राजस्थान में पंचायत चुनाव की आरक्षण लॉटरी टलने से गरमाई सियासत, कांग्रेस ने भजनलाल सरकार को घेरा राजस्थान में पंचायती राज चुनावों के लिए होने वाली वार्ड और आरक्षण लॉटरी प्रक्रिया को स्थगित कर दिया गया है, जिस पर कांग्रेस ने तीखा हमला करते हुए भाजपा पर चुनाव से भागने का आरोप लगाया है। राजस्थान में नगरीय निकाय चुनावों की हलचल के बीच अब ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाले पंचायती राज चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है। शहरों के स्थानीय निकायों में मतदान और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद अब ग्रामीण इलाकों की बारी है। हालांकि, पंचायत चुनावों के आयोजन से ठीक पहले होने वाली सीटों के आरक्षण और वार्डों की लॉटरी निकालने की प्रक्रिया को आगे खिसका दिया गया है। इस स्थगन ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस प्रशासनिक निर्णय को लेकर राज्य की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी सरकार पर जोरदार हमला बोला है और आरोप लगाया है कि भाजपा अपनी संभावित चुनावी पराजय के डर से मैदान छोड़कर भागने की कोशिश कर रही है। दूसरी तरफ, राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि उसकी कोशिश आगामी 15 नवंबर से पहले हर हाल में पंचायत चुनाव संपन्न कराने की है। आरक्षण लॉटरी स्थगित करने का मुख्य कारण पंचायती राज चुनावों के लिए पहले से निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 17 और 18 सितंबर को राज्यभर में आरक्षण और वार्डों की लॉटरी निकाली जानी थी। इस योजना के तहत, 17 सितंबर को जिला स्तर पर जिला परिषद के सदस्यों, पंचायत समितियों के प्रमुखों और उनके वार्डों के लिए आरक्षण का निर्धारण करने हेतु लॉटरी निकाली जानी थी। इसके ठीक अगले दिन यानी 18 सितंबर को उपखंड स्तर पर ग्राम पंचायतों के सरपंचों और उनके पंचों के वार्डों के लिए लॉटरी प्रक्रिया पूरी की जानी थी। लेकिन ऐन वक्त पर पंचायती राज विभाग ने राज्य निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर इस पूरी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का आग्रह किया। विभाग ने तर्क दिया कि इसी समय अवधि में नगरीय निकाय चुनावों के अध्यक्ष और प्रमुख पदों के लिए दाखिल नामांकन पत्रों की जांच, नाम वापसी और उम्मीदवारों को चुनाव चिह्न आवंटित करने का बेहद संवेदनशील कार्य होना है। कलेक्टर्स की व्यस्तता और प्रशासनिक संकट इस निर्णय के पीछे का एक मुख्य कारण जिला कलेक्टर्स की व्यस्तता भी है। नगरीय निकायों में प्रमुखों के चुनाव 21 और 22 सितंबर को होने हैं। चूंकि नगरीय निकाय चुनाव और पंचायती राज चुनाव दोनों में ही जिला कलेक्टर की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है और वे ही जिले के मुख्य निर्वाचन अधिकारी होते हैं, इसलिए कलेक्टर्स ने सरकार से लॉटरी प्रक्रिया को स्थगित करने का अनुरोध किया था। कलेक्टर्स का कहना था कि दोनों महत्वपूर्ण कार्य एक साथ होने से प्रशासनिक अव्यवस्था फैल सकती है। इस व्यावहारिक समस्या को देखते हुए राज्य निर्वाचन आयोग ने 17 और 18 सितंबर को होने वाली लॉटरी की पूरी प्रक्रिया को फिलहाल टाल दिया है। हालांकि, आयोग ने अभी तक इस प्रक्रिया को दोबारा शुरू करने के लिए किसी नई तारीख की घोषणा नहीं की है, जिससे अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। चुनाव आयोग की नवंबर मध्य तक की समयसीमा इन सब विवादों के बीच राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने माना कि पंचायत चुनाव कराने के लिए आयोग के पास अब समय काफी कम बचा है, लेकिन इसके बावजूद आयोग का पूरा प्रयास रहेगा कि 15 नवंबर से पहले सभी चरणों के चुनाव सफलतापूर्वक संपन्न करा लिए जाएं। इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए राज्य निर्वाचन आयोग ने राज्य के सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को मतदाता सूचियों को पूरी तरह से दुरुस्त और अद्यतन करने के कड़े निर्देश दिए हैं। आयोग ने जिला अधिकारियों को साफ कहा है कि जैसे ही नगरीय निकाय चुनाव की प्रक्रिया समाप्त होती है, वे बिना किसी देरी के पंचायती राज चुनावों की तैयारियों को युद्ध स्तर पर तेज कर दें ताकि तय समयसीमा के भीतर मतदान कराया जा सके। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा का तीखा हमला प्रशासनिक स्तर पर लिए गए इस फैसले के बाद राजस्थान कांग्रेस फिर से सरकार के खिलाफ पूरी तरह से हमलावर हो गई है। राजस्थान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इस मुद्दे को लेकर भजनलाल सरकार पर तीखा निशाना साधा है। डोटासरा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर निर्वाचन आयोग के स्थगन आदेश की प्रति साझा करते हुए लिखा कि नगरीय निकाय चुनावों में शहरी वार्डों में जो भाजपा की किरकिरी हुई है और राज्य में उनका जो जनाधार लगातार खिसक रहा है, उससे भाजपा पूरी तरह से बौखला गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा अब ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाले पंचायत चुनावों का सामना करने से बचने के नए-नए रास्ते तलाश रही है। डोटासरा ने भाजपा की चुनावी नीतियों पर उठाए सवाल गोविंद सिंह डोटासरा ने सरकार की नीतियों पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि 17 और 18 सितंबर को प्रस्तावित आरक्षण और लॉटरी की प्रक्रिया को अचानक स्थगित करने का आदेश इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि भाजपा लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव लड़ने से घबरा रही है और अपनी संभावित हार को टालने की कोशिश में है। डोटासरा ने तंज कसते हुए कहा कि एक तरफ तो भाजपा देश और प्रदेश में ‘एक राज्य, एक चुनाव’ का भारी ढिंढोरा पीटती है, और दूसरी तरफ उनसे अपनी ही सरकार के कार्यकाल में नगरीय निकायों के साथ पंचायत चुनाव तक ठीक से नहीं करवाए जा रहे हैं। लोकतंत्र को बंधक बनाने का गंभीर आरोप कांग्रेस नेता ने ग्रामीण जनता के गुस्से का हवाला देते हुए कहा कि गांवों में किसानों और आम लोगों के बीच सरकार के खिलाफ भारी आक्रोश व्याप्त है। इसी आक्रोश से डरी हुई भाजपा पंचायत चुनावों की मतदान प्रक्रिया तो दूर, उसकी प्रारंभिक तैयारी यानी आरक्षण लॉटरी तक को टालने में लगी हुई है। उन्होंने तीखे सवाल पूछते हुए कहा कि भाजपा आखिर चुनावों से कब तक भागती रहेगी और प्रदेश के लोकतंत्र को कब तक बंधक बनाकर रखेगी? डोटासरा ने अपने बयान के अंत में चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जनता के जनादेश और उनके गुस्से से बचने के लिए प्रशासनिक तारीखों को तो आगे खिसकाया जा सकता है, लेकिन अंततः जनता का सामना करने से नहीं बचा जा सकता। उन्होंने दावा किया कि नगरीय निकाय चुनावों में भाजपा को जो करारा झटका लगा है, उसके बाद अब ग्रामीण क्षेत्रों की जनता भी पंचायतों में भाजपा को सबक सिखाने के लिए पूरी तरह तैयार बैठी है। इसका आप पर असर राजस्थान में पंचायत चुनावों की आरक्षण लॉटरी स्थगित होने का सबसे बड़ा व्यावहारिक असर ग्रामीण मतदाताओं और संभावित उम्मीदवारों की चुनावी तैयारियों पर पड़ेगा, जिन्हें अब अपनी रणनीति बदलने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। • आरक्षण स्थिति में अनिश्चितता: वार्डों और प्रमुख पदों के लिए आरक्षण की स्थिति स्पष्ट नहीं होने से उम्मीदवार असमंजस में हैं। वे यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि उन्हें किस क्षेत्र से चुनाव प्रचार शुरू करना चाहिए। • राजस्थान में विकास कार्यों की धीमी रफ्तार: राजस्थान के गांवों में नई विकास योजनाओं की मंजूरी और बजट आवंटन कुछ समय के लिए अटक सकता है। स्थानीय प्रशासनिक अमला चुनाव तैयारियों में व्यस्त रहेगा जिससे नियमित काम प्रभावित होंगे। • मतदाता सूची में सुधार का मौका: राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूचियों को दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि ग्रामीण क्षेत्र के जो लोग छूट गए थे, वे अभी भी मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वा सकते हैं। • चुनावी खर्च और अनिश्चितता: उम्मीदवारों को अपना जनसंपर्क अभियान पहले की तुलना में अधिक समय तक चलाना पड़ेगा। इससे उनका जमीनी प्रचार का खर्च बढ़ेगा और कार्यकर्ताओं की ऊर्जा बनाए रखने की चुनौती होगी। • प्रशासनिक सेवाओं पर प्रभाव: जिला कलेक्टर्स और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों पर एक साथ दोनों चुनावों का दबाव बढ़ गया है। ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को राजस्व और अन्य सरकारी कार्यों के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ राजस्थान में पंचायत चुनाव की आरक्षण लॉटरी को टालने का मुख्य कारण नगरीय निकाय चुनावों और पंचायती राज चुनावों के कार्यक्रमों का आपस में टकराना है। दोनों ही महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को एक साथ संपन्न कराने में भारी प्रशासनिक संसाधनों और कलेक्टर्स की सक्रिय भागीदारी की आवश्यकता होती है। • जिला कलेक्टर्स की व्यस्तता: नगरीय निकाय प्रमुखों के चुनाव की प्रक्रिया सितंबर के तीसरे सप्ताह में निर्धारित है। जिला कलेक्टर्स इन चुनावों में मुख्य निर्वाचन अधिकारी की भूमिका निभा रहे हैं, जिससे वे लॉटरी प्रक्रिया के लिए समय नहीं निकाल पा रहे थे। • पंचायती राज विभाग का अनुरोध: प्रशासनिक अमले पर काम के भारी दबाव को देखते हुए पंचायती राज विभाग ने चुनाव आयोग को पत्र लिखा था। विभाग ने कलेक्टर्स की असमर्थता का हवाला देते हुए आरक्षण लॉटरी की पूर्व निर्धारित तारीखों को आगे बढ़ाने का आधिकारिक आग्रह किया था। • निकाय चुनावों के महत्वपूर्ण चरण: 17 और 18 सितंबर की अवधि के दौरान नगरीय निकायों में नामांकन पत्रों की जांच और चुनाव चिह्नों के आवंटन जैसे बेहद संवेदनशील काम होने हैं। इन कामों में किसी भी प्रकार की लापरवाही से बचने के लिए प्रशासन ने पंचायत चुनाव की लॉटरी को टालना ही बेहतर समझा। सवाल-जवाब 1. राजस्थान में पंचायत चुनाव की लॉटरी प्रक्रिया को क्यों स्थगित किया गया? नगरीय निकाय चुनावों के दौरान नामांकन पत्रों की जांच, चुनाव चिह्नों के आवंटन और निकाय प्रमुखों के चुनाव होने के कारण जिला कलेक्टर्स की व्यस्तता को देखते हुए इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया है। 2. पंचायत चुनावों की आरक्षण लॉटरी के लिए पहले क्या तारीखें तय की गई थीं? पहले तय कार्यक्रम के अनुसार 17 सितंबर को जिला परिषद एवं पंचायत समितियों और 18 सितंबर को ग्राम पंचायतों व उनके वार्डों के लिए आरक्षण लॉटरी निकाली जानी थी। 3. राज्य निर्वाचन आयोग ने राजस्थान में पंचायत चुनाव कराने की क्या नई समयसीमा तय की है? राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने बताया है कि आयोग 15 नवंबर से पहले पंचायत चुनाव कराने का प्रयास करेगा। 4. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भाजपा सरकार पर क्या आरोप लगाए हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि नगरीय निकायों में खिसकते जनाधार और हार के डर से भाजपा सरकार पंचायत चुनावों से भागने का रास्ता तलाश रही है और इसीलिए प्रक्रिया को टाला जा रहा है। 5. राज्य निर्वाचन आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारियों को क्या नए निर्देश दिए हैं? आयोग ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को मतदाता सूचियों को तुरंत दुरुस्त करने और नगरीय निकाय चुनाव संपन्न होते ही पंचायत चुनावों की तैयारियां तेज करने के निर्देश दिए हैं। https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-men-pnchayata-chunava-ki-arakshana-lotari-talane-se-garamai-siyasata-congress-ne-bhajanlal-sarakara-ko-ghera-32671 TrendKia — Har trend, sabse pehle.