राजस्थान में चुनाव ड्यूटी के दौरान दिल का दौरा पड़ने से नगर परिषद कर्मचारी मोहन नकवाल की मौत दौसा पीजी कॉलेज में चुनाव कार्य में तैनात लालसोट नगर परिषद के कर्मचारी मोहन नकवाल को अचानक दिल का दौरा पड़ा, जिसके बाद जयपुर में इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। राजस्थान के दौसा में चुनावी व्यवस्थाओं के बीच तैनात एक सरकारी कर्मचारी की अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद जान चली गई। लालसोट नगर परिषद में तैनात कर्मचारी मोहन नकवाल चुनावी दायित्व निभा रहे थे, जब उन्हें अप्रत्याशित रूप से दिल का दौरा पड़ा। पहले स्थानीय स्तर पर और बाद में राजधानी जयपुर के अस्पताल में उन्हें बचाने की तमाम चिकित्सीय कोशिशें की गईं, लेकिन गंभीर स्थिति के चलते उन्हें बचाया नहीं जा सका। इस दुखद वाकये के बाद प्रशासनिक अमले और चुनावी ड्यूटी में जुटे अन्य कार्मिकों में शोक छा गया है। दौसा पीजी कॉलेज में तैनाती के दौरान बिगड़ी हालत प्राप्त जानकारी के अनुसार, मोहन नकवाल को चुनावी गतिविधियों के संचालन के सिलसिले में दौसा पीजी कॉलेज परिसर में नियुक्त किया गया था। वे कॉलेज केंद्र पर अपने निर्धारित आधिकारिक दायित्वों का निर्वहन कर रहे थे। अचानक उनकी शारीरिक स्थिति बिगड़ने लगी और वे अचेत होने लगे। स्थिति को भांपते हुए वहां उपस्थित अन्य प्रशासनिक सहकर्मियों और प्राथमिक चिकित्सा दल को यह समझते देर नहीं लगी कि उन्हें गंभीर दिल का दौरा पड़ा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मौके पर मौजूद लोगों ने बिना समय गंवाए प्राथमिक उपचार की प्रक्रिया शुरू कर दी। आपात स्थिति में उनकी दिल की धड़कन और सांसों को चालू रखने के उद्देश्य से तुरंत सीपीआर (CPR) देना शुरू किया गया। घटनास्थल पर हर एक पल बेहद कीमती था, इसलिए एम्बुलेंस और वाहन में भी सीपीआर की प्रक्रिया निरंतर जारी रखते हुए उन्हें तुरंत दौसा जिला अस्पताल ले जाया गया। दौसा जिला अस्पताल में आपातकालीन प्रयास और जयपुर रेफर दौसा जिला अस्पताल पहुंचते ही आपातकालीन कक्ष के चिकित्सकों की टीम ने मोहन नकवाल की स्थिति को स्थिर करने के लिए गहन उपचार शुरू किया। डॉक्टरों के अथक प्रयासों से उनके शरीर में सांसों की गतिविधि फिर से शुरू होने के सकारात्मक संकेत मिले। डॉक्टरों ने स्थिति की गंभीरता और हृदय संबंधी जटिलताओं को देखते हुए यह उचित समझा कि उन्हें तुरंत उच्च स्तरीय मेडिकल सेंटर भेजा जाए। स्थानीय अस्पताल में प्राथमिक स्थिरता मिलने के बाद उन्हें बेहतर और विशेष उपचार के लिए दौसा से जयपुर रेफर कर दिया गया। जब उन्हें जयपुर भेजा गया, तब उनके परिजन, साथी कर्मचारी और परिचित उनके स्वस्थ होने की उम्मीद संजोए हुए थे। हालांकि, जयपुर के अस्पताल में विशेषज्ञों की टीम द्वारा किए गए तमाम प्रयासों के बावजूद उनकी हालत में स्थायी सुधार नहीं हो सका और उपचार के दौरान ही उन्होंने दम तोड़ दिया। इस सूचना से उनके परिवार और लालसोट नगर परिषद के पूरे स्टाफ में गहरा सदमा पहुंचा है। लालसोट नगर परिषद में सेवाएं दे रहे थे मोहन नकवाल मोहन नकवाल मूल रूप से लालसोट नगर परिषद में प्रशासनिक कार्मिक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। जब प्रशासनिक स्तर पर चुनाव की जिम्मेदारियां बांटी गईं, तब उनका चयन दौसा पीजी कॉलेज में आयोजित होने वाले निर्वाचन कार्यों के लिए किया गया था। वे पूरी निष्ठा से अपने कार्यस्थल पर पहुंचे थे, लेकिन अचानक आए कार्डियक अरेस्ट ने उनकी जिंदगी छीन ली। समय रहते कॉलेज से अस्पताल ले जाने, रास्ते में लगातार सीपीआर देने और दौसा में डॉक्टरों द्वारा किए गए सभी आपातकालीन उपायों के बाद भी यह दुखद अंत नहीं टाला जा सका। निर्वाचन ड्यूटी और सरकारी कर्मचारियों की सेहत का सवाल लोकतांत्रिक प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए बड़े पैमाने पर सरकारी विभागों, नगर पालिकाओं और शिक्षण संस्थानों से कर्मचारियों की तैनाती की जाती है। निर्वाचन संबंधी जिम्मेदारियों के दौरान कार्मिकों को लगातार कई-कई घंटों तक बेहद दबाव और व्यस्त माहौल में काम करना पड़ता है। मोहन नकवाल के असामयिक निधन ने एक बार फिर चुनावी व्यस्तता के दौरान कर्मचारियों के स्वास्थ्य परीक्षण, तनाव प्रबंधन और कार्यस्थलों पर तत्काल उपलब्ध होने वाली आपातकालीन जीवनरक्षक व्यवस्थाओं की समीक्षा की आवश्यकता को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। इसका आप पर असर यह घटना सरकारी कर्मचारियों की चुनावी तैनाती के दौरान स्वास्थ्य निगरानी और जीवनरक्षक प्राथमिक उपचार की उपलब्धता के महत्व को रेखांकित करती है। • भारत में: चुनावी आयोजनों में भाग लेने वाले कार्मिकों के लिए त्वरित प्राथमिक चिकित्सा और सीपीआर प्रशिक्षण जैसी आपातकालीन सुविधाएं कार्यस्थल पर मौजूद रहना अनिवार्य है। चुनाव आयोग और प्रशासन को लंबी शिफ्टों के दौरान कर्मचारियों की सेहत सुनिश्चित करने के लिए विशेष चिकित्सा प्रोटोकॉल अपनाने होते हैं। • राजस्थान में: दौसा और आसपास के क्षेत्रों में तैनात सरकारी कर्मचारियों के बीच ऑन-ड्यूटी सुरक्षा और त्वरित रेफरल सुविधाओं को लेकर संवेदनशीलता बढ़ गई है। जिला प्रशासन द्वारा चुनावी केंद्रों पर एम्बुलेंस और आपातकालीन रिस्पॉन्स की तत्परता की समीक्षा की जा सकती है। • आपातकालीन सीपीआर: दिल का दौरा पड़ने की स्थिति में घटनास्थल पर मौजूद लोगों द्वारा तुरंत सीपीआर देना सांसें वापस लाने में मददगार साबित हो सकता है। आम नागरिकों और कर्मचारियों को सीपीआर का बुनियादी प्रशिक्षण होना किसी भी आपात स्थिति में जीवनरक्षक साबित होता है। • परिजनों के लिए प्रावधान: ड्यूटी के दौरान आकस्मिक निधन होने पर पीड़ित सरकारी कर्मचारी के आश्रितों को नियमानुसार मिलने वाली सहायता और राहत प्रक्रियाओं का पालन किया जाता है। संबंधित विभाग आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर आश्रितों को देय सहायता उपलब्ध कराता है। ऐसा क्यों हुआ दौसा में चुनाव कार्य के दौरान तैनात कर्मचारी मोहन नकवाल की तबीयत अचानक अत्यधिक बिगड़ गई, जिसके पीछे गंभीर हृदय गति रुकना मुख्य कारण रहा। • प्रत्यक्ष कारण: मोहन नकवाल को दौसा पीजी कॉलेज में चुनाव ड्यूटी के दौरान अचानक दिल का दौरा (हार्ट अटैक) पड़ा। कार्डियक अरेस्ट की गंभीरता के कारण उनका रक्तसंचार और श्वसन तंत्र गंभीर रूप से प्रभावित हुआ था। • चिकित्सीय प्रयास और रेफरल: घटनास्थल पर तुरंत सीपीआर दिए जाने और दौसा जिला अस्पताल में डॉक्टरों के प्रयासों से उनकी सांसें चलने लगी थीं। बेहतर और गहन हृदय चिकित्सा की जरूरत को देखते हुए उन्हें जयपुर रेफर किया गया, लेकिन जटिलताओं के कारण उन्हें बचाया नहीं जा सका। • कार्य का दबाव: चुनावी दायित्वों के संचालन के दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों पर कई घंटों तक लगातार काम करने का शारीरिक और मानसिक तनाव रहता है। ऐसे में पहले से मौजूद किसी अज्ञात स्वास्थ्य समस्या या अचानक बढ़े तनाव से स्थिति नाजुक बन सकती है। सवाल-जवाब 1. मोहन नकवाल कौन थे और वे कहां कार्यरत थे? मोहन नकवाल राजस्थान के लालसोट नगर परिषद में एक सरकारी कर्मचारी के रूप में कार्यरत थे। 2. घटना के समय मोहन नकवाल की ड्यूटी कहां लगी थी? उनकी चुनावी ड्यूटी दौसा स्थित पीजी कॉलेज में लगाई गई थी। 3. ड्यूटी के दौरान उन्हें क्या स्वास्थ्य समस्या हुई? ड्यूटी के दौरान उन्हें अचानक गंभीर दिल का दौरा (हार्ट अटैक) पड़ा था। 4. तबीयत बिगड़ने के तुरंत बाद क्या कदम उठाए गए? मौके पर मौजूद कर्मचारियों और चिकित्सा टीम ने उन्हें तुरंत सीपीआर दिया और सीपीआर देते हुए ही दौसा जिला अस्पताल पहुंचाया। 5. दौसा अस्पताल से उन्हें कहां रेफर किया गया था? दौसा जिला अस्पताल में सांसें चलने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर और गहन इलाज के लिए जयपुर रेफर किया था। 6. मोहन नकवाल का निधन कहां हुआ? जयपुर के अस्पताल में उपचार के दौरान मोहन नकवाल का निधन हो गया। https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-men-chunava-dyuti-ke-daurana-dila-ka-daura-parane-se-nagara-parishada-karmachari-mohan-nakwal-ki-mauta-55261 TrendKia — Har trend, sabse pehle.