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  "type": "article",
  "title": "राजस्थान में पंचायत चुनाव का अनोखा मामला, सरपंच पद के प्रत्याशी को मिला सिर्फ एक वोट",
  "summary": "राजसमंद जिले की खमनोर ग्राम पंचायत में सरपंच चुनाव लड़ने वाले त्रिलोक माली को महज एक वोट मिला। उन्होंने अपने मामा के समर्थन में डमी प्रत्याशी के रूप में पर्चा भरा था और समय पर नाम वापस नहीं ले सके थे।",
  "content": "राजस्थान के पंचायत चुनावों में कई हैरान करने वाले और अनोखे सियासी घटनाक्रम देखने को मिल रहे हैं। राजसमंद जिले की खमनोर ग्राम पंचायत से सरपंच पद के चुनाव का ऐसा ही एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है, जहां चुनाव मैदान में उतरे एक प्रत्याशी के खाते में कुल जमा सिर्फ एक वोट दर्ज हुआ। ताज्जुब की बात यह रही कि प्रत्याशी ने खुद भी अपने पक्ष में मतदान नहीं किया था और वह एक संयुक्त परिवार में रहते हैं। इस अप्रत्याशित चुनावी परिणाम के बाद क्षेत्र में कई तरह की बातें होने लगीं और मतगणना की आधिकारिक ए-शीट सामने आते ही मामला चारों तरफ चर्चा का विषय बन गया।\n\nनामांकन वापसी की समय सीमा चूकने से फंसा पेंच\nखमनोर में गुलाबजल और शरबत का व्यापार करने वाले त्रिलोक माली ने इस चुनावी मुकाबले में भाग लिया था। उन्होंने चुनावी मैदान में डमी उम्मीदवार के तौर पर अपना पर्चा दाखिल किया था। उनका मुख्य मकसद अपने सगे मामा प्रेमशंकर माली के चुनावी अभियान को मजबूती देना और जरूरत पड़ने पर उनके साथ डटे रहना था। योजना के मुताबिक त्रिलोक माली को बाद में अपना नामांकन वापस लेना था, लेकिन वे तय समय सीमा के भीतर संबंधित कार्यालय नहीं पहुंच पाए। नाम वापसी का समय निकल जाने के कारण उनका नाम आधिकारिक मतपत्र और प्रत्याशियों की अंतिम सूची में यथावत दर्ज रह गया, जिसके चलते चुनाव लड़ना उनकी मजबूरी बन गया।\n\nए-शीट के सार्वजनिक होते ही शुरू हुई चर्चाएं\nखमनोर ग्राम पंचायत में सरपंच पद की कुर्सी के लिए कुल 7 उम्मीदवारों के बीच मुकाबला हुआ था। मतदान संपन्न होने के बाद जब मतों की गिनती पूरी हुई, तो वोटों के आधिकारिक आंकड़े दर्शाने वाली ए-शीट पर सभी की नजरें टिक गईं। इस सूची में त्रिलोक माली के नाम के आगे केवल 1 वोट दर्ज दिखाई दिया। संयुक्त परिवार से ताल्लुक रखने वाले प्रत्याशी को सिर्फ एक वोट मिलने की बात जैसे ही सार्वजनिक हुई, लोगों में हैरानी फैल गई। कई लोग यह सवाल उठाने लगे कि क्या उनके अपने कुनबे या घर के किसी सदस्य ने भी उन्हें समर्थन नहीं दिया।\n\nखुद प्रत्याशी ने भी नहीं दिया था अपना वोट\nइस पूरे मामले पर स्थिति साफ करते हुए त्रिलोक माली ने बताया कि उन्होंने स्वयं भी अपने चुनाव चिह्न या नाम के आगे वोट नहीं डाला था। उनका पूरा ध्यान अपने मामा के पक्ष में मतदान कराने और उन्हें जिताने पर केंद्रित था। त्रिलोक का मानना है कि मतगणना में जो एक वोट उनके पक्ष में निकला है, वह भी संभवतः किसी मतदाता द्वारा अनजाने में या भूलवश उनके नाम पर पड़ गया होगा। डमी प्रत्याशी होने की पृष्ठभूमि से अनजान लोगों के लिए यह नतीजा किसी बड़े कौतूहल से कम नहीं रहा।\n\nखमनोर पंचायत के चुनावी नतीजों का पूरा गणित\nइस चुनाव में जीत दर्ज करने वाले मुख्य उम्मीदवार जमनालाल माली रहे, जिन्हें कुल 933 वोट मिले और वे विजयी घोषित किए गए। दूसरे स्थान पर त्रिलोक माली के मामा प्रेमशंकर माली रहे, जिन्होंने 806 मत हासिल किए। वहीं तीसरे पायदान पर तनसुख सोनी रहे, जिनके खाते में 759 वोट आए। सात प्रत्याशियों वाले इस मुकाबले में जीत-हार के समीकरणों के बीच त्रिलोक माली को मिला अकेला वोट सबसे ज्यादा आकर्षण और बातचीत की वजह बन गया। अब खमनोर में नवनिर्वाचित सरपंच के साथ-साथ एक वोट हासिल करने वाले इस डमी प्रत्याशी के नाम की भी खासी चर्चा हो रही है।\n\nइसका आप पर असर\nयह घटना चुनावी प्रक्रियाओं में समय प्रबंधन और डमी नामांकन के कानूनी नियमों की अहमियत को रेखांकित करती है।\n\n• उम्मीदवारों के लिए: चुनावी नियमों के तहत नाम वापसी के निर्धारित समय का ध्यान रखना बेहद आवश्यक होता है। यदि समय पर नाम वापस नहीं लिया गया तो मतपत्र पर नाम दर्ज रह जाता है और अनावश्यक चुनावी औपचारिकताएं झेलनी पड़ती हैं।\n• मतदाताओं के लिए: मतपत्र पर उम्मीदवारों के नाम और चुनाव चिह्न को ध्यान से देखना जरूरी होता है। थोड़ी सी असावधानी से वोट किसी ऐसे प्रत्याशी को जा सकता है जो वास्तव में मुकाबला लड़ ही नहीं रहा हो।\n• राजसमंद क्षेत्र में: स्थानीय चुनावी माहौल में डमी प्रत्याशियों की रणनीति को लेकर चर्चाएं बढ़ गई हैं। ग्रामीण अब ग्राम पंचायत स्तर की चुनावी प्रक्रियाओं और नियमों को अधिक गंभीरता से समझ रहे हैं।\n• आम नागरिकों के लिए: यह मामला लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक वोट की कीमत और गिनती की पारदर्शिता को दर्शाता है। एक-एक वोट का सटीक रिकॉर्ड आधिकारिक दस्तावेजों में दर्ज होकर सार्वजनिक होता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह असामान्य स्थिति डमी नामांकन दाखिल करने और उसके बाद नाम वापसी की तय समय सीमा छूट जाने के कारण पैदा हुई। प्रत्याशी का मुख्य उद्देश्य केवल अपने परिजन को चुनावी प्रक्रिया में बैकअप प्रदान करना था।\n\n• डमी नामांकन की रणनीति: मुख्य प्रत्याशी के नामांकन में किसी तकनीकी खामी या रद्दीकरण की आशंका से बचने के लिए परिवार के सदस्य का डमी पर्चा भरवाया गया था। इसका मकसद केवल सुरक्षा विकल्प तैयार रखना था, स्वतंत्र चुनाव लड़ना नहीं।\n• समय सीमा चूकना: प्रत्याशी निर्धारित समय पर निर्वाचन कार्यालय नहीं पहुंच पाए और नाम वापस लेने की औपचारिकता पूरी नहीं हो सकी। इस कारण निर्वाचन अधिकारी ने उनका नाम आधिकारिक सूची से नहीं हटाया।\n• मतपत्र पर मौजूदगी और भूलवश मतदान: मतपत्र में नाम रह जाने के कारण वे तकनीकी रूप से प्रत्याशी बने रहे। प्रत्याशी के अपने अनुसार किसी अज्ञात मतदाता ने गलती से उनके नाम पर मुहर लगा दी, जिससे उनके खाते में एक वोट दर्ज हुआ।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. खमनोर ग्राम पंचायत के चुनाव में किस प्रत्याशी को सिर्फ एक वोट मिला?\nखमनोर ग्राम पंचायत में सरपंच पद के प्रत्याशी त्रिलोक माली को केवल एक वोट मिला।\n\n2. त्रिलोक माली ने सरपंच पद के लिए चुनाव क्यों लड़ा था?\nउन्होंने अपने मामा प्रेमशंकर माली के समर्थन में एक डमी प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल किया था।\n\n3. त्रिलोक माली का नाम मतपत्र से क्यों नहीं हट सका?\nवे निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना नामांकन फॉर्म वापस लेने नहीं पहुंच सके थे।\n\n4. खमनोर में सरपंच पद के चुनाव में किसने जीत हासिल की?\nजमनालाल माली ने 933 वोट हासिल करके सरपंच पद का चुनाव जीता।\n\n5. इस चुनाव में दूसरे और तीसरे स्थान पर कौन से प्रत्याशी रहे?\nप्रेमशंकर माली 806 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर और तनसुख सोनी 759 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।\n\n6. खमनोर ग्राम पंचायत में सरपंच पद के लिए कुल कितने उम्मीदवार मैदान में थे?\nखमनोर ग्राम पंचायत में सरपंच पद के लिए कुल 7 प्रत्याशी मैदान में उतरे थे।",
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  "publishedAt": "2026-10-31",
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