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  "type": "article",
  "title": "राजस्थान को दीपावली पर 600 मेगावाट बिजली की सौगात, दो महीने बाद चालू हुई कालीसिंध थर्मल पावर प्लांट की यूनिट",
  "summary": "दीपावली के त्योहार से ठीक पहले झालावाड़ के कालीसिंध थर्मल पावर प्लांट की बंद पड़ी 600 मेगावाट क्षमता वाली यूनिट फिर से शुरू हो गई है। स्टीम लाइन में ब्लास्ट और तकनीकी खराबी के कारण यह यूनिट करीब दो महीने से बंद थी, जिसके चालू होने से प्रदेश की बिजली आपूर्ति को बड़ा सहारा मिला है।",
  "content": "झालावाड़ जिले के झालरापाटन क्षेत्र में स्थित कालीसिंध थर्मल पावर प्लांट से जुड़ी एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। दीपावली के पावन पर्व से ठीक एक दिन पहले इस प्लांट की बंद पड़ी यूनिट ने दोबारा से विद्युत उत्पादन शुरू कर दिया है। इस महत्वपूर्ण इकाई के फिर से चालू होने से राजस्थान को 600 मेगावाट अतिरिक्त बिजली मिलने का रास्ता साफ हो गया है। त्योहारी सीजन के दौरान जब बिजली की खपत अपने चरम पर होती है, ऐसे में इस यूनिट के शुरू होने से प्रदेशभर की बिजली आपूर्ति व्यवस्था को अत्यधिक मजबूती मिलने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।\n\nदो महीने पहले स्टीम लाइन में हुआ था ब्लास्ट\nप्राप्त जानकारी के अनुसार, करीब दो महीने पहले इस थर्मल पावर प्लांट की पहली यूनिट की स्टीम लाइन में अचानक एक जोरदार ब्लास्ट हो गया था। इस गंभीर तकनीकी खराबी के कारण यूनिट में बिजली का उत्पादन पूरी तरह से ठप हो गया था और इसे तुरंत बंद करना पड़ा था। इसके बाद संयंत्र प्रबंधन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वार्षिक रखरखाव और सभी आवश्यक तकनीकी सुधार के कार्य एक साथ शुरू कर दिए। पिछले दो महीनों से लगातार इस यूनिट के दोबारा शुरू होने का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा था। आखिरकार इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम ने सभी बाधाओं को दूर करते हुए दीपावली से ठीक पहले इसे सफलतापूर्वक चालू कर दिया।\n\nदोनों इकाइयों के संचालन से पूरी क्षमता हासिल\nकालीसिंध थर्मल पावर प्लांट के भीतर 600-600 मेगावाट क्षमता वाली कुल दो बड़ी इकाइयां स्थापित की गई हैं, जिनकी संयुक्त कुल उत्पादन क्षमता 1200 मेगावाट है। जब पहली यूनिट में तकनीकी खामी आई थी, तब से लेकर अब तक प्लांट की केवल दूसरी यूनिट के जरिए ही बिजली का उत्पादन किया जा रहा था। इस वजह से संयंत्र अपनी पूरी क्षमता के साथ काम करने में असमर्थ था और कुल उत्पादन का पूरा लाभ प्रदेश को नहीं मिल पा रहा था। अब जबकि पहली यूनिट भी पूरी तरह दुरुस्त होकर पटरी पर लौट आई है, तो प्लांट की दोनों इकाइयों से विद्युत उत्पादन का कार्य बेहद सुचारू रूप से चलने लगा है।\n\nत्योहारी सीजन में बिजली संकट की आशंका हुई कम\nदीपावली के इस उमंग भरे त्योहारी सीजन में बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाती है। ऐसे समय में कालीसिंध थर्मल पावर प्लांट की इस बंद पड़ी यूनिट का दोबारा शुरू होना राजस्थान के लिए किसी बड़े वरदान से कम नहीं है। दीपावली के इन खास दिनों में राज्यभर के रिहायशी इलाकों के घरों, सजाए गए बाजारों और तमाम औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली की खपत में भारी इजाफा देखा जाता है। ऐसे हालात में 600 मेगावाट की यह अतिरिक्त बिजली मिलने से पूरे प्रदेश की पावर ग्रिड और वितरण व्यवस्था को बड़ा संबल मिलेगा। ऊर्जा जानकारों का मानना है कि दोनों इकाइयों के एक साथ चलने से इस दीपावली पर बिजली कटौती या कमी की किसी भी तरह की आशंका काफी हद तक टल गई है और राज्य के आम उपभोक्ताओं को निर्बाध व बेहतर बिजली आपूर्ति का लाभ मिल सकेगा।\n\nइसका आप पर असर\nदीपावली के दौरान अतिरिक्त बिजली मिलने से राजस्थान के उपभोक्ताओं को त्योहार पर बेहतर और निर्बाध बिजली आपूर्ति का लाभ मिलेगा।\n\n• राजस्थान में: राज्यभर के घरों, बाजारों और औद्योगिक इकाइयों में बिजली की कटौती या किल्लत की आशंका कम होगी।\n• झालावाड़ में: झालरापाटन और आसपास के स्थानीय क्षेत्रों में प्लांट के दोबारा शुरू होने से ग्रिड व्यवस्था को स्थानीय स्तर पर मजबूती मिलेगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nप्लांट की यूनिट के बंद होने और फिर से चालू होने की पूरी प्रक्रिया तकनीकी कारणों और उसके बाद किए गए रखरखाव पर आधारित है।\n\n• तकनीकी खराबी: करीब दो महीने पहले प्लांट की पहली यूनिट की स्टीम लाइन में अचानक ब्लास्ट हो जाने के कारण उत्पादन ठप हो गया था।\n• वार्षिक रखरखाव: सुरक्षा मानकों और तकनीकी सुधार को सुनिश्चित करने के लिए इकाई को बंद रखकर जरूरी मरम्मत का कार्य पूरा किया गया।\n• त्योहारी मांग: दीपावली के दौरान घरों और उद्योगों में बिजली की खपत अचानक बढ़ जाती है, जिसे पूरा करने के लिए यूनिट को समय पर चालू किया गया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. कालीसिंध थर्मल पावर प्लांट कहाँ स्थित है?\nयह प्लांट झालावाड़ जिले के झालरापाटन क्षेत्र में स्थित है।\n\n2. कितने मेगावाट अतिरिक्त बिजली का उत्पादन शुरू हुआ है?\nइस यूनिट के शुरू होने से प्रदेश को 600 मेगावाट अतिरिक्त बिजली मिल रही है।\n\n3. यूटिन बंद क्यों हो गई थी?\nकरीब दो महीने पहले पहली यूनिट की स्टीम लाइन में ब्लास्ट होने के कारण इसे बंद करना पड़ा था।\n\n4. प्लांट की कुल उत्पादन क्षमता कितनी है?\nकालीसिंध प्लांट में 600-600 मेगावाट की दो इकाइयां हैं, जिनकी कुल क्षमता 1200 मेगावाट है।\n\n5. यूनिट को कब दोबारा चालू किया गया?\nदीपावली के त्योहार से ठीक एक दिन पहले इस बंद यूनिट को फिर से शुरू कर दिया गया।",
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  "publishedAt": "2026-11-07",
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