राजस्थान में असली दिखाकर नकली सोना थमाने वाला गिरोह पकड़ा गया, तीन लोग हिरासत में दौसा पुलिस ने असली सोना दिखाकर नकली गहने बेचने वाले गिरोह के तीन शातिरों को दबोचा है, जिन्होंने 25 वारदातों में 96 लाख रुपये ठगे थे। दौसा जिले के सिकंदरा थाना क्षेत्र की पुलिस और जिला विशेष टीम ने मिलकर एक अंतरजिला ठग गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह भोले-भाले व्यापारियों को पहले असली सोने का नमूना दिखाकर उनका भरोसा जीतता था और फिर भारी मात्रा में पीली धातु की नकली मालाएं देकर नकदी लेकर चंपत हो जाता था। पकड़े गए अभियुक्तों की पहचान जालौर निवासी श्रवण बावरी और नारायण बावरी के रूप में हुई है, जबकि उनके तीसरे साथी को बापर्दा रखा गया है। इन सभी को डीडवाना-कुचामन जिले के मंगलाना क्षेत्र से धर दबोचा गया। पुलिस ने अभियुक्तों के कब्जे से 13 लाख 60 हजार रुपये की नकदी, पीली धातु की नकली मालाएं और अपराध में इस्तेमाल की गई एक मोटरसाइकिल जब्त की है। पूछताछ के दौरान इस गिरोह ने राजस्थान के विभिन्न जिलों में कुल 25 वारदातों को अंजाम देकर करीब 96 लाख रुपये हड़पने का जुर्म कबूल किया है। व्यापारी को झांसे में लेकर की गई 15 लाख की ठगी इस गिरोह की ठगी का ताजा मामला तब सामने आया जब सिकंदरा थाना इलाके के बासड़ा निवासी व्यापारी कमलेश सैनी ने पुलिस में अपनी शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित ने बताया कि कुछ अज्ञात लोग ग्राहक बनकर उनकी दुकान पर पहुंचे थे। उन्होंने खुद को मजदूर बताते हुए दावा किया कि खुदाई या काम के दौरान उन्हें सोने जैसी दिखने वाली वस्तु मिली है, जिसे वे परखवाना चाहते हैं। बदमाशों ने व्यापारी को जांच के लिए एक सोने की माला दी। व्यापारी ने जब उस पर तेजाब डालकर रासायनिक परीक्षण किया, तो वह पूरी तरह असली पाई गई। इसके बाद ठगों ने व्यापारी को झांसे में लेते हुए कहा कि उनके पास इसी तरह का करीब 800 ग्राम सोना और मौजूद है, जिसे वे सस्ते दाम पर बेचना चाहते हैं। व्यापारी इस लालच में आ गया और उसने आरोपियों को एक लाख रुपये बतौर पेशगी थमा दिए। इसके बाद बाकी माल का सौदा तय करने के लिए ठगों ने पीड़ित को जयपुर बुलाया। वहां उन्होंने सोने जैसी दिखने वाली मालाएं थमाकर व्यापारी से 14 लाख रुपये नकद ले लिए। व्यापारी ने जब कुछ दूरी पर जाकर मालाओं की बारीकी से जांच की, तो उसके होश उड़ गए क्योंकि वे पूरी तरह नकली थीं। जांच अभियान और मंगलाना से हुई धरपकड़ व्यापारी के साथ हुई इस बड़ी धोखाधड़ी के बाद सिकंदरा थाने में मामला दर्ज किया गया। दौसा पुलिस और जिला विशेष टीम ने सुराग जुटाने के लिए कई दिनों तक सघन अभियान चलाया। तकनीकी पड़ताल और मुखबिर तंत्र के जरिए पुलिस टीम डीडवाना-कुचामन जिले के मंगलाना पहुंची, जहां घेराबंदी करके तीनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया गया। पुलिस अधीक्षक पीयूष दीक्षित ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि आरोपियों की एक सुव्यवस्थित कार्यप्रणाली थी, जिसके तहत वे विभिन्न शहरों में घूम-घूमकर आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देते थे। धर्मशालाओं में ठिकाना और रेकी का अनोखा तरीका पुलिस अधीक्षक पीयूष दीक्षित के अनुसार, यह गिरोह पहचान छिपाने के लिए बेहद शातिराना योजना बनाता था। गिरोह के सदस्य रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड या बड़े मंदिरों के आसपास बने रैन बसेरों और धर्मशालाओं में डेरा डालते थे। किसी को भी उन पर शक न हो, इसलिए वे अपने साथ महिलाओं और छोटे बच्चों को भी रखते थे, जिससे वे साधारण मजदूर परिवार नजर आएं। इसके बाद गिरोह के पुरुष सदस्य 25 से 30 किलोमीटर के दायरे में स्थित कस्बों और बाजारों का चक्कर लगाकर ऐसे व्यापारियों की रेकी करते थे, जिन्हें लालच देकर फंसाया जा सके। विश्वास जीतने के लिए पहले असली आभूषण की जांच कराई जाती थी और फिर सौदा पक्का होने पर नकली जेवर थमाकर वे शहर छोड़ देते थे। आठ जिलों में 25 वारदातों का कबूलनामा प्राथमिक पूछताछ में सामने आया है कि इस गिरोह ने राजस्थान के कई हिस्सों में ठगी का जाल फैला रखा था। आरोपियों ने दौसा, नागौर, बीकानेर, डीडवाना-कुचामन, जयपुर, झुंझुनूं, चूरू और बांसवाड़ा जैसे जिलों में कुल 25 वारदातों को अंजाम देना स्वीकार किया है। इन सभी मामलों को मिलाकर गिरोह ने करीब 96 लाख रुपये की ठगी की थी। पुलिस अब बरामद 13 लाख 60 हजार रुपये के अलावा शेष रकम और गिरोह के अन्य संभावित संपर्कों की पड़ताल में जुटी हुई है। इसका आप पर असर इस कार्रवाई से व्यापारियों को फर्जी आभूषणों के झांसे में आने से बचाने और संगठित ठगी पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। • भारत में: अजनबियों द्वारा सस्ते में सोना बेचने के किसी भी निजी प्रस्ताव से पूरी तरह सतर्क रहें। सोने की कोई भी खरीद-बिक्री हमेशा पंजीकृत बिल और हॉलमार्क सत्यापन के साथ ही अधिकृत दुकानों से करनी चाहिए। • राजस्थान में: धर्मशालाओं और रैन बसेरों के आसपास संदिग्ध गतिविधियों पर स्थानीय प्रशासन और नागरिकों की निगरानी बढ़ेगी। 25 से 30 किलोमीटर के दायरे में स्थित बाजारों के सर्राफा व्यापारियों को अज्ञात लोगों से सीधे सोने के सौदे करने से बचने की सख्त जरूरत है। • व्यापारियों के लिए: किसी भी आभूषण की पूरी खेप जांचे बिना बड़ी नकद रकम कभी किसी को न सौंपें। नमूने के रूप में दिखाया गया टुकड़ा असली हो सकता है, लेकिन बाकी माल पूरी तरह नकली होने का बड़ा जोखिम रहता है। • कानूनी कार्रवाई: पुलिस द्वारा 13 लाख 60 हजार रुपये की बरामदगी से पीड़ित व्यापारियों को अपनी डूबी हुई रकम वापस पाने की कानूनी प्रक्रिया में मदद मिलेगी। शेष पीड़ितों को संबंधित थानों में संपर्क कर अपनी शिकायतों को इस मामले से जोड़ने का अवसर मिलेगा। ऐसा क्यों हुआ यह अपराध गिरोह सस्ते सोने का लालच देकर और असली वस्तु से भरोसा जीतकर लोगों की मनोदशा का फायदा उठाकर ठगी करता था। • सीधा कारण: आरोपियों ने पहले असली सोने की माला देकर रासायनिक जांच कराई, जिससे व्यापारी का भरोसा पक्का हो गया और उसने बिना बाकी सामान देखे 15 लाख रुपये सौंप दिए। • सोची-समझी योजना: गिरोह साधारण मजदूर बनकर रैन बसेरों में महिलाओं और बच्चों के साथ ठहरता था, ताकि उन पर किसी को कोई शक न हो। • रेकी और दूरी: आरोपी अपने ठिकाने से 25 से 30 किलोमीटर दूर जाकर नए बाजारों के व्यापारियों को चुनते थे, जिससे वे वारदात के तुरंत बाद आसानी से भाग निकलते थे। • जांच और आगे की कार्रवाई: सिकंदरा पुलिस और विशेष टीम ने तकनीकी जानकारी के आधार पर मंगलाना से तीन आरोपियों को पकड़ा, और अब बाकी रकम की बरामदगी के लिए पूछताछ जारी है। सवाल-जवाब 1. दौसा में पकड़े गए ठग गिरोह के किन सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है? पुलिस ने जालौर निवासी श्रवण बावरी और नारायण बावरी के साथ एक अन्य बापर्दा साथी को गिरफ्तार किया है। 2. इस गिरोह ने कुल कितने मामलों में और कितनी रकम की ठगी कबूल की है? आरोपियों ने राजस्थान के विभिन्न जिलों में कुल 25 वारदातों में करीब 96 लाख रुपये ठगने की बात स्वीकार की है। 3. पुलिस ने आरोपियों के पास से क्या-क्या सामान बरामद किया है? पुलिस ने आरोपियों के पास से 13 लाख 60 हजार रुपये नकद, पीली धातु की नकली मालाएं और एक मोटरसाइकिल बरामद की है। 4. व्यापारी कमलेश सैनी के साथ ठगी किस तरह की गई थी? आरोपियों ने पहले असली सोने की माला दिखाकर जांच कराई, फिर 800 ग्राम और सोना होने का झांसा देकर 15 लाख रुपये लेकर नकली मालाएं थमा दीं। 5. गिरोह के सदस्य खुद को पुलिस और लोगों के शक से कैसे बचाते थे? वे धर्मशालाओं और रैन बसेरों में महिलाओं और बच्चों के साथ रहते थे ताकि किसी को उनके आपराधिक मंसूबों का शक न हो। 6. यह गिरोह राजस्थान के किन-किन जिलों में सक्रिय था? गिरोह ने दौसा, नागौर, बीकानेर, डीडवाना-कुचामन, जयपुर, झुंझुनूं, चूरू और बांसवाड़ा जिलों में वारदातों को अंजाम दिया था। https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-men-asali-dikhakara-nakali-sona-thamane-vala-giroha-pakara-gaya-tina-loga-hirasata-men-42394 TrendKia — Har trend, sabse pehle.