राजस्थान में गरबा उत्सवों से पहले विश्व हिंदू परिषद की एंट्री, पंडालों में पहचान पत्र जांचने की मांग उठाई विश्व हिंदू परिषद ने जयपुर में प्रशासन से गरबा पंडालों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने और पहचान पत्र जांचने की अपील की है, जिससे त्योहार से पहले सुरक्षा व्यवस्था पर चर्चा तेज हो गई है। शारदीय नवरात्र की शुरुआत 11 अक्टूबर से होने जा रही है, और इसके साथ ही राजस्थान के शहरों तथा कस्बों में पारंपरिक डांडिया और गरबा उत्सवों की तैयारियां जोर पकड़ने लगी हैं। इसी बीच विश्व हिंदू परिषद ने जयपुर में गरबा पंडालों में प्रवेश नियमों को लेकर एक बड़ा मुद्दा उठा दिया है। संगठन के प्रांत अध्यक्ष सुभद्र पापड़ीवाल ने सार्वजनिक तौर पर मांग रखी है कि इन धार्मिक आयोजनों में गैर-हिंदुओं अथवा अन्य धर्मों के लोगों को प्रवेश न दिया जाए। उनका कहना है कि गरबा केवल नाच-गाने या मौज-मस्ती का साधन नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह से देवी दुर्गा की भक्ति और नवरात्र की पवित्र आस्था से जुड़ा एक धार्मिक अनुष्ठान है। इसलिए पंडालों के मुख्य द्वारों पर सख्त निगरानी और पहचान की प्रक्रिया अनिवार्य होनी चाहिए। प्रवेश द्वारों पर पहचान पत्रों की अनिवार्य जांच की मांग विश्व हिंदू परिषद के प्रांत अध्यक्ष सुभद्र पापड़ीवाल ने प्रशासनिक अमले से सहयोग की उम्मीद जताते हुए कहा कि आयोजन स्थलों पर आने वाले हर व्यक्ति के पहचान पत्र की गहन पड़ताल होनी चाहिए। उनके अनुसार प्रशासन को ऐसे व्यक्तियों को पंडालों के भीतर जाने से रोकना चाहिए जो दूसरे धर्मों से ताल्लुक रखते हैं। संगठन का मानना है कि यदि प्रवेश के समय ही आईडी कार्ड देखने का पुख्ता प्रबंध कर दिया जाए, तो गरबा आयोजकों को कार्यक्रम के दौरान या बाद में किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति या विवाद का सामना नहीं करना पड़ेगा। पापड़ीवाल ने साफ किया कि संगठन सरकारी तंत्र के साथ टकराव की स्थिति नहीं चाहता, बल्कि व्यवस्था को पारदर्शी और सुरक्षित बनाए रखने के लिए समय रहते सहयोग की उम्मीद करता है। उन्होंने आग्रह किया कि 11 अक्टूबर को नवरात्र पर्व शुरू होने से पहले ही स्थानीय प्रशासन को इस संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए। धार्मिक मान्यताओं और आस्था के अंतर पर उठाया सवाल अन्य धर्मों के व्यक्तियों के गरबा कार्यक्रमों में शामिल होने पर सवाल खड़े करते हुए सुभद्र पापड़ीवाल ने तर्क दिया कि संबंधित मजहब में किसी अन्य देवी-देवता की पूजा-अर्चना या भक्ति में विश्वास करना शिर्क के दायरे में आता है। ऐसे में जब उनकी अपनी धार्मिक मान्यताएं इसकी इजाजत नहीं देतीं, तो फिर उनका हिंदू देवी की आराधना वाले गरबा पंडालों में पहुंचना समझ से परे है। इसी आधार पर विश्व हिंदू परिषद का रुख है कि उत्सव में सम्मिलित होने वाले प्रत्येक श्रद्धालु या दर्शक की धार्मिक पहचान पूरी तरह स्पष्ट होनी चाहिए। संगठन ने गरबा समितियों और आयोजकों से भी सचेत रहने की अपील की है, ताकि वे प्रशासनिक अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर प्रवेश बिंदुओं पर सुचारु जांच प्रणाली तैयार कर सकें। यह विवाद सिर्फ राजस्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के कई अन्य राज्यों में भी पहले से गरबा आयोजनों के दौरान पहचान पत्रों की जांच और गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर व्यापक चर्चाएं होती रही हैं। उदाहरण के तौर पर महाराष्ट्र में भी इस वर्ष गरबा उत्सवों से पूर्व विश्व हिंदू परिषद की ओर से ठीक इसी प्रकार पहचान पत्रों की जांच और गैर-हिंदुओं के दाखिले पर रोक लगाने की मांग सामने रखी जा चुकी है। कानून हाथ में न लेने का आश्वासन और प्रशासन को चेतावनी सुभद्र पापड़ीवाल ने इस बात पर विशेष बल दिया कि विश्व हिंदू परिषद का इरादा किसी भी सूरत में कानून को अपने हाथ में लेने का नहीं है। उन्होंने कहा कि शांति व्यवस्था या कानून-व्यवस्था को बिगाड़ना संगठन का उद्देश्य बिल्कुल नहीं है। इसके बावजूद उन्होंने जिला प्रशासन को आगाह करते हुए कहा कि यदि संदिग्ध या गैर-धार्मिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को पंडालों में आने से नहीं रोका गया और बाद में कोई सामाजिक तनाव या असंतोष पैदा हुआ, तो उसकी पूरी जवाबदेही स्थानीय प्रशासन की होगी। इस प्रकार विश्व हिंदू परिषद ने एक ओर जहां व्यवस्था में सहयोग का प्रस्ताव रखा है, वहीं दूसरी ओर अपनी मांगों को लेकर कड़ा रुख भी स्पष्ट कर दिया है। संगठन की अपेक्षा है कि नवरात्र के दौरान किसी भी टकराव या विवाद की नौबत आने से पहले ही संबंधित विभाग आवश्यक सुरक्षात्मक कदम उठा लें। 11 अक्टूबर से सजेंगे पंडाल और सुरक्षा का व्यापक खाका इस वर्ष शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से शुरू हो रहे हैं, जिसके बाद पूरे राजस्थान भर में बड़े पैमाने पर डांडिया और गरबा पंडाल सजेंगे। राज्य के प्रमुख शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक कई भव्य पंडाल तैयार किए जाते हैं, जहां हर रात हजारों की संख्या में लोग परिवार सहित पहुंचते हैं। भारी भीड़ जुटने की संभावना को देखते हुए आगामी दिनों में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के लिए सुरक्षा का प्रबंधन सबसे बड़ी प्राथमिकता रहेगा। विभिन्न इलाकों में आयोजकों और स्थानीय अधिकारियों की बैठकों के जरिए प्रवेश नियंत्रण, पहचान जांच, पार्किंग व्यवस्था, महिला सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश तय किए जा सकते हैं। विश्व हिंदू परिषद की ओर से उठाए गए इस कदम के बाद अब सबकी नजरें जिला प्रशासन और राजस्थान पुलिस के रुख पर टिकी हैं कि वे गरबा आयोजनों में प्रवेश नियमों को लेकर क्या रणनीति अपनाते हैं। इसका आप पर असर गरबा उत्सवों में प्रवेश को लेकर विश्व हिंदू परिषद की इस मांग के बाद आयोजकों और आगंतुकों के लिए उत्सव परिसरों में प्रवेश के नियम काफी कड़े हो सकते हैं। • भारत में: देश भर के विभिन्न राज्यों में गरबा आयोजनों के दौरान प्रवेश द्वारों पर सुरक्षा जांच और पहचान पत्र दिखाने की प्रक्रिया सख्त की जा सकती है। इसके चलते गरबा पंडालों में जाने वाले आम नागरिकों को अपनी वैध सरकारी आईडी साथ ले जाने की सलाह दी जा सकती है ताकि प्रवेश में देरी न हो। • जयपुर और राजस्थान में: जयपुर सहित राजस्थान के शहरों में गरबा आयोजक और पुलिस प्रशासन पंडालों के बाहर अतिरिक्त सुरक्षा गार्ड और बैरिकेडिंग लगा सकते हैं। आगंतुकों को पंडालों के बाहर लंबी कतारों और कड़ी चेकिंग का सामना करना पड़ सकता है, इसलिए लोगों को समय से पहले पहुंचना होगा। • आयोजकों पर प्रभाव: राजस्थान में डांडिया और गरबा नाइट आयोजित करने वाली निजी और सामाजिक समितियों को अब स्थानीय प्रशासन से स्पष्ट अनुमति लेनी पड़ सकती है। उन्हें टिकट बिक्री और गेट मैनेजमेंट के दौरान पहचान पत्रों के सत्यापन के लिए अलग से स्टाफ तैनात करना पड़ सकता है। • कानून व्यवस्था की स्थिति: त्योहारों के दौरान किसी भी संभावित विवाद या कहासुनी से बचने के लिए संवेदनशील इलाकों के गरबा स्थलों पर पुलिस गश्त बढ़ाई जा सकती है। प्रशासन द्वारा पंडालों के लिए अलग से एडवाइजरी जारी होने की संभावना है जिसका पालन सभी नागरिकों को करना होगा। ऐसा क्यों हुआ शारदीय नवरात्र से पहले गरबा पंडालों में केवल श्रद्धालुओं को प्रवेश देने और आयोजनों की धार्मिक पवित्रता बनाए रखने के तर्क के साथ यह मांग उठाई गई है। • धार्मिक स्वरूप की दलील: विश्व हिंदू परिषद का कहना है कि गरबा और डांडिया कोई साधारण सांस्कृतिक मनोरंजन नहीं बल्कि मां दुर्गा की आराधना का पवित्र धार्मिक उत्सव है। संगठन का तर्क है कि जिन समुदायों की धार्मिक आस्था में मूर्ति पूजा या अन्य देवी-देवताओं की उपासना को वर्जित माना जाता है, उनका इस अनुष्ठान में आना तार्किक नहीं है। • पूर्व विवादों और अन्य राज्यों का संदर्भ: हाल के वर्षों में देश के कई राज्यों, विशेष रूप से महाराष्ट्र और अन्य इलाकों में गरबा उत्सवों के दौरान पहचान जांच और गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर तीखी बहसें और तनाव की घटनाएं देखी गई हैं। इसी पृष्ठभूमि में संगठन चाहता है कि राजस्थान में किसी भी विवाद से पहले ही नियम तय कर दिए जाएं। • विवादों की आशंका और जिम्मेदारी: संगठन का मानना है कि यदि बिना जांच के सभी को प्रवेश दिया गया तो बाद में सामाजिक असंतोष की स्थिति बन सकती है। इसी संभावित तनाव से बचने के लिए प्रशासन से पहले से ही प्रवेश नियमों को लेकर सख्त व्यवस्था करने का आग्रह किया गया है। सवाल-जवाब 1. जयपुर में विश्व हिंदू परिषद ने गरबा पंडालों को लेकर क्या मांग रखी है? संगठन ने मांग की है कि गरबा पंडालों में गैर-हिंदुओं का प्रवेश रोका जाए और आने वाले सभी लोगों के पहचान पत्र अनिवार्य रूप से जांचे जाएं। 2. विश्व हिंदू परिषद के अनुसार गरबा आयोजन का मूल उद्देश्य क्या है? विहिप का कहना है कि गरबा केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह शारदीय नवरात्र के दौरान देवी दुर्गा की भक्ति और धार्मिक आस्था से जुड़ा उत्सव है। 3. इस वर्ष शारदीय नवरात्र किस तारीख से शुरू हो रहे हैं? इस वर्ष शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से शुरू होने जा रहे हैं, जिसके साथ ही राजस्थान भर में डांडिया और गरबा कार्यक्रम शुरू होंगे। 4. पहचान पत्र जांच की मांग को लेकर विश्व हिंदू परिषद ने किस अन्य राज्य का उदाहरण दिया है? संगठन ने महाराष्ट्र का उल्लेख किया है, जहां इस साल गरबा उत्सवों से पहले पहचान पत्र जांचने और गैर-हिंदुओं के प्रवेश को सीमित करने की मांग उठाई गई थी। 5. यदि प्रशासन ने यह मांग नहीं मानी तो विहिप का क्या रुख है? विहिप ने स्पष्ट किया है कि वह कानून हाथ में नहीं लेगी, लेकिन यदि बाद में कोई सामाजिक तनाव उत्पन्न होता है तो उसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-men-garaba-utsavon-se-pahale-vishva-hindu-parishad-ki-entri-pndalon-men-pahachana-patra-janchane-ki-manga-uthai-44105 TrendKia — Har trend, sabse pehle.