राजस्थान में कमजोर पड़ा मानसून, उमस भरी गर्मी से लोग परेशान, इस दिन से बदलेगा मौसम राजस्थान में फिलहाल मानसून की रफ्तार धीमी पड़ गई है जिससे अधिकांश इलाकों में मौसम शुष्क बना हुआ है और उमस भरी गर्मी बढ़ गई है। हालांकि मौसम विभाग के अनुसार सितंबर के शुरुआती दिनों में बारिश का नया दौर शुरू होने की उम्मीद है। राजस्थान के मौसम मिजाज में इन दिनों बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है जहां मानसून की सक्रियता में भारी कमी दर्ज की गई है। प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में इन दिनों बारिश का दौर थम सा गया है और मौसम आमतौर पर शुष्क बना हुआ है। मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर के ताजा अपडेट के मुताबिक आगामी चार से पांच दिनों तक राज्यभर में मानसूनी गतिविधियां काफी सुस्त रहने वाली हैं। इस सुस्ती के चलते भारी बारिश की कोई चेतावनी फिलहाल जारी नहीं की गई है, लेकिन नमी और तीखी धूप के मेल से उमस भरी गर्मी का प्रकोप आम जनजीवन को परेशान कर रहा है। श्रीगंगानगर में पारा पहुंचा सर्वोच्च स्तर पर मानसून की बेरुखी और बादलों की आवाजाही कम होने के कारण तापमान में उछाल आया है जिससे आम लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बीते रविवार को राज्य के विभिन्न हिस्सों में औसत आर्द्रता का स्तर 40 से 80 प्रतिशत के दायरे में दर्ज किया गया, जिसने हवा में नमी और चिपचिपाहट को बढ़ा दिया। इस दौरान श्रीगंगानगर में सबसे अधिक अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। इसके अलावा बीकानेर, कोटा, जयपुर, चूरू, अजमेर, उदयपुर, भरतपुर, जैसलमेर, जालौर, करौली, चित्तौड़गढ़, हनुमानगढ़, पाली, राजसमंद, बालोतरा और डीग जैसे तमाम जिलों में गर्मी और उमस का मिलाजुला असर साफ तौर पर महसूस किया गया। पश्चिमी राजस्थान के कई इलाकों में दिन का तापमान 38 से 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है, जिससे लोगों को गर्मी से राहत नहीं मिल पा रही है। सितंबर के पहले हफ्ते में होगी झमाझम वापसी मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार यह मानसूनी सुस्ती ज्यादा लंबी नहीं खिंचेगी और सितंबर के शुरुआती दिनों के साथ ही मौसम का रुख एक बार फिर पलटी मारेगा। उत्तर-पूर्वी और पूर्वी राजस्थान के क्षेत्रों में तीन सितंबर से बारिश की गतिविधियों में तेजी आने के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं। दैनिक पूर्वानुमान की बात करें तो एक सितंबर को उदयपुर संभाग में छिटपुट बारिश हो सकती है, जबकि दो सितंबर को भरतपुर, कोटा और उदयपुर संभाग के कुछ स्थानों पर बादल बरस सकते हैं। इसके बाद तीन और चार सितंबर को पूर्वी राजस्थान के साथ-साथ बीकानेर और जोधपुर संभागों में भी बारिश का दायरा बढ़ने की पूरी संभावना जताई गई है। विशेष तौर पर चार से सात सितंबर के दौरान भरतपुर, कोटा, जयपुर, अजमेर और उदयपुर संभाग के अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम दर्जे की बारिश होने के आसार हैं। पश्चिमी राजस्थान में भले ही व्यापक बारिश से अभी दूरी बनी रहे, लेकिन पांच से आठ सितंबर के दौरान बीकानेर संभाग के कुछ इलाकों में भी हल्की से मध्यम बौछारें पड़ने की उम्मीद है। वज्रपात और मेघगर्जन का येलो अलर्ट जारी नया मानसूनी दौर शुरू होने से पहले मौसम विभाग ने कुछ जिलों में आंधी और बिजली गिरने की चेतावनी दी है। आईएमडी ने एक सितंबर को भरतपुर, डीग और धौलपुर जिलों में मेघगर्जन के साथ वज्रपात होने को लेकर येलो अलर्ट घोषित किया है। इसके अगले दिन यानी दो सितंबर को अलवर, भरतपुर, दौसा, डीग, धौलपुर, करौली और सवाई माधोपुर जिलों में भी ऐसा ही मौसम रहने की संभावना जताई गई है, जहां कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ तीस से चालीस किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। तीन सितंबर को भी कई अन्य जिलों में इसी तरह का येलो अलर्ट प्रभावी रहने के संकेत दिए गए हैं। सक्रिय मौसमी तंत्र और मानसूनी ट्रफ की स्थिति वर्तमान समय में बने मौसमी तंत्रों का विश्लेषण करें तो मानसून ट्रफ इस समय समुद्र तल के सहारे अमृतसर, मुजफ्फरनगर, हरदोई, गोरखपुर, पटना और बांका से गुजरते हुए उत्तर-पूर्वी बंगाल की खाड़ी तक फैली हुई है, जहां एक सुस्पष्ट निम्न दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। इसके अतिरिक्त इस निम्न दबाव के प्रभाव से जुड़ी एक अन्य ट्रफ रेखा झारखंड और बिहार से होते हुए उत्तर-पश्चिमी उत्तर प्रदेश की ओर लगभग 0.9 से 1.5 किलोमीटर की ऊंचाई पर सक्रिय अवस्था में है। साथ ही उत्तर पाकिस्तान और उसके आसपास के जम्मू संभाग के ऊपर लगभग 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई पर एक पश्चिमी विक्षोभ चक्रवाती परिसंचरण के रूप में मौजूद है, जो आने वाले दिनों में मौसम को प्रभावित करेगा। इसका आप पर असर राजस्थान में मानसून की सुस्ती और उमस भरी गर्मी से आम जनजीवन और दैनिक गतिविधियों पर सीधा असर पड़ रहा है। • भारत में: राष्ट्रीय स्तर पर कमजोर मानसूनी परिस्थितियां उत्तर भारत के कृषि क्षेत्रों में खरीफ फसलों की सिंचाई आवश्यकताओं को प्रभावित कर सकती हैं। किसानों को सलाह दी जाती है कि स्थानीय मिट्टी की नमी के अनुसार फसलों में पानी की वैकल्पिक व्यवस्था बनाए रखें। • राजस्थान में: राज्यभर में विशेषकर श्रीगंगानगर, जयपुर और बीकानेर जैसे जिलों में तापमान 40 डिग्री तक पहुंचने और चिपचिपी गर्मी बढ़ने से लोगों को स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां बरतनी होंगी। दोपहर के समय तेज धूप से बचाव करें और पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन करें। • यातायात और यात्रा: एक और दो सितंबर को भरतपुर, डीग, धौलपुर और अलवर जैसे जिलों में वज्रपात और मेघगर्जन के येलो अलर्ट के दौरान यात्रा करने वाले लोग मौसम के बदलाव पर नजर रखें। आंधी के समय खुले में खड़े होने या पेड़ों के नीचे शरण लेने से बचें। • तापमान प्रबंधन: अगले चार से पांच दिनों तक बारिश न होने के कारण बिजली की मांग में बढ़ोतरी हो सकती है। आम उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि बिजली और पानी का विवेकपूर्ण उपयोग करें ताकि किसी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके। • आगामी तैयारी: तीन सितंबर से शुरू होने वाले नए बारिश के दौर को देखते हुए ग्रामीण और शहरी इलाकों में जल निकासी के प्रबंधों की समीक्षा की जानी चाहिए। निचले इलाकों में रहने वाले लोग मौसम विभाग की चेतावनियों से अपडेट रहें। सवाल-जवाब 1. राजस्थान में फिलहाल मानसून की स्थिति कैसी है? राजस्थान में मानसून की रफ्तार धीमी पड़ गई है और अधिकांश हिस्सों में मौसम शुष्क बना हुआ है। 2. 31 अगस्त को सबसे अधिक तापमान कहां दर्ज किया गया? श्रीगंगानगर में राज्य का सर्वाधिक अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। 3. राज्य में बारिश का नया दौर कब से शुरू होगा? मौसम विभाग के अनुसार 3 सितंबर से उत्तर-पूर्वी और पूर्वी राजस्थान में बारिश का नया दौर शुरू होने की संभावना है। 4. किन जिलों में 1 सितंबर को वज्रपात का येलो अलर्ट है? आईएमडी ने 1 सितंबर को भरतपुर, डीग और धौलपुर में मेघगर्जन और वज्रपात को लेकर येलो अलर्ट जारी किया है। 5. 4 से 7 सितंबर के बीच किन संभागों में बारिश हो सकती है? इस दौरान भरतपुर, कोटा, जयपुर, अजमेर और उदयपुर संभाग में कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश होने के आसार हैं। https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-men-kamajora-para-monsoon-umasa-bhari-garmi-se-loga-pareshana-isa-dina-se-badalega-weather-24800 TrendKia — Har trend, sabse pehle.