# राजस्थान में घूसखोर ईपीएफओ अफसर पर शिकंजा, जयपुर में 1 लाख रुपये लेते पकड़ा गया सोनू मौर्य

> जयपुर में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के प्रवर्तन अधिकारी सोनू मौर्य को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने फर्म पर कार्रवाई न करने की एवज में रिश्वत की पहली किस्त लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-11-04 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-men-ghusakhora-epfo-aphasara-para-shiknja-jaipur-men-1-lakha-rupaye-lete-pakara-gaya-sonu-maurya-56517 · **Language:** Hindi
**Tags:** जयपुर, एसीबी, ईपीएफओ, सोनू मौर्य, रिश्वत, भ्रष्टाचार, ओमप्रकाश मीणा

राजस्थान की राजधानी जयपुर में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा कदम उठाते हुए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के एक प्रवर्तन अधिकारी को रंगे हाथों पकड़ लिया है। पकड़े गए अधिकारी की पहचान सोनू मौर्य के रूप में हुई है, जो एक निजी फर्म पर विधिक कार्रवाई दबाने के नाम पर मोटी रकम वसूलने की कोशिश कर रहा था। इस औचक कार्रवाई से भविष्य निधि कार्यालय सहित समूचे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।

## फर्म के खाते फ्रीज करने और कानूनी कार्रवाई की धमकी
जांच एजेंसी से सामने आए विवरण के मुताबिक परिवादी की निजी फर्म अपने कर्मचारियों का कर्मचारी भविष्य निधि (पीएफ) समय पर जमा नहीं करवा पाई थी। इसी चूक को आधार बनाकर प्रवर्तन अधिकारी सोनू मौर्य ने फर्म संचालक को कानूनी फंदे में फंसाने का डर दिखाया। उसने फर्म के विरुद्ध पुलिस में प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज कराने और कंपनी के बैंक खातों को पूरी तरह फ्रीज करवाने की चेतावनी दी थी। इस दंडात्मक कार्रवाई से राहत देने का झांसा देकर आरोपी अधिकारी ने सीधे 2 लाख रुपये की अवैध मांग रखी थी।

## सत्यापन के बाद बिछाया गया योजनाबद्ध ट्रैप
अवैध मांग और लगातार मिल रहे दबाव से त्रस्त होकर परिवादी ने पूरे मामले की औपचारिक शिकायत भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के समक्ष पेश की। एसीबी ने शिकायत का संज्ञान लेते हुए गोपनीय तरीके से लगाए गए आरोपों का सत्यापन करवाया। सत्यापन के दौरान परिवादी से रिश्वत मांगने की पुष्टि हो गई, जिसके बाद आरोपी को पकड़ने के लिए एक विशेष योजना तैयार की गई और ट्रैप टीम मैदान में उतारी गई।

## सीए की मौजूदगी में पहली किस्त लेते ही दबिश
तय योजना के अनुसार परिवादी की फर्म के सीए की उपस्थिति में सह-परिवादी से रिश्वत की पहली किस्त के रूप में 1 लाख रुपये का लेन-देन होना तय हुआ था। जैसे ही आरोपी सोनू मौर्य ने 1 लाख रुपये की यह रकम अपने हाथ में ली, पहले से तैयार एसीबी की टीम ने फौरन दबिश देकर उसे मौके पर ही दबोच लिया। टीम ने उसके कब्जे से रिश्वत की पूरी राशि यानी 1 लाख रुपये बरामद कर लिए। इस पूरी कार्रवाई को एसीबी के डीआईजी ओमप्रकाश मीणा के कुशल नेतृत्व में गठित टीम ने सफलतापूर्वक पूरा किया।

## आवासीय ठिकानों पर तलाशी और अन्य कड़ियों की पड़ताल
गिरफ्तारी के उपरांत एसीबी ने सोनू मौर्य को हिरासत में लेकर विस्तृत पूछताछ शुरू कर दी है। जांच दल इस पहलू की गहराई से पड़ताल कर रहा है कि क्या इस रिश्वतखोरी में ईपीएफओ विभाग के अन्य अधिकारी, कर्मचारी अथवा कोई बाहरी बिचौलिए भी शामिल थे। इसके साथ ही आरोपी के आवास तथा अन्य संभावित ठिकानों पर तलाशी अभियान भी संचालित किया जा रहा है, ताकि आय से अधिक संपत्ति अथवा अन्य अनियमितताओं से जुड़े साक्ष्य जुटाए जा सकें। इस धरपकड़ के बाद भ्रष्ट आचरण में लिप्त तंत्र के भीतर भय का माहौल देखा जा रहा है।

## इसका आप पर असर
यह कार्रवाई दर्शाती है कि सरकारी विभागों द्वारा डरा-धमकाकर की जाने वाली अवैध वसूली के खिलाफ जांच एजेंसियां तुरंत संज्ञान लेती हैं।

- **भारत में:** देश भर के उद्यमियों और कंपनियों के लिए यह स्पष्ट संदेश है कि वैधानिक बकाए के नाम पर रिश्वत मांगने वाले अधिकारियों की शिकायत तुरंत भ्रष्टाचार निरोधक हेल्पलाइन पर की जानी चाहिए। शिकायत दर्ज कराने पर प्रवर्तन एजेंसियों की ओर से त्वरित जाल बिछाकर भ्रष्ट अधिकारियों को पकड़ा जा सकता है।
- **राजस्थान में:** जयपुर सहित राज्य के व्यापारियों और प्रतिष्ठानों को नियामक अनुपालन में देरी होने पर किसी भी अधिकारी की अनौपचारिक धमकियों से डरने की जरूरत नहीं है। ऐसे मामलों में सीधे विधिक प्रक्रिया का पालन करना चाहिए और रिश्वत की मांग पर एसीबी को सूचित करना चाहिए।
- **कर्मचारियों के लिए:** निजी कंपनियों के कर्मचारियों को समय पर पीएफ जमा होने की स्थिति पर नजर रखनी चाहिए ताकि कानूनी पेच न फंसे। किसी भी अनियमितता की स्थिति में आधिकारिक शिकायत पोर्टल का सहारा लिया जा सकता है।
- **प्रशासनिक जवाबदेही:** ईपीएफओ जैसे संवेदनशील नियामक विभागों में कार्यरत अधिकारियों के आचरण पर निगरानी तेज होगी। आम नागरिक बिना बिचौलियों के सीधे कार्यालयीन नियमों के तहत अपने मामलों का निस्तारण करवा सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
यह गिरफ्तारी तब हुई जब एक अधिकारी ने फर्म द्वारा कर्मचारियों का भविष्य निधि अंशदान समय पर जमा न करने की चूक का अनुचित लाभ उठाने का प्रयास किया।

- **सीधा कारण:** पीड़ित फर्म द्वारा कर्मचारियों का पीएफ समय पर जमा नहीं कराया गया था, जिसके चलते कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर अधिकारी ने 2 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। इसी की पहली किस्त के रूप में 1 लाख रुपये लेते हुए वह पकड़ा गया।
- **दबाव बनाने का तरीका:** आरोपी अधिकारी ने फर्म प्रबंधन को एफआईआर दर्ज कराने और बैंक खाते पूरी तरह फ्रीज कराने की धमकी दी थी, जिससे व्यापार ठप होने की आशंका पैदा हो गई थी।
- **शिकायत की पुष्टि:** पीड़ित पक्ष ने भयभीत होने के बजाय एसीबी में गुहार लगाई, जहां अधिकारियों ने ट्रैप से पूर्व आरोपों का गोपनीय सत्यापन कर मामले को पुख्ता किया।
- **आगे की दिशा:** गिरफ्तारी के बाद अब एजेंसी आरोपी के ठिकानों पर तलाशी ले रही है और यह जांच रही है कि क्या विभाग के अन्य सदस्य अथवा बिचौलिए भी इस रैकेट का हिस्सा थे।

## सवाल-जवाब

### 1. जयपुर में एसीबी ने किस अधिकारी को गिरफ्तार किया है?
एसीबी ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के प्रवर्तन अधिकारी सोनू मौर्य को गिरफ्तार किया है।

### 2. आरोपी अधिकारी पर रिश्वत मांगने का क्या आरोप था?
आरोपी ने एक निजी फर्म के खिलाफ एफआईआर दर्ज न करने और बैंक खाते फ्रीज न करने के एवज में 2 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी।

### 3. कार्रवाई के समय आरोपी से कितनी राशि बरामद हुई?
ट्रैप के दौरान एसीबी ने आरोपी अधिकारी को रिश्वत की पहली किस्त के रूप में 1 लाख रुपये लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा और पूरी राशि बरामद की।

### 4. यह कार्रवाई किस अधिकारी के नेतृत्व में संपन्न हुई?
यह कार्रवाई एसीबी के डीआईजी ओमप्रकाश मीणा के कुशल नेतृत्व में गठित टीम द्वारा की गई।

### 5. गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी अब क्या कदम उठा रही है?
एसीबी आरोपी से पूछताछ कर रही है, उसके आवासीय ठिकानों की तलाशी ले रही है और विभाग के अन्य व्यक्तियों या बिचौलियों की भूमिका की जांच कर रही है।

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