राजस्थान में पंचायत चुनावों से पहले अशोक गहलोत का तीखा हमला, प्रशासनिक मशीनरी और किसान विरोधी बयानों पर उठाए सवाल पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजस्थान में आगामी पंचायत चुनावों को लेकर सत्तारूढ़ दल की नीतियों, चार चरणों वाले चुनावी शेड्यूल और किसानों पर की गई टिप्पणियों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। राजस्थान के सियासी गलियारों में स्थानीय निकाय मतदान संपन्न होने के तुरंत बाद ग्रामीण क्षेत्रों के चुनावी दंगल की हलचल तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य की सत्तासीन भारतीय जनता पार्टी पर तीखे राजनीतिक बाण चलाते हुए आरोप लगाया है कि प्रशासनिक तंत्र और पुलिस बल का मनमाना इस्तेमाल चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने रेखांकित किया कि राज्य के राजनीतिक अतीत में इस प्रकार की अवांछित कार्यशैली कभी देखने को नहीं मिली थी। गहलोत के अनुसार शहरी स्थानीय चुनावों के दौरान उपजा जनआक्रोश अब देहात के इलाकों में फैल चुका है, जिससे आने वाले पंचायत स्तर के मुकाबलों में मतदाताओं का कड़ा रुख देखने को मिलेगा। ग्रामीण मतदाताओं का रुख और संगठनात्मक तैयारी पूर्व मुख्यमंत्री का आकलन है कि शहरी निकाय चुनावों के हालिया अनुभवों से ग्रामीण इलाकों की जनता ने बहुत कुछ समझा और सीखा है। कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता ग्राम स्तर, ब्लॉक स्तर तथा जिला स्तर पर जनसाधारण के बीच लगातार सक्रिय होकर उनकी कठिनाइयों को साझा कर रहे हैं। विपक्ष में रहते हुए पिछले ढाई साल की अवधि के दौरान पार्टी ने सत्ता पक्ष की विसंगतियों, प्रशासनिक अक्षमताओं और आमजन की बुनियादी समस्याओं को उजागर करने में निरंतर भूमिका निभाई है। इन्हीं आधारभूत मुद्दों को केंद्र में रखकर पार्टी ग्रामीण चुनाव में सत्ताधारी दल को चौतरफा घेरने की पुख्ता रणनीति पर आगे बढ़ रही है। किसानों के कार्यदिवसों पर विवादित टिप्पणी की आलोचना राज्य के मुख्यमंत्री द्वारा अन्नदाताओं के केवल 20-25 दिन ही काम करने से संबंधित कथित बयान पर आपत्ति दर्ज कराते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने इसे खेदजनक बताया। गहलोत ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार की टिप्पणी ने ग्रामीण समाज और खेती-किसानी से जुड़े परिवारों के भीतर गहरा असंतोष पैदा किया है। गांवों के लोग अब खुलकर पूछ रहे हैं कि यदि किसान वर्ष भर में मात्र 20-25 दिन ही मेहनत करते हैं, तो शेष पूरे साल वे क्या करते हैं। इस तरह की गैरजिम्मेदाराना बयानबाजी का सीधा और नकारात्मक असर आगामी चुनावी नतीजों में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होगा। कल्याणकारी पहलों की बंदी पर चिंता अपनी पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल की नीतियों का उल्लेख करते हुए गहलोत ने सामाजिक सुरक्षा और व्यापक लोक-कल्याण से जुड़ी योजनाओं का स्मरण कराया। उन्होंने कहा कि निर्धन परिवारों, दलितों और पिछड़े तबकों की बेहतरी के लिए क्रियान्वित किए गए कार्यक्रम हर गांव में बेहद लोकप्रिय और प्रभावी थे। वर्तमान शासन पर निशाना साधते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि जनहित की अनेक उपयोगी योजनाओं को बेवजह बंद कर दिया गया। किसी सरकारी योजना के नाम में बदलाव करना समझ आता है, किंतु आम जनता को लाभान्वित करने वाली योजनाओं को पूरी तरह समाप्त कर देना सर्वथा अनुचित और तर्कहीन है। चार चरणों की चुनाव प्रक्रिया पर गहरा संदेह पंचायत चुनाव को चार अलग-अलग चरणों में विभक्त करके संपन्न कराने की योजना पर भी पूर्व मुख्यमंत्री ने कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने कहा कि यद्यपि निर्वाचन आयोग ने इस व्यवस्था पर विचार किया होगा, किंतु यदि यह कदम सरकार के मशविरे पर उठाया गया है, तो इसके पीछे किसी अन्य गुप्त मंतव्य की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने आशंका व्यक्त की कि इस लंबी प्रक्रिया के जरिए पंचायत समितियों एवं जिला परिषदों में जीत दर्ज करने वाले प्रतिनिधियों को प्रलोभन देने या उन पर दबाव बनाने की चेष्टा हो सकती है। गहलोत ने चेताया कि यदि नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों की खरीद-फरोख्त अथवा उनके अपहरण जैसी अवांछनीय साजिशें रची जाती हैं, तो वे जनता के सामने उजागर होकर रहेंगी। उन्होंने कहा कि बीते 60-70 वर्षों के लोकतांत्रिक इतिहास में पक्ष और विपक्ष दोनों ही पक्षों ने निकाय तथा पंचायत चुनाव जीते हैं, लेकिन इस तरह की अनैतिक कार्यप्रणाली की शिकायतें पूर्व के दशकों में कभी सुनने को नहीं मिली थीं। विपक्षविहीन लोकतंत्र के प्रयासों पर आक्षेप केंद्र और राज्य दोनों ही स्तरों पर काम कर रही सरकारों पर विपक्षी दलों के अस्तित्व को समाप्त करने का प्रयास करने का आरोप लगाते हुए गहलोत ने लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा पर बल दिया। उनका कहना है कि यदि प्रजातांत्रिक ढांचे में विपक्ष की भूमिका को जानबूझकर कमजोर किया जाएगा, तो समूची व्यवस्था की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगेंगे। लोकतंत्र की गाड़ी को सुचारू रूप से चलाने के लिए सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ही समान रूप से महत्वपूर्ण स्तंभ हैं और दोनों के अपने निर्धारित दायित्व हैं। निर्वाचन तंत्र और मतों की सुरक्षा का मुद्दा राहुल गांधी द्वारा निर्वाचन प्रक्रिया और मतों की सुरक्षा को लेकर खड़े किए गए सवालों का संदर्भ देते हुए गहलोत ने कहा कि चुनाव आयोग से जुड़ी कई गंभीर चेतावनियां पूर्व में दर्ज की गई थीं। उन्होंने दावा पेश किया कि निर्वाचन आयोग के दो अहम सदस्यों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त को लिखित में कई बार सचेत किया था, और यह सूचनाएं कैबिनेट सचिव के संज्ञान में भी लाई गई थीं। गहलोत के अनुसार मुख्य निर्वाचन आयुक्त को 14 बार लिखित रूप से चेताया गया था। राहुल गांधी के दृष्टिकोण की सराहना करते हुए गहलोत ने कहा कि वे शासन व्यवस्था को जटिल विषयों पर पहले ही आगाह कर देते हैं, जो कालांतर में सच साबित होती हैं। यदि सत्ता पक्ष इन महत्वपूर्ण चेतावनियों को सकारात्मक नजरिए से स्वीकार करे, तो इससे देश और प्रशासनिक तंत्र दोनों का भला हो सकता है। मतों से जुड़े इन विषयों का सीधा प्रभाव युवा पीढ़ी पर पड़ रहा है और उनके सड़क पर आकर सवाल पूछने के पीछे भी यही भावनाएं काम कर रही हैं। गहलोत ने पूर्ण विश्वास व्यक्त किया कि ग्रामीण समाज के मतदाता आगामी पंचायत चुनाव में सत्ताधारी दल की नीतियों का माकूल उत्तर देंगे और कांग्रेस को बड़ी विजय प्राप्त होगी। इसका आप पर असर राजस्थान में होने वाले आगामी पंचायत चुनाव राज्य के ग्रामीण इलाकों में स्थानीय नेतृत्व और विकास योजनाओं की दिशा तय करेंगे। • भारत में: राज्यों में स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों की निष्पक्षता पूरे देश में लोकतांत्रिक ढांचे की विश्वसनीयता को दर्शाती है। विपक्षी दलों और चुनाव सुधारों पर होने वाली राष्ट्रव्यापी बहस मतदाताओं में प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर सतर्कता बढ़ाती है। • राजस्थान में: ग्रामीण मतदाताओं को चार चरणों में अपनी ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद के प्रतिनिधि चुनने का अवसर मिलेगा। चुनाव के परिणामों से ग्रामीण विकास की रुकी हुई योजनाओं और स्थानीय प्रशासनिक कामकाज की दिशा स्पष्ट होगी। • किसानों और ग्रामीणों के लिए: सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और कृषि नीतियों पर राजनीतिक दलों का रुख सीधे ग्रामीण परिवारों के कल्याण से जुड़ा है। मतदाता अपने स्थानीय मुद्दों और हालिया नीतिगत फैसलों के आधार पर अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकते हैं। • युवा मतदाताओं के लिए: चुनावी पारदर्शिता और स्थानीय रोजगार से जुड़े मुद्दे युवाओं की भागीदारी को सीधे प्रभावित करेंगे। युवा वर्ग पंचायती राज संस्थाओं में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मतदान में सक्रिय भूमिका निभा सकता है। ऐसा क्यों हुआ यह राजनीतिक बयानबाजी राजस्थान में नगर निकाय चुनावों के तुरंत बाद और आगामी पंचायत चुनावों की घोषणा के मद्देनजर सामने आई है। • आगामी पंचायत चुनाव: नगर निकाय चुनावों के बाद अब राज्य में ग्रामीण स्तर की चार-चरणीय निर्वाचन प्रक्रिया शुरू होने वाली है। कांग्रेस पार्टी ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी चुनावी जमीन मजबूत करने और मतदाताओं को लामबंद करने के लिए सक्रिय हो गई है। • प्रशासनिक फैसलों पर सवाल: विपक्ष ने निकाय चुनावों में पुलिस प्रशासन के कथित अनुचित इस्तेमाल और पंचायत चुनावों को चार चरणों में कराने के समयबद्ध शेड्यूल पर सवाल खड़े किए हैं। विपक्षी नेतृत्व को आशंका है कि लंबे शेड्यूल से चुनाव बाद जनप्रतिनिधियों की खरीद-फरोख्त की गुंजाइश बन सकती है। • नीतिगत व वैचारिक मतभेद: पूर्ववर्ती कल्याणकारी योजनाओं को बंद किए जाने और किसानों के कार्यदिवसों पर दिए गए बयानों ने ग्रामीण असंतोष को चुनावी मुद्दा बना दिया है। इसके साथ ही राहुल गांधी द्वारा उठाए गए निर्वाचन पारदर्शिता के मुद्दों को भी इस बहस से जोड़ा गया है। सवाल-जवाब 1. अशोक गहलोत ने राजस्थान में किन चुनावों को लेकर बयान दिया है? अशोक गहलोत ने राजस्थान में नगर निकाय चुनावों के बाद आयोजित होने वाले आगामी चार चरणों के पंचायत चुनावों को लेकर बयान दिया है। 2. पूर्व मुख्यमंत्री ने पंचायत चुनावों के शेड्यूल पर क्या आपत्ति जताई है? उन्होंने चुनाव को चार चरणों में कराने पर सवाल उठाते हुए आशंका जताई कि इससे जीते हुए पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्यों को प्रभावित या प्रलोभित करने की कोशिश हो सकती है। 3. किसानों से जुड़े किस मुद्दे पर सरकार को घेरा गया है? गहलोत ने मुख्यमंत्री द्वारा किसानों के केवल 20-25 दिन काम करने से संबंधित कथित बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे ग्रामीण इलाकों में नाराजगी है। 4. गहलोत ने निर्वाचन आयोग के संबंध में क्या दावा किया है? उन्होंने दावा किया कि निर्वाचन आयोग के दो सदस्यों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त को 14 बार लिखित चेतावनियां दी थीं, जिसकी जानकारी कैबिनेट सचिव को भी भेजी गई थी। 5. सामाजिक योजनाओं को लेकर क्या आरोप लगाए गए हैं? गहलोत ने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकार द्वारा गरीब, दलित और पिछड़े वर्गों के लिए शुरू की गई कई जनहितैषी योजनाओं को मौजूदा सरकार ने बंद कर दिया है। https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-men-pnchayata-chunavon-se-pahale-ashok-gehlot-ka-tikha-hamala-prashasanika-mashinari-aura-kisana-virodhi-bayanon-para-ut-42640 TrendKia — Har trend, sabse pehle.