राजस्थान में ग्राम पंचायत संग्राम के लिए भाजपा का चक्रव्यूह तैयार, सात संभागों में दिग्गज संभालेंगे कमान राजस्थान में आगामी पंचायत चुनावों को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक स्तर पर अपनी व्यूहरचना मजबूत करते हुए सातों प्रशासनिक संभागों में वरिष्ठ पदाधिकारियों की संचालन समितियां तैनात कर दी हैं। राजस्थान के देहाती इलाकों में आगामी पंचायती राज दंगल जीतने के इरादे से भारतीय जनता पार्टी ने अपनी संगठनात्मक रणनीति को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। ग्रामीण सत्ता पर कब्जा जमाने के मकसद से पार्टी ने राज्य के सभी सात प्रशासनिक संभागों में विशेष चुनावी संचालन कमेटियों की घोषणा की है। इन पैनलों में संगठन के मझे हुए दिग्गजों को सीधे तौर पर जोड़कर यह साफ कर दिया गया है कि देहात की राजनीति के इस बड़े मुकाबले में पार्टी किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। संभागवार दिग्गजों को बांटी गई जिम्मेदारियां पार्टी की ओर से जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा, बीकानेर, भरतपुर और अजमेर संभागों के लिए अलग-अलग वरिष्ठ चेहरों को जिम्मेदारी दी गई है। हर अंचल के राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों को साधने के लिए अनुभवी रणनीतिकारों की तिकड़ी तैनात की गई है • जयपुर संभाग: यहां चुनाव संचालन का दायित्व ओंकार सिंह लखावत, डॉ. अलका गुर्जर तथा शंकर सिंह राजपुरोहित के कंधों पर रहेगा। • जोधपुर संभाग: मारवाड़ क्षेत्र के इस महत्वपूर्ण अंचल में सीआर चौधरी, प्रमोद सामर एवं चंपालाल गेदर चुनावी गतिविधियों को दिशा देंगे। • उदयपुर संभाग: मेवाड़ के इस संभाग में पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ के साथ नारायण पंचारिया और हेमंत विजय चुनावी मोर्चे पर रहेंगे। • कोटा संभाग: हाड़ौती इलाके में मुकेश दाधीच, मेघराज लोहिया तथा डॉ. महेंद्र कुमावत को कमान सौंपी गई है। • बीकानेर संभाग: इस उत्तरी अंचल में प्रसन्न चंद्र मेहता, कैलाश चौधरी और राजेंद्र कुमार गहलोत को संचालन समिति का जिम्मा मिला है। • भरतपुर संभाग: पूर्वी राजस्थान के इस हिस्से में अशोक परनामी, हेमराज मीणा व छगन माहुर चुनावी बागडोर संभालेंगे। • अजमेर संभाग: इस मध्यवर्ती संभाग में अरुण चतुर्वेदी, देवजी भाई पटेल और लालचंद कटारिया चुनावी मोर्चेबंदी करेंगे। कार्यकर्ताओं से तालमेल और जमीनी स्तर पर फीडबैक पर जोर इन कमेटियों के गठन के साथ ही प्रदेश भर में पार्टी मशीनरी पूरी तरह सक्रिय मोड में आ गई है। इन संभागीय संचालन समितियों का मुख्य काम केवल प्रचार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ये स्थानीय स्तर पर पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ सीधा संवाद स्थापित करेंगी। इसके अलावा गांवों के बूथ स्तर से मिलने वाले जमीनी फीडबैक के आधार पर रणनीति को धार दी जाएगी, जिससे टिकट वितरण से लेकर प्रचार अभियान तक आपसी सामंजस्य बना रहे। इसका आप पर असर राजस्थान में पंचायत चुनावों के लिए संगठनात्मक सक्रियता बढ़ने से ग्रामीण प्रशासन और विकास कार्यों से जुड़े फैसलों की रफ्तार सीधे तौर पर प्रभावित होगी। • राजस्थान में: ग्रामीण इलाकों में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो जाएगी। गांव की चौपालों से लेकर ग्राम पंचायतों तक विकास कार्यों की समीक्षा और स्थानीय नेतृत्व की दावेदारी तेज होगी। • मतदाताओं के लिए: स्थानीय मुद्दों पर राजनीतिक दलों का ध्यान केंद्रित होगा। ग्रामीणों को सड़क, पानी, बिजली और स्थानीय कल्याणकारी योजनाओं को लेकर अपनी मांगें प्रमुखता से रखने का अवसर मिलेगा। • कार्यकर्ताओं के लिए: बूथ स्तर पर जवाबदेही और समन्वय बढ़ जाएगा। स्थानीय कार्यकर्ताओं को सीधे वरिष्ठ नेताओं तक जमीनी स्थिति और जनता का मूड पहुंचाने का माध्यम मिलेगा। • स्थानीय प्रशासन के लिए: चुनावी औपचारिकताओं को लेकर प्रशासनिक तैयारियां तेज होंगी। वोटर लिस्ट पुनरीक्षण और मतदान केंद्रों की व्यवस्था जैसे कार्यों में तेजी देखने को मिलेगी। ऐसा क्यों हुआ भारतीय जनता पार्टी ने ग्रामीण स्तर पर अपने प्रभाव को सुरक्षित और मजबूत करने के लिए यह संगठनात्मक कदम उठाया है। पंचायती राज चुनाव सीधे तौर पर गांव स्तर के जनाधार से जुड़े होते हैं, जहां संगठनात्मक समन्वय सबसे अहम माना जाता है। • सीधा कारण: आगामी पंचायत चुनावों के प्रबंधन को अनुशासित और प्रभावी बनाने के लिए कमेटियों का गठन किया गया है। पार्टी चाहती है कि सातों संभागों में स्थानीय स्तर पर किसी भी गुटबाजी या असमंजस से बचा जा सके। • रणनीतिक पृष्ठभूमि: ग्रामीण क्षेत्रों की राजनीति विधानसभा और लोकसभा में जनाधार बनाए रखने की नींव मानी जाती है। अनुभवी नेताओं को मैदान में उतारकर भाजपा जमीनी फीडबैक और कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल को पुख्ता कर रही है। • आगामी कदम: अब ये सभी नामित नेता अपने संबंधित संभागों का दौरा शुरू करेंगे। इसके बाद मंडल व बूथ स्तर के पदाधिकारियों के साथ बैठकें कर उम्मीदवारों के चयन और प्रचार की रूपरेखा तैयार की जाएगी। सवाल-जवाब 1. भाजपा ने राजस्थान में किन चुनावों के लिए समितियां बनाई हैं? भाजपा ने राजस्थान में आगामी पंचायती राज (पंचायत) चुनावों के लिए संभागवार संचालन समितियां गठित की हैं। 2. राज्य के कितने संभागों में ये चुनाव संचालन समितियां बनाई गई हैं? पार्टी ने राज्य के सभी सात संभागों जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा, बीकानेर, भरतपुर और अजमेर में ये कमेटियां बनाई हैं। 3. जयपुर संभाग में किन नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है? जयपुर संभाग में ओंकार सिंह लखावत, डॉ. अलका गुर्जर और शंकर सिंह राजपुरोहित को कमान सौंपी गई है। 4. उदयपुर संभाग की चुनाव संचालन समिति में कौन-कौन शामिल हैं? उदयपुर संभाग में राजेंद्र राठौड़, नारायण पंचारिया और हेमंत विजय को संचालन की जिम्मेदारी दी गई है। 5. इन संभागीय चुनाव समितियों का मुख्य कार्य क्या होगा? ये समितियां चुनावी तैयारियों की निगरानी, कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय स्थापित करने और जमीनी फीडबैक जुटाने का काम करेंगी। https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-men-grama-pnchayata-sngrama-ke-lie-bjp-ka-chakravyuha-taiyara-sata-snbhagon-men-diggaja-snbhalenge-kamana-42330 TrendKia — Har trend, sabse pehle.