# राजस्थान में बेर की फसल पर मंडराया कीटों का साया, जानिए बचाव के ठोस उपाय

> भरतपुर जिले में बेर के पेड़ों पर फूल आने के साथ ही फल मक्खी और फफूंद जनित रोगों का जोखिम बढ़ गया है, जिसको लेकर कृषि विभाग ने विशेष परामर्श जारी किया है।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-10-07 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-men-bera-ki-phasala-para-mndaraya-kiton-ka-saya-janie-bachava-ke-thosa-upaya-44318 · **Language:** Hindi
**Tags:** भरतपुर बेर की खेती, फल मक्खी कीट, राजस्थान बागवानी, कृषि विभाग एडवायजरी, वैर और भुसावर, फसल संरक्षण उपाय

राजस्थान के भरतपुर जिले में बागवानी करने वाले किसानों के सामने मौजूदा मौसम एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। जिले के वैर और भुसावर इलाकों में बेर की पैदावार बड़े पैमाने पर की जाती है, जहां के फल अपनी खास मिठास के कारण व्यापक पहचान रखते हैं। वर्तमान दौर में इन बागों में लगे पेड़ों पर फूल खिलने का क्रम जारी है, जो आगे चलकर फल के विकास की बुनियादी नींव तैयार करता है। हालांकि, पौधों के जीवन चक्र का यह चरण जितना अहम है, उतना ही संवेदनशील भी माना जाता है। बदलते मौसमी मिजाज के बीच फल मक्खी का प्रकोप और फफूंद से पनपने वाली बीमारियों का खतरा गहराने लगा है, जिससे बागवानों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा रही हैं।

## फूल आने के दौर में क्यों बढ़ जाता है कीटों का आक्रमण
कृषि क्षेत्र के जानकारों का स्पष्ट मानना है कि फूल खिलने की यही वह अवधि होती है जब फसल पर बाहरी कीटों और रोगों के हमले की आशंका सबसे तीव्र हो जाती है। कृषि विभाग के विशेषज्ञ डॉ उदयभान सिंह ने जोर देकर कहा है कि बागवानों को इस नाजुक मोड़ पर पारंपरिक ढर्रे से हटकर वैज्ञानिक पद्धतियों के सहारे बागों की सघन निगरानी करनी होगी। उपज को नुकसान पहुंचाने वाले जीवों में फल मक्खी सबसे अधिक संहारक साबित होती है। यह कीट शुरुआती दौर के नन्हें और कोमल फलों की त्वचा में छेद करके अपने अंडे भीतर रोपित कर देता है।

इन अंडों से जब लार्वा बाहर आता है, तो वह फल के भीतरी गूदे को धीरे-धीरे चट करने लगता है। इसका सीधा नतीजा यह निकलता है कि फल अंदर से सड़कर पूरी तरह बेजान हो जाता है और पकने की अवस्था में पहुंचने से पहले ही पेड़ की टहनियों से टूटकर जमीन पर आ गिरता है। इसके अतिरिक्त, वातावरण के तापमान में आने वाला अचानक उतार-चढ़ाव और क्यारियों में अत्यधिक नमी का जमाव फफूंद जनित संक्रमणों को आमंत्रित करता है, जिससे पूरी फसल असमय बर्बाद हो सकती है।

## कृषि विभाग की ओर से जरूरी सुरक्षा परामर्श
फसल को होने वाले नुकसान और किसानों को संभावित वित्तीय आघात से बचाने के उद्देश्य से कृषि विभाग ने विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने समस्त बेर उत्पादकों को निर्देशित किया है कि वे प्रतिदिन अपने बगीचों में जाकर पेड़ों, खिले हुए फूलों और प्रारंभिक कलियों की बारीकी से जांच-पड़ताल करें। निरीक्षण के दौरान यदि किसी पौधे में बीमारी अथवा कीड़े के शुरुआती लक्षण भी दिखाई पड़ें, तो जरा भी लापरवाही बरते बिना तुरंत अपने नजदीकी कृषि अधिकारियों या तकनीकी जानकारों से संपर्क साधना चाहिए।

किसानों को यह भी कड़ा निर्देश दिया गया है कि वे बाजार से बिना सोचे-समझे रासायनिक दवाएं लाकर अपनी मर्जी से छिड़काव न करें। फसल पर केवल उन्हीं कीटनाशकों और फफूंदनाशक दवाओं का प्रयोग होना चाहिए जिनकी सिफारिश कृषि विशेषज्ञों द्वारा आधिकारिक रूप से की गई हो। घोल तैयार करते समय रसायनों की निर्धारित मात्रा का सख्ती से पालन करना अनिवार्य है। तय अनुपात से अधिक या कम दवा डालने से न केवल पौधों की प्राकृतिक वृद्धि बाधित होती है, बल्कि बेर के स्वाद और गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है।

## बगीचे की साफ-सफाई और खरपतवार प्रबंधन पर जोर
कीटों के प्रकोप को शुरुआती स्तर पर थामने के लिए बाग की स्वच्छता को सबसे कारगर ढाल माना जाता है। विशेषज्ञों ने स्पष्ट हिदायत दी है कि जो फल रोगग्रस्त होकर या किसी अन्य कारण से जमीन पर गिर चुके हों, उन्हें तुरंत बीनकर नष्ट कर देना चाहिए अथवा मिट्टी में गहरा गड्ढा खोदकर दबा देना चाहिए। जमीन की सतह पर पड़े सड़े-गले फल मक्खियों और फफूंद के पनपने के लिए प्राथमिक प्रजनन स्थल का काम करते हैं।

इसके साथ ही, पेड़ों के इर्द-गिर्द उग आई जंगली घास, अवांछित झाड़ियों और खरपतवार को फौरन उखाड़ फेंकना बेहद जरूरी है। वैर और भुसावर क्षेत्र के ग्रामीण परिवारों की आजीविका बहुत हद तक बेर के व्यापार और उसकी वार्षिक आमदनी पर ही टिकी हुई है। ऐसे में समय रहते अपनाई गई तकनीकी समझ, समयबद्ध सतर्कता और बगीचे का सुव्यवस्थित रखरखाव किसानों को भारी आर्थिक नुकसान से बचाकर उनके लाभ को सुनिश्चित कर सकता है।

## इसका आप पर असर
यह परामर्श किसानों को फसल की बर्बादी और आर्थिक नुकसान से बचाने के लिए तुरंत कदम उठाने का रास्ता दिखाता है।

- **राजस्थान में:** भरतपुर, वैर और भुसावर के बेर उत्पादकों को अपने पेड़ों पर कीटों के हमले रोकने के लिए तत्काल नियमित निगरानी शुरू करनी होगी। बगीचे की सफाई न रखने या गलत कीटनाशक डालने से फल सड़ सकते हैं और पूरी कमाई प्रभावित हो सकती है।
- **भारत में:** बागवानी करने वाले सभी किसान इस वैज्ञानिक परामर्श को अपनाकर बदलते मौसम में अपनी उपज को बीमारियों से सुरक्षित रख सकते हैं। सही मात्रा में अनुशंसित दवाओं के प्रयोग से बाजार में उपभोक्ताओं को उच्च गुणवत्ता वाले फल प्राप्त होंगे।
- **दवाओं के चयन पर:** स्थानीय बाजार से कोई भी रसायन अपनी मर्जी से खरीदकर डालने की सख्त मनाही की गई है। कृषि विभाग द्वारा तय मानकों का पालन करके ही लागत और स्वास्थ्य दोनों को बचाया जा सकता है।
- **स्वच्छता का नियम:** जमीन पर गिरे सभी खराब फलों को तुरंत इकट्ठा करके मिट्टी में गहरा दबाना जरूरी है। ऐसा करने से आगामी हफ्तों में कीटों और फंगस के फैलाव की गति स्वतः धीमी पड़ जाएगी।

## ऐसा क्यों हुआ
मौसम में अचानक आने वाले बदलावों और पौधों की शारीरिक संरचना के कारण यह कीट संकट उत्पन्न हुआ है। फूल खिलने का वक्त पेड़ों के लिए जैविक रूप से सबसे नाजुक होता है, जिससे वे बाहरी संक्रमणों के प्रति बेहद संवेदनशील हो जाते हैं।

- **फूलों का खिलना:** पेड़ों पर जैसे ही फूल आते हैं, कोमल फल बनने की प्राकृतिक शुरुआत होती है जो रस चूसने वाले कीटों और फल मक्खियों को स्वाभाविक रूप से आकर्षित करती है। यह मक्खी मुलायम छिलके के भीतर अंडे देकर फल को अंदर से सड़ा देती है।
- **तापमान और नमी का उतार-चढ़ाव:** मौजूदा दिनों में वातावरण के पारे में आ रहे उतार-चढ़ाव और मिट्टी में अधिक नमी के रहने से फंगस के बीजाणु तेजी से सक्रिय हो जाते हैं। उचित जल प्रबंधन और वायु संचार न होने पर यह संक्रमण गंभीर रूप ले लेता है।
- **बगीचों में अस्वच्छता:** पहले से गिरे हुए सड़े फल और आसपास फैली जंगली घास कीटों के पनपने के लिए शरणगाह का काम करते हैं। समय पर सफाई न होने से इन कीटों की आबादी तेजी से बढ़कर पूरी फसल पर छा जाती है।

## सवाल-जवाब

### 1. भरतपुर के किन क्षेत्रों में बेर की व्यावसायिक खेती बड़े पैमाने पर होती है?
भरतपुर जिले के वैर और भुसावर क्षेत्रों में बेर की खेती मुख्य रूप से की जाती है, जहां के फल अपनी खास मिठास के लिए प्रसिद्ध हैं।

### 2. फूल आने के समय बेर की फसल पर किस कीट का सबसे अधिक खतरा होता है?
इस चरण में फल मक्खी का खतरा सबसे अधिक होता है, जो कोमल फलों के अंदर अंडे देकर उन्हें सड़ा देती है।

### 3. फल मक्खी का लार्वा फसल को किस तरह नुकसान पहुंचाता है?
अंडों से निकलने वाला लार्वा फल के भीतरी हिस्से को खाना शुरू कर देता है, जिससे फल पकने से पहले ही सड़कर जमीन पर गिर जाता है।

### 4. कृषि विभाग ने कीटनाशकों के उपयोग को लेकर किसानों को क्या सलाह दी है?
विभाग ने सलाह दी है कि अपनी मर्जी से कोई दवा न डालें और केवल विशेषज्ञों द्वारा सुझाई गई अनुशंसित दवाओं का तय मात्रा में ही छिड़काव करें।

### 5. बगीचे की सफाई के लिए किसानों को क्या ठोस कदम उठाने चाहिए?
किसानों को जमीन पर गिरे सड़े-गले फलों को गहरा गड्ढा खोदकर दबा देना चाहिए और आसपास उगी जंगली घास तथा खरपतवार को हटा देना चाहिए।

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