राजस्थान में सरकारी योजनाओं की आड़ में म्यूल बैंक खाते बेचने वाले तीन जालसाज पकड़े गए चूरू पुलिस ने ग्रामीण इलाकों में फर्जी एनजीओ और बैंक अधिकारी बनकर ग्रामीणों के नाम पर करंट खाते खुलवाने और उन्हें साइबर अपराधियों को बेचने वाले गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है। राजस्थान के चूरू जिले में कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने साइबर अपराध से जुड़े एक संगठित नेटवर्क को बेनकाब किया है। यह गिरोह सीधे-सादे गांव वालों को सरकारी आर्थिक सहायता दिलाने का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाता था और फिर इन खातों को देश भर में ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी करने वाले शातिर अपराधियों को सौंप देता था। पुलिस की साइबर शाखा ने त्वरित कदम उठाते हुए इस सिंडिकेट के तीन मुख्य सदस्यों को सलाखों के पीछे भेज दिया है, जबकि एक अन्य नामजद साथी की तलाश जारी है। सब्सिडी का प्रलोभन देकर दस्तावेज जुटाने की साजिश जांच अधिकारियों के अनुसार यह गिरोह गांवों में बेहद सुनियोजित तरीके से सक्रिय होता था। आरोपी बस्तियों में पहुंचकर खुद को किसी गैर-सरकारी संगठन से जुड़ा प्रतिनिधि बताते थे। वे पशुपालकों और कृषकों से संपर्क कर सौर ऊर्जा, डेयरी व्यवसाय और बकरी पालन से संबंधित विभिन्न सरकारी अनुदान कार्यक्रमों का हवाला देते थे। ग्रामीणों को यह विश्वास दिलाया जाता था कि उन्हें इन योजनाओं के माध्यम से बड़ी धनराशि सीधे सरकारी खजाने से मिलने वाली है। अनुदान राशि के सीधे अंतरण की बात कहकर वे लोगों को नया डिजिटल बैंक खाता शुरू करने के लिए राजी करते थे। ग्रामीण जब उनकी बातों के जाल में उलझ जाते, तो अपने व्यक्तिगत पहचान पत्र और छायाचित्र उन्हें सौंप देते थे। इन कागजात और तस्वीरों के सहारे आरोपी एयरटेल पेमेंट्स बैंक में संबंधित व्यक्तियों के नाम पर ऑनलाइन चालू खाते तैयार कर लेते थे। फर्जी बैंक अधिकारी बनकर जीतते थे भरोसा ग्रामीणों के मन में कोई संदेह न उपजे, इसके लिए गिरोह के सदस्य खुद को एयरटेल पेमेंट्स बैंक का प्रबंधक अथवा सहायक प्रबंधक बताकर पेश करते थे। इस ओहदे का ढोंग रचने से इलाके के लोग उन पर आंख मूंदकर भरोसा कर लेते थे। इस मामले में पुलिस ने सुजानगढ़ के रहने वाले जितेंद्र कुमार जैन, फतेहपुर के उदनसर गांव के निवासी अंकित जाट तथा मांडेला निवासी कार्तिक जाट को हिरासत में लिया है। इस पूरे प्रकरण में छापर के रहने वाले सेठी भाट के विरुद्ध भी नामजद प्राथमिकी दर्ज है, जो अभी गिरफ्त से बाहर है और जिसकी धरपकड़ के प्रयास किए जा रहे हैं। पासबुक दबाकर साइबर ठगों को सौंपते थे खाते प्रक्रिया पूरी होने के बाद गिरोह के सदस्य खाताधारकों को मिलने वाली पासबुक, एटीएम कार्ड अथवा डिजिटल एक्सेस विवरण कभी उनके सुपुर्द नहीं करते थे। बैंकिंग से जुड़े ये सभी आवश्यक साधन वे अपने पास ही दबाकर रख लेते थे। इसके उपरांत वे इन सक्रिय खातों को साइबर जालसाजों के हाथों बेच देते थे। अन्य ठग इन खातों का इस्तेमाल पीड़ितों से वसूली गई रकम को मंगाने तथा अवैध धन को इधर-उधर स्थानांतरित करने के लिए करते थे। इस पूरी चाल का मकसद यह था कि यदि कभी कोई जांच एजेंसी अवैध लेन-देन का पीछा करे, तो जांच का रुख असली अपराधियों के बजाय बेकसूर ग्रामीणों की ओर मुड़ जाए। शिकायत के बाद हरकत में आई पुलिस टीम चूरू के पुलिस अधीक्षक निश्चय प्रसाद एम के मुताबिक, 29 सितंबर को देवाणी गांव के निवासी मेघाराम लुहार ने इस छलावे को लेकर पुलिस से गुहार लगाई थी। पीड़ित की तहरीर पर 30 सितंबर 2026 को साइबर थाना चूरू में भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी कानून के सुसंगत प्रावधानों के तहत मामला दर्ज हुआ। इसके बाद डीएसपी विजय कुमार मीणा की अगुवाई में एक विशेष दस्ते को जांच का जिम्मा सौंपा गया। साइबर साक्ष्यों और तकनीकी सुरागों का विश्लेषण करने के बाद टीम ने तीनों आरोपियों को दबोच लिया। इस धरपकड़ अभियान में साइबर थाने के पुलिसकर्मी कमल कुमार, सुनील कुमार और राकेश कुमार ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पकड़े गए आरोपियों से हुई शुरुआती पूछताछ से संकेत मिले हैं कि उन्होंने फतेहपुर, सुजानगढ़, छापर एवं आसपास के अनेक देहाती इलाकों में सैकड़ों लोगों के ऐसे बैंक खाते खुलवाए थे। पुलिस अब उन अंतिम साइबर जालसाजों की कड़ियों को तलाशने में लगी है जिन्होंने इन खातों की खरीद की थी। इसका आप पर असर यह मामला दर्शाता है कि सरकारी सब्सिडी के नाम पर साझा किए गए व्यक्तिगत दस्तावेज आपको अनजाने में वित्तीय अपराधों की पुलिस जांच के दायरे में ला सकते हैं। • भारत में: यदि आप किसी अनधिकृत व्यक्ति को बैंक खाता खोलने के लिए आधार या पैन कार्ड सौंपते हैं, तो वह खाता साइबर अपराधियों के हाथ लग सकता है। किसी भी वित्तीय योजना के लिए केवल अधिकृत सरकारी केंद्रों या बैंक शाखाओं में जाकर ही दस्तावेज जमा करें। • चूरू और राजस्थान में: ग्रामीण क्षेत्रों के निवासी किसी भी व्यक्ति को खुद को एनजीओ या बैंक प्रतिनिधि बताने पर बिना पहचान सत्यापन के फोटो या कागजात न दें। यदि आपके नाम पर बिना पासबुक और एटीएम दिए कोई खाता खोला गया है, तो तुरंत निकटतम पुलिस थाने में इसकी सूचना दें। • दस्तावेज सुरक्षा: बैंक खाते के आवेदन पत्र पर हमेशा हस्ताक्षर करने से पहले नियम और शर्तों को ध्यान से जांचें। कभी भी अपना बैंक खाता, सिम कार्ड या एटीएम कार्ड किसी तीसरे व्यक्ति के संचालन के लिए न छोड़ें। • कानूनी जोखिम: आपके नाम पर खुले खाते में साइबर अपराध का पैसा आने पर कानूनी तौर पर पहली जवाबदेही खाताधारक की बन जाती है। ऐसे मामलों से बचने के लिए अपने नाम से जुड़े सभी सक्रिय बैंक खातों की समय-समय पर जांच करते रहें। ऐसा क्यों हुआ यह धोखाधड़ी ग्रामीण नागरिकों में डिजिटल बैंकिंग प्रक्रियाओं की अधूरी जानकारी और सरकारी योजनाओं से भारी आर्थिक लाभ मिलने के झांसे के कारण संभव हो सकी। • सीधा कारण: आरोपियों ने सौर ऊर्जा और पशुपालन सब्सिडी के नाम पर फर्जी पहचान पेश करके ग्रामीणों के नाम पर करंट खाते शुरू किए और उन्हें साइबर ठगों को बेच दिया। • सहायक परिस्थितियां: गिरोह के सदस्यों ने खुद को एनजीओ कार्यकर्ता और बैंक प्रबंधक बताकर ग्रामीणों का भरोसा जीता, जिससे लोगों ने बिना संदेह किए अपने दस्तावेज और तस्वीरें सौंप दीं। • साजिश की बनावट: खाताधारकों को पासबुक या एटीएम कार्ड न देकर गिरोह ने खातों का पूर्ण नियंत्रण अपने पास रखा ताकि पुलिस जांच होने पर मूल अपराधी बचे रहें और ग्रामीण फंसे। • जांच की स्थिति: 29 सितंबर को पीड़ित मेघाराम लुहार की शिकायत के बाद पुलिस ने त्वरित जांच शुरू की और तीन आरोपियों को पकड़ लिया, जबकि फरार साथी और खाता खरीदारों की तलाश जारी है। सवाल-जवाब 1. चूरू में पकड़े गए गिरोह के सदस्यों के क्या नाम हैं? पुलिस ने सुजानगढ़ निवासी जितेंद्र कुमार जैन, उदनसर निवासी अंकित जाट और मांडेला निवासी कार्तिक जाट को गिरफ्तार किया है, जबकि सेठी भाट फरार है। 2. यह गिरोह ग्रामीणों को किस बात का झांसा देता था? वे ग्रामीणों को बकरी पालन, दुग्ध उत्पादन और सौर ऊर्जा जैसी सरकारी योजनाओं में भारी सब्सिडी दिलाने का झूठा आश्वासन देते थे। 3. आरोपी ग्रामीणों के नाम पर किस बैंक में खाते खोलते थे? आरोपी ग्रामीणों के केवाईसी दस्तावेजों और फोटो का उपयोग करके एयरटेल पेमेंट्स बैंक में ऑनलाइन चालू खाते खोलते थे। 4. खाता खोलने के बाद आरोपी पासबुक और एटीएम कार्ड क्यों नहीं देते थे? वे इन दस्तावेजों को अपने पास रखकर खातों को साइबर ठगों को बेच देते थे ताकि ठगी का काला धन उन खातों में आसानी से मंगाया जा सके। 5. इस मामले में पुलिस ने कब और किसकी शिकायत पर कार्रवाई की? देवाणी निवासी मेघाराम लुहार की 29 सितंबर की शिकायत पर चूरू साइबर पुलिस ने 30 सितंबर 2026 को मामला दर्ज कर कार्रवाई की। https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-men-sarakari-yojanaon-ki-ara-men-myula-bainka-khate-bechane-vale-tina-jalasaja-pakare-gae-42610 TrendKia — Har trend, sabse pehle.