राजस्थान में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो का बड़ा शिकंजा, तीन जिलों में रिश्वत लेते पकड़े गए कर्मचारी और इंजीनियर राजस्थान में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने सोमवार को कोटा, झुंझुनूं के चिड़ावा और झालावाड़ में छापेमारी कर रिश्वतखोरी के तीन अलग-अलग मामलों में संविदाकर्मियों और एक महिला कनिष्ठ अभियंता को रंगे हाथों पकड़ा। राजस्थान के प्रशासनिक तंत्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी एजेंसियों की सख्ती के बावजूद अवैध वसूली के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। सोमवार को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो यानी एसीबी ने राज्य के तीन अलग-अलग जिलों में समानांतर छापेमारी कर रिश्वतखोरी के तीन बड़े मामलों का पर्दाफाश किया। कोटा नगर निगम, झुंझुनूं जिले के चिड़ावा विद्युत विभाग और झालावाड़ जिला परिषद में हुई इन कार्रवाइयों में सरकारी योजनाओं और जनहित कार्यों के बदले घूस मांगने वाले आरोपियों को रंगे हाथों दबोचा गया। इन मामलों में संविदाकर्मियों के साथ-साथ एक कनिष्ठ अभियंता यानी जेईएन भी कानून के शिकंजे में आई हैं, जबकि एक अन्य आरोपी मौका पाकर फरार होने में सफल रहा। कोटा नगर निगम में आवास योजना की किश्त पर वसूली कोटा में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टीम ने एक सुनियोजित जाल बिछाकर नगर निगम में तैनात संविदाकर्मी अखिलेश मीणा को 10 हजार रुपये की अवैध राशि लेते हुए गिरफ्तार किया। प्राप्त विवरण के अनुसार यह अनुचित राशि केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना की पहली किश्त जारी करवाने के एवज में मांगी गई थी। पीड़ित लाभार्थी ने आवास निर्माण के लिए मिलने वाले अपने ही हक के पैसे में से रिश्वत मांगे जाने की शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद ब्यूरो के अधिकारियों ने मामले की पुष्टि कर ट्रैप आयोजित किया। छापेमारी की इस प्रक्रिया के दौरान निगम का एक अन्य संविदाकर्मी नरेश वर्मा भी घटना स्थल पर मौजूद था। हालांकि, ब्यूरो की सक्रियता की भनक लगते ही वह मौके की नजाकत को भांपकर वहां से भागने में सफल रहा। जांच दल अब फरार चल रहे नरेश वर्मा की तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रहा है और मामले में उसकी प्रत्यक्ष संलिप्तता की गहन पड़ताल कर रहा है। चिड़ावा में लाइन शिफ्टिंग के नाम पर महिला जेईएन धरी गईं झुंझुनूं जिले के चिड़ावा कस्बे में विद्युत निगम के कार्यालय में एसीबी की कार्रवाई से हड़कंप मच गया। चिड़ावा ग्रामीण क्षेत्र में पदस्थापित कनिष्ठ अभियंता दीपिका गोदारा को ब्यूरो की टीम ने 15 हजार रुपये की रिश्वत राशि स्वीकार करते हुए रंगे हाथों हिरासत में लिया। मामले के अनुसार, विद्युत लाइन शिफ्टिंग के कार्य को मंजूरी देने और उसे पूरा करवाने के लिए पहले 11 हजार रुपये की मांग से जुड़ा मामला सामने आया था। शिकायतकर्ता द्वारा संपर्क किए जाने के बाद भ्रष्टाचार निरोधक दल ने तथ्यों का सत्यापन कराया और तय योजना के अनुसार जाल बिछाया। जैसे ही जेईएन ग्रामीण दीपिका गोदारा ने 15 हजार रुपये की राशि अपने हाथ में ली, ब्यूरो की टीम ने उन्हें दबोच लिया और रिश्वत की रकम बरामद कर ली। बिजली विभाग जैसे सीधे जनसरोकार से जुड़े महकमे में एक जिम्मेदार तकनीकी अधिकारी के ट्रैप होने की घटना के बाद संबंधित दफ्तर में हड़कंप का माहौल देखा गया। मामले में कानूनी औपचारिकताएं पूरी करते हुए आगे का अनुसंधान शुरू कर दिया गया है। झालावाड़ में अन्नपूर्णा रसोई के बिल पास कराने पर रिश्वत तीसरा मामला झालावाड़ जिले से प्रकाश में आया, जहां जिला परिषद के अंतर्गत कार्यरत संविदाकर्मी जयराम वर्मा को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने गिरफ्तार किया। झालावाड़ एसीबी की टीम ने मामा-भांजा चौराहे के निकटवर्ती क्षेत्र में रणनीति बनाकर इस कार्रवाई को अंजाम दिया, जहां आरोपी को 3 हजार रुपये की घूस लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। इस मामले में सामने आया कि राज्य सरकार की सामाजिक कल्याणकारी योजना अन्नपूर्णा रसोई में फर्जी टोकन के आधार पर बिल तैयार करने और उन्हें पास करवाने के नाम पर यह अवैध राशि मांगी जा रही थी। शिकायत के आधार पर जाल बिछाकर आरोपी जयराम वर्मा को नकदी सहित दबोच लिया गया। जनकल्याणकारी भोजन योजना से जुड़े बिलों के प्रबंधन में इस तरह का घालमेल सामने आने से निगरानी तंत्र की खामियों पर भी सवाल उठ रहे हैं। लगातार कानूनी शिकंजे के बाद भी प्रशासनिक तंत्र में घूसखोरी एक ही दिन के भीतर तीन अलग-अलग स्थानों पर हुई इन कार्रवाइयों ने राज्य के विभिन्न प्रशासनिक और तकनीकी विभागों में निचले और मध्यम स्तर पर पसरे भ्रष्टाचार की तस्वीर उजागर की है। जहां कोटा में बेघरों के सिर पर छत मुहैया कराने वाली प्रधानमंत्री आवास योजना से कमीशन वसूला जा रहा था, वहीं चिड़ावा में बुनियादी बिजली ढांचे से जुड़ी लाइन शिफ्टिंग के लिए पैसे ऐंठे जा रहे थे, और झालावाड़ में जरूरतमंदों को रियायती भोजन देने वाली अन्नपूर्णा रसोई योजना के बिलों में हेराफेरी कर रिश्वत की मांग की जा रही थी। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टीमें जनता से मिलने वाली शिकायतों के आधार पर लगातार ट्रैप अभियान चला रही हैं और मौके से नकदी बरामद कर अधिकारियों व कर्मचारियों को सलाखों के पीछे भेज रही हैं। इसके बावजूद विभागों के भीतर अनैतिक लेनदेन पर पूरी तरह विराम नहीं लग पा रहा है। इन घटनाओं से यह गंभीर सवाल खड़ा होता है कि निरंतर छापों और कड़ी कानूनी धाराओं के बावजूद सरकारी तंत्र के भीतर जनता के बुनियादी कार्यों को अटकाकर धन वसूलने की प्रवृत्ति पर ठोस अंकुश क्यों नहीं लग पा रहा है। इसका आप पर असर सरकारी योजनाओं और जनसुविधाओं के बदले रिश्वत मांगने वाले कर्मचारियों पर हुई इस कार्रवाई से आम नागरिकों को अपने अधिकारों की रक्षा के लिए सीधा संदेश मिलता है। • राजस्थान में: यदि किसी सरकारी दफ्तर में आवास योजना, बिजली कनेक्शन या अन्य सेवाओं के लिए आपसे रिश्वत मांगी जाती है, तो आप तुरंत एसीबी के हेल्पलाइन नंबर 1064 या टोल फ्री नंबर पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। जांच एजेंसी आपकी पहचान गोपनीय रखकर भ्रष्ट कर्मचारियों के खिलाफ सीधी कार्रवाई करती है। • योजनाओं के लाभार्थियों के लिए: प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी केंद्रीय योजनाओं के तहत मिलने वाली अनुदान राशि शत-प्रतिशत लाभार्थियों के बैंक खाते में सीधे भेजी जाती है। किसी भी बिचौलिए या संविदाकर्मी को किसी भी किश्त के भुगतान के बदले कोई राशि देने की आवश्यकता नहीं है। • विद्युत सेवाओं के उपभोक्ताओं के लिए: बिजली के तार या खंभे शिफ्ट करवाने के लिए केवल विभाग की आधिकारिक रसीद के आधार पर ही निर्धारित शुल्क जमा करें। किसी भी कर्मचारी या कनिष्ठ अभियंता द्वारा नकद मांग किए जाने पर विभाग के उच्चाधिकारियों अथवा निगरानी एजेंसी से संपर्क किया जा सकता है। • प्रशासनिक पारदर्शिता पर: सरकारी कार्यालयों में संविदा पर तैनात कर्मचारियों द्वारा किए जा रहे लेन-देन पर अब निगरानी तंत्र और अधिक सख्त होगा। आम नागरिक किसी भी संविदाकर्मी की अनुचित मांग के खिलाफ सीधे विभाग प्रमुख या एसीबी के समक्ष अपना पक्ष रख सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ यह घटनाक्रम राजस्थान के प्रशासनिक और तकनीकी विभागों में योजनाओं के क्रियान्वयन के दौरान निगरानी की ढिलाई और जवाबदेही के अभाव के कारण सामने आया। • अप्रत्यक्ष नियंत्रण और बिचौलिए: नगर निगमों और जिला परिषदों में नियमित कर्मचारियों के स्थान पर संविदाकर्मियों को महत्वपूर्ण फाइलों और टोकन प्रबंधन का काम सौंपे जाने से भ्रष्टाचार के रास्ते खुलते हैं। जवाबदेही तय न होने के कारण ऐसे कर्मचारी लाभार्थियों से बेखौफ होकर अवैध धन की मांग करने लगते हैं। • योजनाओं में मानवीय हस्तक्षेप: प्रधानमंत्री आवास योजना की किश्त जारी करने और अन्नपूर्णा रसोई के बिल पास करने में अधिकारियों के स्तर पर सत्यापन अनिवार्य होता है। इस सत्यापन प्रक्रिया को अटकाकर नागरिकों और वेंडरों पर रिश्वत देने का अनुचित दबाव बनाया जाता है। • उपभोक्ता जागरूकता और शिकायतें: पीड़ितों द्वारा अवैध मांग के आगे झुकने के बजाय भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से संपर्क करने के फैसले ने इस त्वरित ट्रैप कार्रवाई को संभव बनाया। एसीबी द्वारा की गई प्रारंभिक जांच में आरोपों की पुष्टि होते ही टीम ने जाल बिछाकर आरोपियों को रंगे हाथों पकड़ा। सवाल-जवाब 1. कोटा नगर निगम में संविदाकर्मी को किस मामले में पकड़ा गया? कोटा नगर निगम में संविदाकर्मी अखिलेश मीणा को प्रधानमंत्री आवास योजना की पहली किश्त की राशि में से 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। 2. कोटा में क्या कोई अन्य आरोपी भी शामिल था? हां, छापेमारी के समय नरेश वर्मा नाम का एक अन्य संविदाकर्मी भी मौके पर मौजूद था, जो कार्रवाई की भनक लगते ही फरार हो गया। 3. चिड़ावा में कनिष्ठ अभियंता को कितनी रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया? चिड़ावा विद्युत विभाग में कनिष्ठ अभियंता ग्रामीण दीपिका गोदारा को लाइन शिफ्टिंग के मामले में 15 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया। 4. झालावाड़ में किस योजना से जुड़े बिलों के नाम पर घूस मांगी गई थी? झालावाड़ जिला परिषद के संविदाकर्मी जयराम वर्मा ने अन्नपूर्णा रसोई योजना में फर्जी टोकन से बिल बनाने के एवज में 3 हजार रुपये की रिश्वत ली थी। 5. झालावाड़ में एसीबी की कार्रवाई किस स्थान पर हुई? झालावाड़ में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने मामा-भांजा चौराहा क्षेत्र में कार्रवाई कर आरोपी को गिरफ्तार किया। https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-men-bhrashtachara-nirodhaka-byuro-ka-bara-shiknja-tina-jilon-men-rishvata-lete-pakare-gae-karmachari-aura-injiniyara-43388 TrendKia — Har trend, sabse pehle.