# राजस्थान में परिवहन ढांचे का कायाकल्प, 35 ड्राइविंग ट्रैक ऑटोमेटेड करने और रोडवेज में 900 नई बसें जोड़ने की तैयारी

> राजस्थान में सड़क सुरक्षा बढ़ाने के लिए सभी 35 ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक को हाईटेक निगरानी से लैस किया जा रहा है, जिनमें से 23 ट्रैक पहले ही शुरू हो चुके हैं। इसके साथ ही रोडवेज बेड़े में 900 नई इलेक्ट्रिक, एसी और ब्लू लाइन बसें शामिल करने और प्रमुख जिलों के बस स्टैंड सुधारने पर तेजी से काम चल रहा है।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-10-03 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-men-parivahana-dhanche-ka-kayakalpa-35-draivinga-traika-tometeda-karane-aura-rodaveja-men-900-nai-basen-jorane-ki-taiyar-42153 · **Language:** Hindi
**Tags:** राजस्थान रोडवेज, ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक, ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट, सार्वजनिक परिवहन, सड़क सुरक्षा, इलेक्ट्रिक बसें, बस स्टैंड जीर्णोद्धार

राजस्थान सरकार अपने सार्वजनिक परिवहन तंत्र और सड़क सुरक्षा ढांचे को आधुनिक बनाने के लिए व्यापक स्तर पर सुधार कर रही है। प्रदेश में वाहन चालकों की दक्षता जांचने से लेकर आम मुसाफिरों के सफर को सुगम बनाने तक, कई अहम परियोजनाओं को धरातल पर उतारा जा रहा है। राज्य में कुल 35 ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक तैयार किए जा रहे हैं, जिन्हें पूरी तरह ऑटोमेटेड बनाया जाना है। इनमें से 23 स्थानों पर यह स्वचालित व्यवस्था पहले ही शुरू होकर सुचारू रूप से काम करने लगी है। नई व्यवस्था लागू होने से ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में मानवीय दखल खत्म होगा और सेंसर व कैमरों के जरिए निष्पक्ष मूल्यांकन संभव हो सकेगा।

 सड़क पर उतरने वाले नए चालकों की योग्यता परखने के साथ-साथ राज्य परिवहन व्यवस्था के बुनियादी ढांचे को भी नया रूप दिया जा रहा है। राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम के बेड़े को मजबूत करने के लिए करीब 900 नई बसों को जोड़ने की योजना अब अपने आखिरी दौर में पहुंच चुकी है। इन बसों के आने से न केवल लंबे और ग्रामीण रूटों पर बसों की कमी दूर होगी, बल्कि यात्रियों को आधुनिक और आरामदायक सफर का विकल्प भी मिलेगा।

 

## सेंसर आधारित 35 ट्रैक से परखी जाएगी ड्राइविंग दक्षता

सड़क हादसों में कमी लाने और सुरक्षित ड्राइविंग संस्कृति विकसित करने के मकसद से राज्य के सभी 35 ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक को तकनीक से जोड़ा जा रहा है। अब तक 23 प्रमुख केंद्रों पर ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक पूरी तरह सक्रिय किए जा चुके हैं, जबकि शेष 12 केंद्रों पर काम तेजी से पूरा किया जा रहा है। पारंपरिक व्यवस्था में अक्सर परीक्षक के व्यक्तिगत निर्णय पर निर्भरता रहती थी, लेकिन इस स्वचालित प्रणाली में सेंसर, हाई-डेफिनिशन कैमरे और कंप्यूटर आधारित एल्गोरिदम आवेदक के ड्राइविंग कौशल का सटीक विश्लेषण करते हैं।

 इस आधुनिक प्रणाली का मुख्य उद्देश्य ड्राइविंग परीक्षा में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करना और किसी भी तरह की धांधली या मानवीय हस्तक्षेप की गुंजाइश को समाप्त करना है। वाहन को रिवर्स करने, ढलान पर रोकने, आठ के आकार में मोड़ने और आपातकालीन ब्रेक लगाने जैसे कठिन परीक्षणों का मूल्यांकन पूरी तरह कंप्यूटर स्क्रीन पर दर्ज होता है। निर्धारित मानकों पर खरा उतरने वाले आवेदकों को ही ड्राइविंग लाइसेंस मिल सकेगा, जिससे अकुशल चालकों के कारण होने वाली सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी रोक लगेगी।

 

## रोडवेज बेड़े में शामिल होंगी 900 अत्याधुनिक बसें

राजस्थान रोडवेज की परिवहन क्षमता को विस्तार देने और पुरानी खटारा बसों को चरणबद्ध तरीके से हटाने के लिए करीब 900 नई बसें बेड़े में लाई जा रही हैं। यह पूरी खरीद प्रक्रिया अब अंतिम चरण में है और जल्द ही ये बसें सड़कों पर दौड़ती नजर आएंगी। इस नए बेड़े में विभिन्न श्रेणियों के यात्रियों की जरूरतों का विशेष ख्याल रखा गया है, जिसमें आधुनिक वातानुकूलित बसें, सामान्य दूरी के लिए ब्लू लाइन बसें और पर्यावरण के अनुकूल चलने वाली इलेक्ट्रिक बसें शामिल की गई हैं।

 इलेक्ट्रिक बसों को सार्वजनिक सेवा में उतारने से राज्य में हरित ऊर्जा और प्रदूषण मुक्त परिवहन को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। वहीं, दूरदराज के क्षेत्रों और अंतरराज्यीय मार्गों पर ब्लू लाइन और एसी बसों के संचालन से दैनिक यात्रियों, नौकरीपेशा लोगों और पर्यटकों को सुरक्षित, समयबद्ध और आरामदायक परिवहन सेवा मिल सकेगी। इससे रोडवेज की आमदनी में सुधार होने के साथ-साथ निजी ऑपरेटरों पर यात्रियों की निर्भरता भी घटेगी।

 

## अजमेर, कोटा और उदयपुर समेत कई जिलों में सुधरेंगे बस स्टैंड

सड़कों और बसों के साथ-साथ यात्री सुविधाओं के प्रमुख केंद्र यानी बस स्टैंडों के पुनर्विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अजमेर, भरतपुर, दूदू, कोटा, उदयपुर और अलवर सहित कई प्रमुख जिला मुख्यालयों और कस्बों में आधुनिक बस स्टैंडों के निर्माण और पुराने भवनों के जीर्णोद्धार का काम प्रगति पर है। कई स्थानों पर वर्षों पुराने बुनियादी ढांचे को पूरी तरह तोड़कर नए सिरे से तैयार किया जा रहा है, ताकि बढ़ते यात्री दबाव को संभाला जा सके।

 इन बस स्टैंडों पर यात्रियों की सहूलियत के लिए आधुनिक प्रतीक्षालय, साफ-सुथरे प्रसाधन, इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले बोर्ड, सुगम टिकट काउंटर और बसों के व्यवस्थित आवागमन के लिए चौड़े प्लेटफॉर्म तैयार किए जा रहे हैं। अलवर, कोटा और उदयपुर जैसे पर्यटन व औद्योगिक दृष्टि से महत्वपूर्ण शहरों में बेहतर बस टर्मिनल बनने से स्थानीय व्यापार और आवागमन को नई गति मिलेगी।

 

## सड़क सुरक्षा और जनसुविधाओं पर केंद्रित एकीकृत रणनीति

राजस्थान में परिवहन सुधारों की यह पूरी कवायद एक एकीकृत दृष्टिकोण के तहत आगे बढ़ाई जा रही है। एक तरफ जहां ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक के माध्यम से लाइसेंसिंग प्रक्रिया को सख्त और पारदर्शी बनाकर सड़कों को सुरक्षित करने का प्रयास हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ 900 नई बसों और आधुनिक टर्मिनलों के जरिए सार्वजनिक परिवहन को आम नागरिक के लिए पहली पसंद बनाने पर जोर है। जब सुरक्षित चालक, आधुनिक बसें और सुविधाजनक बस स्टैंड एक साथ काम करेंगे, तो प्रदेश की परिवहन व्यवस्था राष्ट्रीय स्तर पर एक मानक स्थापित करेगी।

## इसका आप पर असर
राजस्थान में रहने वाले आम नागरिकों और मुसाफिरों के लिए ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने से लेकर दैनिक आवागमन तक कई बड़े बदलाव होने जा रहे हैं।

- **राजस्थान में:** अब राज्य के किसी भी जिले में ड्राइविंग टेस्ट पास करने के लिए वास्तविक कौशल दिखाना अनिवार्य होगा। पूरी तरह सेंसर और कैमरे पर आधारित व्यवस्था होने से दलालों या सिफारिश के जरिए अनुचित तरीके से लाइसेंस हासिल करने के रास्ते बंद हो जाएंगे।
- **दैनिक यात्रियों के लिए:** रोडवेज बेड़े में 900 नई बसें आने से ग्रामीण और अंतरराज्यीय रूटों पर बसों के फेरे बढ़ेंगे। एसी, इलेक्ट्रिक और ब्लू लाइन बसों की उपलब्धता बढ़ने से यात्रियों को निजी बसों पर निर्भर रहने की मजबूरी खत्म होगी।
- **जिला मुख्यालयों में:** अजमेर, कोटा, भरतपुर, अलवर, दूदू और उदयपुर के बस स्टैंडों पर यात्रियों को बेहतर प्रतीक्षालय और साफ प्रसाधन मिलेंगे। आधुनिक बस टर्मिनलों के निर्माण से बस पकड़ने और आवागमन के दौरान होने वाली असुविधाओं से मुक्ति मिलेगी।
- **सड़क सुरक्षा पर:** केवल प्रमाणित चालकों को लाइसेंस मिलने और सड़कों पर नई बसें उतरने से सड़क हादसों में उल्लेखनीय कमी आएगी। सुरक्षित चालन प्रणाली लागू होने से आम जनता का सड़कों पर सफर पहले से अधिक सुरक्षित बन सकेगा।

## ऐसा क्यों हुआ
राजस्थान सरकार ने सड़क हादसों पर नियंत्रण पाने और रोडवेज निगम की गिरती कार्यक्षमता को सुधारने के लिए यह व्यापक आधुनिकीकरण अभियान शुरू किया है। अकुशल चालकों द्वारा फर्जी तरीके से लाइसेंस प्राप्त करने की शिकायतों और पुरानी हो चुकी बसों की कमी को दूर करने के लिए तकनीक आधारित समाधान अपनाया गया है।

- **तकनीकी पारदर्शिता की जरूरत:** पारंपरिक परीक्षण व्यवस्था में मानवीय निगरानी के कारण कई बार अयोग्य चालकों को भी लाइसेंस जारी हो जाते थे। इन कमियों को दूर करने के लिए सभी 35 केंद्रों को सेंसर और कंप्यूटर आधारित स्वचालित प्रणाली से लैस करने का फैसला लिया गया।
- **पुराने बेड़े की समस्या:** राजस्थान रोडवेज की सैकड़ों पुरानी बसें अपनी समयसीमा पूरी कर चुकी थीं, जिससे कई मार्गों पर सेवाएं प्रभावित हो रही थीं। यात्रियों की मांग को पूरा करने और प्रदूषण घटाने के लिए 900 नई पर्यावरण-अनुकूल व एसी बसों की खरीद को अंतिम रूप दिया गया।
- **जर्जर बस अड्डों की स्थिति:** कई जिलों के बस स्टैंड वर्षों से जीर्ण-शीर्ण हालत में थे और बुनियादी यात्री सुविधाओं का अभाव था। क्षेत्रीय आवागमन को गति देने और पर्यटन केंद्रों को आधुनिक ढांचा उपलब्ध कराने के लिए प्रमुख टर्मिनलों के जीर्णोद्धार का काम हाथ में लिया गया।

## सवाल-जवाब

### 1. राजस्थान में कितने ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक को ऑटोमेटेड किया जा रहा है?
प्रदेश के कुल 35 ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक को ऑटोमेटेड किया जा रहा है, जिनमें से 23 ट्रैक पहले ही कार्यशील हो चुके हैं।

### 2. ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक से आवेदकों को क्या फायदा होगा?
इस व्यवस्था से ड्राइविंग टेस्ट में मानवीय हस्तक्षेप खत्म होगा और सेंसर व कैमरों की मदद से निष्पक्ष व पारदर्शी मूल्यांकन सुनिश्चित होगा।

### 3. राजस्थान रोडवेज के बेड़े में कितनी नई बसें शामिल की जा रही हैं?
राजस्थान रोडवेज में करीब 900 नई बसें शामिल करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है, जिनमें एसी, ब्लू लाइन और इलेक्ट्रिक बसें शामिल हैं।

### 4. किन-किन शहरों के बस स्टैंड का निर्माण और जीर्णोद्धार किया जा रहा है?
अजमेर, भरतपुर, दूदू, कोटा, उदयपुर और अलवर सहित कई प्रमुख जिला मुख्यालयों और कस्बों के बस स्टैंडों का निर्माण व नवीनीकरण चल रहा है।

### 5. नई बसों के आने से सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में क्या सुधार होगा?
नई बसों के जुड़ने से रोडवेज की परिवहन क्षमता बढ़ेगी, यात्रियों को विभिन्न श्रेणियों की आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी और पर्यावरण अनुकूल इलेक्ट्रिक बसों को बढ़ावा मिलेगा।

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