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  "type": "article",
  "title": "राजस्थान के तीन बड़े शहरों में महापौर चुनने की जंग, जयपुर में भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने",
  "summary": "जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगमों में आज महापौर पद के लिए मतदान हो रहा है। जयपुर में 76 के जादुई आंकड़े को हासिल करने के लिए भाजपा के 78 पार्षदों और कांग्रेस के 57 पार्षदों के बीच मुकाबला कड़ा हो गया है।",
  "content": "राजस्थान के तीन प्रमुख शहरों जयपुर, जोधपुर और कोटा में नगर निगम महापौर पद के लिए मतदान प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसके अलावा कोटा जिले की सुकेत नगरपालिका के अध्यक्ष पद पर भी आज ही मतदान कराया जा रहा है। इन चारों स्थानीय निकायों के कई वार्डों में दोबारा मतदान कराए जाने के कारण पहले से तय 21 सितंबर को महापौर और अध्यक्ष का चुनाव संपन्न नहीं हो सका था। पुनर्मतदान की औपचारिकता पूरी होने के बाद राज्य निर्वाचन तंत्र अब प्रमुख पदों पर नई कमान सौंपने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है।\n\nजयपुर में चुनावी कार्यक्रम और सीधा मुकाबला\nजयपुर नगर निगम में महापौर पद के लिए मतदान सुबह 10 बजे प्रारंभ होकर दोपहर 2 बजे तक चलेगा। चुनाव प्रक्रिया में जनता द्वारा चुने गए कुल 150 पार्षद अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। मतदान की समय सीमा समाप्त होते ही मतगणना की जाएगी और आज ही परिणाम घोषित कर जयपुर के नए महापौर के नाम पर मुहर लगा दी जाएगी। मैदान में प्रत्याशियों की स्थिति नामांकन वापसी के बाद बिल्कुल साफ हो चुकी है, जहां भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार सुनील कोठारी और कांग्रेस की प्रत्याशी सुनीता मावर के बीच सीधी टक्कर है। इस चुनाव के अगले चरण में 26 सितंबर को उपमहापौर (डिप्टी मेयर) पद के लिए मतदान कराया जाएगा।\n\nजयपुर नगर निगम का सियासी गणित और जादुई आंकड़ा\nजयपुर के 150 वार्डों के सदन में बहुमत हासिल कर महापौर पद जीतने के लिए कम से कम 76 वोटों की आवश्यकता है। दलीय स्थिति पर नजर डालें तो भाजपा के पास 78 निर्वाचित पार्षद हैं, जो निर्धारित बहुमत से महज दो वोट अधिक हैं। दूसरी तरफ कांग्रेस के खाते में 57 पार्षद हैं, जबकि 15 निर्दलीय पार्षद सदन में मौजूद हैं। यदि कांग्रेस सभी 15 निर्दलीय पार्षदों का समर्थन हासिल करने में सफल भी हो जाती है, तो उसका आंकड़ा 72 तक ही पहुंचेगा, जो बहुमत के आंकड़े से 4 वोट कम रह जाता है।\n\nक्रॉस वोटिंग की संभावना और गुप्त मतदान की चुनौती\nसदन में गुप्त मतदान की व्यवस्था होने के चलते दोनों ही दलों के लिए यह मुकाबला बेहद संवेदनशील बना हुआ है। कांग्रेस की रणनीति 15 निर्दलीय पार्षदों को साधने के साथ ही भाजपा खेमे में संभावित सेंधमारी और क्रॉस वोटिंग पर टिकी है। वहीं भाजपा के लिए अपने सभी 78 पार्षदों को एकजुट रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गई है, क्योंकि मात्र दो वोटों की बढ़त के कारण एक-एक वोट निर्णायक साबित हो सकता है। 15 निर्दलीय पार्षदों का रुख और मतदान पेटी में पड़ने वाले गुप्त वोट ही तय करेंगे कि जयपुर नगर निगम की सत्ता किसके हाथ में जाएगी।\n\nइसका आप पर असर\nजयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगमों में नए महापौर के चयन से स्थानीय प्रशासनिक कामकाज और नागरिक सुविधाओं की प्राथमिकताओं पर सीधा असर पड़ेगा।\n\n• राजस्थान भर में: राज्य के तीन प्रमुख शहरों में बोर्ड गठन से लंबित विकास योजनाओं, बुनियादी ढांचे के बजट और शहरी सुधार कार्यों को गति मिलेगी। जनता अगले पांच वर्षों तक अपने शहरों की प्रशासनिक दिशा निर्धारित होते देखेगी।\n• जयपुर, जोधपुर और कोटा में: इन शहरों में आज ही नया महापौर मिलने के बाद सफाई व्यवस्था, सड़क निर्माण और नागरिक सेवाओं के अटके फैसले तुरंत शुरू हो सकेंगे। 26 सितंबर को उपमहापौर चुने जाने के बाद नगर निगमों की प्रशासनिक संरचना पूरी तरह सक्रिय हो जाएगी।\n• वार्ड स्तर पर नागरिक सेवाएं: चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्वाचित 150 पार्षद अपने-अपने क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए आधिकारिक तौर पर सक्रिय हो सकेंगे। इससे मोहल्लों की समस्याओं और शिकायतों के समाधान में तेजी आएगी।\n• राजनीतिक समीकरण: गुप्त मतदान के नतीजों से क्षेत्रीय राजनीति में पार्षदों के दलीय प्रभाव और स्थानीय नेतृत्व की मजबूती की वास्तविक स्थिति जनता के सामने आ जाएगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nराजस्थान के तीन बड़े नगर निगमों और एक नगरपालिका में मतदान की तिथि को आगे बढ़ाकर आज आयोजित करना पड़ा, जिसके पीछे चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी प्रशासनिक वजहें रहीं।\n\n• वार्डों में पुनर्मतदान: चारों स्थानीय निकायों के कुछ विशिष्ट वार्डों में मतदान के दौरान उत्पन्न परिस्थितियों के कारण निर्वाचन विभाग को पुनर्मतदान कराना पड़ा। इस पुनर्मतदान की प्रक्रिया पूरी किए बिना महापौर और पालिकाध्यक्ष का चयन नियमानुसार संभव नहीं था।\n• 21 सितंबर की निर्धारित तिथि टलना: पहले से तय कार्यक्रम के तहत महापौर और अध्यक्ष का चुनाव 21 सितंबर को होना था। वार्डों में दोबारा मतदान लंबित रहने के कारण निर्वाचन अधिकारियों को इस चरण को स्थगित करना पड़ा था।\n• पुनर्मतदान पूरा होने के बाद नई तारीख: संबंधित वार्डों में शांतिपूर्ण तरीके से दोबारा मतदान संपन्न होने के बाद राज्य निर्वाचन तंत्र ने महापौर पद के लिए मतदान का नया कार्यक्रम तय कर आज की तारीख घोषित की।\n• उपमहापौर चुनाव का अगला चरण: नियमों के अनुसार शीर्ष पद का निर्वाचन होने के बाद ही दूसरे पदों की प्रक्रिया शुरू होती है, जिसके तहत 26 सितंबर को उपमहापौर के चुनाव का कार्यक्रम तय किया गया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. राजस्थान के किन निकायों में आज महापौर पद का चुनाव हो रहा है?\nराजस्थान के जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगमों में महापौर पद तथा कोटा जिले की सुकेत नगरपालिका में अध्यक्ष पद के लिए आज मतदान हो रहा है।\n\n2. जयपुर नगर निगम में मतदान का समय क्या है?\nजयपुर में निर्वाचित पार्षद सुबह 10 बजे से लेकर दोपहर 2 बजे तक अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकेंगे।\n\n3. जयपुर में महापौर पद के लिए कौन-कौन से प्रत्याशी मैदान में हैं?\nजयपुर में भारतीय जनता पार्टी की तरफ से सुनील कोठारी और कांग्रेस की तरफ से सुनीता मावर के बीच सीधा मुकाबला है।\n\n4. जयपुर नगर निगम में बहुमत के लिए कितने वोटों की जरूरत है?\nजयपुर नगर निगम के 150 वार्डों के सदन में महापौर बनने के लिए 76 मतों का स्पष्ट बहुमत आवश्यक है।\n\n5. जयपुर में भाजपा और कांग्रेस के पास कुल कितने पार्षद हैं?\nजयपुर में भाजपा के पास 78 पार्षद और कांग्रेस के पास 57 पार्षद हैं, जबकि 15 निर्दलीय पार्षद भी सदन में शामिल हैं।\n\n6. पहले 21 सितंबर को यह चुनाव क्यों नहीं हो सका था?\nचारों निकायों के कुछ वार्डों में दोबारा मतदान (पुनर्मतदान) कराने की आवश्यकता के चलते 21 सितंबर को चुनाव स्थगित करना पड़ा था।\n\n7. उपमहापौर (डिप्टी मेयर) पद के लिए मतदान कब होगा?\nमहापौर का चुनाव आज संपन्न होने के बाद 26 सितंबर को डिप्टी मेयर पद के लिए मतदान कराया जाएगा।",
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  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-09-25",
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