{
  "type": "article",
  "title": "राजस्थान में असंगठित रोजगार का मजबूत केंद्र बना सीकर, बीकानेर को पीछे छोड़ हासिल किया चौथा स्थान",
  "summary": "केंद्रीय सांख्यिकी मंत्रालय के जिला स्तरीय आंकड़ों के मुताबिक सीकर में कम उद्यमों के बावजूद 3.27 लाख से ज्यादा कामगारों को आजीविका मिल रही है, जिससे यह जिला रोजगार देने में प्रदेश में चौथे पायदान पर पहुंच गया है।",
  "content": "राजस्थान के औद्योगिक और व्यावसायिक परिदृश्य में सीकर जिले ने असंगठित क्षेत्र के भीतर रोजगार सृजन का एक उल्लेखनीय उदाहरण पेश किया है। केंद्रीय सांख्यिकी मंत्रालय की ओर से जारी जिला स्तरीय रिपोर्ट के अनुसार, जिले में संचालित अनौपचारिक इकाइयों ने कार्यबल को खपाने के मामले में राज्य के कई प्रमुख केंद्रों को पछाड़ दिया है। आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि सीकर में कुल 1 लाख 73 हजार 82 असंगठित उद्यम सक्रिय हैं, जिनके माध्यम से 3 लाख 27 हजार 999 कामगारों को नियमित आजीविका मिल रही है। कामगारों की इस विशाल तादाद के साथ सीकर पूरे राजस्थान में चौथे पायदान पर मजबूती से स्थापित हो गया है।\n\nबीकानेर के मुकाबले कम इकाइयां, लेकिन कार्यबल में बढ़त\nजब सीकर की तुलना बीकानेर जैसे बड़े जिले से की जाती है, तो एक दिलचस्प आर्थिक तस्वीर सामने आती है। बीकानेर में असंगठित प्रतिष्ठानों की कुल संख्या सीकर से अधिक है, किंतु वहां काम करने वाले लोगों की संख्या तुलनात्मक रूप से कम दर्ज की गई है। आधिकारिक रिपोर्ट बताती है कि बीकानेर में 1 लाख 80 हजार 41 असंगठित उद्यम काम कर रहे हैं, जो कुल 3 लाख 10 हजार 363 कामगारों को रोजगार प्रदान करते हैं। इसके विपरीत, सीकर में उद्यमों की संख्या कम होने के बाद भी 3 लाख 27 हजार 999 श्रमिक कार्यरत हैं। इसका सीधा अर्थ यह है कि सीकर में बीकानेर की तुलना में 17 हजार 636 अधिक कामगार असंगठित आजीविका से जुड़े हुए हैं, जो प्रत्येक उद्यम में बेहतर श्रम अवशोषण क्षमता को रेखांकित करता है।\n\nस्थानीय व्यापार और सेवा क्षेत्र बने रीढ़\nसीकर के असंगठित क्षेत्र का विश्लेषण करने पर यह स्पष्ट होता है कि जिले की अर्थव्यवस्था केवल किसी एक उद्योग पर निर्भर नहीं है। यहां खुदरा व्यापार, छोटे पैमाने की विनिर्माण इकाइयां, विविध सेवा प्रदाता और रोजमर्रा से जुड़े स्थानीय कारोबार बड़े पैमाने पर कार्यबल को आजीविका दे रहे हैं। ये छोटे और मध्यम स्तर के संस्थान स्थानीय बाजार की रीढ़ बनकर उभरे हैं। इन व्यवसायों में इतनी बड़ी तादाद में लोगों की भागीदारी इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि अनौपचारिक और जमीनी स्तर का कारोबार जिले के सामाजिक-आर्थिक ढांचे को स्थिरता प्रदान करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।\n\nराज्य भर में जिलों की स्थिति और रैंकिंग\nसमूचे राजस्थान में असंगठित क्षेत्र के प्रतिष्ठानों और उनसे जुड़े श्रमिकों के मामले में राजधानी जयपुर शीर्ष पर बनी हुई है। जयपुर में 4 लाख 84 हजार 873 असंगठित उद्यम संचालित हैं, जहां 10 लाख 15 हजार 884 कामगार रोजी-रोटी कमा रहे हैं। सूची में दूसरा स्थान चूरू जिले को मिला है, जहां 3 लाख 18 हजार 817 उद्यमों के जरिए 6 लाख 31 हजार 828 लोगों को आजीविका मिल रही है। इसके पश्चात बीकानेर और सीकर का क्रम आता है।\n\nश्रमिकों की संख्या के लिहाज से चौथे स्थान पर काबिज सीकर के ठीक पीछे उदयपुर मौजूद है। उदयपुर में 1 लाख 54 हजार 460 उद्यमों में 3 लाख 6 हजार 916 कामगार कार्यरत हैं। वहीं जयपुर ग्रामीण क्षेत्र में 1 लाख 34 हजार 320 उद्यमों से 2 लाख 56 हजार 782 लोग जुड़े हैं, जबकि कोटा में 1 लाख 54 हजार 325 असंगठित इकाइयों के तहत 2 लाख 52 हजार 930 कामगारों को काम मिला हुआ है।\n\nप्रवासी श्रमिकों का योगदान और महिला उद्यमिता\nसांख्यिकी मंत्रालय की इस रिपोर्ट में असंगठित इकाइयों में अन्य क्षेत्रों से आने वाले बाहरी श्रमिकों की उपस्थिति का भी विस्तृत ब्योरा दिया गया है। आंकड़ों के अनुसार, नीमकाथाना क्षेत्र में बाहरी कामगारों वाले उद्यमों का अनुपात 24 प्रतिशत दर्ज किया गया, जो अध्ययन में शामिल क्षेत्रों में सबसे अधिक है। इसके बाद जयपुर में ऐसे उद्यमों की हिस्सेदारी 20.71 प्रतिशत, जोधपुर में 20.01 प्रतिशत और कोटा में 12.93 प्रतिशत दर्ज की गई। यह आंकड़े प्रमाणित करते हैं कि राज्य के इन व्यावसायिक केंद्रों में स्थानीय लोगों के साथ-साथ प्रवासी मजदूर भी बड़ी हिस्सेदारी निभा रहे हैं।\n\nइसके अतिरिक्त, महिला स्वामित्व वाले एकल स्वामित्व यानी प्रोपराइटी उपक्रमों के मामले में झुंझुनूं जिले ने पूरे राज्य में बाजी मारी है। झुंझुनूं में 37.11 प्रतिशत उद्यमों का मालिकाना हक महिलाओं के हाथों में है, जबकि जयपुर जैसे महानगरीय जिले में यह अनुपात केवल 24.87 प्रतिशत रहा। यह संपूर्ण सांख्यिकी दर्शाती है कि सीकर और उसके आसपास के अंचल केवल व्यवसायों की संख्या तक सीमित नहीं हैं, बल्कि रोजगार सृजन और संतुलित आर्थिक भागीदारी में प्रदेश के अग्रणी क्षेत्रों में शुमार हैं।\n\nइसका आप पर असर\nयह आंकड़े दर्शाते हैं कि राजस्थान के गैर-मेट्रो शहरों में छोटे स्थानीय उद्यम ही वास्तविक रोजगार का सबसे बड़ा सहारा हैं।\n\n• भारत में: राष्ट्रीय स्तर पर खुदरा और छोटे सेवा उद्यमों की मजबूती से असंगठित श्रमिकों के लिए घरेलू स्तर पर आजीविका के अवसर बने रहते हैं। इससे यह नीतिगत सीख मिलती है कि सूक्ष्म उद्यमों को बैंकिंग और बुनियादी ढांचे का समर्थन मिलना कितना आवश्यक है।\n• सीकर में: सीकर जिले के स्थानीय युवाओं और श्रमिकों के लिए खुदरा व्यापार, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में 3.27 लाख से अधिक रोजगार मौजूद हैं। ऐसे में स्थानीय व्यवसायों से जुड़े लोगों को अपनी दक्षता बढ़ाने और स्थानीय बाजार से ही कमाई के नए अवसर तलाशने में मदद मिलेगी।\n• कामगारों के लिए: जिले के असंगठित उद्यमों में बीकानेर से 17 हजार 636 अधिक कामगार जुड़े होने से यह साबित होता है कि यहां प्रति उद्यम अधिक श्रम की आवश्यकता है। कामगारों के लिए स्थानीय स्तर पर काम मिलने से अन्य महानगरों की ओर पलायन की मजबूरी कम होती है।\n• महिला उद्यमियों के लिए: पड़ोसी जिले झुंझुनूं में 37.11 प्रतिशत और जयपुर में 24.87 प्रतिशत महिला स्वामित्व वाले उद्यमों की मौजूदगी से महिलाओं के स्वरोजगार को बल मिलेगा। इससे जिले की महिलाओं को भी छोटे व्यवसाय और दुकानें शुरू करने की प्रेरणा मिलेगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nसीकर में असंगठित उद्यमों की संख्या कम होने के बावजूद रोजगार का दायरा विस्तृत होने के पीछे वहां की व्यावसायिक संरचना और सक्रिय स्थानीय बाजार मुख्य वजह हैं। केंद्रीय सांख्यिकी मंत्रालय के संकलन से स्पष्ट हुआ है कि विभिन्न जिलों में आर्थिक गतिविधियों की प्रकृति अलग-अलग प्रकार से रोजगार उत्पन्न करती है।\n\n• व्यावसायिक मॉडल और श्रम अवशोषण: सीकर में संचालित 1.73 लाख उद्यमों में खुदरा व्यापार, विनिर्माण और सेवा इकाइयों का बाहुल्य है, जहां व्यक्तिगत कारीगरों के बजाय बहु-व्यक्तिगत कार्यबल की आवश्यकता होती है। यही वजह है कि बीकानेर में 1.80 लाख उद्यम होने के बाद भी सीकर में कामगारों की संख्या अधिक निकली।\n• क्षेत्रीय बाजार और प्रवासी श्रम का प्रवाह: शेखावाटी और आसपास के औद्योगिक केंद्रों जैसे नीमकाथाना में 24 प्रतिशत तक बाहरी श्रमिक कार्यरत हैं। स्थानीय कारोबार के फैलाव ने न केवल स्थानीय बल्कि पड़ोसी क्षेत्रों के कामगारों को भी आकर्षित किया है।\n• राज्यव्यापी आर्थिक वितरण: जयपुर और चूरू जैसे विशाल सेवा और व्यापारिक केंद्रों के बाद सीकर का चौथा स्थान दर्शाता है कि जिले की अर्थव्यवस्था बड़े भारी उद्योगों के अभाव में भी छोटे कारोबारियों के दम पर फल-फूल रही है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. असंगठित क्षेत्र में रोजगार देने के मामले में सीकर का राजस्थान में कौन सा स्थान है?\nकामगारों की संख्या के आधार पर सीकर 3 लाख 27 हजार 999 कामगारों के साथ पूरे राजस्थान में चौथे स्थान पर है।\n\n2. सीकर में कुल कितने असंगठित उद्यम सक्रिय हैं?\nकेंद्रीय सांख्यिकी मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार सीकर जिले में 1 लाख 73 हजार 82 असंगठित उद्यम संचालित हो रहे हैं।\n\n3. सीकर और बीकानेर के कामगारों की संख्या में कितना अंतर है?\nबीकानेर में 3 लाख 10 हजार 363 कामगार हैं, जबकि सीकर में 3 लाख 27 हजार 999 कामगार हैं, जो बीकानेर से 17 हजार 636 अधिक हैं।\n\n4. राजस्थान में असंगठित क्षेत्र के रोजगार में पहले और दूसरे स्थान पर कौन से जिले हैं?\nजयपुर 10 लाख 15 हजार 884 कामगारों के साथ पहले स्थान पर और चूरू 6 लाख 31 हजार 828 कामगारों के साथ दूसरे स्थान पर है।\n\n5. सीकर के बाद पांचवें स्थान पर कौन सा जिला है और वहां कितने कामगार हैं?\nसीकर के बाद उदयपुर का स्थान है, जहां 1 लाख 54 हजार 460 उद्यमों से 3 लाख 6 हजार 916 कामगार जुड़े हुए हैं।\n\n6. महिला स्वामित्व वाले उद्यमों में कौन सा जिला सबसे आगे रहा?\nमहिला स्वामित्व वाले प्रोपराइटी उद्यमों में झुंझुनूं 37.11 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ प्रदेश में पहले स्थान पर रहा।",
  "url": "https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-men-asngathita-rojagara-ka-majabuta-kendra-bana-sikar-bikaner-ko-pichhe-chhora-hasila-kiya-chautha-sthana-38446",
  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-09-25",
  "tags": [
    "सीकर रोजगार",
    "असंगठित क्षेत्र",
    "राजस्थान समाचार",
    "बीकानेर",
    "सांख्यिकी मंत्रालय",
    "स्थानीय व्यापार"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}