# राजस्थान में शिक्षा का हाल बेहाल, सैकड़ों स्कूलों के पास खुद की इमारत नहीं और हजारों में पानी-शौचालय गायब

> राजस्थान विधानसभा में सरकार ने खुद माना है कि प्रदेश में सैकड़ों सरकारी स्कूलों के पास अपनी इमारत नहीं है, जबकि हजारों स्कूलों में पेयजल और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं तक नहीं हैं।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-08-22 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-me-611-schools-ke-paas-building-nahi-20078 · **Language:** Hindi
**Tags:** राजस्थान शिक्षा, सरकारी स्कूल, टीकाराम जूली, राजस्थान विधानसभा, बुनियादी ढांचा

राजस्थान के सरकारी शिक्षण संस्थानों की जमीनी हकीकत का एक चौंकाने वाला सच विधानसभा में सामने आया है। राज्य सरकार ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि प्रदेशभर में 611 सरकारी स्कूल ऐसे हैं जो बिना किसी भवन के संचालित हो रहे हैं। इस हैरान करने वाली सूची में 10 बालिका विद्यालय भी शामिल हैं। इसके अलावा, जिन स्कूलों के पास अपने भवन मौजूद हैं, उनमें से भी हजारों संस्थानों में विद्यार्थियों के लिए पीने के पानी और टॉयलेट का अभाव बना हुआ है। यह आंकड़े समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत वर्ष 2025-26 के यूडीआईएसई डेटा पर आधारित हैं। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली की ओर से पूछे गए एक सवाल के लिखित उत्तर में यह सारी जानकारी साझा की गई है। राजधानी जयपुर की बात करें तो यहाँ भी 38 सरकारी स्कूल बिना अपनी इमारत के चल रहे हैं, जिससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों और जिलों में शिक्षा व्यवस्था की स्थिति कितनी दयनीय होगी।

## झालावाड़ से जयपुर तक बिना भवन के चल रहे स्कूल
सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, बिना भवनों के चलने वाले स्कूलों के मामले में झालावाड़ जिला सबसे आगे चल रहा है। झालावाड़ के अकलेरा ब्लॉक में 23, खानपुर में 16 और झालरापाटन में 11 स्कूल ऐसे हैं जो बिना भवन के बच्चों को पढ़ा रहे हैं। इसके अलावा फलोदी के बाप क्षेत्र में 11 और बांसवाड़ा के छोटी सरवन इलाके में 10 स्कूल बिना भवन के संचालित हो रहे हैं। वहीं जिन 10 बालिका विद्यालयों के पास अपनी इमारत नहीं है, उनमें जयपुर और अलवर जिले में दो-दो स्कूल शामिल हैं, जबकि बाड़मेर, चूरू, डूंगरपुर, करौली, कोटा और राजसमंद में एक-एक ऐसा गर्ल्स स्कूल है जो बिना भवन के चल रहा है। यह पूरा मामला ऐसे वक्त में और अधिक चर्चा का विषय बन गया है जब कॉकरोच जनता पार्टी की तरफ से सरकारी स्कूलों के निरीक्षण का अभियान चलाया जा रहा है। हाल ही में इस अभियान के दौरान जयपुर के पास बगरू में एक सरकारी स्कूल का निरीक्षण करने जा रही टीम पर कथित तौर पर हमला किए जाने की घटना भी सामने आई थी, जहाँ स्कूल के गौशाला में चलाए जाने की शिकायत मिली थी।

## पेयजल और शौचालयों की भारी कमी
इमारतों के अभाव के साथ-साथ बुनियादी सुविधाओं का संकट भी स्कूलों में बड़े पैमाने पर मुँह बाए खड़ा है। राज्य के 64,484 ऐसे सरकारी स्कूल जिनके पास अपने भवन हैं, उनमें से भी 2,047 स्कूलों में शौचालय तक की सुविधा नहीं है। शौचालयों की इस कमी के मामले में बांसवाड़ा जिला 188 स्कूलों के साथ सबसे ऊपर है, जिसके बाद डूंगरपुर में 124 और उदयपुर में 98 स्कूलों में टॉयलेट नहीं हैं। इसके अलावा बीकानेर में 84, झालावाड़ में 81 और जैसलमेर के 79 सरकारी विद्यालयों में भी शौचालय उपलब्ध नहीं हैं। पीने के पानी की व्यवस्था की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। पेयजल सुविधा से वंचित स्कूलों की सूची में दौसा 96 संस्थानों के साथ शीर्ष पर है, जबकि उदयपुर में 70, अलवर में 65, करौली में 60 और बांसवाड़ा के 58 स्कूलों में पीने का साफ पानी तक नसीब नहीं होता है।

## सरकार का वित्तीय प्रावधान और विपक्ष के सवाल
शिक्षा महकमे की इन बुनियादी कमियों को दूर करने के लिए सरकार ने वित्तीय मोर्चे पर कई बड़े दावों की घोषणा की है। सरकार का कहना है कि स्कूलों की मरम्मत और उनके नवीनीकरण के लिए कुल 550 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसके अलावा, भवनविहीन विद्यालयों और जर्जर इमारतों में चल रहे स्कूलों के लिए नए भवनों का निर्माण करवाने के वास्ते 450 करोड़ रुपये का अलग से प्रावधान किया गया है। सरकारी योजना के मुताबिक प्राथमिक से लेकर उच्च माध्यमिक स्तर तक के जर्जर परिसरों के नए निर्माण, मरम्मत और रखरखाव के मद में हर साल 2,500 करोड़ रुपये तथा आगामी पाँच वर्षों में कुल 12,500 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए जाएंगे। इस भारी-भरकम राशि को जुटाने के लिए जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट, समग्र शिक्षा, राज्य निधि, वीबी-जी राम-जी, सांसद और विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास निधि, एसडीआरएफ तथा सीएसआर जैसे विभिन्न वित्तीय स्रोतों का सहारा लिया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सरकारी स्कूलों में भवन और शौचालय जैसी बुनियादी सहूलियतें मुहैया कराना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शुमार है।

हालांकि, इन तमाम सरकारी दावों के बाद भी विपक्ष ने व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने पिछले साल हुए एक ऑडिट का हवाला देते हुए कड़े आरोप लगाए हैं। उनके अनुसार प्रदेश में 3,768 सरकारी स्कूल ऐसे हैं जिन्हें पूरी तरह जर्जर और बच्चों के उपयोग के लिए असुरक्षित घोषित किया जा चुका है। उनका कहना है कि इस तरह के खतरनाक स्कूलों को बंद किए जाने या दूसरी जगहों पर ट्रांसफर किए जाने की वजह से विद्यार्थियों के नामांकन पर बुरा असर पड़ा है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि सरकारी विद्यालयों के कुल 83,783 कक्षा-कक्ष भी पूरी तरह जर्जर हालत में हैं और छात्र-छात्राओं की सुरक्षा के लिहाज से पूरी तरह असुरक्षित हैं।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** सरकारी विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव देश के दूर-दराज के इलाकों में छात्रों की पढ़ाई और उनके नामांकन पर सीधा असर डालता है।

**राजस्थान में:** राज्य के सैंकड़ों बिना भवन वाले और हजारों पेयजल-शौचालय विहीन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य पर सीधा और गंभीर संकट बना हुआ है।

## सवाल-जवाब

### 1. राजस्थान में कितने सरकारी स्कूलों के पास अपनी इमारत नहीं है?
राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार राजस्थान में 611 सरकारी स्कूलों के पास अपना भवन नहीं है।

### 2. कितने सरकारी स्कूलों में शौचालय की सुविधा उपलब्ध नहीं है?
अपने भवन वाले 64,484 सरकारी स्कूलों में से 2,047 स्कूलों में शौचालय नहीं हैं।

### 3. पेयजल सुविधा से वंचित सरकारी स्कूल कितने हैं?
प्रदेश के 1,049 सरकारी स्कूलों में पीने के पानी की कोई सुविधा नहीं है।

### 4. यह आंकड़े किस डेटा के आधार पर सामने आए हैं?
यह आंकड़े समग्र शिक्षा अभियान के तहत वर्ष 2025-26 के यूडीआईएसई डेटा पर आधारित हैं।

### 5. राजधानी जयपुर में बिना भवन के कितने सरकारी स्कूल चल रहे हैं?
जयपुर जिले में ही 38 सरकारी स्कूल बिना भवन के संचालित हो रहे हैं।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._