राजस्थान में भिवाड़ी की हवा सबसे ज्यादा खराब, जयपुर और अन्य शहरों में मध्यम श्रेणी में दर्ज हुआ एक्यूआई राजस्थान के अधिकांश संभाग मुख्यालयों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में दर्ज की गई है, जबकि औद्योगिक केंद्र भिवाड़ी 184 एक्यूआई के साथ राज्य में सबसे प्रदूषित रहा। राजस्थान के सभी सात संभाग मुख्यालयों और प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता का स्तर अधिकांश जगहों पर मध्यम श्रेणी में दर्ज किया गया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और स्थानीय निगरानी केंद्रों से सामने आए नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, राजधानी जयपुर में वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई 109 रिकॉर्ड किया गया। जयपुर के वातावरण में इस समय हवा की गुणवत्ता को प्रभावित करने वाला मुख्य प्रदूषक तत्व पार्टिकुलेट मैटर 10 यानी पीएम-10 पाया गया है। पूरे राज्य में वातावरण की स्थिति मिली-जुली बनी हुई है, जहां कुछ शहरों में हवा सांस लेने योग्य है, वहीं औद्योगिक क्षेत्रों में धुंध और प्रदूषण का स्तर लगातार चिंता बढ़ा रहा है। संभाग मुख्यालयों में हवा की स्थिति राज्य के अन्य प्रशासनिक संभाग मुख्यालयों पर नजर डालें तो वहां भी प्रदूषण का स्तर मध्यम दायरे में ही बना हुआ है। पश्चिमी राजस्थान के प्रमुख शहर जोधपुर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 126 दर्ज हुआ, जबकि झीलों की नगरी उदयपुर में यह आंकड़ा 125 रहा। अजमेर शहर में एक्यूआई 110 दर्ज किया गया, जिससे वहां की हवा तुलनात्मक रूप से थोड़ी बेहतर रही। इसके विपरीत बीकानेर में वायु प्रदूषण अधिक देखा गया और वहां एक्यूआई 163 तक पहुंच गया। हाड़ौती क्षेत्र के कोटा शहर में सूचकांक लगभग 120 के आसपास मापा गया, जबकि पूर्वी राजस्थान के भरतपुर में यह स्तर करीब 150 दर्ज किया गया। इन सभी संभागों में प्रदूषण का स्तर मध्यम वर्ग में आने के कारण स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने आम जनता को सचेत रहने को कहा है। औद्योगिक शहरों का हाल और भिवाड़ी में सबसे ज्यादा प्रदूषण राजस्थान के प्रमुख औद्योगिक नगरों में वायु गुणवत्ता के स्तर में काफी अंतर देखने को मिला है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से सटे अलवर में एक्यूआई 107 दर्ज किया गया, जो मध्यम श्रेणी में है। वस्त्र नगरी भीलवाड़ा में वायु गुणवत्ता सूचकांक 128 रहा, जबकि शेखावाटी के सीकर में यह आंकड़ा लगभग 160 तक पहुंच गया, जिसे मध्यम से खराब स्थिति की ओर बढ़ता माना जा रहा है। हालांकि, पूरे प्रदेश में सबसे अधिक प्रदूषित हवा औद्योगिक शहर भिवाड़ी में रिकॉर्ड की गई, जहां एक्यूआई 184 के आसपास दर्ज हुआ। भिवाड़ी में निरंतर संचालित होने वाली औद्योगिक गतिविधियों, कारखानों के धुएं और मालवाहक वाहनों की आवाजाही को इस उच्च प्रदूषण की मुख्य वजह बताया जा रहा है। स्वास्थ्य परामर्श और आगामी दिनों का पूर्वानुमान यद्यपि राज्य के अधिकांश हिस्सों में हवा आम लोगों के लिए बेहद गंभीर स्थिति में नहीं है, फिर भी सांस, हृदय और फेफड़ों की पुरानी बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए यह स्तर परेशानी खड़ी कर सकता है। चिकित्सा विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि अस्थमा और सांस के मरीज सुबह और शाम के समय बाहरी गतिविधियों, तेज दौड़ और कसरत को सीमित रखें। बाहर निकलते समय मास्क का उपयोग करना स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित कदम साबित होगा। मौसम विज्ञानियों के अनुसार, आने वाले दिनों में आसमान साफ रहने और धूप खिलने के आसार हैं, जिससे प्रदूषक तत्वों के बिखरने और हवा की गुणवत्ता में धीरे-धीरे सुधार आने की संभावना है। इसका आप पर असर मध्यम और खराब श्रेणी का वायु प्रदूषण संवेदनशील नागरिकों के दैनिक स्वास्थ्य और दिनचर्या पर सीधा असर डालता है। • भारत में: देश भर के औद्योगिक क्लस्टर्स में सर्दियों के बाद भी पार्टिकुलेट मैटर की मौजूदगी बनी रहती है। पर्यावरण मानकों का कड़ाई से पालन न होने पर ऐसे क्षेत्रों में रहने वाले कामगारों को लगातार श्वसन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। • राजस्थान में: राज्य के शहरों में रहने वाले सांस और दिल के मरीजों को सुबह की सैर सीमित करनी चाहिए। खासकर भिवाड़ी, बीकानेर और सीकर के निवासियों को घर से बाहर निकलते समय एन95 मास्क का इस्तेमाल करना चाहिए ताकि धूल कणों से बचाव हो सके। • औद्योगिक कामगारों के लिए: भिवाड़ी और अलवर जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों को कार्यस्थल पर अतिरिक्त सुरक्षा उपकरण पहनने होंगे। निर्माण और फैक्ट्री क्षेत्रों में पानी के नियमित छिड़काव से स्थानीय स्तर पर उड़ने वाली धूल को कम किया जा सकता है। • मौसम और दैनिक दिनचर्या: आने वाले दिनों में धूप खिलने पर हवा में सुधार की उम्मीद है, लेकिन शाम के समय प्रदूषण का घनत्व बढ़ सकता है। नागरिक अपनी बाहरी गतिविधियों को दोपहर के समय प्लान कर सकते हैं जब हवा में प्रदूषकों का जमाव कम रहता है। ऐसा क्यों हुआ राजस्थान के विभिन्न संभागों और शहरों में वायु गुणवत्ता के मध्यम तथा भिवाड़ी में खराब स्तर पर पहुंचने के पीछे कई औद्योगिक और वातावरणीय कारक सक्रिय रहे हैं। • औद्योगिक उत्सर्जन: भिवाड़ी में लगातार चलने वाले कारखानों, भट्ठियों और औद्योगिक संयंत्रों से निकलने वाले धुएं ने स्थानीय वायुमंडल में विषाक्त कणों का घनत्व तेजी से बढ़ाया है। इस सघन औद्योगिक गतिविधि के कारण भिवाड़ी का सूचकांक राज्य में सबसे अधिक 184 तक पहुंच गया। • पार्टिकुलेट मैटर और धूल का प्रभाव: जयपुर और बीकानेर जैसे शहरों में पीएम-10 मुख्य प्रदूषक तत्व रहा है, जो मुख्य रूप से सड़क की धूल, निर्माण गतिविधियों और वाहनों की आवाजाही से पैदा होता है। शुष्क मौसम के चलते ये धूल कण वातावरण की निचली सतह में तैरते रहते हैं। • स्थानीय भौगोलिक व मौसमी स्थिति: पश्चिमी राजस्थान के शुष्क इलाकों में रेतीली हवाओं और शुष्कता के कारण बीकानेर और भरतपुर जैसे शहरों में धूल का स्तर स्वाभाविक रूप से ऊंचा दर्ज किया गया है। आने वाले दिनों में साफ मौसम और हवा की गति बढ़ने पर ही इन प्रदूषक तत्वों के पूरी तरह छंटने की संभावना बनेगी। सवाल-जवाब 1. राजस्थान में सबसे ज्यादा प्रदूषित शहर कौन सा दर्ज किया गया? राज्य में सबसे अधिक वायु प्रदूषण भिवाड़ी में दर्ज किया गया, जहां एक्यूआई 184 के स्तर पर पहुंच गया। 2. राजधानी जयपुर में हवा की गुणवत्ता का क्या स्तर रहा? जयपुर का वायु गुणवत्ता सूचकांक 109 रहा, जो मध्यम श्रेणी में आता है, और इसका मुख्य प्रदूषक पीएम-10 दर्ज हुआ। 3. अन्य प्रमुख संभागों जैसे जोधपुर, बीकानेर और कोटा में एक्यूआई कितना था? जोधपुर में एक्यूआई 126, उदयपुर में 125, अजमेर में 110, बीकानेर में 163, कोटा में लगभग 120 और भरतपुर में करीब 150 दर्ज किया गया। 4. स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने मरीजों को क्या सावधानियां बरतने की सलाह दी है? अस्थमा और फेफड़ों के रोगियों को सुबह-शाम बाहरी कसरत सीमित करने और बाहर निकलते समय मास्क पहनने की सलाह दी गई है। 5. आने वाले दिनों में मौसम को लेकर क्या पूर्वानुमान जताया गया है? मौसम के साफ रहने की संभावना जताई गई है, जिससे हवा की गुणवत्ता में आने वाले समय में सुधार होने की उम्मीद है। https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-men-bhiwadi-ki-hava-sabase-jyada-kharaba-jaipur-aura-anya-shaharon-men-madhyama-shreni-men-darja-hua-aqi-52143 TrendKia — Har trend, sabse pehle.