कांग्रेस वॉर रूम के बाहर रोके गए बाबूलाल नागर, टिकट मंथन के बीच पूर्व मंत्री को नहीं मिली एंट्री राजस्थान में निकाय चुनाव के माहौल के बीच कांग्रेस वॉर रूम पहुंचे पूर्व मंत्री बाबूलाल नागर को मुख्य द्वार पर ही रोक दिया गया। बिना अपॉइंटमेंट पहुंचे नागर को अंदर जाने की अनुमति नहीं मिली, जिसके बाद उन्हें निराश होकर वापस लौटना पड़ा। जयपुर में निकाय चुनाव की सुगबुगाहट के बीच शुक्रवार को कांग्रेस के केंद्रीय वॉर रूम के बाहर एक हैरान करने वाला वाकया सामने आया। कभी पार्टी के भीतर और दूदू से लेकर जयपुर तक मजबूत राजनीतिक रसूख रखने वाले पूर्व मंत्री बाबूलाल नागर को वॉर रूम के गेट पर ही रोक दिया गया। सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें अंदर जाने की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया, जिससे उन्हें काफी देर तक बाहर ही खड़े रहना पड़ा। यह घटना उस समय हुई जब पार्टी कार्यालय के भीतर आगामी स्थानीय निकाय चुनावों के टिकट वितरण को लेकर बड़े पैमाने पर मंथन चल रहा था। विभिन्न नेताओं और दावेदारों का आना-जाना लगातार जारी था। इसी गहमागहमी के बीच बाबूलाल नागर अचानक वहां पहुंचे, लेकिन उनके पास कोई पूर्व निर्धारित समय या अनुमति नहीं थी। अंदर जाने की कोशिश में उन्होंने कई वरिष्ठ लोगों को फोन भी मिलाए और लगातार संपर्क साधने की कोशिश की ताकि किसी तरह अंदर प्रवेश मिल सके। हालांकि, उनके तमाम प्रयासों के बावजूद वॉर रूम का दरवाजा उनके लिए नहीं खुला। सुरक्षाकर्मियों का स्पष्ट निर्देश था कि बिना अपॉइंटमेंट के किसी को भी अंदर जाने की इजाजत नहीं दी जा सकती। जब तमाम कोशिशें नाकाम हो गईं और अंदर से कोई हरी झंडी नहीं मिली, तो बाबूलाल नागर ने अंततः वापस लौटने का फैसला किया। उन्होंने खुद ही अपने ड्राइवर को गाड़ी आगे बढ़ाने का इशारा किया, जिसके बाद उनकी गाड़ी वहां से रवाना हो गई। इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक गलियारों में एक नई चर्चा को जन्म दे दिया है। बाबूलाल नागर का राजनीतिक सफर एक समय ऐसा रहा है जब उनकी गिनती पार्टी के प्रभावशाली नेताओं में होती थी और उनके एक इशारे पर राजनीतिक समीकरण बदल जाते थे। ऐसे नेता को चुनाव के इस महत्वपूर्ण समय में पार्टी दफ्तर के बाहर रोका जाना सियासी गलियारों में तरह-तरह की चर्चाओं का विषय बन गया है। इसे पार्टी के भीतर आए बदलावों और समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, इस पूरी घटना के पीछे मुख्य वजह यही बताई गई कि वह बिना समय लिए अचानक पहुंच गए थे। लेकिन निकाय चुनाव के टिकटों पर फैसलों के दौर के बीच यह घटना सामान्य राजनीतिक गतिविधि नहीं मानी जा रही है। अब सवाल यह भी उठ रहे हैं कि क्या चुनाव के चलते सुरक्षा नियमों को लेकर सख्ती बढ़ाई गई है या फिर इसके पीछे कोई और राजनीतिक वजह है। इसका आप पर असर यह घटना राजनीतिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं के लिए अनुशासन और प्रोटोकॉल के महत्व को दर्शाती है। • भारत में: राजनीतिक दलों के दफ्तरों में चुनावी माहौल के दौरान सुरक्षा और समय प्रबंधन के नियमों को अब और अधिक सख्ती से लागू किया जा रहा है। • जयपुर में: स्थानीय कार्यकर्ताओं और नेताओं को यह स्पष्ट संदेश मिलता है कि महत्वपूर्ण चुनावी बैठकों और टिकट वितरण के दौरान संगठनात्मक नियमों का पालन करना अनिवार्य है। सवाल-जवाब 1. बाबूलाल नागर को कहां रोका गया? बाबूलाल नागर को जयपुर में कांग्रेस के वॉर रूम के मुख्य द्वार पर रोका गया। 2. बाबूलाल नागर को अंदर क्यों नहीं जाने दिया गया? सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोक दिया क्योंकि वह बिना किसी पूर्व समय या अपॉइंटमेंट के वॉर रूम पहुंचे थे। 3. वॉर रूम के अंदर उस समय क्या चल रहा था? वॉर रूम के भीतर आगामी निकाय चुनाव के टिकटों और उससे जुड़े फैसलों को लेकर नेताओं के बीच चर्चा चल रही थी। 4. गेट पर रोके जाने के बाद बाबूलाल नागर ने क्या किया? उन्होंने अंदर जाने के लिए कई लोगों को फोन किए, लेकिन अनुमति न मिलने पर वह अपनी गाड़ी से वापस लौट गए। https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-men-purva-mntri-babulal-nagar-kangresa-war-room-ke-bahara-roke-gae-24160 TrendKia — Har trend, sabse pehle.