स्थानीय प्रशासनिक नेतृत्व मिलेगा। इन निकायों पर कब्जा करने वाला दल स्थानीय बजट का नियंत्रण करेगा, जिससे आम लोगों को मिलने वाली सड़क, सफाई, पानी और कचरा प्रबंधन जैसी दैनिक नागरिक सुविधाएं सीधे प्रभावित होंगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह राजनीतिक टकराव राजस्थान के 309 नगर निकायों में स्थानीय प्रशासनिक बोर्डों पर नियंत्रण हासिल करने की होड़ के कारण पैदा हुआ है।\n\n• आगामी चुनाव: 21 सितंबर को होने वाले अध्यक्ष पद के मतदान के चलते दोनों प्रमुख दलों को बहुमत जुटाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। इसी वजह से पार्षदों को सुरक्षित स्थानों या रिजॉर्ट्स में भेजने (बाड़ेबंदी) जैसी विवादास्पद प्रथा को अपनाना पड़ा है।\n• रिश्वतखोरी के आरोप: कांग्रेस पार्टी ने सत्तारूढ़ बीजेपी पर पाला बदलने के लिए प्रत्येक पार्षद को 2-2 करोड़ रुपये तक की पेशकश करने का आरोप लगाया है। इस दावे ने दोनों राजनीतिक खेमों के बीच अविश्वास और बयानबाजी को और तेज कर दिया है।\n• पुलिस की कार्रवाई: कांग्रेस पार्षद लिंबाराम के साले द्वारा दर्ज कराई गई अपहरण की शिकायत के कारण पुलिस को नागौर के एक रिजॉर्ट में जांच के लिए जाना पड़ा। विपक्ष ने इस कदम को सरकारी मशीनरी के जरिए डराने-धमकाने का प्रयास बताया, जिससे तनाव और बढ़ गया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. राजस्थान में नगर निकायों के अध्यक्षों का चुनाव कब होगा?\nनगर निकायों के अध्यक्षों के चुनाव 21 सितंबर को आयोजित किए जाएंगे।\n\n2. कुल कितने नगर निकायों के प्रमुखों के लिए यह चुनाव हो रहे हैं?\nराज्य के कुल 309 नगर निकायों के प्रमुखों (अध्यक्षों) के लिए यह चुनाव कराए जा रहे हैं।\n\n3. कांग्रेस ने बीजेपी पर क्या गंभीर आरोप लगाए हैं?\nकांग्रेस ने बीजेपी पर पार्षदों को 2-2 करोड़ रुपये में खरीदने की कोशिश करने और पुलिस के जरिए उन्हें डराने-धमकाने के आरोप लगाए हैं।\n\n4. नागौर के कुचेरा स्थित रिजॉर्ट में पुलिस क्यों पहुंची थी?\nकांग्रेस पार्षद लिंबाराम के साले महेंद्र ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि लिंबाराम और उनकी पत्नी का अपहरण कर लिया गया है, जिसके बाद पुलिस वहां जांच के लिए पहुंची थी।\n\n5. अपहरण के आरोपों पर पार्षद लिंबाराम ने क्या प्रतिक्रिया दी?\nलिंबाराम ने एक वीडियो जारी कर स्पष्ट किया कि वह पूरी तरह सुरक्षित हैं और अपनी मर्जी से रिजॉर्ट में रह रहे हैं।\n\n6. बीजेपी अब तक कितने नगर निकायों में निर्विरोध अपना बोर्ड बना चुकी है?\nबीजेपी 309 में से 25 नगर निकायों में निर्विरोध अपना बोर्ड बनाने में सफल रही है, जिसमें भरतपुर भी शामिल है।",
  "url": "https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-ke-sthaniya-nikaya-chunavon-se-pahale-teja-hui-rajanitika-jnga-ashok-gehlot-aura-govind-singh-dotasra-ne-lagae-sngina-ar-33278",
  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-09-18",
  "tags": [
    "राजस्थान की राजनीति",
    "नगर निकाय चुनाव",
    "बीजेपी",
    "कांग्रेस",
    "अशोक गहलोत",
    "गोविंद सिंह डोटासरा",
    "खरीद फरोख्त के आरोप"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}