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  "type": "article",
  "title": "राजस्थान में कमजोर पड़ा मानसून, 11 जिलों में दशक के सबसे भीषण सूखे की आहट",
  "summary": "कम बारिश के कारण राजस्थान के 11 से अधिक जिलों में जलसंकट गहरा गया है और बांधों में पानी का स्तर घटकर 62 प्रतिशत रह गया है। फसलों के नुकसान और चारे की किल्लत से निपटने के लिए प्रशासन ने राहत उपायों के तहत पानी की ट्रेन चलाने पर विचार शुरू कर दिया है।",
  "content": "कमजोर मानसून की मार के चलते राजस्थान पर बीते दस वर्षों के सबसे गंभीर अकाल का साया मंडराने लगा है। मौसम संबंधी आंकड़ों और आपदा प्रबंधन की स्थिति से यह साफ संकेत मिल रहे हैं कि प्रदेश के 11 से ज्यादा जिले इस समय भीषण सूखे के दौर से गुजर रहे हैं। खेतों में खड़ी फसलें पानी की कमी से सूख चुकी हैं और बांधों में जलस्तर तेजी से गिर रहा है। परिस्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन आने वाले महीनों में पेयजल संकट दूर करने के लिए प्रभावित क्षेत्रों में पानी की विशेष ट्रेन चलाने की तैयारी कर रहा है।\n\nपाली, जैसलमेर और जालोर में आधी से भी कम बारिश\nप्रदेश के पश्चिमी और दक्षिणी हिस्सों में हालात सबसे अधिक चिंताजनक बने हुए हैं। विशेष रूप से पाली, जैसलमेर और जालोर में वर्षा का स्तर सामान्य के मुकाबले 50 प्रतिशत से भी नीचे रह गया है। इसके परिणामस्वरूप इन जिलों में खरीफ की खेती पूरी तरह तबाह हो चुकी है। इन तीन जिलों के अलावा सिरोही, राजसमंद, उदयपुर, हनुमानगढ़, बालोतरा, जोधपुर और बांसवाड़ा की अनेक तहसीलों में भी सूखे की स्थिति विकराल रूप ले चुकी है। संकट की जमीनी पड़ताल के लिए पटवारियों और प्रशासनिक अधिकारियों की टीमें लगातार खेतों और गांवों का दौरा कर रही हैं। प्रशासन द्वारा 15 अक्टूबर के बाद आधिकारिक रूप से अभावग्रस्त और सूखाग्रस्त जिलों की विस्तृत सूची घोषित की जाएगी।\n\nबीते मानसून सत्र के मुकाबले बारिश के आंकड़ों में भारी गिरावट\nयदि पिछले मानसून के आंकड़ों से इस वर्ष की तुलना की जाए, तो अंतर बेहद चौंकाने वाला नजर आता है। पिछले साल राज्य के 23 जिलों में सामान्य से 60 प्रतिशत तक ज्यादा वर्षा दर्ज की गई थी, जबकि इस बार राज्य का एक भी जिला ऐसा नहीं रहा जहां भारी या अत्यधिक वर्षा हुई हो। हालांकि तकनीकी वर्गीकरण में मौसम विभाग ने 24 जिलों को सामान्य वर्षा की श्रेणी में रखा है, लेकिन वास्तविक विश्लेषण दिखाता है कि इनमें से 18 जिलों में बारिश का रुझान नकारात्मक दायरे में रहा है। जयपुर, टोंक और चित्तौड़गढ़ जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सामान्य से 17 प्रतिशत से भी कम पानी बरसा। पूरे राजस्थान में केवल धौलपुर, डीग और सलूम्बर ही ऐसे जिले रहे, जहां वर्षा सामान्य से 24 से 28 प्रतिशत अधिक दर्ज की गई।\n\nबांधों में सिमटा जलस्तर और पानी की ट्रेन की सुगबुगाहट\nबारिश की कमी का सीधा और गंभीर प्रभाव राजस्थान के जल भंडारों पर दिखाई दे रहा है। पिछले मानसून के समापन पर राज्य के बांध अपनी कुल जल संचयन क्षमता के 90.5 प्रतिशत तक भर चुके थे। इसके विपरीत इस वर्ष राज्य के बांधों में पानी का कुल स्तर मुश्किल से 62 प्रतिशत तक ही पहुंच पाया है। सबसे नाजुक स्थिति जोधपुर संभाग की है, जहां के बांधों में महज 16 प्रतिशत पानी ही उपलब्ध है। इस जल संकट के गहराने पर आपदा प्रबंधन तंत्र ने पाली तथा अन्य सूखाग्रस्त जिलों में पानी की ट्रेन चलाने के विकल्प पर काम करना शुरू कर दिया है। इससे पूर्व वर्ष 2022 के भीषण सूखे के दौरान भी पाली जिले में पेयजल आपूर्ति बनाए रखने के लिए पानी की ट्रेन संचालित की गई थी।\n\nफसलों का विनाश, चारे का संकट और महंगाई की आशंका\nसूखे की इस दोहरी मार से ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि क्षेत्र पूरी तरह चरमरा गए हैं। प्रमुख खरीफ फसलें जैसे बाजरा, मूंग, ग्वार, मोठ और सोयाबीन पानी के अभाव में खेतों में ही सूख कर नष्ट हो चुकी हैं। स्थानीय उत्पादन ठप होने से आने वाले समय में बाजरे और दालों की कीमतों में तीव्र उछाल आने की आशंका है, जिससे आम जनता पर महंगाई का बोझ बढ़ेगा। इसके अलावा मवेशियों के लिए हरे और सूखे चारे की गंभीर कमी पैदा हो रही है। चारा महंगा होने के कारण दूध और डेयरी उत्पादों के दाम बढ़ने के आसार हैं। जरूरतों को पूरा करने के लिए राजस्थान को अन्य राज्यों से खाद्यान्न और पशु आहार मंगवाना पड़ सकता है, जिससे दैनिक मजदूरों और निम्न आय वर्ग के परिवारों का घरेलू बजट बुरी तरह प्रभावित होगा।\n\nप्रशासन की ओर से शुरू किए गए आपातकालीन उपाय\nगंभीर होते संकट को देखते हुए राज्य प्रशासन ने राहत कार्यों को गति देने के निर्देश दिए हैं। गांवों और ढाणियों में पेयजल की निरंतर उपलब्धता बनाए रखने के लिए टैंकरों से जलापूर्ति की व्यवस्था को 31 दिसंबर तक बढ़ा दिया गया है। त्वरित राहत पहुंचाने के उद्देश्य से सूखा प्रभावित जिलों के जिला कलेक्टरों को तात्कालिक कार्यों के लिए एक-एक करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत करने के विशेष वित्तीय अधिकार सौंपे गए हैं। साथ ही मवेशियों को बचाने और पशुपालकों को संबल देने के लिए बाड़मेर, बालोतरा और जैसलमेर सहित नजदीकी जिलों में नए चारा डिपो खोलने के कड़े आदेश जारी किए गए हैं।\n\nइसका आप पर असर\nकमजोर मानसून के कारण राजस्थान में पेयजल की गंभीर किल्लत और खाद्यान्न के दामों में बढ़ोतरी का खतरा पैदा हो गया है।\n\n• भारत में: राजस्थान में दलहन, बाजरा और सोयाबीन के उत्पादन में कमी से राष्ट्रीय स्तर पर इन कृषि उत्पादों की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसके चलते आने वाले महीनों में खुले बाजार में आवश्यक अनाजों और पशु चारे की कीमतों में तेजी देखने को मिल सकती है।\n• राजस्थान में: राज्य के 11 से अधिक जिलों के ग्रामीण और शहरी इलाकों में पानी के राशनिंग की नौबत आ सकती है। पाली और जालोर जैसे अत्यधिक प्रभावित क्षेत्रों में 31 दिसंबर तक टैंकरों और संभावित पानी की ट्रेनों पर निर्भरता बढ़ जाएगी, जबकि दूध तथा दालों के दाम सीधे तौर पर आम उपभोक्ता का खर्च बढ़ाएंगे।\n• पशुपालकों और किसानों के लिए: खरीफ की फसलें नष्ट होने से ग्रामीण परिवारों की आय पर भारी चोट पहुंची है। चारे की भारी कमी को देखते हुए पशुपालकों को सरकार द्वारा बाड़मेर, बालोतरा और जैसलमेर में खोले जा रहे राहत चारा डिपो से संपर्क साधना होगा।\n• आपात राहत व्यवस्था: जिला कलेक्टरों को एक-एक करोड़ रुपये तक के त्वरित कार्य स्वीकृत करने का अधिकार दिया गया है। 15 अक्टूबर के बाद राज्य सरकार आधिकारिक तौर पर अभावग्रस्त क्षेत्रों की घोषणा करेगी जिसके बाद अतिरिक्त राहत योजनाएं लागू होंगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह स्थिति मानसून सीजन में मानसूनी हवाओं की कमजोरी और वर्षा के असामान्य क्षेत्रीय वितरण के कारण उत्पन्न हुई है। समय पर पर्याप्त वर्षा न होने से भूजल और बांधों का पुनर्भरण नहीं हो पाया।\n\n• कमजोर मानसूनी गतिविधियां: पश्चिमी राजस्थान के ऊपर मौसमी दबाव तंत्र अनुकूल न रहने के कारण अधिकांश हिस्सों में मानसूनी बादल पर्याप्त वर्षा नहीं कर सके। इसके चलते पाली, जैसलमेर और जालोर जैसे जिलों में वर्षा सामान्य से 50 प्रतिशत कम दर्ज की गई।\n• बांधों का कम जलस्तर: इस सीजन में बारिश का वितरण असंतुलित रहने से प्रदेश के बांध केवल 62 प्रतिशत क्षमता तक ही भर सके, जबकि जोधपुर संभाग में यह आंकड़ा मात्र 16 प्रतिशत रहा। पिछले साल हुई 60 प्रतिशत तक की अतिरिक्त बारिश के विपरीत इस बार ऐसा कोई अतिरिक्त जल प्रवाह दर्ज नहीं हुआ।\n• ऐतिहासिक सूखे की पुनरावृत्ति: राजस्थान में भौगोलिक कारणों से सूखे की स्थिति पहले भी बनती रही है, जैसा कि वर्ष 2022 में हुआ था जब पाली में पानी की ट्रेन चलानी पड़ी थी। वर्तमान संकट के दस साल के सबसे गंभीर स्तर तक पहुंचने की मुख्य वजह कम बारिश के साथ-साथ अत्यंत निम्न जल संचयन है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. राजस्थान के कौन से जिले सूखे से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं?\nपाली, जैसलमेर और जालोर सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, जहां सामान्य से 50 प्रतिशत से भी कम बारिश दर्ज की गई है।\n\n2. वर्तमान में राजस्थान के बांधों में कितना पानी बचा है?\nप्रदेश के बांधों में वर्तमान में कुल क्षमता का केवल 62 प्रतिशत पानी ही भर पाया है, जबकि जोधपुर जोन के बांधों में यह आंकड़ा मात्र 16 प्रतिशत है।\n\n3. सूखे से निपटने के लिए सरकार ने क्या तात्कालिक कदम उठाए हैं?\nप्रशासन ने पानी के टैंकरों की व्यवस्था 31 दिसंबर तक बढ़ा दी है और जिला कलेक्टरों को राहत कार्यों के लिए एक-एक करोड़ रुपये तक स्वीकृत करने के अधिकार दिए हैं।\n\n4. क्या प्रभावित जिलों में पानी की ट्रेन चलाई जाएगी?\nआपदा प्रबंधन अधिकारियों ने पेयजल संकट को देखते हुए पाली और अन्य अत्यधिक सूखा प्रभावित जिलों में पानी की ट्रेन चलाने की संभावना से इनकार नहीं किया है।\n\n5. कम बारिश से कौन-सी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है?\nबारिश की कमी के कारण खरीफ की प्रमुख फसलें जैसे बाजरा, मूंग, ग्वार, मोठ और सोयाबीन पूरी तरह सूख कर नष्ट हो गई हैं।\n\n6. सरकार सूखा प्रभावित जिलों की आधिकारिक सूची कब जारी करेगी?\nप्रशासनिक और पटवारी टीमों के जमीनी सर्वे के बाद 15 अक्टूबर के बाद अभावग्रस्त जिलों की आधिकारिक सूची जारी की जाएगी।",
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  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-10-04",
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    "राजस्थान सूखा",
    "मानसून संकट",
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