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  "title": "राजस्थान में होमगार्ड भर्ती पर फर्जीवाड़े का साया, अलवर और बाड़मेर में दर्जनों चयनितों पर एफआईआर",
  "summary": "राजस्थान होमगार्ड भर्ती प्रक्रिया में फर्जी प्रमाण-पत्रों का इस्तेमाल उजागर होने के बाद अलवर में 24 और बाड़मेर में 17 चयनित अभ्यर्थियों पर आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं।",
  "content": "राजस्थान के भीतर होमगार्ड चयन प्रक्रिया में फर्जी दस्तावेजों के सहारे नौकरी हासिल करने की एक बड़ी साजिश सामने आई है। राज्य के दो अलग-अलग जिलों में दस्तावेज सत्यापन के दौरान कई अभ्यर्थियों के शैक्षणिक, तकनीकी और खेल प्रमाण-पत्र पूरी तरह जाली पाए गए हैं। इसके तुरंत बाद भर्ती बोर्ड से जुड़े अधिकारियों ने कानूनी कदम उठाते हुए संबंधित पुलिस थानों में औपचारिक शिकायतें दर्ज करवाई हैं। शुरुआती छानबीन से यह स्पष्ट हुआ है कि चयन सूची में जगह बनाने अथवा मेरिट सूची में अतिरिक्त अंकों का लाभ उठाने के इरादे से इन बनावटी कागजातों को पेश किया गया था। अब पुलिस प्रशासन पूरे प्रकरण की जड़ तक पहुंचने के लिए इन जाली प्रमाण-पत्रों के निर्माण स्रोतों और संभावित गिरोहों की पड़ताल में जुट गया है।\n\nअलवर रिजर्व पुलिस लाइन में सत्यापन के दौरान खुला खेल\nअलवर जिले की रिजर्व पुलिस लाइन में 322 पदों के लिए होमगार्ड जवानों के चयन की कवायद आयोजित की गई थी। चयन प्रक्रिया पूरी होने के उपरांत जब अंतिम रूप से चुने गए अभ्यर्थियों के रिकॉर्ड्स की बारीकी से जांच शुरू हुई, तब अधिकारियों के कान खड़े हो गए। सत्यापन की इस चरणबद्ध प्रक्रिया में कुल 24 उम्मीदवारों के आरएससीआईटी और एनसीसी प्रमाण-पत्र संदिग्ध पाए गए।\n\nसंदेह गहराने पर भर्ती बोर्ड ने इन दस्तावेजों को जारी करने वाले संबंधित संस्थानों और प्राधिकरणों से पत्राचार कर क्रॉस-वेरिफिकेशन करवाया। वहां से मिले आधिकारिक जवाब में यह पुष्टि हुई कि रिकॉर्ड में दर्ज विवरण पूरी तरह मनगढ़ंत और जाली थे। इस धोखेबाजी के प्रमाणित होते ही होमगार्ड भर्ती अधिकारी ने अखेपुरा पुलिस स्टेशन पहुंचकर सभी 24 अभ्यर्थियों के विरुद्ध नामजद मामला दर्ज करा दिया। स्थानीय पुलिस ने अब इन फाइलों को जब्त कर जांच आगे बढ़ा दी है।\n\nबाड़मेर में 17 नवनियुक्त जवानों के खिलाफ कोतवाली में केस दर्ज\nअलवर जैसी ही धोखाधड़ी बाड़मेर जिले में भी देखने को मिली है, जहां फर्जी दस्तावेजों की बुनियाद पर चयनित हो चुके 17 जवानों के खिलाफ कोतवाली पुलिस ने आपराधिक मुकदमा दर्ज किया है। यहां अभ्यर्थियों पर आरोप है कि उन्होंने पात्रता हासिल करने अथवा बोनस अंक बटोरने के लिए स्काउट, आईटीआई, विभिन्न खेलकूद, एनसीसी, कंप्यूटर दक्षता और ड्राइविंग लाइसेंस जैसे महत्वपूर्ण प्रमाण-पत्रों में भारी हेरफेर किया था।\n\nकोतवाली पुलिस के अनुसार जिन 17 लोगों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसा गया है, उनमें हाथमा क्षेत्र के प्रेमसिंह, देवीसिंह और सवाई सिंह शामिल हैं। इसके अलावा इंद्रोई निवासी भीख सिंह, दशरथ सिंह और रायपाल सिंह पर भी केस दर्ज हुआ है। अन्य आरोपियों में पाबूसरिया के हेमाराम, मौसेरी के पिंटू सिंह, रामसर के सुखदेव सिंह, राणासर कल्ला के रमेश कुमार, नवातला जेतमाल के महेंद्र पाल सिंह, शोभाला जेतमाल के दशरथ सिंह, ईटादा के चंदन सिंह, दुधवा के भूपेंद्र सिंह, सनाउ के गोविंद कुमार, भाचभर के जसवंत सिंह तथा देदूसर के नखत सिंह के नाम शामिल हैं। इन सभी के खिलाफ दर्ज रिपोर्ट में कूटरचित दस्तावेजों के उपयोग का सीधा आरोप लगाया गया है।\n\nजाली प्रमाण-पत्रों के रैकेट और सोर्स की तलाश\nअलवर और बाड़मेर दोनों ही क्षेत्रों में एक साथ सामने आए इन मामलों ने भर्ती परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह पता लगाना है कि कंप्यूटर, तकनीकी शिक्षा, खेल और एनसीसी से जुड़े ये कथित फर्जी कागजात आखिर किस प्रिंटिंग प्रेस या गिरोह के जरिए तैयार किए गए थे।\n\nजांच दल इस दिशा में काम कर रहा है कि क्या उम्मीदवारों ने अपनी व्यक्तिगत स्तर पर यह जालसाजी की या फिर इसके पीछे किसी संगठित गिरोह का हाथ है, जो युवाओं से मोटी रकम वसूल कर फर्जी डिग्री और प्रमाण-पत्र मुहैया कराता है। साथ ही भर्ती प्रक्रिया के दौरान इन दस्तावेजों के आधार पर दिए गए अंकों का पुनर्मूल्यांकन भी किया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों से पूछताछ और साक्ष्यों के संकलन के बाद इस पूरे फर्जीवाड़े के मास्टरमाइंड्स तक पहुंचा जा सकेगा।\n\nइसका आप पर असर\nभर्ती परीक्षाओं में फर्जी दस्तावेजों की रोकथाम और वास्तविक अभ्यर्थियों के अधिकारों के संरक्षण के लिहाज से यह कार्रवाई अत्यंत महत्वपूर्ण है।\n\n• भारत में: सरकारी नियुक्तियों में दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया को तकनीकी रूप से अधिक सख्त बनाया जाएगा। इससे अन्य राज्यों के अभ्यर्थी भी अपने मूल दस्तावेजों की डिजिटल पुष्टि के प्रति अधिक सतर्क रहेंगे।\n• राजस्थान में: होमगार्ड भर्ती की चयन सूची का पुनरीक्षण होने से योग्य और आरक्षित प्रतीक्षा सूची वाले अभ्यर्थियों को चयन का अवसर मिल सकता है। जिन लोगों ने जाली दस्तावेज पेश किए हैं, वे भविष्य की सरकारी भर्ती परीक्षाओं से हमेशा के लिए डिबार हो सकते हैं।\n• पारदर्शिता पर प्रभाव: खेल, एनसीसी और तकनीकी प्रमाण-पत्र जारी करने वाली संस्थाओं के डेटाबेस को सीधे भर्ती बोर्ड से लिंक किए जाने की पहल तेज होगी। इससे सामान्य प्रतियोगी छात्रों का चयन प्रक्रिया में विश्वास मजबूत होगा।\n• उम्मीदवारों के लिए चेतावनी: शॉर्टकट या बिचौलियों के माध्यम से डिग्री व डिप्लोमा बनवाने वाले अभ्यर्थियों के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज होने का खतरा बढ़ गया है। किसी भी चयन प्रक्रिया में केवल वैध और अधिकृत प्रमाण-पत्र ही प्रस्तुत करने की सख्त सीख मिलती है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह कानूनी कार्रवाई होमगार्ड चयन सूची जारी होने के बाद अनिवार्य भौतिक और संस्थागत दस्तावेज सत्यापन के दौरान सामने आई अनियमितताओं के चलते की गई है।\n\n• सत्यापन में पोल खुलना: चयन प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद जब भर्ती बोर्ड ने उम्मीदवारों के प्रमाण-पत्रों को जारीकर्ता संस्थानों से सत्यापित कराया, तो 41 अभ्यर्थियों के रिकॉर्ड पूरी तरह फर्जी पाए गए। इसी पुष्टि के आधार पर अधिकारियों ने पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई।\n• अतिरिक्त अंकों का लालच: होमगार्ड भर्ती में एनसीसी, खेल, कंप्यूटर और ड्राइविंग लाइसेंस जैसे प्रमाण-पत्रों पर अभ्यर्थियों को विशेष बोनस अंक और वरीयता मिलती है। मेरिट में ऊपर आने के लिए अभ्यर्थियों ने कथित तौर पर जाली दस्तावेजों का सहारा लिया।\n• फर्जी कागजात बनाने वाले गिरोह: प्रारंभिक जांच दर्शाती है कि स्थानीय स्तर पर अनधिकृत केंद्र और बिचौलिए सक्रिय हैं जो अवैध तरीके से ऐसे प्रमाण-पत्र तैयार कर युवाओं को बेचते हैं। फिलहाल पुलिस इस पूरे सिंडिकेट के नेटवर्क का सुराग जुटा रही है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. राजस्थान के किन जिलों में होमगार्ड भर्ती में फर्जीवाड़े के केस दर्ज हुए हैं?\nयह कार्रवाई मुख्य रूप से अलवर और बाड़मेर जिलों में की गई है, जहां चयनित अभ्यर्थियों के दस्तावेज जाली पाए गए।\n\n2. अलवर और बाड़मेर में कुल कितने अभ्यर्थियों पर प्राथमिकी दर्ज की गई है?\nअलवर के अखेपुरा थाने में 24 अभ्यर्थियों और बाड़मेर के कोतवाली थाने में 17 चयनित जवानों के खिलाफ मामले दर्ज हुए हैं।\n\n3. किन-किन प्रमाण-पत्रों में मुख्य रूप से फर्जीवाड़ा पाया गया?\nउम्मीदवारों के आरएससीआईटी, एनसीसी, आईटीआई, खेलकूद, स्काउट और ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़े प्रमाण-पत्र जांच में फर्जी मिले।\n\n4. अलवर में कुल कितने होमगार्ड पदों पर भर्ती प्रक्रिया आयोजित की गई थी?\nअलवर की रिजर्व पुलिस लाइन में कुल 322 होमगार्ड जवानों के पदों के लिए भर्ती आयोजित हुई थी।\n\n5. पुलिस अब इस मामले में किस पहलू की पड़ताल कर रही है?\nपुलिस यह जांच कर रही है कि फर्जी प्रमाण-पत्र कहां से बनवाए गए और क्या इसके पीछे कोई संगठित रैकेट सक्रिय था।",
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  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-10-03",
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    "राजस्थान होमगार्ड",
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