{
  "type": "article",
  "title": "राजस्थान में 2 करोड़ रुपये के घूसकांड में फंसे निलंबित एएसपी मुकेश सोनी और दलाल ने अदालत में वॉइस सैंपल देने से मना किया",
  "summary": "उदयपुर की अदालत में पेशी के दौरान निलंबित एएसपी मुकेश कुमार सोनी और दलाल सज्जन सिंह ने फॉरेंसिक जांच के लिए अपनी आवाज के नमूने देने से साफ मना कर दिया।",
  "content": "राजस्थान के बहुचर्चित दो करोड़ रुपये के रिश्वत प्रकरण में न्यायिक प्रक्रिया के दौरान एक अहम मोड़ सामने आया है। एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने जब स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप के निलंबित एडिशनल एसपी मुकेश कुमार सोनी और दलाल सज्जन सिंह को उदयपुर स्थित एनआई एक्ट कोर्ट-4 में पेश किया, तब दोनों आरोपियों ने अपनी आवाज के नमूने यानी वॉइस सैंपल देने से साफ इनकार कर दिया। फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी के दल ने अदालत के समक्ष ऑडियो टेप से मिलान कराने के उद्देश्य से इन नमूनों की औपचारिक मांग रखी थी, जिसे दोनों आरोपियों ने ठुकरा दिया।\n\nऑडियो रिकॉर्डिंग और साक्ष्यों की कानूनी पड़ताल\nभ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की तफ्तीश में यह बात उजागर हुई थी कि घूस की सौदेबाजी के सिलसिले में आरोपियों और पीड़ित पक्ष के मध्य टेलीफोन पर कई मर्तबा बातचीत हुई थी। जांच दल ने इस पूरे वार्तालाप की विस्तृत ऑडियो रिकॉर्डिंग सुरक्षित कर रखी है। न्यायिक प्रक्रिया के दौरान अभियोजन पक्ष के दावों को ठोस वैज्ञानिक आधार देने के लिए निलंबित एएसपी मुकेश सोनी तथा दलाल सज्जन सिंह की आवाज के नमूनों का मिलान कराया जाना बेहद आवश्यक कदम माना जा रहा था। इस बीच जांच एजेंसी ने इस मामले के शिकायतकर्ता निरंजन मोगरा का वॉइस सैंपल पहले ही कानूनी प्रक्रिया के तहत दर्ज कर लिया है।\n\nएसओजी दफ्तर का रीडर पिछले 18 दिनों से लगातार फरार\nप्रकरण के जांच अधिकारी और एसीबी के एएसपी महावीर सिंह के अनुसार घूसखोरी के इस पूरे नेटवर्क को बेनकाब करने के लिए विभिन्न स्थानों पर लगातार तलाशी अभियान चलाए जा रहे हैं। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप के कार्यालय में पदस्थापित रीडर जसवंत सिंह राव पिछले 18 दिनों से लगातार अपनी उपस्थिति छिपाए हुए है और फरार चल रहा है। पुलिस तथा एसीबी की संयुक्त टीमों ने आरोपी रीडर के पैतृक आवास समेत कई संभावित ठिकानों पर छापे मारे हैं, लेकिन फिलहाल उसका कोई अता-पता नहीं मिल सका है। जांच अधिकारियों का आंकलन है कि रीडर जसवंत सिंह राव की धरपकड़ के बाद इस रिश्वतखोरी कांड के पीछे सक्रिय कई अन्य पहलुओं और कड़ियों का खुलासा हो सकेगा।\n\n272 भूखंडों के घोटाले को रफा-दफा करने की साजिश\nउदयपुर का यह पूरा विवाद भू-माफियाओं तथा 272 प्लॉटों से जुड़ी एक व्यापक अनियमितता की जांच को दबाने से जुड़ा हुआ है। आरोपों के मुताबिक स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप की जांच के दायरे में आई इस फाइल को बंद कराने, मामले में अंतिम रिपोर्ट यानी एफआर लगाने और पड़ताल के दौरान जब्त किए गए कागजात व सामान लौटाने के बदले 2 करोड़ रुपये की अवैध धनराशि मांगी गई थी। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाकर सबसे पहले बिचौलिए सज्जन सिंह को रंगे हाथों हिरासत में लिया था। दलाल से पूछताछ और जांच आगे बढ़ने पर मामले के तार सीधे तौर पर एएसपी मुकेश सोनी से जुड़े पाए गए, जिसके बाद एसीबी ने तत्परता दिखाते हुए मुकेश सोनी को बालोतरा स्थित उनके आवास से गिरफ्तार कर लिया था।\n\nइसका आप पर असर\nइस बड़े घूसकांड और अदालती प्रक्रिया से आम नागरिकों और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों पर सीधा असर पड़ता है।\n\n• भारत में: किसी भी आपराधिक या भ्रष्टाचार जांच में आरोपियों द्वारा वॉइस सैंपल से इनकार करने पर अदालत अन्य परिस्थितिजन्य व तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर कानूनी निष्कर्ष निकाल सकती है। यह घटनाक्रम देश भर में भ्रष्टाचार के विरुद्ध चल रही फॉरेंसिक जांच प्रक्रियाओं की जटिलताओं को रेखांकित करता है।\n• राजस्थान में: 272 प्लॉटों से जुड़ा घोटाला सीधे तौर पर स्थानीय संपत्ति खरीदारों और जमीन मालिकों के मालिकाना हक व विवादों को प्रभावित करता है। एसओजी और एसीबी की सख्त कार्रवाई से जमीन विवादों में घूस देकर मामले रफा-दफा कराने वाले बिचौलियों और भ्रष्ट अधिकारियों पर लगाम कसने में मदद मिलेगी।\n• संपत्ति खरीदारों के लिए: विवादित जमीनों या घोटालों के घेरे में आए प्लॉटों की जांच निष्पक्ष होने से ही असली खरीदारों के कानूनी दस्तावेज सुरक्षित रह सकते हैं। जांच पूरी होने तक संबंधित 272 भूखंडों के लेन-देन और रिकॉर्ड्स की निगरानी अत्यधिक सतर्कता से की जाएगी।\n• कानूनी साक्ष्य की स्थिति: शिकायतकर्ता द्वारा पहले ही आवाज का नमूना दिए जाने के कारण जांच एजेंसी के पास बातचीत की पुष्टि का एक सिरा पहले से उपलब्ध है। आरोपियों के इनकार के बाद अब अदालत यह तय करेगी कि रिकॉर्डिंग की प्रमाणिकता को किस कानूनी प्रावधान के तहत आंका जाए।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह घटनाक्रम जमीन घोटाले की जांच को अवैध रूप से बंद कराने और फॉरेंसिक साक्ष्य संकलन से बचने के प्रयासों के कारण उत्पन्न हुआ।\n\n• रिश्वत की मांग की मुख्य वजह: स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप में 272 भूखंडों से जुड़े भूमि घोटाले की फाइल को रफा-दफा करने, अंतिम रिपोर्ट पेश करने और जब्त दस्तावेज वापस करने के बदले 2 करोड़ रुपये की घूस मांगी गई थी।\n• वॉइस सैंपल से इनकार का कारण: फोन पर हुई बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग के साथ आवाज का मिलान रोकने के लिए आरोपियों ने अदालत में फॉरेंसिक टीम को अपने नमूने देने से मना कर दिया ताकि सीधे वैज्ञानिक साक्ष्य से बचा जा सके।\n• गिरफ्तारी की पृष्ठभूमि: एसीबी ने पहले दलाल सज्जन सिंह को रंगे हाथों पकड़ा, जिसके खुलासे के बाद साजिश में शामिल निलंबित एएसपी मुकेश सोनी को बालोतरा से गिरफ्तार किया गया।\n• जांच में अभी बाकी बिंदु: एसओजी का रीडर जसवंत सिंह राव पिछले 18 दिनों से लगातार फरार चल रहा है, जिसकी गिरफ्तारी के बाद ही रिश्वत नेटवर्क की पूरी कार्यप्रणाली का अंतिम ब्योरा सामने आ सकेगा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. निलंबित एएसपी मुकेश सोनी और दलाल पर क्या आरोप हैं?\nउन पर 272 प्लॉटों से जुड़े मामले में अंतिम रिपोर्ट लगाने और जब्त दस्तावेज लौटाने के लिए 2 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप है।\n\n2. अदालत में आरोपियों ने किस चीज से इनकार किया?\nउन्होंने फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी को अपनी आवाज के नमूने यानी वॉइस सैंपल देने से साफ मना कर दिया।\n\n3. क्या मामले में किसी का वॉइस सैंपल लिया जा चुका है?\nहां, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टीम शिकायतकर्ता निरंजन मोगरा का वॉइस सैंपल पहले ही दर्ज कर चुकी है।\n\n4. एसओजी कार्यालय का कौन सा कर्मचारी फरार चल रहा है?\nएसओजी कार्यालय में तैनात रीडर जसवंत सिंह राव पिछले 18 दिनों से लगातार फरार चल रहा है।\n\n5. एएसपी मुकेश सोनी को कहां से गिरफ्तार किया गया था?\nएसीबी की टीम ने मुकेश सोनी को बालोतरा स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया था।",
  "url": "https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-men-2-karora-rupaye-ke-ghusakanda-men-phnse-nilnbita-asp-mukesh-soni-aura-dalala-ne-adalata-men-voisa-sainpala-dene-se-m-48173",
  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-10-16",
  "tags": [
    "उदयपुर घूसकांड",
    "मुकेश कुमार सोनी",
    "सज्जन सिंह",
    "एसीबी राजस्थान",
    "एसओजी राजस्थान",
    "भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो",
    "जसवंत सिंह राव"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}