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  "type": "article",
  "title": "राजस्थान में ग्राम पंचायत चुनाव की बिसात बिछी, चार आदिवासी जिलों में सारे पद एसटी के नाम",
  "summary": "राजस्थान पंचायत चुनाव 2026 में परिसीमन और आरक्षण निर्धारण के बाद चार जिलों में पंच और सरपंच के सभी पद एसटी वर्ग के खाते में चले गए हैं, जबकि 7,200 पंचायतों का नेतृत्व महिलाएं करेंगी।",
  "content": "राजस्थान के ग्रामीण अंचलों में वर्ष 2026 के पंचायत चुनावों की तैयारी अब अपने निर्णायक मोड़ पर आ चुकी है। राज्य भर में ग्राम पंचायतों के आरक्षण निर्धारण की लॉटरी का काम संपन्न होते ही स्थानीय राजनीति की तस्वीर बिल्कुल बदल गई है। नए परिसीमन और जातिगत आरक्षण के लागू होने से ग्रामीण सत्ता के पुराने समीकरण पूरी तरह ध्वस्त हो गए हैं। इस चुनाव का सबसे अभूतपूर्व प्रभाव दक्षिणी राजस्थान के आदिवासी इलाकों में नजर आ रहा है, जहाँ चार प्रमुख जिलों में सामान्य और अन्य वर्गों के लिए सरपंच अथवा वार्ड पंच पद की कोई गुंजाइश नहीं बची है।\n\nचार जिलों में शत-प्रतिशत पद अनुसूचित जनजाति के लिए तय\nनए प्रशासनिक नक्शे और नियमों के तहत प्रदेश के चार आदिवासी बहुल जिलों बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और सलूंबर में स्थानीय सत्ता पूरी तरह अनुसूचित जनजाति यानी एसटी वर्ग के प्रतिनिधियों के हाथ में रहेगी। इन चारों जिलों की प्रत्येक ग्राम पंचायत में सरपंच और सभी वार्ड पंचों के पद शत-प्रतिशत एसटी वर्ग के लिए ही आरक्षित किए गए हैं। इस निर्णय के चलते इन जिलों के चुनावी दंगल में सभी राजनीतिक दलों और स्थानीय गुटों को केवल इसी वर्ग के उम्मीदवारों के बीच से अपने चेहरे चुनने होंगे, जिससे यहाँ का शक्ति संतुलन पूरी तरह नए ढांचे में ढल चुका है।\n\nमहिला नेतृत्व की अभूतपूर्व भागीदारी\nनया परिसीमन लागू होने के बाद राजस्थान में ग्राम पंचायतों का कुल दायरा बढ़कर 14,403 तक पहुंच गया है। पंचायती राज कानून के तहत महिलाओं को मिलने वाले 50 प्रतिशत आरक्षण के चलते इस बार करीब 7,200 ग्राम पंचायतों की बागडोर महिला सरपंच संभालेंगी। पिछले चुनावों में 5,670 महिला सरपंच जीतकर आई थीं, जिसके मुकाबले इस बार महिला मुखियाओं की संख्या में 1,500 से अधिक का इजाफा हुआ है। इसी तरह वार्ड स्तर पर भी महिला प्रतिनिधित्व में बड़ा उछाल देखा जा रहा है। प्रदेश में करीब 65 हजार महिलाएं वार्ड पंच चुनकर पंचायत सदनों में बैठेंगी, जबकि पिछले कार्यकाल में यह संख्या लगभग 54 हजार तक ही सीमित थी।\n\nसरपंच पदों का जातिवार आरक्षण ब्योरा\nराज्य निर्वाचन आयोग और पंचायती राज विभाग की ओर से जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक कुल 14,403 सरपंच पदों का वर्गीकरण पूरा हो चुका है। कुल पदों में से अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग के लिए 3,058 ग्राम पंचायतें आरक्षित की गई हैं। अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग के हिस्से में 2,493 सरपंच पद आए हैं। इसके अलावा अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए 1,961 पदों का कोटा निर्धारित किया गया है। शेष सामान्य श्रेणी सहित सभी आरक्षित श्रेणियों में महिलाओं के लिए निर्धारित 50 फीसदी हिस्सेदारी को पूरी कड़ाई से लागू किया गया है।\n\nवार्ड पंचों का गणित और घड़साना में विरोध\nग्राम पंचायतों के वार्डों के स्तर पर लगभग 1.30 लाख पंच पदों के लिए आरक्षण लॉटरी निकाली गई है। वार्ड पंचों में एससी वर्ग के लिए 21,962 वार्ड, एसटी वर्ग के लिए 19,117 वार्ड तथा ओबीसी वर्ग के लिए तकरीबन 15 हजार वार्ड तय किए गए हैं। इस लॉटरी प्रक्रिया के दौरान श्रीगंगानगर जिले के घड़साना क्षेत्र में किसानों ने कड़ा ऐतराज जताया और विरोध प्रदर्शन किया, जिसकी वजह से कुछ देर के लिए आरक्षण निर्धारण का काम रोकना पड़ गया था। हालांकि बाद में प्रशासनिक अधिकारियों की समझाइश और बातचीत के बाद प्रक्रिया को शांतिपूर्ण ढंग से पूरा करा लिया गया।\n\n15 नवंबर तक पूरी होगी निर्वाचन प्रक्रिया\nहाई कोर्ट के कड़े दिशा-निर्देशों के मद्देनजर राज्य में पंचायत चुनाव का पूरा कार्यक्रम 15 नवंबर तक संपन्न कराया जाना अनिवार्य है। शनिवार या सोमवार तक पंचायत समिति सदस्यों, जिला परिषद सदस्यों, वार्ड पंचों और सरपंचों के आरक्षण का अंतिम विवरण राज्य निर्वाचन आयोग को सौंप दिया जाएगा। इस ब्योरे की समीक्षा के एक से दो दिन बाद निर्वाचन आयोग विधिवत चुनावी तिथियों की घोषणा कर देगा। माना जा रहा है कि नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया अक्टूबर के पहले हफ्ते से शुरू कर दी जाएगी।\n\nइसका आप पर असर\nइस चुनाव व्यवस्था से राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में सामाजिक प्रतिनिधित्व और ग्राम विकास की प्राथमिकताओं में बड़ा बदलाव आएगा।\n\n• राजस्थान में: कुल 14,403 में से करीब 7,200 ग्राम पंचायतों में महिलाएं मुखिया बनेंगी, जिससे ग्रामीण स्तर पर महिला नेतृत्व मजबूत होगा। ग्राम स्तर की सरकारी योजनाओं, फंड आवंटन और बुनियादी विकास के फैसलों में महिला जनप्रतिनिधियों की सीधी भागीदारी रहेगी।\n• आदिवासी जिलों में: बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और सलूंबर में केवल एसटी वर्ग के उम्मीदवार ही चुनाव लड़ सकेंगे। इन जिलों में अन्य वर्गों के दावेदारों को स्थानीय सत्ता की चुनावी दौड़ से पूरी तरह बाहर रहना होगा।\n• उम्मीदवारों के लिए: आरक्षण लॉटरी पूरी होने से गांवों में संभावित प्रत्याशियों को अपनी चुनावी रणनीति तुरंत बदलनी होगी। कई वर्तमान जनप्रतिनिधि अपनी सीट आरक्षित हो जाने के कारण इस बार मैदान से बाहर हो गए हैं।\n• मतदाताओं के लिए: चुनाव की पूरी प्रक्रिया 15 नवंबर तक संपन्न होनी है और नामांकन अक्टूबर के पहले हफ्ते से शुरू होने की संभावना है। ग्रामीणों को अपने-अपने वार्ड और ग्राम पंचायत के नए आरक्षण रोस्टर के अनुसार नए चेहरों को चुनना होगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nराजस्थान के पंचायत चुनाव ढांचे में आए इस व्यापक बदलाव की मुख्य वजहें नया परिसीमन, न्यायिक आदेश और संवैधानिक आरक्षण के नियम हैं।\n\n• परिसीमन का प्रभाव: राज्य में नई ग्राम पंचायतों के गठन और सीमाओं के पुनर्गठन से पंचायतों की संख्या बढ़कर 14,403 हो गई। इसके चलते सभी श्रेणियों के लिए नए सिरे से पदों की गणना और लॉटरी निकालनी पड़ी।\n• आदिवासी आबादी का अनुपात: बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और सलूंबर जैसे अधिसूचित आदिवासी क्षेत्रों में जनसंख्या संरचना के नियमों के तहत सभी पदों को शत-प्रतिशत एसटी वर्ग के लिए आरक्षित किया गया। इस प्रावधान ने इन चार जिलों की सभी ग्रामीण सीटों को पूरी तरह आरक्षित श्रेणी में बदल दिया।\n• अदालती समयसीमा: हाई कोर्ट ने पंचायत चुनाव की प्रक्रिया को समय पर संपन्न कराने के कड़े आदेश दिए हैं। इसी कानूनी बाध्यता के कारण 15 नवंबर तक पूरी चुनाव प्रक्रिया को संपन्न कराने की अंतिम रूपरेखा तैयार की गई है।\n• महिला कोटा का सख्ती से पालन: पंचायती राज कानून के 50 प्रतिशत महिला आरक्षण नियम को हर वर्ग में अनिवार्य रूप से लागू किया गया। इसके परिणामस्वरूप महिला सरपंचों की संख्या पिछली बार के 5,670 से बढ़कर करीब 7,200 तक पहुंच गई।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. राजस्थान में परिसीमन के बाद ग्राम पंचायतों की कुल संख्या कितनी हो गई है?\nनए परिसीमन के बाद राज्य में कुल ग्राम पंचायतों की संख्या बढ़कर 14,403 हो गई है।\n\n2. किन जिलों में सरपंच और वार्ड पंच के सभी पद एसटी वर्ग के लिए आरक्षित किए गए हैं?\nबांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और सलूंबर जिलों में सभी सरपंच और पंच पद शत-प्रतिशत एसटी वर्ग के लिए आरक्षित किए गए हैं।\n\n3. इस बार कितनी ग्राम पंचायतों की कमान महिला सरपंचों के हाथों में होगी?\nपचास प्रतिशत आरक्षण के तहत इस बार लगभग 7,200 ग्राम पंचायतों की कमान महिला सरपंच संभालेंगी।\n\n4. सरपंच पदों के लिए जातिवार आरक्षण का आंकड़ा क्या है?\nएसटी वर्ग के लिए 3,058, एससी के लिए 2,493 और ओबीसी वर्ग के लिए 1,961 सरपंच पद आरक्षित किए गए हैं।\n\n5. वार्ड पंच के कुल कितने पदों के लिए लॉटरी निकाली गई है?\nप्रदेश भर में वार्ड पंचों के लगभग 1.30 लाख पदों के लिए आरक्षण की लॉटरी निकाली गई है।\n\n6. आरक्षण प्रक्रिया के दौरान विरोध प्रदर्शन कहाँ देखने को मिला?\nश्रीगंगानगर जिले के घड़साना में किसानों के विरोध के चलते कुछ समय के लिए लॉटरी प्रक्रिया रोकनी पड़ी थी।\n\n7. हाई कोर्ट के अनुसार चुनाव प्रक्रिया कब तक पूरी करानी है?\nहाई कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के अनुसार पंचायत चुनाव की पूरी प्रक्रिया 15 नवंबर तक संपन्न करानी है।\n\n8. नामांकन प्रक्रिया कब से शुरू होने की संभावना है?\nराज्य में अक्टूबर के पहले सप्ताह से नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू होने की प्रबल संभावना है।",
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  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-09-25",
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