# राजस्थान के विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने खाटूश्यामजी मंदिर में की पूजा, प्रदेश के लिए मांगा आशीर्वाद

> सीकर स्थित विख्यात खाटूश्यामजी धाम पहुंचे विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने विशेष पूजा कर प्रदेश की समृद्धि की प्रार्थना की और मंदिर कमेटी ने उनका सम्मान किया।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-10-11 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-ke-vidhayaka-ravindra-singh-bhati-ne-khatu-shyam-ji-mndira-men-ki-puja-pradesha-ke-lie-manga-ashirvada-46222 · **Language:** Hindi
**Tags:** खाटूश्यामजी, रविन्द्र सिंह भाटी, सीकर, राजस्थान, धार्मिक समाचार, बाबा श्याम

राजस्थान के सीकर जिले में स्थित सुप्रसिद्ध धार्मिक स्थल खाटूश्यामजी में श्रद्धालुओं का तांता हर दिन लगा रहता है। इस पवित्र तीर्थ में आम जनमानस के साथ-साथ कई प्रमुख जनप्रतिनिधि और हस्तियां भी निरंतर अपनी हाजिरी लगाते हैं। इसी कड़ी में राजस्थान विधानसभा सदस्य रविन्द्र सिंह भाटी ने खाटूश्यामजी पहुंचकर बाबा श्याम के दर्शन किए। उन्होंने मंदिर में शीश नवाकर विधि-विधान से विशेष अनुष्ठान संपन्न किया तथा पूरे राजस्थान की प्रगति, खुशहाली और सुख-समृद्धि की मंगलकामना की।

## मंदिर कमेटी ने किया अभिनंदन और गर्भगृह में करवाई पूजा
धाम परिसर में आगमन के उपरांत श्री श्याम मंदिर कमेटी के पदाधिकारियों द्वारा विधायक रविन्द्र सिंह भाटी का भव्य स्वागत किया गया। मंदिर कमेटी के मंत्री मानवेंद्र सिंह चौहान स्वयं उन्हें मंदिर के मुख्य गर्भगृह तक ले गए, जहां उन्होंने पूरी विधि और परंपरा के साथ विशेष पूजा-अर्चना संपन्न कराई। दर्शन और धार्मिक अनुष्ठान पूरे होने पर ट्रस्ट की ओर से विधायक को बाबा श्याम का पावन स्मृति प्रतीक चिह्न भेंट किया गया। इसके अतिरिक्त उन्हें पारंपरिक श्याम दुपट्टा ओढ़ाकर आत्मीय सम्मान भी प्रदान किया गया। इस धार्मिक प्रवास के दौरान विधायक की गहरी श्रद्धा स्पष्ट नजर आई, और उन्होंने इस खास मौके पर गर्भगृह के सामने केक भी काटा।

## वैश्विक स्तर पर श्याम भक्ति के प्रसार का किया उल्लेख
धार्मिक अनुष्ठान पूर्ण करने के बाद संवाददाताओं से रूबरू होते हुए रविन्द्र सिंह भाटी ने बाबा श्याम के प्रति अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने बताया कि इस पवित्र धाम का महत्व अत्यंत अनूठा और अलौकिक है। उनके अनुसार, जो भी श्रद्धालु सच्चे हृदय और पूर्ण विश्वास के साथ इस चौखट पर दस्तक देता है, उसकी झोली कभी खाली नहीं रहती। उन्होंने कहा कि वे स्वयं भी अपनी विशेष मन्नत और मनोकामना लेकर इस पावन दरबार में पहुंचे हैं।

विधायक ने इस तथ्य को भी रेखांकित किया कि बाबा श्याम का प्रभाव अब केवल राजस्थान या भारत की सीमाओं तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि विदेशों में भी उनकी भक्ति निरंतर फैल रही है। उन्होंने साझा किया कि विभिन्न देशों में आयोजित होने वाले श्याम कीर्तन आयोजनों में वे पूर्व में कई अवसरों पर स्वयं सहभागिता कर चुके हैं।

## धार्मिक मान्यता और पौराणिक पृष्ठभूमि
सीकर का यह तीर्थ पूरे देश के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का बहुत बड़ा केंद्र माना जाता है। भारत के अलग-अलग राज्यों से श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर नियमित रूप से यहां आते हैं। हाल के दिनों में राज्य मंत्री संजय शर्मा के साथ राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी यहां आकर बाबा श्याम के चरणों में नतमस्तक हो चुके हैं।

धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महाभारत काल के दौरान महाबली भीम के पौत्र बर्बरीक ने भगवान श्रीकृष्ण को अपने शीश का दान दे दिया था। बर्बरीक के इस अद्वितीय और महान त्याग से अत्यधिक प्रसन्न होकर भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें यह वरदान दिया था कि कलयुग के युग में वे स्वयं श्रीकृष्ण के ‘श्याम’ नाम से जाने और पूजे जाएंगे। इसके साथ ही वे हर संकटग्रस्त और पराजित व्यक्ति को संबल प्रदान कर उसका सहारा बनेंगे। यही ऐतिहासिक और पौराणिक कारण है जिसके चलते बाबा श्याम को ‘हारे का सहारा’ के रूप में स्मरण किया जाता है और यह धाम करोड़ों भक्तों के विश्वास का केंद्र बना हुआ है।

## इसका आप पर असर
इस यात्रा से सीकर स्थित प्रसिद्ध धार्मिक स्थल पर सामान्य श्रद्धालुओं और व्यवस्थाओं के संदर्भ में महत्वपूर्ण प्रभाव रेखांकित होते हैं।

- **भारत में:** देश भर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह मंदिर आस्था का बहुत बड़ा केंद्र बना हुआ है। प्रमुख जनप्रतिनिधियों के आगमन से धार्मिक पर्यटन के महत्व और मंदिर दर्शन व्यवस्थाओं पर निरंतर ध्यान बना रहता है।
- **सीकर में:** स्थानीय स्तर पर खाटूश्यामजी क्षेत्र में वीआईपी दौरों के बीच दर्शन व्यवस्था और सुरक्षा प्रबंधन पर ध्यान रहता है। यहां पहुंचने वाले आम दर्शनार्थियों को मंदिर कमेटी के दिशानिर्देशों के अनुसार गर्भगृह में दर्शन की नियमित सुविधाएं मिलती रहती हैं।
- **धार्मिक आयोजनों पर:** विदेशों और अन्य राज्यों में आयोजित होने वाले कीर्तन कार्यक्रमों का प्रभाव बढ़ता दिख रहा है। विभिन्न शहरों में रहने वाले श्याम भक्त अपने स्थानीय स्तर पर भी ऐसे भक्ति आयोजनों से जुड़ सकते हैं।
- **यात्रा योजना:** सीकर जाने वाले यात्रियों के लिए दर्शन समय और मंदिर कमेटी के कार्यक्रमों की पूर्व जानकारी रखना आवश्यक होता है। किसी भी बड़े प्रवास या आयोजन के दौरान मंदिर समय-सारणी का पालन करना यात्रा को आसान बनाता है।

## ऐसा क्यों हुआ
विधायक रविन्द्र सिंह भाटी की यह यात्रा व्यक्तिगत आस्था, राज्य की सुख-समृद्धि की कामना और धार्मिक परंपरा के निर्वहन के अंतर्गत संपन्न हुई।

- **आस्था और मन्नत:** विधायक अपनी विशेष मन्नत और प्रदेश के कल्याण की प्रार्थना के उद्देश्य से मंदिर पहुंचे थे। इस पवित्र स्थल पर अपनी मनोकामनाएं लेकर हाजिरी लगाने की पुरानी परंपरा रही है।
- **मंदिर कमेटी की परंपरा:** श्री श्याम मंदिर कमेटी प्रमुख आगंतुकों और जनप्रतिनिधियों का पारंपरिक सम्मान और विधिवत स्वागत करती है। मंत्री मानवेंद्र सिंह चौहान ने इसी शिष्टाचार के तहत उन्हें गर्भगृह में ले जाकर पूजा संपन्न कराई।
- **धार्मिक और वीआईपी प्रवाह:** हाल के समय में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और राज्य मंत्री संजय शर्मा भी यहां दर्शन कर चुके हैं। इसी सिलसिले में प्रमुख हस्तियों का इस ऐतिहासिक धाम में पहुंचना जारी है।

## सवाल-जवाब

### 1. विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने किस मंदिर में दर्शन किए?
उन्होंने राजस्थान के सीकर जिले में स्थित प्रसिद्ध खाटूश्यामजी मंदिर में दर्शन किए।

### 2. रविन्द्र सिंह भाटी ने मंदिर में क्या प्रार्थना की?
उन्होंने अपनी मनोकामना रखने के साथ-साथ राजस्थान राज्य की सुख-समृद्धि की प्रार्थना की।

### 3. मंदिर कमेटी की ओर से विधायक का स्वागत किसने कराया?
श्री श्याम मंदिर कमेटी के मंत्री मानवेंद्र सिंह चौहान ने उनका स्वागत किया और गर्भगृह में विशेष पूजा कराई।

### 4. पूजा के बाद मंदिर कमेटी ने विधायक को क्या भेंट किया?
उन्हें बाबा श्याम का प्रतीक चिह्न भेंट किया गया और पारंपरिक श्याम दुपट्टा ओढ़ाकर सम्मानित किया गया।

### 5. हाल ही में किन अन्य प्रमुख नेताओं ने खाटूश्यामजी के दर्शन किए थे?
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और राज्य मंत्री संजय शर्मा ने हाल ही में मंदिर में दर्शन किए थे।

### 6. बाबा श्याम को 'हारे का सहारा' क्यों कहा जाता है?
महाभारत काल में बर्बरीक द्वारा शीश दान करने पर भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें कलयुग में श्याम नाम से पूजे जाने और हारने वालों का संबल बनने का वरदान दिया था।

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