# राजस्थान में सब-इंस्पेक्टर री-एग्जाम पेपर के खिलाफ फूटा गुस्सा, 29 सितंबर को जयपुर में बड़े धरने का ऐलान

> राजस्थान में 20 सितंबर को आयोजित एसआई भर्ती री-एग्जाम के प्रश्न पत्र को कठिन और गैर-पारंपरिक बताते हुए अभ्यर्थियों ने 29 सितंबर को जयपुर के शहीद स्मारक पर प्रदर्शन का फैसला किया है।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-09-28 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-men-saba-inspektara-ri-egjama-pepara-ke-khilapha-phuta-gussa-29-sitnbara-ko-jaipur-men-bare-dharane-ka-ailana-39743 · **Language:** Hindi
**Tags:** राजस्थान एसआई भर्ती, आरपीएससी, राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड, शहीद स्मारक जयपुर, एसआई री-एग्जाम, सत्येंद्र राव, राम सिंह समोता

राजस्थान में 20 सितंबर को आयोजित हुई पुलिस सब-इंस्पेक्टर (एसआई) भर्ती की पुनः परीक्षा को लेकर परीक्षार्थियों में गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है। परीक्षा में शामिल हुए युवाओं का तर्क है कि इस बार का प्रश्न पत्र स्थापित पाठ्यक्रम, पूर्व निर्धारित परीक्षा पैटर्न और पिछले सालों के ट्रेंड से पूरी तरह अलग था। अभ्यर्थियों ने प्रश्न पत्र को बेहद कठिन, उलझाऊ और अतार्किक करार दिया है। उनका कहना है कि परीक्षा के लिए तय किए गए दो घंटे के सीमित समय में ऐसे सवालों को हल करना व्यावहारिक धरातल पर लगभग नामुमकिन था। इसी असंतोष के चलते अभ्यर्थियों ने अब संगठित होकर 29 सितंबर को जयपुर स्थित शहीद स्मारक पर व्यापक धरना प्रदर्शन करने का फैसला किया है।

## समय सीमा और असामान्य प्रश्न पत्र पर उठे गंभीर सवाल
परीक्षा में शामिल हुए अभ्यर्थियों का कहना है कि प्रश्न पत्र का प्रारूप ऐसा था जिसने योग्य और समर्पित छात्रों की तैयारी को भी असमंजस में डाल दिया। प्रश्न पत्र में प्रश्नों का कठिनाई स्तर इतना ज्यादा था कि 120 मिनट की समय सीमा सवालों को समझने और सही उत्तर तक पहुंचने के लिए बहुत कम साबित हुई। अभ्यर्थियों के अनुसार, परीक्षा के समय प्रबंधन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

मामले में अपनी बात रखते हुए अभ्यर्थी सत्येंद्र राव ने कहा कि इस परीक्षा का पेपर तय किए गए ट्रेंड से पूरी तरह अलग था। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रश्न पत्र की बनावट इस तरह की थी, जिसे दो घंटे के निर्धारित समय के भीतर पूरा हल कर पाना अधिकांश अभ्यर्थियों के लिए एक अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य साबित हुआ। युवाओं का तर्क है कि जब भर्ती परीक्षा का एक तय ढांचा निर्धारित होता है, तो अचानक बिना किसी पूर्व संकेत के उसे पूरी तरह बदल देना छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने जैसा है।

## पुनः परीक्षा कराने और निष्पक्ष जांच की उठाई गई मांग
प्रश्न पत्र के स्तर से नाराज युवाओं ने सरकार और परीक्षा आयोजकों के सामने अपनी प्रमुख मांगें रखी हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि 20 सितंबर को आयोजित एसआई री-एग्जाम को रद्द कर नए सिरे से दोबारा परीक्षा आयोजित की जानी चाहिए। इसके अलावा, छात्रों ने मांग की है कि हाल ही में आयोजित हुई इस परीक्षा के प्रश्न पत्र के पैटर्न, उसकी भाषा और कठिनाई स्तर की विषय विशेषज्ञों की एक स्वतंत्र समिति से गहन समीक्षा कराई जाए।

अभ्यर्थियों का मत है कि किसी भी राज्य स्तरीय भर्ती परीक्षा में हर प्रतियोगी छात्र को अपनी वास्तविक योग्यता और ज्ञान साबित करने का निष्पक्ष एवं समान अवसर मिलना चाहिए। उनका आरोप है कि प्रश्न पत्र के मानकों में अप्रत्याशित और अव्यावहारिक बदलाव करके परीक्षार्थियों को मानसिक तनाव में धकेल दिया गया है, जिससे वर्षों से तैयारी कर रहे कई योग्य अभ्यर्थियों का मनोबल टूटा है।

## आरपीएससी और कर्मचारी चयन बोर्ड के बुनियादी पुनर्गठन की उठी आवाज
इस पूरे विवाद के बीच अभ्यर्थियों ने राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) और राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की मौजूदा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। युवाओं ने दोनों प्रमुख भर्ती संस्थानों के पुनर्गठन की मांग तेज कर दी है। उनका कहना है कि सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं की साख, पारदर्शिता और गुणवत्ता को बहाल करने के लिए इन संस्थाओं में अनुभवी शिक्षाविदों और विभिन्न विषयों के उच्च स्तरीय विशेषज्ञों को शामिल किया जाना बेहद जरूरी है।

छात्र नेता राम सिंह समोता ने इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि आरपीएससी और राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के कामकाज के तरीकों को लेकर प्रदेश के युवाओं और अभ्यर्थियों में लंबे समय से असंतोष पनप रहा है। उन्होंने कहा कि एसआई भर्ती री-एग्जाम का असंतुलित प्रश्न पत्र इसी निरंतर चले आ रहे असंतोष का एक नया और स्पष्ट उदाहरण है। राम सिंह समोता ने पुरजोर मांग की है कि आयोग और बोर्ड में ऐसे काबिल विशेषज्ञों को नियुक्त किया जाए, जिन्हें न केवल गहरा शैक्षणिक अनुभव हो, बल्कि वे प्रतियोगी भर्ती परीक्षाओं की व्यवहार्यता और जटिलताओं को भी भली-भांति समझते हों।

## 29 सितंबर को जयपुर के शहीद स्मारक पर जुटेगा युवाओं का हुजूम
अपनी इन तमाम चिंताओं और मांगों को लेकर अभ्यर्थियों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। 29 सितंबर को जयपुर के ऐतिहासिक शहीद स्मारक पर प्रस्तावित धरने में राज्य के हर जिले और कोने से युवाओं के जुटने की उम्मीद जताई गई है। अभ्यर्थी इसे केवल एक दिन के सांकेतिक धरने तक सीमित नहीं रखना चाहते।

प्रदर्शन की तैयारी कर रहे युवाओं ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर संवेदनशीलता से विचार करते हुए कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया, तो वे इस आंदोलन को प्रदेशव्यापी रूप देंगे। अभ्यर्थियों का कहना है कि उनकी लड़ाई सिर्फ एक प्रश्न पत्र के कठिन होने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता, प्रश्न पत्रों के निर्माण में विषय विशेषज्ञों की जवाबदेही और सभी अभ्यर्थियों को समान अवसर दिलाने की एक बड़ी मुहिम है। अब सभी की नजरें 29 सितंबर के आंदोलन और उस पर प्रशासनिक रुख पर टिकी हैं।

## इसका आप पर असर
इस विरोध प्रदर्शन और परीक्षा विवाद का सीधा असर राजस्थान में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं की भर्ती प्रक्रिया और भविष्य पर पड़ेगा।

- **राजस्थान में:** एसआई भर्ती के हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य फिर से अधर में लटक गया है, जिससे परीक्षा रद्द होने या विशेषज्ञ समीक्षा की स्थिति में अंतिम चयन प्रक्रिया और जॉइनिंग में कई महीनों की देरी हो सकती है। जो अभ्यर्थी 29 सितंबर को जयपुर के शहीद स्मारक पहुंच रहे हैं, उन्हें अपने यात्रा और विरोध प्रदर्शन की योजना शांतिपूर्ण तरीके से बनानी होगी।
- **भारत में:** राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे देश भर के छात्रों पर परीक्षा पैटर्न में अनपेक्षित बदलाव का मानसिक असर पड़ता है। परीक्षा प्राधिकरणों की कार्यप्रणाली में बदलाव की यह मांग अन्य राज्यों के भर्ती बोर्डों पर भी प्रश्न पत्रों के मानकीकरण और पारदर्शिता बढ़ाने का दबाव बनाएगी।
- **भर्ती कैलेंडर पर असर:** विवाद बढ़ने पर राज्य के पुलिस विभाग में सब-इंस्पेक्टर पदों पर नई नियुक्तियों का शेड्यूल आगे खिसक सकता है। इससे पुलिस थानों और क्षेत्रीय चौकियों में रिक्त पदों को भरने की प्रशासनिक प्रक्रिया धीमी पड़ जाएगी।
- **अभ्यर्थियों के लिए विकल्प:** वर्तमान में परीक्षार्थियों को आधिकारिक सरकारी बयानों और भर्ती बोर्ड की औपचारिक अधिसूचनाओं पर निरंतर नजर बनाए रखनी चाहिए। किसी भी अनौपचारिक घोषणा के बजाय आरपीएससी के आधिकारिक फैसलों के आधार पर ही अगली तैयारी की रणनीति तय करें।

## ऐसा क्यों हुआ
यह असंतोष 20 सितंबर को आयोजित पुलिस सब-इंस्पेक्टर री-एग्जाम के प्रश्न पत्र को लेकर उपजा है, जहां अभ्यर्थियों ने पेपर को असामान्य और अत्यधिक कठिन पाया। छात्रों का मानना है कि परीक्षा संचालन संस्थाओं द्वारा तय मानकों की अनदेखी के चलते यह स्थिति पैदा हुई है।

- **पाठ्यक्रम और ट्रेंड से भटकाव:** अभ्यर्थियों का मुख्य आरोप है कि 20 सितंबर का प्रश्न पत्र पिछले वर्षों के प्रश्न प्रारूप और निर्धारित सिलेबस के अनुरूप नहीं था। प्रश्नों की जटिलता और तर्कहीनता के कारण अधिकांश छात्र निर्धारित दो घंटे के भीतर सवालों को हल करने में असमर्थ रहे।
- **समय की गंभीर कमी:** प्रश्न पत्र में पूछे गए प्रश्नों की अत्यधिक लंबाई और कठिन स्तर के चलते 120 मिनट की समय सीमा बेहद कम साबित हुई। अभ्यर्थी सत्येंद्र राव ने रेखांकित किया कि पेपर का ढांचा ऐसा था कि सामान्य समय प्रबंधन पूरी तरह ध्वस्त हो गया।
- **संस्थागत असंतोष की पुरानी पृष्ठभूमि:** छात्र नेता राम सिंह समोता के अनुसार, आरपीएससी और राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की कार्यप्रणाली को लेकर परीक्षार्थियों में लंबे समय से गहरा अविश्वास रहा है। योग्य शिक्षाविदों और विषय विशेषज्ञों की कमी के कारण बार-बार विवादित या असंतुलित प्रश्न पत्र तैयार होने की शिकायतें आती रही हैं।
- **आगामी कदम:** अभ्यर्थियों ने अपनी मांगों को लेकर 29 सितंबर को जयपुर के शहीद स्मारक पर व्यापक धरना आयोजित करने का निर्णय लिया है। यदि सरकार ने परीक्षा रद्द करने या स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित करने पर सकारात्मक रुख नहीं दिखाया, तो इसे राज्यव्यापी आंदोलन का रूप दिया जाएगा।

## सवाल-जवाब

### 1. राजस्थान एसआई भर्ती की री-एग्जाम कब आयोजित की गई थी?
राजस्थान सब-इंस्पेक्टर भर्ती की री-एग्जाम 20 सितंबर को आयोजित की गई थी।

### 2. अभ्यर्थी इस परीक्षा के प्रश्न पत्र का विरोध क्यों कर रहे हैं?
अभ्यर्थियों का आरोप है कि प्रश्न पत्र तय परीक्षा पैटर्न और पुराने ट्रेंड से अलग, अत्यधिक कठिन और दो घंटे की समय सीमा में हल करने के लिहाज से अव्यावहारिक था।

### 3. अभ्यर्थियों ने जयपुर में प्रदर्शन के लिए कौन सी तारीख और स्थान तय किया है?
अभ्यर्थियों ने अपनी मांगों को लेकर 29 सितंबर को जयपुर स्थित शहीद स्मारक पर धरने का ऐलान किया है।

### 4. अभ्यर्थियों की मुख्य मांगें क्या हैं?
अभ्यर्थी 20 सितंबर की परीक्षा को दोबारा कराने, प्रश्न पत्र की विशेषज्ञों से समीक्षा कराने और आरपीएससी तथा कर्मचारी चयन बोर्ड के पुनर्गठन की मांग कर रहे हैं।

### 5. छात्र नेता राम सिंह समोता ने भर्ती बोर्डों को लेकर क्या कहा?
राम सिंह समोता ने कहा कि भर्ती आयोगों में लंबे समय से असंतोष है और इनमें शैक्षणिक अनुभव रखने वाले निष्पक्ष विषय विशेषज्ञों को शामिल किया जाना चाहिए।

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