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  "title": "राजस्थान के टोंक में तेज आंधी से भारी नुकसान, 150 बीघा बाजरे की बोआई नष्ट होने के बाद प्रशासनिक मदद की गुहार",
  "summary": "टोंक जिले के देवगंज गांव में दो दिन पूर्व आए तूफान और वर्षा से 150 बीघा में बोया बाजरा पूरी तरह बिछ गया। पीड़ित किसानों ने पशुचारे का संकट जताते हुए जिलाधिकारी और तहसीलदार से तुरंत गिरदावरी कराने की अपील की है।",
  "content": "राजस्थान के टोंक जिले में अचानक बदले मौसम के मिजाज ने काश्तकारों की कमर तोड़ दी है। मंडावर ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले देवगंज गांव में दो दिन पहले आई तेज मूसलाधार बारिश और भयंकर बवंडर से व्यापक तबाही देखने को मिली है। खेतों में पककर तैयार खड़ी बाजरे की फसल आंधी की चपेट में आकर लगभग 150 बीघा क्षेत्र में पूरी तरह बिछ गई है। महीनों की हाड़तोड़ मेहनत और भारी पूंजी लगाने के बाद ऐन कटाई के समय कुदरत के इस कहर ने देवगंज के कृषक परिवारों के सामने गहरा वित्तीय संकट पैदा कर दिया है। हवा और पानी के थपेड़ों से गिरी हुई फसल में दाना खराब होने का खतरा मंडरा रहा है, जिससे गांव के किसान बेहद परेशान हैं।\n\nफसल की तबाही और गहराता आर्थिक संकट\nदेवगंज गांव के काश्तकारों का कहना है कि उन्होंने बाजरे की खेती के लिए बीते कई महीनों से दिन-रात पसीना बहाया था। बीज, खाद, सिंचाई और खेतों की जुताई में काफी लागत लगाई गई थी। फसल खेतों में पूरी तरह लहरा रही थी और किसान बेहतर पैदावार की उम्मीद लगाए बैठे थे। हालांकि, दो दिन पहले आए अप्रत्याशित तूफान ने उनकी पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया। तेज हवाओं के कारण बाजरे के पौधे जड़ों से उखड़कर या बीच से टूटकर जमीन पर समा गए हैं। यदि प्रभावित खेतों को समय रहते संभाला नहीं गया और मौसम यूं ही बना रहा, तो पौधों में लगे दाने की गुणवत्ता बुरी तरह प्रभावित होगी और कुल उत्पादन में भारी गिरावट दर्ज की जाएगी।\n\nपशुधन पर मंडराया संकट और चारे की किल्लत\nइस प्राकृतिक आपदा का प्रभाव सिर्फ खाद्यान्न उत्पादन और किसानों की आय तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था का दूसरा मुख्य आधार भी डगमगा गया है। पश्चिमी और मध्य राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में बाजरे का पौधा केवल अनाज देने का जरिया नहीं होता, बल्कि इसके सूखे तने (कड़बी) पशुओं के मुख्य भोजन और चारे के रूप में इस्तेमाल किए जाते हैं। तूफान के कारण फसल के जमीन पर गिर जाने और पानी में भीगने से चारा सड़ने की आशंका बन गई है। देवगंज के निवासियों का कहना है कि अगर चारा समय पर नहीं सुखाया जा सका या खराब हो गया, तो मवेशियों का पेट भरना दूभर हो जाएगा। पशुपालन से जुड़े परिवारों के सामने आने वाले दिनों में सूखे चारे का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।\n\nगिरदावरी और मुआवजे के लिए प्रशासन से गुहार\nखेतों में हुए नुकसान के बाद देवगंज के कृषकों ने राज्य सरकार और स्थानीय जिला प्रशासन से तत्काल राहत की गुहार लगाई है। ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रशासनिक टीम और राजस्व कर्मियों को बिना किसी देरी के मौके पर भेजकर प्रभावित 150 बीघा रकबे का मौका मुआयना कराया जाए। किसानों का स्पष्ट कहना है कि यदि प्रशासन द्वारा समय पर गिरदावरी नहीं कराई गई, तो खेतों में हुए वास्तविक खराबे का सही आकलन करना असंभव हो जाएगा। इस संबंध में ग्रामीणों ने टोंक के कलेक्टर और क्षेत्रीय तहसीलदार को ज्ञापन देकर मांग की है कि नियमों के तहत त्वरित कार्रवाई करते हुए क्षतिग्रस्‍त फसलों की गिरदावरी रिपोर्ट तैयार की जाए और पीड़ित काश्तकारों को सरकारी नियमानुसार उचित वित्तीय मुआवजा प्रदान किया जाए।\n\nइसका आप पर असर\nटोंक जिले में आए तूफान से बाजरे की फसल नष्ट होने का सीधा असर स्थानीय किसानों और पशुपालकों पर पड़ रहा है।\n\n• भारत में: अनिश्चित मौसमी चक्र और बेमौसम आंधी-तूफान से बाजरा जैसी मुख्य फसलों के उत्पादन पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है, जिससे खुले बाजार में मोटे अनाज की कीमतों में उतार-चढ़ाव आ सकता है।\n• टोंक (राजस्थान) में: देवगंज गांव के 150 बीघा क्षेत्र में फसल बिछ जाने से प्रभावित काश्तकारों को कटाई के मौसम में भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।\n• पशुपालकों पर प्रभाव: बाजरे की कड़बी खराब होने से ग्रामीण क्षेत्रों में सूखे चारे की भारी किल्लत हो सकती है, जिससे पशुओं के पोषण और दुग्ध उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।\n• प्रशासनिक कार्रवाई: किसानों द्वारा जिलाधिकारी और तहसीलदार से त्वरित गिरदावरी की मांग की गई है, ताकि समय पर सरकारी नियमों के तहत मुआवजा राशि मिल सके।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. टोंक जिले के किस गांव में बाजरे की फसल को नुकसान पहुंचा है?\nटोंक जिले की मंडावर ग्राम पंचायत के देवगंज गांव में तेज बारिश और तूफान से बाजरे की फसल को नुकसान हुआ है।\n\n2. देवगंज गांव में कितने बीघा में बोई गई फसल प्रभावित हुई है?\nमौसम की मार से देवगंज गांव में लगभग 150 बीघा जमीन में खड़ी बाजरे की फसल प्रभावित हुई है।\n\n3. फसल खराब होने से किसानों के सामने कौन सी दो मुख्य चिंताएं हैं?\nकिसानों को वित्तीय घाटे के साथ-साथ आने वाले समय में पशुओं के लिए सूखे चारे की भारी किल्लत सता रही है।\n\n4. ग्रामीणों ने किन अधिकारियों से गिरदावरी कराने की मांग की है?\nग्रामीणों और किसानों ने जिला कलेक्टर और तहसीलदार से जल्द से जल्द खेतों की गिरदावरी कराकर मुआवजा देने की मांग की है।",
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  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-08-28",
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    "टोंक समाचार",
    "राजस्थान कृषि",
    "बाजरा फसल नुकसान",
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    "गिरदावरी मांग"
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