# राजस्थान में 29 सीटें जीतने के बाद भी कांग्रेस हारी, पाली नगर निगम में भाजपा की नमिता बुबकिया बनीं मेयर

> पाली नगर निगम चुनाव में 29 वार्ड जीतने के बावजूद कांग्रेस महापौर पद की दौड़ में पिछड़ गई और भाजपा की नमिता बुबकिया ने जीत दर्ज की।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-09-21 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-men-29-siten-jitane-ke-bada-bhi-congress-hari-pali-nagara-nigama-men-bjp-ki-namita-bubkiya-banin-meyara-35623 · **Language:** Hindi
**Tags:** पाली नगर निगम, मेयर चुनाव, नमिता बुबकिया, राजस्थान निकाय चुनाव, क्रॉस वोटिंग, भाजपा, कांग्रेस

राजस्थान के निकाय चुनावों में पाली नगर निगम के नतीजों ने सबको चौंका दिया है, जहाँ सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद कांग्रेस अपना मेयर नहीं बना पाई। नगर निगम के कुल 65 वार्डों में से कांग्रेस ने 29 सीटों पर परचम लहराया था, जबकि भारतीय जनता पार्टी को केवल 21 वार्डों में कामयाबी मिली थी। इसके बावजूद चुनावी गणित और क्रॉस वोटिंग के फेर में भाजपा की नमिता बुबकिया ने बाजी मारते हुए पाली नगर निगम की पहली निर्वाचित महापौर बनने का गौरव हासिल किया।

## त्रिकोणीय मुकाबले में पलटा चुनावी समीकरण
पाली नगर निगम के महापौर चुनाव में मुकाबला काफी कड़ा और दिलचस्प रहा। यहाँ भाजपा प्रत्याशी नमिता बुबकिया, कांग्रेस प्रत्याशी और निर्दलीय उम्मीदवार के बीच त्रिकोणीय संघर्ष देखने को मिला। नाम वापसी के अंतिम दौर में कुसुम, पुष्पा और रशीदा ने अपने नाम वापस ले लिए थे, जिसके बाद मैदान में नमिता, सुमित्रा और राजबाला के बीच मुख्य मुकाबला तय हुआ। अंतिम नतीजों में नमिता बुबकिया ने निर्दलीय प्रत्याशी को 4 मतों के अंतर से शिकस्त देकर नगर निगम बोर्ड पर भाजपा का परचम लहरा दिया।

## कांग्रेस पार्षदों की टूट और भारी क्रॉस वोटिंग
इस चुनाव का सबसे हैरान करने वाला पहलू कांग्रेस पार्टी का वोट बैंक बिखरना रहा। सदन में 29 निर्वाचित पार्षद होने के बावजूद कांग्रेस प्रत्याशी को मात्र 3 मत ही हासिल हो सके। सदन में मौजूद 15 निर्दलीय पार्षदों और असंतुष्ट खेमों के रुख ने पूरे मुकाबले का रुख मोड़ दिया। इस भारी क्रॉस वोटिंग और बगावत ने साफ कर दिया कि स्थानीय स्तर पर पार्षद दल अपनी पार्टी के पक्ष में एकजुट नहीं रह सका, जिसका सीधा फायदा भाजपा खेमे को मिला।

## राजस्थान के 273 निकायों में हुआ मतदान
पाली के साथ ही राजस्थान भर में स्थानीय स्वशासन के बड़े स्तर पर चुनाव संपन्न हुए। राज्य के कुल 273 नगरीय निकायों में अध्यक्ष और 5 नगर निगमों में महापौर के पदों के लिए वोट डाले गए। कई निकायों में निर्दलीय पार्षदों और बाड़ाबंदी के बीच कड़ा मुकाबला देखा गया, जहाँ 32 निकायों में प्रमुखों का चुनाव पहले ही निर्विरोध संपन्न हो चुका था। पाली में बने इस नए समीकरण ने स्थानीय सियासत में नए समीकरण स्थापित कर दिए हैं।

## इसका आप पर असर
पाली नगर निगम के इस चुनाव नतीजे से शहर के विकास कार्यों और स्थानीय प्रशासन की भावी दिशा तय होगी।

- **पाली के निवासियों के लिए:** शहर के प्रशासनिक बोर्ड की कमान अब नमिता बुबकिया के हाथों में होगी। इसका सीधा असर नागरिक सुविधाओं, सफाई व्यवस्था और स्थानीय विकास योजनाओं के क्रियान्वयन पर पड़ेगा।
- **स्थानीय राजनीति पर असर:** वार्ड स्तर पर जीते पार्षदों में भारी क्रॉस वोटिंग के बाद राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं। शहर के 65 वार्डों के विकास कार्यों के प्रस्तावों को पारित कराने में अब नए गठजोड़ देखने को मिलेंगे।
- **राजस्थान निकाय राजनीति:** राज्य स्तर पर यह नतीजा दर्शाता है कि सदन में बहुमत न होने पर भी निर्दलीयों की भूमिका निर्णायक हो सकती है। आगामी नगरीय नीतियों और स्थानीय योजनाओं में दोनों प्रमुख दलों की खींचतान देखने को मिलेगी।
- **आम मतदाताओं पर प्रभाव:** मतदाताओं द्वारा चुने गए 29 कांग्रेस पार्षदों में से अधिकांश का पार्टी लाइन से भटकना राजनीतिक चर्चा का केंद्र बना है। इससे नागरिक अपने क्षेत्र के प्रतिनिधियों से उनकी जवाबदेही को लेकर सवाल कर सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
पाली में अल्पमत में होने के बावजूद भाजपा की जीत और कांग्रेस के हारने की मुख्य वजह क्रॉस वोटिंग और निर्दलीय पार्षदों का समर्थन रहा। चुनाव में सदन का अंकगणित पार्टी सीटों से अलग साबित हुआ।

- **पार्षदों में असंतोष और क्रॉस वोटिंग:** कांग्रेस के पास 29 पार्षद होने के बाद भी प्रत्याशी को केवल 3 वोट मिले, जिससे साफ है कि पार्टी के 26 पार्षदों ने दल के निर्देश के विपरीत मतदान किया। पार्षदों के बीच आपसी असंतोष और बगावत ने पार्टी के आधिकारिक रुख को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।
- **निर्दलीय पार्षदों की निर्णायक भूमिका:** सदन में कुल 15 निर्दलीय पार्षद चुनकर आए थे, जिनका झुकाव तय कर रहा था कि सत्ता किसके पास जाएगी। निर्दलीय पार्षदों और असंतुष्ट धड़ों के वोटों के बिखराव का सीधा लाभ भाजपा प्रत्याशी को मिला।
- **त्रिकोणीय मुकाबला और वोटों का विभाजन:** नाम वापसी के बाद मुकाबले में तीन प्रत्याशी बचे थे, जिससे मतों का विभाजन हुआ। निर्दलीय प्रत्याशी को मिले समर्थन के बावजूद भाजपा उम्मीदवार ने 4 वोटों के मामूली अंतर से जीत दर्ज कर ली।

## सवाल-जवाब

### 1. पाली नगर निगम की पहली निर्वाचित महापौर कौन बनी हैं?
भाजपा की नमिता बुबकिया ने त्रिकोणीय मुकाबले में जीत हासिल कर पाली नगर निगम की पहली निर्वाचित महापौर बनने का गौरव हासिल किया।

### 2. पाली नगर निगम चुनाव में विभिन्न दलों को कितनी सीटें मिली थीं?
कुल 65 वार्डों में से कांग्रेस ने 29 सीटें और भाजपा ने 21 सीटें जीती थीं, जबकि 15 वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे थे।

### 3. सदन में 29 सीटें होने के बावजूद कांग्रेस प्रत्याशी को कितने वोट मिले?
भारी क्रॉस वोटिंग के कारण 29 पार्षद जीतने के बावजूद कांग्रेस प्रत्याशी को महापौर चुनाव में महज 3 वोट मिले।

### 4. नमिता बुबकिया ने कितने वोटों के अंतर से जीत हासिल की?
भाजपा उम्मीदवार नमिता बुबकिया ने निर्दलीय प्रत्याशी को 4 मतों के अंतर से हराकर जीत दर्ज की।

### 5. महापौर चुनाव में किन उम्मीदवारों के बीच मुकाबला था?
नाम वापसी के बाद नमिता, सुमित्रा और राजबाला के बीच त्रिकोणीय मुकाबला तय हुआ था।

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