# राजस्थान में खाद संकट पर नरेश मीणा का अनशन पांचवें दिन टोंक पहुंचा, महिलाओं ने की खाना खाने की भावुक गुहार

> किसानों की खाद समस्या को लेकर बारां से जयपुर कूच कर रहे नरेश मीणा के अनशन के पांचवें दिन टोंक में भारी जनसमर्थन मिला, जहां महिलाओं ने उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताते हुए अन्न ग्रहण करने की अपील की।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-10-07 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-men-khada-snkata-para-naresh-meena-ka-anashana-panchaven-dina-tonk-pahuncha-mahilaon-ne-ki-khana-khane-ki-bhavuka-guhara-44221 · **Language:** Hindi
**Tags:** नरेश मीणा, टोंक, खाद संकट, किसान आंदोलन, जयपुर कूच, हनुमान बेनीवाल, राजेंद्र गुढ़ा, शहीद स्मारक

राजस्थान में किसानों की समस्याओं और खाद की कमी को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब तेज होता जा रहा है। बारां से राजधानी जयपुर के लिए पैदल कूच पर निकले किसान नेता नरेश मीणा के आमरण अनशन का पांचवां दिन टोंक में बीता। पांच दिनों से बिना अन्न-जल के पदयात्रा कर रहे नरेश मीणा जैसे ही टोंक पहुंचे, बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण और किसान उनके समर्थन में उमड़ पड़े। इस दौरान जुटी भीड़ में ग्रामीण महिलाओं की मौजूदगी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही, जिन्होंने किसान नेता की बिगड़ती शारीरिक स्थिति को देखकर बेहद भावुक अपील की।

## टोंक में महिलाओं की भावुक अपील और एकजुटता
टोंक पड़ाव के दौरान माहौल उस समय बेहद भावुक हो गया जब स्थानीय महिलाओं ने नरेश मीणा से मिलकर अनशन समाप्त करने की गुहार लगाई। महिलाओं ने कहा कि भले ही खाद न मिले, लेकिन आप खाना खा लीजिए। ग्रामीण महिलाओं ने उनके साथ गहरा भावनात्मक जुड़ाव दिखाते हुए यह भी स्पष्ट कर दिया कि यदि वे भोजन नहीं करेंगे, तो गांव की महिलाएं भी अन्न ग्रहण नहीं करेंगी। मौके पर मौजूद प्रदर्शनकारी और समर्थक इस दृश्य को देखकर भावुक हो गए। महिलाओं का यह रुख दिखाता है कि खाद की अनुपलब्धता का संकट भले ही खेतों में गहरा हो, लेकिन उनके लिए इस हक की लड़ाई लड़ रहे नेता की जान सबसे ज्यादा कीमती है।

## बारां से जयपुर कूच और शहीद स्मारक पर बड़े प्रदर्शन की तैयारी
नरेश मीणा ने राज्य में किसानों को समय पर खाद की आपूर्ति सुनिश्चित कराने और खेती से जुड़ी अन्य समस्याओं को लेकर यह आंदोलन छेड़ा है। सरकार का ध्यान इन जमीनी दिक्कतों की ओर खींचने के लिए उन्होंने बारां से जयपुर तक की लंबी पदयात्रा शुरू की है। टोंक में कुछ समय रुकने के बाद उनका कारवां अब राजधानी जयपुर के शहीद स्मारक की ओर आगे बढ़ रहा है। किसान नेता ने घोषणा की है कि वे जयपुर स्थित शहीद स्मारक पहुंचकर राज्यव्यापी स्तर पर बड़ा प्रदर्शन करेंगे। लगातार पांच दिनों की भूख-प्यास के बावजूद जारी यह पदयात्रा अब ग्रामीण इलाकों में किसानों के बीच व्यापक समर्थन जुटा रही है।

## तीसरे मोर्चे के नेताओं का मिला खुला साथ
इस आंदोलन को व्यापक राजनीतिक और सामाजिक दबाव में बदलने के लिए नरेश मीणा ने राजस्थान के तीसरे मोर्चे से जुड़े तमाम सियासी दलों और नेताओं से एक मंच पर आने का आह्वान किया है। उनका कहना है कि किसानों के हक में सभी गैर-सत्तारूढ़ ताकतों को मतभेद भुलाकर एकजुट होना चाहिए। उनकी इस मांग को विपक्षी खेमे से मजबूत समर्थन भी मिला है। सांसद हनुमान बेनीवाल और पूर्व मंत्री या विधायक का कोई पद जोड़े बिना राजेंद्र गुढ़ा सहित कई प्रमुख नेताओं ने खुले तौर पर आंदोलन को अपना समर्थन देने की घोषणा की है। इन प्रमुख नेताओं के साथ आने से आंदोलन को नई ताकत मिली है और अब प्रशासन की नजरें जयपुर में प्रस्तावित प्रदर्शन पर टिकी हैं।

## इसका आप पर असर
इस आंदोलन और पैदल मार्च का सीधा असर राजस्थान के ग्रामीण अंचल, कृषि क्षेत्र और यातायात व्यवस्था पर पड़ रहा है।

- **भारत में:** देश भर के किसानों के लिए समय पर खाद की उपलब्धता एक संवेदनशील विषय बनी हुई है। राजस्थान में उभरता यह विरोध प्रदर्शन नीति निर्माताओं को आपूर्ति व्यवस्था दुरुस्त करने का संकेत देता है।
- **राजस्थान में:** टोंक और जयपुर के बीच पदयात्रा मार्ग पर किसानों का जमावड़ा बढ़ने से यातायात प्रभावित हो सकता है। जयपुर के शहीद स्मारक पर बड़े प्रदर्शन के ऐलान से राजधानी के प्रशासन को सुरक्षा व आवाजाही के विशेष इंतजाम करने होंगे।
- **कृषि कार्य पर:** खाद की किल्लत से जूझ रहे स्थानीय किसानों की मांगें अब सीधे राज्य स्तर के राजनीतिक विमर्श में आ गई हैं। सरकार द्वारा वितरण प्रक्रिया तेज किए जाने की उम्मीद बढ़ गई है।
- **राजनीतिक असर:** तीसरे मोर्चे के प्रमुख नेताओं के एक साथ आने से विपक्ष की गोलबंदी मजबूत हो रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा विधानसभा और प्रशासनिक स्तर पर प्रमुखता से उठेगा।

## ऐसा क्यों हुआ
यह आंदोलन राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में खाद की गंभीर कमी और किसानों की अनसुनी समस्याओं की पृष्ठभूमि में शुरू हुआ है।

- **सीधा कारण:** किसानों को फसलों के लिए आवश्यक खाद की पर्याप्त आपूर्ति नहीं मिल पाना इस आंदोलन की सीधी वजह बना। नरेश मीणा ने सरकार तक इस परेशानी को पुरजोर तरीके से पहुंचाने के लिए आमरण अनशन का रास्ता चुना।
- **विरोध की पृष्ठभूमि:** बारां से शुरू होकर जयपुर की ओर बढ़ रहा यह पैदल मार्च लगातार पांच दिनों से चल रहा है। स्थानीय स्तर पर सुनवाई न होने के कारण आंदोलनकारियों ने राज्य मुख्यालय पहुंचकर अपनी बात रखने का निर्णय लिया।
- **नेताओं की एकजुटता:** हनुमान बेनीवाल और राजेंद्र गुढ़ा जैसे प्रमुख चेहरों के समर्थन ने इस आंदोलन को जनआंदोलन से एक बड़े राजनीतिक मंच के रूप में तब्दील कर दिया है।
- **आगामी कदम:** टोंक में पड़ाव डालने के बाद पदयात्रा का अंतिम लक्ष्य जयपुर का शहीद स्मारक है, जहां पहुंचकर बड़े स्तर पर धरना शुरू करने की योजना बनाई गई है।

## सवाल-जवाब

### 1. नरेश मीणा किस मांग को लेकर आमरण अनशन कर रहे हैं?
नरेश मीणा किसानों को पर्याप्त खाद की उपलब्धता और खेती से जुड़ी अन्य मुख्य समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर अनशन कर रहे हैं।

### 2. नरेश मीणा का यह पैदल मार्च कहां से कहां तक जा रहा है?
यह मार्च राजस्थान के बारां जिले से शुरू होकर राज्य की राजधानी जयपुर के शहीद स्मारक तक जा रहा है।

### 3. टोंक में महिलाओं ने नरेश मीणा से क्या गुहार लगाई?
महिलाओं ने उनके स्वास्थ्य पर चिंता जताते हुए कहा कि खाद न मिले सही लेकिन वे खाना खा लें, और चेतावनी दी कि वे नहीं खाएंगे तो महिलाएं भी भूखी रहेंगी।

### 4. अनशन का यह कौन सा दिन था जब वे टोंक पहुंचे?
नरेश मीणा के आमरण अनशन और जयपुर कूच का यह पांचवां दिन था।

### 5. राजस्थान के किन प्रमुख नेताओं ने इस आंदोलन को समर्थन दिया है?
सांसद हनुमान बेनीवाल और राजेंद्र गुढ़ा सहित राज्य के कई प्रमुख तीसरे मोर्चे के नेताओं ने इस आंदोलन का खुला समर्थन किया है।

### 6. जयपुर में नरेश मीणा का अगला कदम क्या होगा?
वे जयपुर स्थित शहीद स्मारक पहुंचकर किसानों की मांगों को लेकर एक बड़ा राज्यस्तरीय आंदोलन और प्रदर्शन करेंगे।

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