राजस्थान में 969 करोड़ रुपये से बदल रही ब्रिटिश काल की रेल लाइन, उदयपुर-जोधपुर का सफर होगा आसान राजस्थान के मेवाड़ और मारवाड़ को जोड़ने वाली ऐतिहासिक मावली-मारवाड़ रेल लाइन को ब्रॉडगेज में बदला जा रहा है। इस 969 करोड़ रुपये की परियोजना से उदयपुर और जोधपुर के बीच की यात्रा का समय घटकर मात्र 4 घंटे रह जाएगा। राजस्थान के बुनियादी ढांचे को एक नई ताकत देने वाली रेल परियोजनाओं में मावली जंक्शन से मारवाड़ जंक्शन तक का रेलमार्ग बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाने जा रहा है। यह केवल एक पुराने मीटरगेज ट्रैक को ब्रॉडगेज नेटवर्क में तब्दील करने भर का प्रयास नहीं है, बल्कि इसके जरिए मेवाड़ और मारवाड़ के बीच व्यापार, पर्यटन और परिवहन का एक नया और आधुनिक गलियारा तैयार किया जा रहा है। इस बड़ी परियोजना के पूरी तरह से धरातल पर उतरने के बाद उदयपुर से जोधपुर की यात्रा का समय मौजूदा करीब 7 घंटे से घटकर लगभग 4 घंटे ही रह जाएगा। इसके साथ ही दोनों प्रमुख शहरों के बीच रेल मार्ग की दूरी में भी करीब 250 किलोमीटर तक की भारी कमी आने की बात सामने आ रही है। अरावली की पहाड़ियों और ऐतिहासिक स्थलों से गुजरेगा नया ट्रैक इस पूरे प्रोजेक्ट की सबसे अनूठी विशेषता यह है कि यह रेल लाइन राजस्थान की भौगोलिक खूबसूरती के बीचों-बीच यानी अरावली की पहाड़ियों, घाटियों और कई ऐतिहासिक इलाकों से होकर गुजरेगी। इस रास्ते के आधुनिकीकरण से कुंभलगढ़ दुर्ग, देवगढ़ और टॉडगढ़-रावली वन्यजीव अभयारण्य जैसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों तक देश-विदेश के पर्यटकों की पहुंच बेहद सुगम हो जाएगी। इसका सीधा अर्थ यह है कि रेलवे का यह विस्तार केवल यात्रियों के सफर का समय बचाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह पूरे राजस्थान के पर्यटन मानचित्र को और अधिक समृद्ध बनाने के साथ-साथ औद्योगिक गतिविधियों को भी एक नई रफ़्तार और विस्तार दे सकेगा। दो चरणों में आगे बढ़ रहा है रेल कॉरिडोर का निर्माण कार्य मावली से मारवाड़ तक रेल कनेक्टिविटी को बेहतर और मजबूत बनाने के इस पूरे काम को दो अलग-अलग चरणों में आगे बढ़ाया जा रहा है। पहले चरण के तहत नाथद्वारा से देवगढ़ मदारिया तक लगभग 82 से 85 किलोमीटर लंबे रेलखंड को ब्रॉडगेज में बदलने का काम जोर-शोर से चल रहा है। इस विशिष्ट हिस्से पर करीब 969 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं और इस चरण का 95 प्रतिशत से अधिक कार्य सफलतापूर्वक पूरा भी किया जा चुका है। रेलवे विभाग इस नए ट्रैक पर 121 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से एक सफल स्पीड ट्रायल भी पूरा कर चुका है। इस प्रमुख रेलखंड के अंतर्गत कांकरोली, बेजनाल, सोनियाणा मेवाड़, कुंवारिया, लावासरदारगढ़, आमेट, कुंवाथल और देवगढ़ मदारिया जैसे महत्वपूर्ण स्टेशन शामिल होंगे। इस बुनियादी बदलाव से राजसमंद और उसके आसपास के इलाकों में रहने वाले आम नागरिकों को भारतीय रेल नेटवर्क से जुड़ने का एक बेहतरीन और आधुनिक विकल्प मिल जाएगा। इस परियोजना का दूसरा चरण देवगढ़ मदारिया से मारवाड़ जंक्शन के बीच प्रस्तावित किया गया है, जिसकी अनुमानित लंबाई करीब 72 से 75 किलोमीटर बताई गई है। केंद्रीय रेल मंत्रालय ने इस दूसरे हिस्से के फाइनल लोकेशन सर्वे को पहले ही अपनी मंजूरी दे दी है। इसके लिए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव की तरफ से 12 करोड़ रुपये का बजट भी पहले जारी किया जा चुका है, हालांकि इस चरण के निर्माण कार्य को अभी अंतिम प्रशासनिक स्वीकृति मिलना बाकी है। 90 साल पुराने ऐतिहासिक रेलमार्ग को मिल रहा नया आधुनिक स्वरूप इस पूरी परियोजना का एक और बहुत ही दिलचस्प पहलू इसका गहरा ऐतिहासिक जुड़ाव भी है। मावली-मारवाड़ रेलमार्ग का निर्माण ब्रिटिश शासनकाल के दौरान वर्ष 1936 में किया गया था। लंबी अवधि तक इस ऐतिहासिक ट्रैक पर मीटरगेज लाइन के माध्यम से मावली-मारवाड़ पैसेंजर ट्रेन का नियमित संचालन होता रहा है। अब इसी दशकों पुराने रेल संपर्क को आधुनिक और हाई-कैपेसिटी ब्रॉडगेज नेटवर्क में बदलने की कवायद तेजी से चल रही है। ब्रॉडगेज में तब्दील होने के बाद इस महत्वपूर्ण मार्ग पर भारी क्षमता वाली एक्सप्रेस और मालगाड़ियों के संचालन का रास्ता पूरी तरह खुल जाएगा, जिससे मेवाड़ और मारवाड़ के बीच का सीधा और मजबूत रेल संपर्क और अधिक प्रगाढ़ हो सकेगा। वर्तमान स्थिति यह है कि उदयपुर से जोधपुर जाने के लिए यात्रियों को काफी लंबा रेल मार्ग तय करना पड़ता है, लेकिन इस नए और सीधे संपर्क के चालू होने से यात्रा का समय घटकर सीधा 4 घंटे के आसपास रह जाने की पूरी संभावना है। पर्यटन से लेकर उद्योगों के विकास के खुलेंगे नए रास्ते इस रेल परियोजना का सकारात्मक प्रभाव केवल आम यात्री परिवहन तक ही सीमित नहीं रहने वाला है। प्राकृतिक अरावली की घाटियों से होकर गुजरने वाला यह नया मार्ग राजस्थान के तमाम ऐतिहासिक और प्राकृतिक पर्यटन केंद्रों को आपस में जोड़ने में बहुत मददगार साबित होगा। कुंभलगढ़ किला, देवगढ़ और टॉडगढ़-रावली वन्यजीव अभयारण्य जैसे प्रसिद्ध स्थानों तक पर्यटकों का आना-जाना बहुत आसान हो जाएगा। दूसरी तरफ, राजसमंद और उदयपुर क्षेत्र का मार्बल और ग्रेनाइट उद्योग भी इस उन्नत रेल कनेक्टिविटी से सीधे तौर पर लाभांवित होगा। बेहतर और सुगम रेल संपर्क मिलने से औद्योगिक सामानों की ढुलाई और परिवहन काफी आसान और किफायती होने की उम्मीद है, जिससे दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और गुजरात के प्रमुख बंदरगाहों तक माल पहुंचाने के वैकल्पिक और तेज रास्ते भी और अधिक मजबूत हो सकेंगे। लंबे समय से उठ रही है नई रेल लाइन के विस्तार की मांग देवगढ़ मदारिया से मारवाड़ जंक्शन के बीच रेल संपर्क को और अधिक विस्तार देने के लिए मेवाड़ रेल विकास परिषद काफी लंबे समय से निरंतर प्रयास कर रही है। परिषद के अध्यक्ष प्रकाश मांडोत ने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात कर इस मामले में जल्द से जल्द उचित और सकारात्मक निर्णय लेने की मांग उठाई है। परिषद की प्रमुख मांग के अनुसार, इस प्रस्तावित रेल संपर्क को लासानी, ताल, भीम, जवाजा, बाली, तारागढ़, कोबरा और कालाबार जैसे विभिन्न क्षेत्रों से जोड़ते हुए हरिपुर स्टेशन तक पहुंचाने की योजना पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही खामली घाट, फुलाद, टॉडगढ़ और सिरियारी जैसे इलाकों से होते हुए देवगढ़ मदारिया से मारवाड़ जंक्शन तक आमान परिवर्तन किए जाने की पुरजोर मांग भी लगातार उठाई जा रही है। भारतीय रेलवे बोर्ड वर्ष 2023 में ही इस पूरे रेलखंड का विस्तृत सर्वे कर अपनी रिपोर्ट सौंप चुका है। इसके अलावा उत्तर पश्चिम रेलवे भी अपनी तरफ से आवश्यक रिपोर्ट प्रस्तुत कर चुका है, लेकिन इस पूरी परियोजना को अब भी अंतिम प्रशासनिक मंजूरी का बेसब्री से इंतजार है। परिषद का यह पक्का मानना है कि इस महत्वपूर्ण रेल संपर्क के शुरू हो जाने से राजस्थान के स्थानीय निवासियों के अलावा देश के अन्य राज्यों जैसे केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश से आने वाले यात्रियों को भी बहुत लाभ मिलेगा। कुल मिलाकर मावली-मारवाड़ ब्रॉडगेज परियोजना राजस्थान के संपूर्ण रेल इंफ्रास्ट्रक्चर में एक ऐसा क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है, जिससे पर्यटन, उद्योग और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी तीनों क्षेत्रों को एक नई और बेहतरीन दिशा मिल सकेगी। इसका आप पर असर मावली-मारवाड़ रेल परियोजना के पूरा होने से क्षेत्र के आम नागरिकों और यात्रियों के समय और यात्रा लागत में भारी सुधार देखने को मिलेगा। • भारत में: देश के अन्य राज्यों जैसे केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश से राजस्थान आने वाले यात्रियों को भी बेहतर और सुगम रेल कनेक्टिविटी का सीधा लाभ मिलेगा। • राजस्थान में: उदयपुर और जोधपुर के बीच सफर करने वाले यात्रियों का समय लगभग 7 घंटे से घटकर सिर्फ 4 घंटे रह जाएगा और दोनों शहरों के बीच की रेल दूरी करीब 250 किलोमीटर तक कम हो जाएगी। • पर्यटन क्षेत्र: कुंभलगढ़ दुर्ग, देवगढ़ और टॉडगढ़-रावली वन्यजीव अभयारण्य जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पर्यटकों की पहुंच बहुत आसान हो जाएगी। • उद्योग और व्यापार: राजसमंद और उदयपुर क्षेत्र के मार्बल तथा ग्रेनाइट उद्योगों को बेहतर रेल संपर्क मिलने से औद्योगिक माल की ढुलाई सस्ती और तेज हो जाएगी। • व्यापारिक गलियारे: इस नई कनेक्टिविटी के जरिए दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और गुजरात के बंदरगाहों तक माल पहुंचाने के वैकल्पिक रास्ते मजबूत होंगे। ऐसा क्यों हुआ मावली जंक्शन से मारवाड़ जंक्शन तक की इस रेल परियोजना को आगे बढ़ाने के पीछे दशकों पुराने बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण और क्षेत्रीय व्यापार तथा पर्यटन को बढ़ावा देना मुख्य कारण है। इस मार्ग पर पहले सिर्फ मीटरगेज ट्रेनें चलती थीं जो आधुनिक परिवहन जरूरतों को पूरा करने के लिए नाकाफी साबित हो रही थीं। • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: मावली-मारवाड़ रेलमार्ग का निर्माण ब्रिटिश शासनकाल के दौरान 1936 में किया गया था और लंबे समय से यह पुरानी तकनीक पर चल रहा था। • भौगोलिक जरूरत: अरावली की पहाड़ियों और दुर्गम घाटियों से घिरे इस क्षेत्र में बेहतर रेल संपर्क न होने के कारण यात्रियों को लंबा सफर तय करना पड़ता था। • लंबे समय से मांग: मेवाड़ रेल विकास परिषद द्वारा पिछले 15 वर्षों से इस रेल लाइन के आमान परिवर्तन और विस्तार के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे थे। • सर्वे रिपोर्ट: भारतीय रेलवे बोर्ड और उत्तर पश्चिम रेलवे द्वारा पूर्व में किए गए विस्तृत सर्वे और रिपोर्ट प्रस्तुतिकरण ने इस परियोजना की तकनीकी संभावनाओं को स्पष्ट किया है। सवाल-जवाब 1. मावली-मारवाड़ रेल परियोजना की कुल लागत कितनी है? इस परियोजना के पहले चरण के तहत नाथद्वारा से देवगढ़ मदारिया खंड पर लगभग 969 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। 2. इस रेल परियोजना के पूरा होने से उदयपुर से जोधपुर की यात्रा में कितना समय लगेगा? इस परियोजना के पूरा होने पर उदयपुर से जोधपुर का सफर मौजूदा करीब 7 घंटे के बजाय लगभग 4 घंटे में पूरा हो सकेगा। 3. मावली-मारवाड़ रेलमार्ग का निर्माण किस वर्ष हुआ था? मावली-मारवाड़ रेलमार्ग का निर्माण अंग्रेजी शासन के दौरान वर्ष 1936 में किया गया था। 4. परियोजना के पहले चरण में कौन-कौन से मुख्य स्टेशन शामिल हैं? पहले चरण में कांकरोली, बेजनाल, सोनियाणा मेवाड़, कुंवारिया, लावासरदारगढ़, आमेट, कुंवाथल और देवगढ़ मदारिया स्टेशन शामिल हैं। 5. दूसरे चरण के सर्वे के लिए कितना बजट जारी किया गया था? रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव की ओर से देवगढ़ मदारिया से मारवाड़ जंक्शन तक के फाइनल लोकेशन सर्वे के लिए 12 करोड़ रुपये का बजट जारी किया गया था। 6. इस रेल लाइन के आमान परिवर्तन से किन उद्योगों को लाभ मिलेगा? इस रेल कनेक्टिविटी से राजसमंद और उदयपुर क्षेत्र के मार्बल और ग्रेनाइट उद्योग को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। 7. कौन सा संगठन इस रेल लाइन के विस्तार के लिए प्रयास कर रहा है? मेवाड़ रेल विकास परिषद इस रेल संपर्क को आगे बढ़ाने के लिए लंबे समय से प्रयास कर रही है। 8. पहले चरण के ट्रैक पर रेलवे ने कितनी रफ्तार से स्पीड ट्रायल किया है? रेलवे ने इस ट्रैक पर 121 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से सफल स्पीड ट्रायल पूरा कर लिया है। https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-men-969-karora-rupaye-se-badala-rahi-britisha-kala-ki-rela-laina-udaipur-jodhpur-ka-saphara-hoga-asana-57707 TrendKia — Har trend, sabse pehle.