राजस्थान में पंचायती राज चुनाव 2026 की बिसात बिछी, प्रधान पदों की आरक्षण लॉटरी के बाद गांवों में सियासी पारा चढ़ा राजस्थान में निकाय चुनाव संपन्न होने के बाद अब पंचायती राज चुनाव 2026 की सरगर्मियां तेज हो गई हैं, जहां बुधवार को आरक्षण लॉटरी के जरिए सभी श्रेणियों और 50 फीसदी महिला कोटे की स्थिति साफ कर दी गई। राजस्थान में स्थानीय निकाय चुनावों की प्रक्रिया लगभग पूरी होने के तुरंत बाद अब चुनावी गहमागहमी देहात की ओर मुड़ चुकी है। पंचायती राज चुनाव 2026 के औपचारिक शंखनाद से पहले बुधवार का दिन राज्य की ग्रामीण राजनीति के लिहाज से बेहद अहम साबित हुआ। जिला मुख्यालयों पर आयोजित आधिकारिक प्रक्रियाओं के दौरान प्रधान पदों के आरक्षण की लॉटरी निकाली गई, जिससे विभिन्न पंचायत समितियों का सियासी समीकरण पूरी तरह स्पष्ट हो गया है। जयपुर जिले की 22 पंचायत समितियों की स्थिति राजधानी जयपुर जिले की कुल 22 पंचायत समितियों में प्रधान पदों के लिए आरक्षण तय कर दिया गया है। इस निर्धारण के साथ ही ग्रामीण इलाकों में चुनावी दावेदारों की स्थिति भी स्पष्ट हो गई है। जयपुर के इन 22 पदों में से 4 पद अनुसूचित जाति यानी एससी, 3 पद अनुसूचित जनजाति यानी एसटी, 4 पद अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी और 11 पद सामान्य वर्ग के लिए तय किए गए हैं। नीति के अनुसार कुल पदों में से 50 प्रतिशत पद महिला उम्मीदवारों के लिए आरक्षित रखे गए हैं। एससी और एसटी वर्ग के लिए आरक्षित सीटें जयपुर जिले में अनुसूचित जाति वर्ग के लिए कुल चार पंचायत समितियां निर्धारित की गई हैं, जिनमें कोटखावदा, तूंगा, रामपुरा डाबड़ी और आंधी शामिल हैं। इनमें से रामपुरा डाबड़ी और कोटखावदा के प्रधान पद अनुसूचित जाति की महिला उम्मीदवारों के लिए तय हुए हैं। दूसरी तरफ अनुसूचित जनजाति वर्ग के हिस्से में तीन पंचायत समितियां आई हैं, जिनमें चौमूं, अमरसर और किशनगढ़ रेनवाल शामिल हैं। अमरसर पंचायत समिति का प्रधान पद अनुसूचित जनजाति की महिला के लिए आरक्षित घोषित किया गया है। ओबीसी और सामान्य वर्ग की पंचायत समितियों का ब्योरा अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए जोबनेर, माधोराजपुरा, मौजमाबाद और सांगानेर पंचायत समितियां आरक्षित की गई हैं। इस वर्ग की सीटों में से मौजमाबाद और जोबनेर के पद ओबीसी महिला के लिए सुरक्षित रखे गए हैं। इसके अलावा 11 पंचायत समितियां सामान्य वर्ग के खाते में गई हैं, जिनमें गोविंदगढ़, जालसू, चाकसू, सांभरलेक, जमवारामगढ़, दूदू, आमेर, झोटवाड़ा, शाहपुरा, बस्सी और फागी शामिल हैं। सामान्य वर्ग की इन सीटों में से गोविंदगढ़, जालसू, झोटवाड़ा, आमेर, चाकसू और दूदू के प्रधान पद सामान्य वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। इन घोषणाओं के बाद अब गांवों में उम्मीदवारी को लेकर बैठकों का दौर शुरू हो चुका है। राज्यभर की 457 पंचायत समितियों में आरक्षण का गणित पूरे प्रदेश के स्तर पर बात करें तो कुल 457 पंचायत समितियों के प्रधान पदों के लिए आरक्षण का खाका खींचा गया। राज्यव्यापी कोटे के तहत अनुसूचित जाति वर्ग के हिस्से में 79 पद आए हैं, जबकि अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए 93 पद आरक्षित किए गए हैं। अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए करीब 56 पद निर्धारित किए गए हैं। शेष बचे लगभग 228 से 229 पद ओपन यानी सामान्य वर्ग की श्रेणी में रखे गए हैं। ग्रामीण सत्ता में आधी आबादी की मजबूत भागीदारी पंचायती राज संस्थाओं में लागू 50 प्रतिशत महिला आरक्षण नियम के कारण इस बार ग्रामीण सरकार में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बेहद व्यापक रहने वाला है। प्रदेश में चुने जाने वाले कुल 1.55 लाख ग्रामीण जन-प्रतिनिधियों में से 77 हजार से अधिक सीटों पर केवल महिलाएं ही काबिज होंगी। आरक्षण का यह नियम एससी, एसटी, ओबीसी और सामान्य वर्ग सभी श्रेणियों पर समान रूप से लागू है, जहां प्रत्येक वर्ग के आधे पदों पर महिला नेतृत्व तय किया गया है। इसका आप पर असर पंचायती राज संस्थाओं में आरक्षण तय होने से ग्रामीण इलाकों में स्थानीय नेतृत्व और जन-प्रतिनिधित्व का ढांचा पूरी तरह बदल जाएगा। • भारत में: स्थानीय निकायों में पचास प्रतिशत महिला आरक्षण जमीनी स्तर पर लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के लिए अन्य राज्यों के सामने भी एक स्पष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है। इस व्यवस्था से ग्रामीण विकास की प्राथमिकताओं में महिला प्रतिनिधियों की भूमिका अधिक प्रभावी हो जाती है। • राजस्थान में: राज्य की 457 पंचायत समितियों में 77 हजार से अधिक पदों पर महिलाएं चुनी जाएंगी, जिससे गांवों की सरकार में पहली बार इतना बड़ा महिला नेतृत्व देखने को मिलेगा। जो उम्मीदवार चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे, उन्हें अब अपनी पंचायत समिति की आरक्षित श्रेणी के अनुसार अपनी दावेदारी तय करनी होगी। • मतदाताओं के लिए: ग्रामीणों को अपने वार्डों और पंचायत समितियों में नए सामाजिक वर्गों तथा महिला प्रतिनिधियों को चुनने का सीधा अवसर मिलेगा। इससे स्थानीय समस्याओं जैसे पानी, सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं के समाधान में विविधता आएगी। • उम्मीदवारों के लिए: जिन सीटों पर आरक्षण श्रेणी बदल गई है, वहां पूर्व दावेदारों को अपनी योजना बदलनी पड़ेगी या अपनी जगह परिवार की महिला सदस्यों को आगे लाना होगा। चुनाव की तारीखों से पहले अब गांवों में बैठकों और प्रचार का सिलसिला शुरू हो जाएगा। ऐसा क्यों हुआ शहरी निकाय चुनाव समाप्त होने के बाद ग्रामीण स्तर की सरकार चुनने के लिए प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू की गई है। चुनाव से पहले वैधानिक नियमों के तहत वार्डवार और पदवार आरक्षण तय करना अनिवार्य होता है। • कानूनी अनिवार्यता: पंचायती राज अधिनियम के तहत हर चुनाव से पहले चक्रानुक्रम और जनसंख्या अनुपात के आधार पर सीटों का आरक्षण तय किया जाता है। जिला मुख्यालयों पर बुधवार को लॉटरी प्रक्रिया पूरी कर सभी वर्गों और महिलाओं की स्थिति सार्वजनिक की गई। • निकाय चुनावों का समापन: राज्य में शहरी निकायों के चुनाव लगभग पूरे हो चुके हैं, जिससे प्रशासनिक तंत्र अब ग्रामीण चुनावों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। इसी क्रम में शहरी चुनावी हलचल अब देहात के इलाकों में स्थानांतरित हो चुकी है। • समान प्रतिनिधित्व का लक्ष्य: एससी, एसटी और ओबीसी वर्गों को उनकी जनसंख्या के अनुसार सत्ता में भागीदारी देने और आधी आबादी यानी महिलाओं को बराबरी का हक देने के लिए यह लॉटरी आयोजित की गई। इसके आधार पर अब निर्वाचन आयोग आगे की चुनाव प्रक्रियाओं को पूरा करेगा। सवाल-जवाब 1. राजस्थान में बुधवार को किस बात की लॉटरी निकाली गई? जिला मुख्यालयों पर पंचायती राज चुनाव 2026 के लिए पंचायत समितियों के प्रधान पदों के आरक्षण की लॉटरी निकाली गई। 2. जयपुर जिले में प्रधान पदों का आरक्षण किस प्रकार निर्धारित हुआ? जयपुर की 22 पंचायत समितियों में से 4 पद एससी, 3 पद एसटी, 4 पद ओबीसी और 11 पद सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित किए गए हैं। 3. राज्यभर में कुल कितनी पंचायत समितियों के लिए आरक्षण तय हुआ? पूरे राजस्थान में 457 पंचायत समितियों के प्रधान पदों के लिए आरक्षण का ढांचा तैयार किया गया। 4. प्रदेश स्तर पर एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग को कितनी सीटें मिली हैं? राज्य स्तर पर एससी वर्ग को 79, एसटी वर्ग को 93 और ओबीसी वर्ग को करीब 56 पद मिले हैं, जबकि लगभग 228 से 229 पद ओपन वर्ग में हैं। 5. पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए कितनी सीटें आरक्षित हैं? पंचायती राज संस्थाओं में 50 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू है, जिसके तहत 1.55 लाख कुल प्रतिनिधियों में से 77 हजार से अधिक पदों पर महिलाएं चुनी जाएंगी। https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-men-panchayati-raj-chunava-2026-ki-bisata-bichhi-pradhan-padon-ki-arakshana-lotari-ke-bada-ganvon-men-siyasi-para-charha-37165 TrendKia — Har trend, sabse pehle.