राजस्थान में बुनियादी ढांचे पर ₹2.61 लाख करोड़ का निवेश, रिफाइनरी से लेकर मेट्रो और एयरपोर्ट तक बदलेगा स्वरूप राजस्थान में केंद्र और राज्य के तालमेल से 2.61 लाख करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं पर काम तेज हो गया है, जिनमें ऊर्जा, रेलवे, हवाई अड्डों और जल आपूर्ति के बड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं. राजस्थान के समग्र विकास को नई गति देने के उद्देश्य से केंद्र और राज्य सरकार मिलकर राज्य में बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे के विस्तार में जुटी हुई हैं. राज्य में सड़क नेटवर्क, रेलवे लाइनों, नागरिक उड्डयन, बिजली ट्रांसमिशन और शहरी परिवहन से जुड़ी केंद्रीय योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाई गई है. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के दिल्ली दौरों तथा केंद्रीय मंत्रियों के साथ लगातार हुए विचार-विमर्श के बाद विभिन्न विभागों से जुड़ी लंबित परियोजनाओं की बाधाओं को दूर किया गया है. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस समय राज्य भर में करीब 2 लाख 61 हजार करोड़ रुपये के कुल बजट वाली केंद्रीय ढांचागत परियोजनाओं पर काम चल रहा है, जिनमें से 82 परियोजनाओं पर अब तक 1 लाख 17 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च भी की जा चुकी है. इन निर्माण कार्यों की प्रगति काफी तेज गति से आगे बढ़ रही है. कुल परियोजनाओं में से 1 लाख 22 हजार करोड़ रुपये के बजट वाली 29 अहम परियोजनाओं का काम 80 प्रतिशत से ज्यादा पूरा कर लिया गया है. पश्चिमी राजस्थान में औद्योगिक विकास के बड़े केंद्र के रूप में उभर रहे बाड़मेर जिले में देश की पहली ग्रीनफील्ड रिफाइनरी से संबंधित निर्माण कार्य लगातार आगे बढ़ रहे हैं. वहां पेट्रोकेमिकल निकासी और विपणन टर्मिनल का कार्य लगभग 99 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है, जिससे आने वाले समय में पेट्रोकेमिकल और डाउनस्ट्रीम उद्योगों को सीधा लाभ मिलने की राह खुली है. हवाई अड्डों का विस्तार और आधुनिक यात्री सुविधाएं पर्यटन और नागरिक उड्डयन को बढ़ावा देने के इरादे से प्रदेश के प्रमुख शहरों में हवाई संपर्क व्यवस्था को अपग्रेड किया जा रहा है. जोधपुर हवाई अड्डे पर यात्रियों की बढ़ती संख्या और सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए 480 करोड़ रुपये की लागत से एक नया यात्री टर्मिनल भवन तैयार कर लिया गया है. इसके साथ ही झीलों के शहर उदयपुर के हवाई अड्डे पर नए एकीकृत यात्री टर्मिनल के निर्माण का 88 प्रतिशत काम संपन्न हो चुका है. इन आधुनिक टर्मिनलों के तैयार होने से देशी-विदेशी पर्यटकों के आवागमन में सुगमता आएगी और स्थानीय व्यापार को भी इसका सीधा फायदा मिलेगा. ऊर्जा सुरक्षा और विशाल सोलर परियोजनाएं बिजली उत्पादन और ग्रीन एनर्जी के मोर्चे पर आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए राज्य में 98 हजार 759 करोड़ रुपये के कुल निवेश से 19 महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स पर कार्य संचालित हो रहा है. इसके अंतर्गत बाड़मेर कॉम्प्लेक्स में 6 गीगावाट क्षमता का विशाल सोलर प्रोजेक्ट स्थापित किया जा रहा है. इसके अलावा विद्युत पारेषण तंत्र को मजबूत बनाने के लिए फतेहगढ़-द्वितीय ट्रांसमिशन सिस्टम का जाल बिछाया जा रहा है, जिससे नवीकरणीय ऊर्जा को विभिन्न ग्रिडों तक सुचारु रूप से पहुंचाया जा सके. प्रदेश के ऊर्जा क्षेत्र के दीर्घकालिक विस्तार के लिए माही-बांसवाड़ा परमाणु विद्युत परियोजना पर भी गंभीरता से ध्यान केंद्रित किया जा रहा है. रेल नेटवर्क और राष्ट्रीय राजमार्गों का आधुनिकीकरण यातायात और माल ढुलाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए रेलवे सेक्टर में 33 हजार 572 करोड़ रुपये से अधिक की 22 अलग-अलग परियोजनाओं पर काम चल रहा है. इनमें प्रमुख रूप से बीकानेर-मेड़ता-जोधपुर रेल मार्ग, अजमेर-चित्तौड़गढ़-उदयपुर सेक्शन और सादुलपुर-रतनगढ़ रेल लाइन का नवीनीकरण एवं दोहरीकरण शामिल है. रेल नेटवर्क के साथ-साथ सड़क मार्ग सुधार के तहत राष्ट्रीय राजमार्गों की 22 परियोजनाओं के लिए 16 हजार 241 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं. वहीं शहरों के भीतर सार्वजनिक परिवहन तंत्र को उन्नत बनाने के लिए 14 हजार 222 करोड़ रुपये की परियोजनाएं पाइपलाइन में हैं. राजधानी जयपुर में ट्रैफिक नियंत्रण और रिंग रोड निर्माण जयपुर में वाहनों के भारी दबाव और लगातार लगने वाले जाम से निजात दिलाने के लिए बड़े स्तर पर शहरी ढांचागत योजनाएं तैयार की गई हैं. शहर के उत्तरी हिस्से में 11 हजार 764 करोड़ रुपये के अनुमानित खर्च से जयपुर रिंग रोड (उत्तर) परियोजना के निर्माण को आगे बढ़ाया जाएगा. इसके साथ ही शहर में सार्वजनिक परिवहन को तेज और प्रदूषणमुक्त बनाने के लिए 13 हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली जयपुर मेट्रो फेज-2 परियोजना को गति दी जा रही है. इन दोनों परियोजनाओं के धरातल पर उतरने के बाद शहर के भीतरी मार्गों पर यातायात का दबाव काफी कम हो जाएगा. पेयजल उपलब्धता और औद्योगिक गलियारे जल संकट का सामना कर रहे प्रदेश के ग्रामीण और शहरी इलाकों में पानी पहुंचाने के लिए भी ठोस कदम उठाए जा रहे हैं. राम जल सेतु लिंक परियोजना के माध्यम से राज्य के 17 जिलों में रहने वाले 3 करोड़ से अधिक लोगों को सुरक्षित पेयजल मुहैया कराने का लक्ष्य तय किया गया है. इस व्यापक जल परियोजना से लगभग 4 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई के लिए आवश्यक पानी उपलब्ध कराया जा सकेगा. इसके अतिरिक्त यमुना, किशाऊ और नर्मदा जल समझौतों के प्रावधानों के अमल से राज्य में जल संकट को हल करने में मदद मिलेगी. वहीं औद्योगिक निवेश को गति देने के लिए जोधपुर-पाली-मारवाड़ औद्योगिक क्षेत्र का विस्तार किया जा रहा है, जिससे रोजगार और व्यवसाय के नए मौके पैदा होंगे. इसका आप पर असर इन बड़ी ढांचागत परियोजनाओं के पूरा होने से राज्य में आवागमन, पेयजल, रोजगार और ऊर्जा आपूर्ति के स्तर पर व्यापक सुधार होगा. • भारत में: देश की पहली ग्रीनफील्ड रिफाइनरी और 6 गीगावाट की सोलर परियोजना से राष्ट्रीय ग्रिड तथा ऊर्जा सुरक्षा को बड़ा संबल मिलेगा. इससे पूरे भारत में नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन और पेट्रोकेमिकल उत्पादन का दायरा बढ़ेगा. • राजस्थान में: 17 जिलों के 3 करोड़ से अधिक लोगों को नियमित पेयजल तथा 4 लाख हेक्टेयर खेतों को सिंचाई की सुविधा मिल सकेगी. इससे ग्रामीण और शहरी आबादी के जीवन स्तर और कृषि उत्पादन में सीधा सुधार होगा. • जयपुर में: जयपुर रिंग रोड (उत्तर) और जयपुर मेट्रो फेज-2 के बनने से शहर में ट्रैफिक जाम की समस्या में भारी कमी आएगी. दैनिक यात्रियों के सफर का समय घटेगा और स्थानीय परिवहन बेहद सुगम हो जाएगा. • जोधपुर और उदयपुर में: जोधपुर में 480 करोड़ रुपये का नया टर्मिनल और उदयपुर में 88 प्रतिशत पूरा हो चुका एकीकृत टर्मिनल पर्यटन तथा व्यापार को गति देंगे. यात्रियों को विश्वस्तरीय एयरपोर्ट सुविधाएं मिलेंगी और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बढ़ेगी. ऐसा क्यों हुआ केंद्र और राज्य सरकार के बीच हुए नीतिगत तालमेल और लगातार समीक्षा बैठकों की वजह से इन लंबित परियोजनाओं में तेजी आई है. • सीधा कारण: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के दिल्ली दौरों और केंद्रीय मंत्रियों के साथ हुई नियमित बैठकों के चलते रुकी हुई ढांचागत योजनाओं की बाधाएं खत्म हुईं. केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों ने बजट जारी कर निर्माण कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी. • अनुकूल परिस्थितियां: 82 केंद्रीय परियोजनाओं पर अब तक 1 लाख 17 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं, जिससे प्रोजेक्ट्स को निरंतर वित्तीय सहारा मिला. 29 बड़ी परियोजनाओं का काम 80 प्रतिशत से ज्यादा पूरा होने के बाद अब अंतिम चरण के कार्यों को पूरा किया जा रहा है. • भविष्य की दिशा: परियोजनाओं के समय पर पूरा होने से राजस्थान में पेट्रोकेमिकल, नवीकरणीय ऊर्जा, पर्यटन और विनिर्माण क्षेत्रों में नए निवेश का रास्ता खुलेगा. इसके साथ ही औद्योगिक गलियारों में स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार होंगे. सवाल-जवाब 1. राजस्थान में कुल कितने बजट की केंद्रीय बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर काम चल रहा है? राजस्थान में करीब 2 लाख 61 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली केंद्रीय परियोजनाओं पर सक्रिय रूप से काम चल रहा है. 2. राज्य में कितनी परियोजनाओं का काम 80 प्रतिशत से अधिक पूरा हो चुका है? प्रदेश में 1 लाख 22 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली 29 परियोजनाओं का निर्माण कार्य 80 प्रतिशत से अधिक पूरा हो चुका है. 3. बाड़मेर रिफाइनरी से जुड़े प्रोजेक्ट की वर्तमान प्रगति क्या है? बाड़मेर में पेट्रोकेमिकल निकासी और विपणन टर्मिनल का निर्माण कार्य 99 प्रतिशत पूरा हो चुका है. 4. जोधपुर और उदयपुर हवाई अड्डों पर क्या विकास कार्य किए गए हैं? जोधपुर एयरपोर्ट पर 480 करोड़ रुपये की लागत से नया टर्मिनल बना है, जबकि उदयपुर एयरपोर्ट पर नए एकीकृत टर्मिनल का काम 88 प्रतिशत पूरा हो चुका है. 5. राम जल सेतु लिंक परियोजना से किन क्षेत्रों और लोगों को लाभ मिलेगा? इस परियोजना से 17 जिलों के 3 करोड़ से अधिक लोगों को पेयजल और करीब 4 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई की सुविधा मिलेगी. 6. जयपुर में यातायात दबाव कम करने के लिए किन प्रमुख परियोजनाओं पर काम होगा? जयपुर में 11,764 करोड़ रुपये की लागत से रिंग रोड (उत्तर) और 13,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से मेट्रो फेज-2 पर काम आगे बढ़ाया जाएगा. https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-men-buniyadi-dhanche-para-2-61-lakha-karora-ka-nivesha-refinery-se-lekara-metro-aura-airport-taka-badalega-svarupa-55355 TrendKia — Har trend, sabse pehle.