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  "type": "article",
  "title": "राजस्थान में मानसून की बेरुखी से गहराया भारी जल संकट, 283 बांध पूरी तरह सूख चुके हैं",
  "summary": "राजस्थान में मानसून की एंट्री के हफ्तों बाद भी बारिश की कमी के कारण राज्य के प्रमुख जलाशयों में पानी का स्तर लगातार गिर रहा है। पिछले साल की तुलना में जल स्तर में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे राज्य में पेयजल और सिंचाई को लेकर बड़ा संकट मंडराने लगा है।",
  "content": "राजस्थान जैसे मरुस्थलीय और शुष्क राज्य में मानसून की दस्तक के हफ्तों बाद भी जल संकट गहराता जा रहा है, क्योंकि राज्य के प्रमुख जल स्रोत लगातार सूख रहे हैं। कृषि और पेयजल के लिए पूरी तरह से इन जलाशयों पर निर्भर रहने वाले इस राज्य के लिए यह स्थिति बेहद गंभीर और चिंताजनक है। 21 और 22 जुलाई को बारिश की गतिविधियों में थोड़ी तेजी जरूर आई है, लेकिन इन मानसूनी फुहारों का फायदा जल स्रोतों को बिल्कुल नहीं मिला है। धरातल पर स्थिति इतनी विकराल हो चुकी है कि प्रदेश के सैकड़ों छोटे और बड़े जलाशय पूरी तरह से खाली हो चुके हैं और पिछले साल के मुकाबले पानी के स्तर में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे आम जनजीवन पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।\n\nजल स्तर में भारी गिरावट और चिंताजनक आंकड़े\n\nपिछले एक साल के दौरान राज्य के जलाशयों से जिस गति से पानी कम हुआ है, इस मानसून सीजन में अब तक उसकी भरपाई का एक छोटा सा हिस्सा भी वापस नहीं आ सका है। आंकड़ों पर गौर करें तो 21 जुलाई तक राजस्थान के कुल 693 बांधों में उनकी कुल भराव क्षमता का मात्र 45.32 प्रतिशत जल ही शेष बचा है। यह आंकड़ा पिछले साल की तुलना में बेहद निराशाजनक है, क्योंकि पिछले वर्ष ठीक इसी तारीख को इन जलाशयों में 68.49 प्रतिशत पानी मौजूद था। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इन सभी जल स्रोतों की कुल भंडारण क्षमता 13,029.09 मिलियन क्यूबिक मीटर है, लेकिन वर्तमान में इनमें सिर्फ 5,904.30 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी ही उपलब्ध है। चिंता का सबसे बड़ा विषय यह भी है कि 21 जुलाई की सुबह आठ बजे तक, पिछले चौबीस घंटों के भीतर जल स्तर बढ़ने के बजाय 3.12 मिलियन क्यूबिक मीटर और घट गया। मानसून के इस पीक सीजन में पानी घटने का यह आंकड़ा हालात की गंभीरता को स्पष्ट रूप से बयां करता है।\n\nविभिन्न क्षेत्रों में जल भंडारण की स्थिति\n\nराज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता को लेकर भारी असमानता देखने को मिल रही है। कोटा संभाग के हालात फिलहाल सबसे संतोषजनक हैं, जहां जलाशयों में 56.20 प्रतिशत जल भंडारण मौजूद है। इसके बाद जयपुर क्षेत्र के जल स्रोतों में 47.11 प्रतिशत, बांसवाड़ा क्षेत्र में 45.36 प्रतिशत और उदयपुर संभाग में 36.51 प्रतिशत पानी बचा हुआ है। इसके उलट कुछ क्षेत्रों में सूखे जैसे विनाशकारी हालात बनते जा रहे हैं। भरतपुर संभाग के जलाशयों में महज 25.45 प्रतिशत पानी ही शेष है, जबकि पश्चिमी राजस्थान के जोधपुर क्षेत्र की स्थिति पूरे राज्य में सबसे ज्यादा खराब है। यहां जल स्तर गिरकर मात्र 17.50 प्रतिशत पर आ गया है। इन क्षेत्रों में रहने वाले लाखों लोगों और किसानों के लिए यह आंकड़े एक बड़े संकट का संकेत दे रहे हैं, जो पूरी तरह से मानसून की मेहरबानी पर निर्भर हैं।\n\nप्रमुख बांधों का हाल और राजधानी की प्यास\n\nराजस्थान के 23 सबसे बड़े और प्रमुख बांधों की बात करें, जो पूरे राज्य के जल इंफ्रास्ट्रक्चर की रीढ़ माने जाते हैं, उनमें औसतन 56.78 प्रतिशत पानी भरा हुआ है। मोरेल बांध अपनी सौ प्रतिशत क्षमता के साथ पूरा भर चुका है और कोटा बैराज में भी 97.42 प्रतिशत पानी उपलब्ध है। राणा प्रताप सागर भी 66.14 प्रतिशत तक भरा हुआ है। हालांकि, राजधानी जयपुर सहित कई अन्य शहरों की लाइफलाइन माने जाने वाले बीसलपुर बांध की स्थिति पिछले साल जैसी शानदार नहीं है। बीसलपुर बांध में फिलहाल 66.14 प्रतिशत पानी बचा हुआ है। इस बार के मानसूनी सीजन में अब तक इस बांध के जलग्रहण क्षेत्र में पानी की कोई बड़ी आवक दर्ज नहीं की गई है, जबकि पिछले साल भारी बारिश के कारण यह बांध तीन बार छलक उठा था। वहीं दूसरी तरफ जयपुर का ऐतिहासिक रामगढ़ बांध अपनी पुरानी नियति के अनुसार इस बार भी पूरी तरह सूखा पड़ा है। आसपास के अन्य सहायक जलाशयों जैसे छापरवाड़ा में केवल 15.31 प्रतिशत और कालाख सागर में मात्र 1.70 प्रतिशत पानी ही बचा है।\n\nसैकड़ों बांध पूरी तरह से खाली\n\nप्रदेश की संपूर्ण जल सुरक्षा के नजरिए से सबसे डराने वाली तस्वीर यह है कि कुल 693 बांधों में से 283 जल स्रोत ऐसे हैं जिनमें पानी की एक बूंद भी नहीं बची है, वे पूरी तरह से सूख चुके हैं। इसके अलावा 403 बांध ऐसे हैं जो केवल आंशिक रूप से ही भर पाए हैं। पूरे राज्य में सिर्फ 7 बांध ही ऐसे हैं जो अपनी पूरी क्षमता तक पहुंच पाए हैं। इन सात फुल हो चुके जलाशयों के बारे में भी एक कड़वी सच्चाई यह है कि इनका जल स्तर इस साल की बारिश का नतीजा नहीं है, बल्कि इनमें पिछले साल का ही बचाया हुआ पानी भरा है। मानसून के आधिकारिक रूप से सक्रिय होने के बावजूद जलाशयों का इस तरह खाली रहना आने वाले समय के लिए एक बड़ी चेतावनी है। यदि आने वाले दिनों में मूसलाधार और लगातार बारिश नहीं होती है और मानसून ने अपनी पूरी रफ्तार नहीं पकड़ी, तो राजस्थान में पेयजल आपूर्ति से लेकर आगामी बुवाई सीजन तक के लिए जल संकट बेहद विकराल रूप ले सकता है।\n\nइसका आप पर असर\nयह जल संकट सीधे तौर पर राज्य के आम नागरिकों को प्रभावित करेगा:\n\n• राजस्थान में: जल स्तर में लगातार हो रही गिरावट के कारण आने वाले महीनों में पेयजल की भारी किल्लत का सामना करना पड़ सकता है, जिससे दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित होगा।\n\n• किसानों के लिए: बांधों में पर्याप्त पानी नहीं होने से आगामी कृषि सीजन के लिए सिंचाई का पानी मिलना मुश्किल हो जाएगा, जिससे फसलों की पैदावार और किसानों की आय पर सीधा असर पड़ेगा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. राजस्थान के कितने बांध पूरी तरह से सूखे पड़े हैं?\nवर्तमान आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान के कुल 693 बांधों में से 283 बांध पूरी तरह से खाली हो चुके हैं और उनमें पानी की एक बूंद भी नहीं बची है।\n\n2. पिछले साल की तुलना में राजस्थान के बांधों में जल स्तर कितना कम हुआ है?\nपिछले वर्ष 21 जुलाई को राज्य के बांधों में 68.49 प्रतिशत पानी था, जबकि इस बार इसी तारीख को यह स्तर गिरकर मात्र 45.32 प्रतिशत ही रह गया है।\n\n3. राजस्थान का कौन सा क्षेत्र जल संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित है?\nजोधपुर संभाग की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां के जलाशयों में महज 17.50 प्रतिशत पानी ही शेष बचा है। इसके बाद भरतपुर संभाग में भी केवल 25.45 प्रतिशत पानी है।\n\n4. जयपुर की लाइफलाइन माने जाने वाले बीसलपुर बांध की क्या स्थिति है?\nबीसलपुर बांध में फिलहाल 66.14 प्रतिशत पानी बचा हुआ है। पिछले साल यह बांध भारी बारिश के कारण तीन बार छलक गया था, लेकिन इस बार इसमें कोई खास नया पानी नहीं आया है।",
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  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-07-22",
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    "राजस्थान जल संकट",
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