{
  "type": "article",
  "title": "राजस्थान में पंचायतीराज चुनाव के पहले चरण का मतदान शुरू, 16 जिलों में नई ग्रामीण सरकार चुनने उमड़े मतदाता",
  "summary": "राजस्थान के 16 जिलों में पंचायतीराज चुनाव 2026 के पहले चरण के तहत 24 अक्टूबर को सुबह 7 बजे से मतदान जारी है, जहां संवेदनशील केंद्रों पर कड़े सुरक्षा पहरे के बीच मतदाता सरपंच और वार्ड पंच चुन रहे हैं।",
  "content": "राजस्थान में ग्रामीण लोकतंत्र की बुनियादी सरकार चुनने के लिए पंचायतीराज चुनाव 2026 के पहले चरण का मतदान 24 अक्टूबर को सुबह 7 बजे शुरू हो गया। राज्य के 16 जिलों में फैली ग्राम पंचायतों में नए सरपंच और वार्ड पंच चुनने के लिए सुबह से ही मतदाता मतदान केंद्रों पर कतारों में खड़े नजर आ रहे हैं। इस बार गांवों की सत्ता हासिल करने को लेकर चौपालों से लेकर मतदान केंद्रों तक जबरदस्त हलचल देखी जा रही है। जहां पूर्व सरपंच अपनी प्रतिष्ठा और राजनीतिक प्रभाव को बचाए रखने के लिए चुनावी रण में डटे हैं, वहीं युवा और नए चेहरे बदलाव के वादे के साथ गांव की संसद में अपनी जगह बनाने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं।\n\nराजसमंद में चुनावी मुकाबला और प्रत्याशियों का गणित\nराजसमंद जिले की बात करें तो यहां सुबह से ही ग्रामीण मतदाताओं में खासा जोश देखने को मिल रहा है। जिले के आमेट, चारभुजा, कुंभलगढ़, खमनोर और देलवाड़ा पंचायत समिति क्षेत्रों में मतदान की गतिविधियां तेजी से चल रही हैं। निर्वाचन गतिविधियों से जुड़ी स्थानीय सूचनाओं के मुताबिक, जिले की 325 ग्राम पंचायतों में सरपंच पदों के लिए चुनावी जंग छिड़ी हुई है, जिसमें 2097 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। वहीं, एक अन्य स्थानीय चुनावी आंकड़े में 133 ग्राम पंचायतों और 1155 वार्ड पंच पदों के लिए मतदान कराए जाने की जानकारी भी सामने आई है। इन आंकड़ों में अंतर होने की वजह से मतदान वाली पंचायतों और वार्डों की अंतिम स्थिति की प्रशासनिक पुष्टि जरूरी मानी जा रही है। इन सबके बीच ग्रामीण अपने मुद्दों के आधार पर प्रत्याशियों का चयन कर रहे हैं।\n\nअजमेर की छह पंचायत समितियों में सुरक्षा घेरा सख्त\nअजमेर जिले के ग्रामीण अंचलों में भी पहले चरण के तहत मतदान को लेकर मतदाताओं में भारी उत्साह नजर आ रहा है। जिले की पीसांगन, सरवाड़, सावर, केकड़ी, श्रीनगर और अजमेर ग्रामीण के चुनिंदा वार्डों में सुबह 7 बजे से निष्पक्ष ढंग से वोट डाले जा रहे हैं। राज्य निर्वाचन विभाग के कड़े दिशा-निर्देशों के अनुरूप पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के चाक-चौबंद प्रबंध किए हैं। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए संवेदनशील और अतिसंवेदनशील मतदान केंद्रों पर अतिरिक्त पुलिस जाब्ता तैनात किया गया है। अतिसंवेदनशील बूथों पर हथियारबंद जवानों की तैनाती की गई है ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी या विवाद की आशंका को समय रहते रोका जा सके और ग्रामीण निर्भीक होकर अपने मत का प्रयोग कर सकें।\n\nडूंगरपुर में 595 बूथों पर 5.21 लाख मतदाताओं की परीक्षा\nडूंगरपुर जिले में भी ग्राम पंचायतों की नई सरकार चुनने की प्रक्रिया सुचारू रूप से आगे बढ़ रही है। जिले की सात पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाली 232 ग्राम पंचायतों में सरपंच पदों के लिए मतदान कराया जा रहा है। इसके अलावा 1870 वार्ड पंच पदों के लिए भी ग्रामीण अपने प्रतिनिधि चुन रहे हैं। डूंगरपुर में सरपंच पद के लिए 1462 प्रत्याशी चुनावी मैदान में एक-दूसरे को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। जिले में कुल 5 लाख 21 हजार 601 पंजीकृत मतदाता अपने मताधिकार का उपयोग करने के पात्र हैं। मतदान प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए प्रशासन ने 595 मतदान केंद्र स्थापित किए हैं। स्थानीय चुनावी कार्यक्रम के अनुसार, डूंगरपुर में मतदान का समय समाप्त होते ही मतगणना की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जिससे प्रत्याशियों की हार-जीत का फैसला जल्द सामने आ सकेगा।\n\nस्थानीय विकास के मुद्दों पर टिका ग्रामीणों का भरोसा\nराजस्थान के सभी 16 जिलों में हो रहे इस चुनावी महासमर में सरगर्मियां बेहद तेज हैं। गांवों में सरपंच और वार्ड पंच केवल प्रतिनिधि नहीं होते, बल्कि वे विकास कार्यों की रीढ़ माने जाते हैं। ग्रामीण बस्तियों में पक्की सड़कें, स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति, नालियों की नियमित सफाई, स्ट्रीट लाइट और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की जिम्मेदारी इन्हीं प्रतिनिधियों के कंधों पर होती है। इसी वजह से मतदाता अपने इलाके के बुनियादी विकास की उम्मीदों को ध्यान में रखकर मतदान कर रहे हैं। विभिन्न पंचायतों में प्रत्याशियों और उनके समर्थकों की नजरें लगातार बढ़ते मतदान प्रतिशत पर टिकी हुई हैं, क्योंकि मत प्रतिशत का उतार-चढ़ाव चुनावी समीकरणों को बदलने की ताकत रखता है।\n\nमतदान समाप्त होने के बाद घोषित होंगे परिणाम\nपहले चरण का मतदान संपन्न होने के साथ ही गांवों के नए नेतृत्व की तस्वीर साफ होने लगेगी। डूंगरपुर जिले में मतदान प्रक्रिया पूरी होते ही मतों की गिनती शुरू कराने की योजना तय की गई है। वहीं राज्य के अन्य 16 जिलों में मतगणना और नतीजों की घोषणा संबंधित निर्वाचन कार्यक्रम और प्रशासनिक निर्देशों के अनुसार पूरी की जाएगी। प्रशासन का पूरा ध्यान चुनावी प्रक्रिया को शांतिपूर्ण, पारदर्शी और विवाद रहित तरीके से पूरा कराने पर केंद्रित है, ताकि लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत गांवों को सशक्त और जिम्मेदार प्रतिनिधि मिल सकें।\n\nइसका आप पर असर\nराजस्थान के 16 जिलों में हो रहे इस चुनाव से सीधे तौर पर ग्रामीण विकास, बजट आवंटन और स्थानीय नागरिक सुविधाओं के प्रबंधन पर असर पड़ेगा।\n\n• भारत में: पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव देश के संघीय ढांचे में जमीनी स्तर पर लोकतंत्र और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन को मजबूती प्रदान करते हैं। यह प्रक्रिया दर्शाती है कि ग्रामीण मतदाता बुनियादी अधिकारों और सुविधाओं को लेकर कितने जागरूक हैं।\n• राजस्थान में: 16 जिलों के ग्रामीण मतदाताओं को सड़क, नाली, पेयजल और साफ-सफाई जैसे जरूरी कार्यों के लिए नए सरपंच और वार्ड पंच मिलेंगे। नवनिर्वाचित प्रतिनिधि आगामी पांच वर्षों के लिए ग्राम पंचायत के विकास फंड और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के वितरण का जिम्मा संभालेंगे।\n• मतदाताओं के लिए: जिन ग्रामीणों का नाम मतदाता सूची में दर्ज है, वे अपने मताधिकार का प्रयोग कर गांव के विकास की दिशा तय कर सकते हैं। मतदान केंद्रों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने से ग्रामीण बिना किसी डर या दबाव के वोट डाल सकते हैं।\n• प्रशासनिक तैयारी: अतिसंवेदनशील और संवेदनशील बूथों पर अतिरिक्त बल और हथियारबंद जवान तैनात किए गए हैं ताकि मतदान शांतिपूर्ण रहे। डूंगरपुर जैसे जिलों में मतदान खत्म होते ही गिनती शुरू होने से नतीजे तेजी से सामने आएंगे।\n\nऐसा क्यों हुआ\nराजस्थान में पंचायतों का कार्यकाल पूरा होने और स्थानीय स्तर पर संवैधानिक रूप से अनिवार्य त्रिस्तरीय शासन व्यवस्था को बनाए रखने के लिए यह चुनाव कराया जा रहा है।\n\n• संवैधानिक अनिवार्यता: पंचायतीराज नियमों के तहत ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद समय पर चुनाव कराकर नई ग्रामीण सरकार का गठन करना आवश्यक होता है। इसी क्रम में राज्य निर्वाचन विभाग ने 16 जिलों में चरणबद्ध चुनाव की अधिसूचना जारी की।\n• स्थानीय नेतृत्व की आवश्यकता: गांवों में विकास कार्य, मनरेगा के काम, बुनियादी ढांचे का रखरखाव और सरकारी योजनाओं का प्रमाणन सरपंच और वार्ड पंच के बिना ठप पड़ जाता है। इसलिए प्रशासनिक कामकाज को नियमित रखने के लिए प्रतिनिधियों का चुनाव कराया जा रहा है।\n• सुरक्षा के विशेष कारण: ग्रामीण चुनावों में स्थानीय रंजिश और कड़े मुकाबले के चलते तनाव की आशंका रहती है। इसी स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने संवेदनशील और अतिसंवेदनशील बूथों पर हथियारबंद जवानों की तैनाती की व्यवस्था की है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. राजस्थान पंचायत चुनाव के पहले चरण का मतदान किस तारीख और समय पर शुरू हुआ?\nपहले चरण का मतदान 24 अक्टूबर 2026 को सुबह 7:00 बजे से शुरू हुआ।\n\n2. पहले चरण के तहत राजस्थान के कितने जिलों में वोट डाले जा रहे हैं?\nपहले चरण के अंतर्गत राज्य के कुल 16 जिलों में मतदान कराया जा रहा है।\n\n3. डूंगरपुर जिले में कितने मतदाता और कितने मतदान केंद्र बनाए गए हैं?\nडूंगरपुर जिले में 5,21,601 मतदाता पंजीकृत हैं और मतदान के लिए 595 बूथ बनाए गए हैं।\n\n4. डूंगरपुर में सरपंच पद के लिए कितने उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं?\nडूंगरपुर जिले की 232 ग्राम पंचायतों में सरपंच पद के लिए कुल 1462 उम्मीदवार मैदान में हैं।\n\n5. अजमेर जिले की किन पंचायत समितियों में चुनाव हो रहे हैं?\nअजमेर में पीसांगन, सरवाड़, सावर, केकड़ी, श्रीनगर और अजमेर ग्रामीण के कुछ वार्डों में चुनाव हो रहे हैं।\n\n6. संवेदनशील और अतिसंवेदनशील मतदान केंद्रों पर क्या सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं?\nप्रशासन ने संवेदनशील बूथों पर अतिरिक्त पुलिस जाब्ता और अतिसंवेदनशील बूथों पर हथियारबंद जवान तैनात किए हैं।",
  "url": "https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-men-pnchayatiraja-chunava-ke-pahale-charana-ka-matadana-shuru-16-jilon-men-nai-gramina-sarakara-chunane-umare-matadata-51137",
  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-10-24",
  "tags": [
    "राजस्थान पंचायत चुनाव",
    "पंचायतीराज चुनाव 2026",
    "सरपंच चुनाव",
    "डूंगरपुर चुनाव",
    "राजसमंद चुनाव",
    "अजमेर चुनाव",
    "मतदान",
    "ग्राम पंचायत"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}