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  "type": "article",
  "title": "राजस्थान में गांव की सरकार चुनने की उल्टी गिनती शुरू, राज्य निर्वाचन आयोग कल करेगा तारीखों का ऐलान",
  "summary": "नगरीय निकाय चुनावों के बाद राजस्थान में 2026 के त्रिस्तरीय पंचायती राज चुनावों का विस्तृत कार्यक्रम कल दोपहर तीन बजे घोषित किया जाएगा, जिसके तुरंत बाद ग्रामीण इलाकों में आचार संहिता लागू हो जाएगी।",
  "content": "शहरी निकायों में नई सरकारें गठित होने के बाद अब राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में सत्ता की कमान तय करने की प्रशासनिक तैयारियां मुकम्मल हो चुकी हैं। राज्य निर्वाचन आयोग पंचायती राज संस्थाओं के आम चुनाव 2026 की समय सारिणी कल सार्वजनिक करने जा रहा है। इसके लिए आयोग ने कल दोपहर ठीक 3 बजे पंचायती राज सभागार में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है, जिसमें मतदान की तारीखों, नामांकन की समय सीमा और चुनावी चरणों की पूरी रूपरेखा घोषित की जाएगी। इस घोषणा के सामने आते ही समूचे ग्रामीण राजस्थान में चुनावी आचार संहिता प्रभावी हो जाएगी, जिससे प्रशासनिक मशीनरी पूरी तरह चुनावी मोड में तब्दील हो जाएगी।\n\nकल दोपहर प्रेस कॉन्फ्रेंस और आचार संहिता के तात्कालिक नियम\nराज्य निर्वाचन आयोग की कल दोपहर 3 बजे आयोजित होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस पर समूचे प्रदेश की राजनीतिक और प्रशासनिक नजरें टिकी हुई हैं। चुनाव कार्यक्रम के अधिकृत ऐलान के क्षण से ही ग्रामीण क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता लागू मान ली जाएगी। इसके चलते ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादलों पर फौरी तौर पर पूर्ण पाबंदी लग जाएगी। प्रदेश में हाल ही में संपन्न हुए निकाय चुनावों के बाद अब राज्य सरकार के 'वन स्टेट, वन इलेक्शन' के विजन को अमलीजामा पहनाते हुए पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव संपन्न कराने की दिशा में यह सबसे बड़ा कदम है।\n\nकरीब 1.69 लाख जनप्रतिनिधियों का होगा चुनाव\nइस वृहद लोकतांत्रिक कवायद में पूरे प्रदेश के ग्रामीण अंचल से लगभग 1.69 लाख जनप्रतिनिधि चुने जाएंगे। यह भारी संख्या पंचायती राज व्यवस्था के तीनों स्तरों, यानी जिला परिषद, पंचायत समिति और ग्राम पंचायत को मिलाकर बनती है।\n\n• 1,403 जिला परिषद सदस्यों का निर्वाचन होगा।\n• 8,245 पंचायत समिति सदस्यों का चयन किया जाएगा।\n• 457 पंचायत समितियों में प्रधानों की ताजपोशी होगी।\n• 14,403 ग्राम पंचायतों में सरपंच, उप सरपंच और वार्ड पंचों का चुनाव संपन्न कराया जाएगा।\n• करीब 1.30 लाख वार्ड पंचों के पदों पर ग्रामीण मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे।\n\nत्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था की चयन प्रक्रिया\nग्रामीण स्तर पर जन प्रतिनिधियों के निर्वाचन की व्यवस्था अलग-अलग स्तरों पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष मतदान के जरिए पूरी की जाती है। सबसे शीर्ष स्तर पर ग्रामीण मतदाता जिला परिषद सदस्यों का चुनाव करेंगे, जिसके बाद ये निर्वाचित सदस्य आपस में मतदान करके जिला प्रमुख का चुनाव करेंगे। ठीक इसी तरह, ब्लॉक स्तर पर जनता पंचायत समिति सदस्यों को चुनेगी, और फिर ये चुने हुए सदस्य मिलकर अपने बीच से प्रधान का चुनाव करेंगे। सबसे बुनियादी स्तर पर, ग्राम पंचायत में सरपंच और वार्ड पंच सीधे मतदाताओं द्वारा चुने जाएंगे। इसके पश्चात वार्ड पंच मिलकर उप सरपंच के चयन की प्रक्रिया में भाग लेंगे और उप सरपंच चुनेंगे।\n\nचार चरणों में चुनाव संपन्न कराने की संभावना\nभौगोलिक दृष्टि से विशाल राज्य होने के कारण राजस्थान में इतने बड़े पैमाने पर चुनाव कराना प्रशासनिक और सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ी चुनौती है। माना जा रहा है कि राज्य निर्वाचन आयोग समूची चुनावी प्रक्रिया को लगभग चार अलग-अलग चरणों में विभाजित कर सकता है। हालांकि, चरणों की वास्तविक संख्या, किस चरण में कौन से जिले अथवा ब्लॉक शामिल होंगे, और मतदान का विस्तृत कैलेंडर क्या रहेगा, यह सारी स्थिति आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस में ही स्पष्ट होगी। एक साथ पूरे राज्य में इतने बड़े स्तर पर शांतिपूर्ण मतदान संपन्न कराने के लिए पुलिस और स्थानीय प्रशासन को चाक-चौबंद सुरक्षा बंदोबस्त करने होंगे।\n\nमतदान प्रक्रिया में तकनीक और परंपरा का संगम\nइस बार पंचायती राज चुनावों में मतदान के तरीकों को लेकर एक दिलचस्प और महत्वपूर्ण व्यवस्था तय की गई है। एक ही चुनाव प्रक्रिया के दौरान अलग-अलग पदों के लिए वोटिंग के माध्यम अलग-अलग होंगे।\n\n• ग्राम पंचायत स्तर पर सरपंच पद के लिए मतदान बैलेट पेपर यानी मतपत्र के जरिए कराया जाएगा।\n• वार्ड पंच पद के प्रत्याशी का फैसला भी मतदाताओं द्वारा बैलेट पेपर पर मुहर लगाकर ही किया जाएगा।\n• पंचायत समिति सदस्य के चुनाव में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी EVM का उपयोग किया जाएगा।\n• जिला परिषद सदस्य के महत्वपूर्ण पद के लिए भी मतदान EVM मशीनों के जरिए ही कराया जाएगा।\n\nइस दोहरी व्यवस्था से जहां निचले स्तर पर पारंपरिक मतपत्र प्रणाली काम करेगी, वहीं समिति और परिषद स्तर पर आधुनिक EVM का उपयोग होगा।\n\nगांव की सरकार में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण\nमहिला सशक्तिकरण की दिशा में राजस्थान के पंचायती राज चुनावों में महिलाओं की आधी आबादी को सीधा 50 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है। अलग-अलग स्तरों पर तय किए गए आरक्षण के आंकड़े इस प्रकार हैं\n\n• प्रदेश के कुल 41 जिला प्रमुखों में से 20 पद महिलाओं के लिए आरक्षित रहेंगे।\n• कुल 457 पंचायत समितियों में से 221 पदों पर महिला प्रधान चुनी जाएंगी।\n• 14,403 ग्राम पंचायतों में करीब 7,200 महिला सरपंच पदभार संभालेंगी।\n• 1,30,584 वार्ड पंचों के कुल पदों में से लगभग 65 हजार पदों पर महिलाओं की जीत सुनिश्चित होगी।\n\nइन संवैधानिक प्रावधानों के चलते हजारों की तादाद में महिलाएं प्रत्यक्ष रूप से गांव की सरकार चलाती नजर आएंगी।\n\nत्योहारी सीजन और रबी बुवाई के बीच व्यस्त ग्रामीण अंचल\nइस दफा पंचायती राज चुनावों का आयोजन बेहद व्यस्त मौसम में हो रहा है। एक तरफ प्रदेश में नवरात्र से लेकर दशहरा और उसके तुरंत बाद दीपावली जैसे बड़े त्योहारों का उल्लास रहेगा, तो दूसरी तरफ इसी समयावधि में ग्रामीण इलाकों में किसानों के लिए रबी फसलों की बुवाई का पीक सीजन शुरू हो जाता है। ऐसे माहौल में गांवों में चुनावी सरगर्मी, पूजा-पाठ का उल्लास और खेतों में दिन-रात की मेहनत एक साथ देखने को मिलेगी। उम्मीदवारों और आम ग्रामीणों दोनों के लिए आने वाले कुछ हफ्ते बेहद व्यस्त रहने वाले हैं।\n\n15 नवंबर तक प्रक्रिया पूरी करने की तय समय सीमा\nराज्य निर्वाचन आयोग ने पहले ही स्पष्ट कर रखा है कि हाईकोर्ट के निर्देशों का अक्षरशः पालन करते हुए 15 नवंबर से पहले समूची पंचायती राज चुनावी प्रक्रिया को संपन्न करा लिया जाएगा। कल विस्तृत कार्यक्रम के ऐलान के साथ ही यह साफ हो जाएगा कि मतदान का पहला चरण किस तारीख को होगा और मतगणना कब कराई जाएगी। आचार संहिता प्रभावी होते ही ग्रामीण विकास से जुड़ी नई घोषणाओं पर विराम लगेगा और राजनीतिक दलों के साथ-साथ सभी निर्दलीय प्रत्याशियों को भी तय नियमों की परिधि में रहकर ही चुनाव प्रचार करना होगा।\n\nइसका आप पर असर\nराजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में कल दोपहर से आदर्श आचार संहिता लागू होने जा रही है, जिसका सीधा प्रभाव स्थानीय विकास कार्यों, सरकारी कर्मचारियों और मतदाताओं पर पड़ेगा।\n\n• राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में: आचार संहिता लागू होते ही ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत सरकारी कर्मचारियों के तबादलों पर पूर्ण रोक लग जाएगी। पंचायत स्तर पर किसी भी नए सरकारी विकास कार्य या योजना की घोषणा पर पाबंदी रहेगी।\n• ग्रामीण मतदाताओं के लिए: गांव के नागरिकों को अपने गांव, ब्लॉक और जिले की सरकार चुनने के लिए मतदान का अवसर मिलेगा। यह चुनाव त्योहारी सीजन और रबी फसलों की बुवाई के बीच आयोजित होने से ग्रामीणों को अपनी खेती के साथ-साथ मतदान का समय भी व्यवस्थित करना होगा।\n• महिला प्रतिनिधियों के लिए: 50 प्रतिशत आरक्षण के चलते 7,200 महिला सरपंच और 65 हजार महिला वार्ड पंच चुनी जाएंगी। इससे ग्रामीण महिलाओं को स्थानीय शासन में सीधे भागीदारी और नीतिगत निर्णय लेने का अधिकार मिलेगा।\n• चुनावी उम्मीदवारों के लिए: प्रत्याशियों को चुनाव आयोग द्वारा तय किए गए आचार संहिता के नियमों और चुनावी खर्च की सीमाओं का कड़ाई से पालन करना होगा। नियमों का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई और उम्मीदवारी रद्द होने का जोखिम रहेगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nहाईकोर्ट के निर्देशों की अनुपालना और शहरी निकाय चुनावों के संपन्न होने के बाद ग्रामीण स्वशासन की संवैधानिक अनिवार्यता को पूरा करने के लिए यह चुनाव कार्यक्रम घोषित किया जा रहा है।\n\n• हाईकोर्ट का स्पष्ट निर्देश: राज्य निर्वाचन आयोग ने 15 नवंबर से पहले समूची चुनाव प्रक्रिया पूरी कराने का लक्ष्य रखा है। हाईकोर्ट के आदेशों की समयबद्ध पालना सुनिश्चित करने के लिए आयोग ने कल तारीखों का ऐलान करने का निर्णय लिया है।\n• निकाय चुनावों के बाद की निरंतरता: राज्य में शहरी निकायों के चुनाव पहले ही संपन्न कराए जा चुके हैं। 'वन स्टेट, वन इलेक्शन' की प्रशासनिक अवधारणा के तहत शहरी क्षेत्रों के तुरंत बाद अब ग्रामीण निकायों के चुनाव कराए जा रहे हैं।\n• संवैधानिक कार्यकाल की समाप्ति: पंचायती राज संस्थाओं में चुने गए प्रतिनिधियों का पांच वर्षीय कार्यकाल समाप्त होने पर नई ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों का गठन अनिवार्य होता है। इसी प्रशासनिक निरंतरता को बनाए रखने के लिए यह चुनाव तय समय पर आयोजित किए जा रहे हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. राज्य निर्वाचन आयोग पंचायत चुनाव का कार्यक्रम कब घोषित करेगा?\nराज्य निर्वाचन आयोग कल दोपहर 3 बजे पंचायती राज सभागार में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके चुनाव कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा करेगा।\n\n2. चुनाव कार्यक्रम घोषित होते ही क्या बदलाव होगा?\nकार्यक्रम जारी होते ही ग्रामीण क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता लागू हो जाएगी और सरकारी कर्मचारियों के तबादलों पर रोक लग जाएगी।\n\n3. राजस्थान में कुल कितने जनप्रतिनिधियों का चुनाव होना है?\nराज्य में जिला परिषद, पंचायत समिति और ग्राम पंचायत स्तर को मिलाकर करीब 1.69 लाख जनप्रतिनिधियों का चुनाव होगा।\n\n4. क्या सभी पदों के लिए मतदान EVM से होगा?\nनहीं, सरपंच और वार्ड पंच के चुनाव बैलेट पेपर से होंगे, जबकि पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्यों के चुनाव EVM से कराए जाएंगे।\n\n5. पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए कितने पद आरक्षित हैं?\nमहिलाओं के लिए 50 फीसदी पद आरक्षित हैं, जिनमें 20 जिला प्रमुख, 221 प्रधान और करीब 7,200 महिला सरपंच चुनी जाएंगी।\n\n6. पूरे चुनाव की प्रक्रिया कब तक पूरी कराई जानी है?\nहाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार निर्वाचन आयोग 15 नवंबर से पहले पूरी चुनाव प्रक्रिया संपन्न कराने की तैयारी में है।",
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  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-10-02",
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