राजस्थान में बहुराष्ट्रीय युद्धाभ्यास तरंग शक्ति 2026 शुरू, एफ-35ए और राफेल के साथ कई देश भर रहे उड़ान जोधपुर एयरफोर्स स्टेशन पर भारतीय वायुसेना की मेजबानी में बहुराष्ट्रीय हवाई अभ्यास तरंग शक्ति 2026 का दूसरा संस्करण शुरू हुआ है, जिसमें भारत सहित दुनिया के कई बड़े देश अपने शीर्ष लड़ाकू विमानों के साथ साझा मिशन का अभ्यास कर रहे हैं। पश्चिमी सीमा के पास राजस्थान के जोधपुर एयरफोर्स स्टेशन और उसके विशाल हवाई क्षेत्र में बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास तरंग शक्ति 2026 के दूसरे चरण की शुरुआत हो गई है। भारतीय वायुसेना की मेजबानी में संचालित हो रहे इस बड़े युद्धाभ्यास का केंद्रीय विषय 'पावर इन पार्टनरशिप' रखा गया है। इस अभ्यास का उद्देश्य विभिन्न मित्र देशों की वायु सेनाओं के बीच सामरिक कौशल, युद्ध रणनीतियों और आपसी समन्वय को नए सिरे से परखना है। जोधपुर के रनवे से लेकर निर्धारित एयरस्पेस तक कई श्रेणियों के आधुनिक लड़ाकू विमान दिन-रात जटिल रणनीतिक मिशनों को अंजाम दे रहे हैं। भारतीय वायुसेना के अग्रणी लड़ाकू विमानों की भागीदारी इस युद्धाभ्यास में भारतीय वायुसेना अपनी अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू विमानों के पूरे बेड़े के साथ हिस्सा ले रही है। भारतीय दस्ते में सुखोई-30 एमकेआई, राफेल, मिग-29, जगुआर और स्वदेशी तकनीक से निर्मित लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस शामिल हैं। ये सभी विमान जोधपुर के आसमान में विभिन्न सामरिक पैंतरेबाजी और सटीक हमलों की रणनीतियों पर काम कर रहे हैं। अलग-अलग गति और रडार क्षमताओं वाले इन विमानों का एक साथ उड़ान भरना भारतीय वायुसेना की व्यापक परिचालन ताकत को प्रदर्शित करता है। जापान के मिसावा एयरबेस से सीधे जोधपुर पहुंचे अमेरिकी एफ-35ए अभ्यास में शामिल मित्र देशों के बेड़े में भी दुनिया के सबसे उन्नत विमान मौजूद हैं। अमेरिकी पैसिफिक एयरफोर्स के एफ-35ए लाइटनिंग-II लड़ाकू विमान जापान स्थित मिसावा एयरबेस से लंबी दूरी तय करके सीधे जोधपुर पहुंचे हैं। इन अत्याधुनिक विमानों की लंबी यात्रा और निरंतर संचालन को संभव बनाने के लिए हवा में ईंधन भरने वाले विशाल टैंकर विमान भी इस दल का हिस्सा बने हैं। इसके अतिरिक्त फ्रांस के राफेल लड़ाकू विमान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के एफ-16 फाइटर जेट भी इस बहुराष्ट्रीय अभियान में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। अमेरिकी, फ्रांसीसी, यूएई और भारतीय पायलट एक साथ बैठकर जटिल मिशनों की योजना बना रहे हैं और उन्हें आसमान में अमलीजामा पहना रहे हैं। इंटरऑपरेबिलिटी और जटिल हवाई अभियानों पर जोर इस बड़े पैमाने के युद्धाभ्यास का मुख्य केंद्र केवल लड़ाकू विमानों की गर्जना सुनाना नहीं, बल्कि अलग-अलग देशों की सेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी यानी सहज तकनीकी व रणनीतिक तालमेल स्थापित करना है। अभ्यास के दौरान एयर डिफेंस सिस्टम की कार्यप्रणाली, काउंटर-एयर ऑपरेशंस, संयुक्त सामरिक पैंतरेबाजी और हवा में ईंधन भरने की जटिल तकनीकों का कड़ा अभ्यास किया जा रहा है। विभिन्न देशों के संचार तंत्र, रडार डेटा और मिशन प्लानिंग के तरीकों को आपस में जोड़कर किसी भी वैश्विक चुनौती या संकट के समय तुरंत और प्रभावी संयुक्त प्रतिक्रिया देने की क्षमता तैयार की जा रही है। वायुसेना दिवस पर 8 अक्टूबर को दिखेगा सूर्यकिरण का करतब तरंग शक्ति युद्धाभ्यास के दौरान ही 8 अक्टूबर को भारतीय वायुसेना दिवस का विशेष अवसर भी मनाया जाएगा। इस दिन जोधपुर के आसमान में दर्शकों के लिए एक भव्य एयर डिस्प्ले का आयोजन तय किया गया है। भारतीय वायुसेना की प्रसिद्ध सूर्यकिरण एयरोबेटिक्स टीम अपने हॉक विमानों के साथ आसमान में उतरेगी और हैरतअंगेज करतब दिखाएगी। सूर्यकिरण के पायलट बेहद करीबी फॉर्मेशन, तेज मोड़ और रोमांचक आकृतियों के जरिए अपनी असाधारण उड़ान क्षमता का परिचय देंगे, जो इस पूरे बहुराष्ट्रीय आयोजन का एक प्रमुख आकर्षण बनेगा। इसका आप पर असर इस बहुराष्ट्रीय युद्धाभ्यास से भारत की रक्षा तैयारियों और क्षेत्रीय सुरक्षा तंत्र में अहम रणनीतिक मजबूती देखने को मिलेगी। • भारत में: यह अभ्यास भारतीय वायुसेना की वैश्विक साझीदारों के साथ मिलकर बड़े सैन्य अभियान संचालित करने की परिचालन क्षमता को मजबूत करता है। इससे आधुनिक पांचवीं पीढ़ी के विदेशी फाइटर जेट्स और स्वदेशी तेजस के बीच रणनीतिक समन्वय और युद्धक तत्परता में वृद्धि होगी। • जोधपुर में: सैन्य अभ्यास और आगामी वायुसेना दिवस के कारण जोधपुर तथा आसपास के एयरस्पेस में नागरिक विमानों और स्थानीय आवागमन के लिए निर्धारित वायु सुरक्षा प्रोटोकॉल प्रभावी रहेंगे। स्थानीय नागरिकों को 8 अक्टूबर को सूर्यकिरण टीम के औपचारिक एयर शो और जेट विमानों की हवाई गतिविधियों को देखने का अवसर मिलेगा। • रक्षा कूटनीति के लिए: मित्र देशों के साथ ऐसे संयुक्त आयोजनों से बहुपक्षीय रक्षा संबंध मजबूत होते हैं और संकट के समय त्वरित सैन्य तालमेल संभव हो पाता है। इससे वैश्विक स्तर पर साझी सुरक्षा प्राथमिकताओं को साधने में सहायता मिलती है। • नागरिक सुरक्षा के लिए: पश्चिमी सीमावर्ती क्षेत्रों में हवाई चौकसी और एयर डिफेंस तंत्र के परीक्षण से देश की सुरक्षा दीवार और अधिक अभेद्य बनेगी। सीमावर्ती इलाकों में लगातार हवाई निगरानी और अभ्यास सुरक्षा तंत्र को पूरी तरह मुस्तैद रखते हैं। ऐसा क्यों हुआ तरंग शक्ति 2026 का आयोजन मित्र देशों की वायु सेनाओं के बीच संयुक्त युद्धक क्षमताओं और तकनीकी तालमेल को परखने के लिए किया गया है। भारतीय वायुसेना अपनी वैश्विक साझेदारियों को मजबूत करने और पश्चिमी क्षेत्र में जटिल हवाई परिस्थितियों का अभ्यास करने के लिए इस बड़े मंच का उपयोग कर रही है। • रणनीतिक तालमेल की आवश्यकता: विभिन्न देशों के रडार, हथियार प्रणाली और संचार माध्यम अलग-अलग होते हैं, जिन्हें एक साथ संचालित करने के लिए नियमित अभ्यास जरूरी होता है। इस अभ्यास से अलग-अलग वायु सेनाओं के पायलट और कमांड सेंटर एक एकीकृत रणनीति के तहत काम करना सीखते हैं। • लंबी दूरी की परिचालन क्षमता: अमेरिकी एफ-35ए विमानों का जापान के मिसावा एयरबेस से सीधे जोधपुर पहुंचना लंबी दूरी की तैनाती और एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग तकनीकों की परीक्षा के उद्देश्य से संभव हुआ। यह दिखाता है कि मित्र देश जरूरत पड़ने पर तेजी से भारी सैन्य क्षमता एक स्थान से दूसरे स्थान स्थानांतरित कर सकते हैं। • हवाई सुरक्षा और रक्षा रणनीति: आधुनिक युद्ध में काउंटर-एयर ऑपरेशन और एयर डिफेंस नेटवर्क की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। विभिन्न प्रकार के लड़ाकू विमानों का एक साथ अभ्यास इन जटिल रक्षा रणनीतियों को मजबूत करने के लिए तैयार किया गया है। सवाल-जवाब 1. तरंग शक्ति 2026 का आयोजन कहां किया जा रहा है? इस बहुराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यास का आयोजन राजस्थान के जोधपुर एयरफोर्स स्टेशन और पश्चिमी सीमा क्षेत्र के एयरस्पेस में किया जा रहा है। 2. इस युद्धाभ्यास की मुख्य थीम क्या है? तरंग शक्ति 2026 के दूसरे संस्करण का आयोजन 'पावर इन पार्टनरशिप' की थीम पर किया जा रहा है। 3. भारतीय वायुसेना की ओर से कौन-कौन से लड़ाकू विमान शामिल हैं? भारतीय वायुसेना की ओर से सुखोई-30 एमकेआई, राफेल, मिग-29, जगुआर और स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस अभ्यास में भाग ले रहे हैं। 4. विदेशी वायु सेनाओं के कौन से विमान इस अभ्यास में हिस्सा ले रहे हैं? अमेरिका के एफ-35ए लाइटनिंग-II, फ्रांस के राफेल और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के एफ-16 लड़ाकू विमान इस अभ्यास में शामिल हैं। 5. अमेरिकी एफ-35ए विमान कहां से जोधपुर पहुंचे हैं? अमेरिकी एफ-35ए लाइटनिंग-II लड़ाकू विमान जापान के मिसावा एयरबेस से उड़ान भरकर सीधे जोधपुर पहुंचे हैं। 6. 8 अक्टूबर को जोधपुर में क्या विशेष कार्यक्रम होगा? 8 अक्टूबर को वायुसेना दिवस के उपलक्ष्य में भारतीय वायुसेना की सूर्यकिरण एयरोबेटिक्स टीम अपने हॉक विमानों से विशेष एयर डिस्प्ले प्रस्तुत करेगी। https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-men-bahurashtriya-yuddhabhyasa-tarang-shakti-2026-shuru-f-35a-aura-rafale-ke-satha-kai-desha-bhara-rahe-urana-42680 TrendKia — Har trend, sabse pehle.