राजस्थान की झुग्गी-झोपड़ी से निकला पारंपरिक ममीरा सुरमा, सोशल मीडिया के दम पर बना सुशीला सपेरा का ग्लोबल ब्रांड सीकर की रहने वाली सुशीला सपेरा अपने दादाजी से सीखी पारंपरिक आयुर्वेदिक विधि से 'ममीरा' सुरमा तैयार करती हैं, जिसकी मांग अब सोशल मीडिया के दम पर देश-विदेश तक फैल चुकी है। किसी व्यक्ति का हुनर उसकी असली ताकत होता है, जो उसे कठिन से कठिन परिस्थितियों से बाहर निकालकर एक नई पहचान दिला सकता है। राजस्थान के सीकर जिले की रहने वाली सुशीला सपेरा ने इस बात को पूरी तरह सच साबित कर दिखाया है। एक समय था जब वह झुग्गी-झोपड़ी में रहकर बेहद साधारण जीवन व्यतीत कर रही थीं, लेकिन आज उनके हाथों से तैयार होने वाले पारंपरिक सुरमे की गूंज विदेशों तक सुनाई दे रही है। सुशीला ने अपनी मेहनत और कला के बल पर न केवल अपनी जिंदगी बदली है, बल्कि अपने सपेरा समाज का नाम भी ऊंचा किया है। खाटूश्याम जी से रींगस रोड की तरफ जाने वाले मार्ग पर, जांगिड़ सेवा सदन के ठीक सामने उनका यह सफल उद्यम संचालित होता है, जहां वह आयुर्वेदिक पद्धति से 'ममीरा' नाम का विशेष पारंपरिक सुरमा तैयार करती हैं। विरासत में मिली पारंपरिक कला और कारोबार की शुरुआत सुशीला सपेरा मूल रूप से चौमूं पुरोहितान की रहने वाली हैं। उन्होंने सुरमा बनाने की इस खास और दुर्लभ कला को कहीं बाहर से नहीं सीखा, बल्कि यह उनके परिवार की पीढ़ियों पुरानी थाती है। सुशीला बताती हैं कि उन्होंने सुरमा बनाने की पूरी आयुर्वेदिक विधि अपने दादाजी शौकीन नाथ से सीखी थी। उनके परिवार में यह ज्ञान एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को मिलता आया था। सुशीला ने इस पारिवारिक हुनर को महज एक शौक तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे अपनी आजीविका और रोजगार का मुख्य जरिया बनाने का फैसला किया। आज उनके द्वारा तैयार किए जाने वाले आयुर्वेदिक सुरमा ममीरा की मांग बाजार में लगातार तेजी से बढ़ती जा रही है। राजस्थान के स्थानीय इलाकों से शुरू हुआ यह सफर अब देश के अलग-अलग राज्यों तक फैल चुका है, जहां लोग इस पारंपरिक सुरमे को काफी पसंद कर रहे हैं। सोशल मीडिया की ताकत से वैश्विक स्तर पर मिली पहचान सुशीला के इस पारंपरिक व्यवसाय को आसमान की बुलंदियों तक पहुंचाने में आधुनिक तकनीक और सोशल मीडिया ने बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज के डिजिटल युग का सही इस्तेमाल करते हुए उन्होंने अपने उत्पादों को ऑनलाइन मंच पर पेश किया। वर्तमान में सोशल मीडिया पर सुशीला के लगभग 16 लाख फॉलोअर्स हैं। इस विशाल इंटरनेट कम्युनिटी के जरिए देश-विदेश के लोग उनके काम को देखते हैं, उनकी पारंपरिक सुरमा बनाने की विधि से परिचित होते हैं और ऑनलाइन ऑर्डर भी देते हैं। यही वजह है कि सीकर की एक झुग्गी से शुरू हुआ यह सुरमा अब केवल भारत के राज्यों तक ही सीमित नहीं रह गया है। सुशीला के अनुसार, अब उनके पास ऑस्ट्रेलिया, कैलिफोर्निया, दुबई और कनाडा जैसे विकसित देशों से भी ममीरा सुरमा के भारी ऑर्डर आ रहे हैं। आँखों की सेहत और रोशनी को लेकर बड़े दावे सुशीला सपेरा द्वारा बनाया जाने वाला 'ममीरा सुरमा' अपनी खास जड़ी-बूटियों और निर्माण की शुद्ध पारंपरिक विधि के लिए जाना जाता है। उनका दावा है कि यह सुरमा आंखों की कई तरह की समस्याओं को दूर करने में अत्यधिक असरदार और उपयोगी है। इसे नियमित रूप से लगाने से आंखों से लगातार पानी आने की शिकायत, आंखों में जाला पड़ने की समस्या, कम रोशनी और नाखूना जैसी बीमारियों में लोगों को बहुत आराम मिला है। इसके अलावा, कई ग्राहकों ने यह भी अनुभव साझा किया है कि इसके लगातार इस्तेमाल से उनकी आंखों की कमजोरी दूर हुई है और उन्हें चश्मा लगाने की जरूरत भी काफी हद तक कम हो गई है। इसी भरोसे और गुणवत्ता के कारण आज हर रोज बड़ी संख्या में लोग सुशीला के केंद्र पर आते हैं और खुद अपने लिए यह सुरमा खरीदकर ले जाते हैं। महिला सशक्तिकरण और दूसरों के लिए रोजगार की राह सुशीला की यह सफलता केवल एक उत्पाद बेचने या व्यक्तिगत मुनाफा कमाने तक ही सीमित नहीं है। उन्होंने अपने इस छोटे से घरेलू हुनर को एक व्यवस्थित बिजनेस मॉडल में बदल दिया है, जिससे आज कई अन्य लोगों को भी काम मिल रहा है। सुशीला का मानना है कि हालात चाहे जितने भी विपरीत हों, अगर इंसान अपने हुनर पर पूरा भरोसा रखे और बिना थके लगातार मेहनत करता रहे, तो सफलता और पहचान एक दिन खुद-ब-खुद आपके कदम चूमती है। एक झुग्गी-झोपड़ी के आशियाने से शुरू हुआ उनका यह संघर्षपूर्ण सफर आज अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच चुका है। खास बात यह है कि इस व्यवसाय को चलाने में अब न केवल उनके परिवार के सदस्य बल्कि एक पूरी टीम उनके साथ मिलकर काम कर रही है, जिससे उनके समाज और आसपास के लोगों को आत्मनिर्भर बनने में मदद मिल रही है। इसका आप पर असर सीकर की सुशीला सपेरा की यह कहानी दर्शाती है कि कैसे आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का उपयोग करके पारंपरिक भारतीय ज्ञान को एक वैश्विक व्यवसाय में बदला जा सकता है। • भारत में: यह कहानी देश के विभिन्न हिस्सों में रह रहे छोटे कारीगरों और गृह उद्योगों को प्रेरित करती है कि वे सोशल मीडिया का लाभ उठाकर अपने पारंपरिक उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचा सकते हैं। इससे ग्रामीण भारत में डिजिटल साक्षरता और उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा। • राजस्थान में: राजस्थान के सीकर और सपेरा समुदाय के लोगों के लिए यह गर्व की बात है, जिससे स्थानीय जड़ी-बूटियों और पारंपरिक आयुर्वेदिक उत्पादों के प्रति लोगों की रुचि बढ़ेगी। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। ऐसा क्यों हुआ सुशीला सपेरा की इस बड़ी सफलता और उनके पारंपरिक व्यवसाय के वैश्विक स्तर पर पहुंचने के पीछे कई महत्वपूर्ण कारक काम कर रहे थे। • पारंपरिक ज्ञान की विरासत: सुशीला को सुरमा ममीरा बनाने की विशेष आयुर्वेदिक विधि विरासत में अपने दादाजी शौकीन नाथ से मिली थी, जिसे उन्होंने खोने नहीं दिया। इस प्राचीन नुस्खे की प्रामाणिकता ने ही उनके उत्पाद को बाजार में एक खास पहचान दिलाई। • सोशल मीडिया का प्रभाव: सुशीला ने फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया मंचों का भरपूर फायदा उठाया, जहां उनके 16 लाख से अधिक फॉलोअर्स बन गए। इस डिजिटल मौजूदगी ने उनके उत्पाद को सीधे वैश्विक ग्राहकों तक पहुँचाने का काम किया। • आयुर्वेद के प्रति बढ़ता झुकाव: वर्तमान में लोग रासायनिक उत्पादों के बजाय प्राकृतिक और पारंपरिक जड़ी-बूटियों से बनी चीजों को अधिक पसंद कर रहे हैं। आँखों की विभिन्न समस्याओं में राहत के दावों ने भी उनके सुरमे की लोकप्रियता को तेजी से बढ़ाया। सवाल-जवाब 1. सुशीला सपेरा कौन हैं और वह कहां की रहने वाली हैं? सुशीला सपेरा चौमूं पुरोहितान, सीकर (राजस्थान) की रहने वाली हैं, जो पारंपरिक आयुर्वेदिक सुरमा ममीरा बनाती हैं। 2. सुशीला ने सुरमा बनाने की आयुर्वेदिक विधि किससे सीखी थी? सुशीला ने सुरमा बनाने की यह पारंपरिक आयुर्वेदिक विधि अपने दादाजी शौकीन नाथ से सीखी थी। 3. सुशीला का उद्यम सीकर में किस स्थान पर संचालित होता है? उनका उद्यम सीकर में खाटूश्याम जी से रींगस रोड जाने वाले मार्ग पर जांगिड़ सेवा सदन के सामने स्थित है। 4. सुशीला के सुरमे ममीरा की मांग किन विदेशी देशों में है? उनके बनाए ममीरा सुरमे की मांग ऑस्ट्रेलिया, कैलिफोर्निया, दुबई और कनाडा जैसे देशों से आ रही है। 5. सोशल मीडिया पर सुशीला के कितने फॉलोअर्स हैं? सोशल मीडिया पर सुशीला के लगभग 16 लाख फॉलोअर्स हैं, जो उनके बिजनेस को बढ़ाने में मदद करते हैं। 6. सुशीला के सुरमे 'ममीरा' को लेकर क्या दावे किए गए हैं? उनके अनुसार, यह सुरमा आंखों से पानी आना, जाला, नजर की कमजोरी और नाखूना जैसी बीमारियों में राहत देता है। प्रेरणा और सबक सुशीला सपेरा का झुग्गी-झोपड़ी से निकलकर वैश्विक उद्यमी बनने का सफर हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणादायक है जो विपरीत परिस्थितियों से लड़कर आगे बढ़ना चाहता है। • हुनर पर विश्वास रखें: सुशीला की कहानी सिखाती है कि आपका हुनर ही आपकी असली पहचान है, जो किसी भी परिस्थिति से आपको बाहर निकाल सकता है। अपने कौशल को कमतर न आंकें और उस पर निरंतर काम करते रहें। • बदलाव और तकनीक को अपनाएं: पारंपरिक व्यवसाय को आधुनिक तकनीक और सोशल मीडिया से जोड़ना सुशीला का एक बड़ा और सफल फैसला था। नए समय के साथ चलना ही कारोबार को बड़ा बनाने का एकमात्र जरिया है। • सामाजिक और पारिवारिक सहयोग: अपने परिवार के ज्ञान को सहेजकर और उनके सहयोग से सुशीला ने न केवल खुद को स्थापित किया, बल्कि दूसरों को भी रोजगार दिया। व्यवसाय में पूरी टीम को साथ लेकर चलना लंबी सफलता की कुंजी है। https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-ki-jhuggi-jhopari-se-nikala-parnparika-mamira-surama-soshala-midiya-ke-dama-para-bana-sushila-sapera-ka-globala-branda-32503 TrendKia — Har trend, sabse pehle.