# राजस्थान में बाजरा कटाई के बाद खेत की सफाई पर कृषि जानकारों की सलाह, रबी बुवाई से पहले अवशेष प्रबंधन जरूरी

> भरतपुर समेत राजस्थान में बाजरा कटाई के बाद खेतों में बचे डंठल और अवशेषों का सही प्रबंधन अगली रबी फसल की बुवाई और बेहतर पैदावार के लिए जरूरी बताया गया है।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-10-03 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-men-bajra-katai-ke-bada-kheta-ki-saphai-para-krishi-janakaron-ki-salaha-rabi-buvai-se-pahale-avashesha-prabndhana-jaruri-42143 · **Language:** Hindi
**Tags:** बाजरा, कृषि, राजस्थान, भरतपुर, फसल अवशेष, रबी फसल, किसान

भरतपुर सहित पूरे राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में खरीफ सत्र की मुख्य फसल बाजरा की कटाई का काम इन दिनों काफी तेजी से चल रहा है। खेतों में किसान अपनी पकी हुई फसल को सुरक्षित समेटने के लिए लगातार मेहनत कर रहे हैं। कटाई पूरी होने के तुरंत बाद खेतों में भारी मात्रा में फसल अवशेष छूट जाते हैं। इन अवशेषों में बाजरे के सख्त डंठल, कुटा हुआ बूला, जमीन की सतह पर बचे ठूंठ और कई किस्मों की जंगली घास-फूस शामिल रहती है। कई बार किसान कटाई के फौरन बाद खेत को कुछ समय के लिए यूं ही खुला छोड़ देते हैं, जिससे आगे चलकर जुताई के समय भारी परेशानियां खड़ी हो जाती हैं।

कृषि क्षेत्र के जानकारों का स्पष्ट कहना है कि रबी सीजन की अगली बुवाई शुरू करने से पहले इन तमाम बचे हुए अवशेषों का वैज्ञानिक और व्यवस्थित प्रबंधन करना हर किसान के लिए बहुत आवश्यक है। अगर खेत की सही समय पर समुचित सफाई नहीं की जाती, तो मिट्टी की बनावट और आगामी फसल की गुणवत्ता दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

## जुताई और बुवाई में पैदा होने वाली व्यावहारिक अड़चनें
बाजरा कटाई के बाद जब खेतों में मोटे और कठोर डंठल लंबे अरसे तक पड़े रहते हैं, तो वे आगामी बुवाई चक्र के लिए रुकावट बन जाते हैं। आधुनिक खेती में जब किसान ट्रैक्टर, कल्टीवेटर या आधुनिक सीड ड्रिल मशीनों का संचालन करते हैं, तब ये सख्त डंठल और जड़ें यंत्रों के हिस्सों में बुरी तरह उलझ जाती हैं। इस उलझाव के कारण जुताई न तो पर्याप्त गहरी हो पाती है और न ही खेत में एक समान समतलता बन पाती है। असमतल और उथली जुताई से मिट्टी भुरभुरी नहीं बन पाती, जिससे नए बीजों को जमने के लिए जरूरी गहराई नहीं मिल पाती है।

इसके साथ ही खेत में बची हुई पुरानी घास-फूस अगली फसल में खरपतवार के गंभीर संकट को जन्म देती है। यदि पुरानी घास को जड़ से हटाकर खेत को साफ नहीं किया गया, तो नई रबी फसल के अंकुरित होते ही यह पुरानी खरपतवार तेजी से फैलने लगती है। यह अवांछित घास जमीन में मौजूद सारे जरूरी पोषक तत्वों, नमी और खाद को खुद खींच लेती है, जिसके चलते नई फसल के पौधे कमजोर रह जाते हैं और उनकी प्रारंभिक बढ़वार बुरी तरह प्रभावित होती है।

## पशु आहार और कंपोस्ट खाद के रूप में अवशेषों का उपयोग
खेत में बिखरे इन अवशेषों को केवल कचरा मानकर नजरअंदाज करने के बजाय किसान इनका लाभकारी इस्तेमाल कर सकते हैं। उपयोगी अवशेषों को इकट्ठा करके पशुओं के पौष्टिक आहार और अन्य कृषि कार्यों में काम में लाया जा सकता है। बाजरे का कुटा हुआ बूला गाय और भैंस जैसे दुधारू पशुओं के लिए बेहद पौष्टिक और सुपाच्य सूखा चारा माना जाता है। इसे सही ढंग से काटकर और संरक्षित करके पूरे साल पशुओं के चारे के रूप में इस्तेमाल में लिया जा सकता है।

वहीं जो अवशेष चारे के काम नहीं आ सकते, उन्हें खेत से बाहर निकालकर कंपोस्ट गड्ढों में डालकर जैविक खाद तैयार की जा सकती है। अवशेषों को सड़ाकर बनाई गई कंपोस्ट खाद जमीन की जैविक संरचना को बेहतर करती है और रासायनिक खादों पर किसानों की निर्भरता को घटाने में मददगार साबित होती है।

## खेत में आग लगाने के गंभीर जैविक और पर्यावरणीय नुकसान
फसल अवशेषों से छुटकारा पाने के लिए कई बार लोग खेतों में आग लगा देते हैं, जिससे विशेषज्ञों ने पूरी तरह बचने की चेतावनी दी है। बिना सोचे-समझे अवशेषों को जलाने से मिट्टी की ऊपरी सतह अत्यधिक गर्म हो जाती है, जिससे जमीन के भीतर सक्रिय रहने वाले लाभकारी सूक्ष्म जीव और मित्र कीट केंचुए पूरी तरह झुलसकर समाप्त हो जाते हैं। केंचुए और सूक्ष्म जीव मिट्टी को प्राकृतिक रूप से उपजाऊ और हवादार बनाए रखने का कार्य करते हैं, और उनके नष्ट होने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति गिर जाती है।

इसके अलावा खेतों में आग लगाने से उठने वाला भारी धुआं पर्यावरण को बड़े पैमाने पर प्रदूषित करता है। यह धुआं ग्रामीण इलाकों की हवा को जहरीला बना देता है, जिससे गांव के बुजुर्गों, बच्चों और आम नागरिकों को सांस लेने में तकलीफ तथा आंखों में जलन जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

## रबी फसलों की मजबूत शुरुआत के लिए खेत की सही तैयारी
कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाली रबी फसल से भरपूर पैदावार लेने की बुनियाद खेत की पूर्व तैयारी पर ही टिकी होती है। समय रहते खेत से डंठल, बूला और खरपतवार को पूरी तरह हटाकर जब जमीन की गहरी और व्यवस्थित जुताई की जाती है, तो मिट्टी भुरभुरी और हवादार बनती है। इस प्रक्रिया से रबी फसलों के बीजों को अंकुरण के लिए एकदम अनुकूल वातावरण हासिल होता है, जिससे बीज तेजी से और एक समान गति से फूटते हैं।

शुरुआती दौर में खरपतवार का दबाव न होने की वजह से नई फसल के पौधों को सूर्य की धूप, हवा और जमीन का पूरा पोषण मिलता है। इसलिए सभी किसानों को यह हिदायत दी जाती है कि वे कटाई पूरी होते ही खेतों को बिना ध्यान दिए खाली छोड़ने के बजाय अवशेष प्रबंधन में जुट जाएं, ताकि रबी सीजन में कम लागत और बेहतर उत्पादन के जरिए वे अच्छा मुनाफा कमा सकें।

## इसका आप पर असर
बाजरे की कटाई के बाद खेत की उचित सफाई और अवशेष प्रबंधन से किसानों की अगली रबी फसल की बुवाई सुगम होगी और पैदावार में बढ़ोतरी होगी।

- **भारत में:** फसल अवशेषों को जलाने से रोकने से ग्रामीण वायु गुणवत्ता बेहतर बनी रहेगी और मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता सुरक्षित रहेगी। इससे रासायनिक खादों पर निर्भरता घटेगी और रबी फसलों का उत्पादन देश भर में टिकाऊ बनेगा।
- **राजस्थान में:** भरतपुर और राज्य के अन्य बाजरा उत्पादक क्षेत्रों में किसान बूला को चारे के रूप में एकत्र कर पशु आहार का संकट टाल सकते हैं। साथ ही समय पर गहरी जुताई कर सरसों, चना या गेहूं जैसी अगली फसलों की बुवाई बिना किसी अड़चन के कर सकेंगे।
- **आधुनिक कृषि उपकरणों की सुरक्षा:** डंठल हटाने से ट्रैक्टर और बुवाई मशीनों में अवशेष नहीं फंसेंगे। इससे मशीनों के कलपुर्जों के टूटने या खराब होने का खर्च बचेगा और जुताई का काम तेजी से निपटेगा।
- **लागत में कमी:** खरपतवार का समय रहते खात्मा होने से नई फसल पर अनावश्यक खरपतवारनाशक रसायनों का छिड़काव नहीं करना पड़ेगा। इसके चलते किसानों की खेती की प्रारंभिक लागत में स्पष्ट बचत होगी।

## ऐसा क्यों हुआ
बाजरे की कटाई के बाद खेतों में बड़ी मात्रा में सख्त डंठल, बूला और खरपतवार बच जाते हैं, जिन्हें कुछ किसान तुरंत हटाने के बजाय खेत में ही छोड़ देते हैं। इस लापरवाही के कारण मिट्टी की जुताई में रुकावट आती है और रबी सीजन की बुवाई प्रभावित होने लगती है।

- **कठोर फसल अवशेषों का जमाव:** बाजरे के डंठल काफी सख्त और रेशेदार होते हैं जो आसानी से मिट्टी में नहीं गलते। कटाई के तुरंत बाद अगर इन्हें हटाया न जाए तो ये अगली जुताई में आधुनिक कृषि यंत्रों को उलझा देते हैं।
- **खरपतवार की अनियंत्रित वृद्धि:** कटाई के बाद खेत खाली छोड़ने पर पुरानी घास और खरपतवार तेजी से जड़ें जमा लेते हैं। ये खरपतवार अगली फसल के अंकुरित होते ही उसके लिए जरूरी पोषक तत्वों और नमी को सोख लेते हैं।
- **लापरवाही में पराली जलाने की प्रवृत्ति:** समय बचाने के फेर में कई किसान अवशेषों में आग लगा देते हैं, जिससे बचने की सलाह दी जाती है। आग लगाने से जमीन के लाभकारी केंचुए और मित्र कीट जल जाते हैं तथा वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या पैदा होती है।

## सवाल-जवाब

### 1. बाजरा कटाई के बाद खेतों में कौन से अवशेष रह जाते हैं?
खेतों में बाजरे के कठोर डंठल, कुटा हुआ बूला, जड़ के पास बचे ठूंठ और कई तरह की जंगली घास-फूस अवशेष के रूप में बच जाती है।

### 2. खेत में अवशेष पड़े रहने से जुताई के दौरान क्या दिक्कत आती है?
कठोर डंठल ट्रैक्टर और आधुनिक कृषि यंत्रों में फंस जाते हैं, जिससे जुताई गहरी और एक समान नहीं हो पाती।

### 3. बाजरे के बूले का उपयोग किस काम में किया जा सकता है?
बाजरे का कुटा हुआ बूला गाय और भैंस जैसे दुधारू पशुओं के लिए बेहद पौष्टिक सूखे चारे के रूप में उपयोग में लाया जा सकता है।

### 4. खेत में बचे अवशेषों को आग क्यों नहीं लगानी चाहिए?
आग लगाने से मिट्टी के लाभकारी सूक्ष्म जीव और केंचुए नष्ट हो जाते हैं, जमीन की उर्वरा शक्ति घटती है और वायु प्रदूषण फैलता है।

### 5. अगली रबी फसल की बुवाई से पहले खेत की सफाई क्यों जरूरी है?
खेत साफ होने और गहरी जुताई मिलने से नए बीजों का अंकुरण बेहतर होता है और खरपतवार का संकट काफी घट जाता है।

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