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  "type": "article",
  "title": "राजस्थान में सेवानिवृत्ति के एक माह बाद आईएएस श्रुति भारद्वाज को मिली आरसीडीएफ के एमडी पद की दोबारा जिम्मेदारी",
  "summary": "राजस्थान सरकार ने पात्रता नियमों में ढील देते हुए 31 अगस्त 2026 को सेवानिवृत्त हुईं आईएएस अधिकारी श्रुति भारद्वाज को अगले छह महीनों के लिए राजस्थान कॉपरेटिव डेयरी फेडरेशन का प्रबंध निदेशक नियुक्त किया है।",
  "content": "राजस्थान के प्रशासनिक तंत्र में वरिष्ठ अधिकारियों का स्थानांतरण और नई जिम्मेदारियां मिलना एक सामान्य प्रक्रिया है, परंतु अपनी सेवानिवृत्ति के महज एक माह के भीतर उसी सर्वोच्च पद पर दोबारा आसीन होना किसी भी सिविल सेवक की असाधारण कार्यकुशलता को रेखांकित करता है। 31 अगस्त 2026 को अपनी सरकारी सेवा पूरी करने वाली भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की वरिष्ठ अधिकारी श्रुति भारद्वाज को राज्य सरकार ने एक बार पुनः राजस्थान कॉपरेटिव डेयरी फेडरेशन (आरसीडीएफ) के मैनेजिंग डायरेक्टर (एमडी) पद की कमान सौंपी है। इस महत्वपूर्ण पुनर्नियुक्ति के लिए प्रशासन ने तय पात्रता मापदंडों में विशेष शिथिलता बरती है, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि प्रदेश के विशाल डेयरी ढांचे को संचालित करने हेतु उनके व्यापक प्रशासनिक अनुभव को अनिवार्य माना गया।\n\nआरएएस से शुरू हुआ सफर और आईएएस संवर्ग में पदोन्नति\n4 अगस्त 1966 को जन्मीं श्रुति भारद्वाज का मूल निवास देश की राजधानी दिल्ली में है। उच्च शिक्षा के अंतर्गत कला वर्ग में स्नातकोत्तर (एम.ए.) की उपाधि प्राप्त करने के पश्चात उन्होंने वर्ष 1994 में राजस्थान प्रशासनिक सेवा (आरएएस) की परीक्षा उत्तीर्ण कर अपने पेशेवर जीवन का श्रीगणेश किया था। राज्य सेवा में चयनित होने के उपरांत उन्होंने अपना आवश्यक प्रोबेशन काल सफलता के साथ पूरा किया। सेवा के प्रारंभिक दौर में उनकी तैनाती जयपुर तथा अलवर में असिस्टेंट कलेक्टर एवं एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के पद पर रही, जहां उन्होंने मैदानी स्तर के प्रशासनिक कार्यों का गहन अनुभव प्राप्त किया। कार्यक्षेत्र में उनके विशिष्ट प्रदर्शन, त्वरित निर्णय लेने की क्षमता और बेदाग सेवा रिकॉर्ड को मान्यता देते हुए शासन द्वारा उन्हें पदोन्नत कर 2013 बैच के आईएएस संवर्ग में शामिल किया गया।\n\nतीन दशकों का समृद्ध अनुभव और प्रमुख विभागों का प्रभार\nश्रुति भारद्वाज का तीन दशक लंबा प्रशासनिक सफर बेहद व्यापक और जिम्मेदारियों से परिपूर्ण रहा है। उन्होंने राज्य के शासन तंत्र में कई जटिल और नीतिगत महत्व वाले महकमों का नेतृत्व किया। प्रशासनिक पुनर्गठन के समय गठित हुए नीमकाथाना और डीग जैसे नए जिलों में उन्हें जिला कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट के रूप में कानून व्यवस्था तथा विकास कार्यों को धरातल पर उतारने की कमान सौंपी गई थी। इसके अतिरिक्त शिक्षा क्षेत्र में सुधार हेतु संचालित समग्र शिक्षा अभियान (एसएमएसए) में उन्होंने स्टेट प्रोजेक्ट डायरेक्टर के रूप में दायित्व संभाला। उन्होंने स्टेट इंश्योरेंस एंड प्रोविडेंट फंड (एसआईपीएफ) विभाग में निदेशक, जल संसाधन विभाग में संयुक्त सचिव, बाल अधिकारिता विभाग में अतिरिक्त निदेशक तथा राजस्थान आवासन मंडल (राजस्थान हाउसिंग बोर्ड) में चीफ एस्टेट ऑफिसर जैसे उच्च पदों पर रहकर प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ किया। इसके साथ ही उन्होंने राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम (आरएसआरटीसी) और जयपुर नगर निगम में भी दीर्घकाल तक प्रमुख जिम्मेदारियों का निर्वहन किया।\n\nराजधानी जयपुर में केंद्रित रहा सेवा का प्रमुख भाग\nउनके 30 वर्षों के सेवाकाल का एक बड़ा हिस्सा राजधानी जयपुर की व्यवस्थाओं को संभालने में व्यतीत हुआ। वर्ष 1995-96 में उन्होंने जयपुर के सुप्रसिद्ध सांस्कृतिक केंद्र रवींद्र मंच के प्रबंधक का दायित्व निभाया था। प्रशासनिक सीढ़ियां चढ़ते हुए उन्होंने जयपुर में उपखंड अधिकारी (एसडीएम/एसडीओ) के पद पर काम किया और बाद में नगर निगम जयपुर में कमिश्नर (मुख्यालय) की जिम्मेदारी संभाली। इसके उपरांत खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग में डिप्टी कमिश्नर के रूप में जनवितरण प्रणाली को देखा और जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) में अतिरिक्त निगमायुक्त (भूमि) का दायित्व संभालते हुए भूमि एवं संपदा संबंधी मामलों का निपटारा किया। नगरीय प्रशासन के अतिरिक्त उन्होंने राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम (रोडवेज) में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर (प्रशासन) की भूमिका भी कुशलतापूर्वक निभाई।\n\nपे-माइनस-पेंशन फॉर्मूले पर छह माह के लिए नई नियुक्ति\nप्रशासनिक गलियारों में श्रुति भारद्वाज की कार्यशैली को ऐसे अधिकारी के तौर पर जाना जाता है जो जटिल फाइलों और नीतिगत गतिरोधों को सुलझाकर सटीक परिणाम सुनिश्चित करती हैं। राजस्थान कॉपरेटिव डेयरी फेडरेशन का सीधा संबंध राज्य के लाखों पशुपालकों, ग्रामीण दुग्ध सहकारी समितियों तथा शहरों के आम उपभोक्ताओं से जुड़ा है। 31 अगस्त को उनकी सेवानिवृत्ति के उपरांत पिछले एक माह से आरसीडीएफ के एमडी का पद रिक्त पड़ा था और इतने बड़े तंत्र को सुचारू रखने के लिए किसी सक्षम विकल्प की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। सरकार ने उनके लंबे अनुभव और कार्यकुशलता पर पुनः भरोसा जताते हुए 'पे-माइनस-पेंशन' (वेतन में से पेंशन की राशि घटाकर मिलने वाला भुगतान) के नियम के तहत आगामी छह माह के लिए उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी है।\n\nइसका आप पर असर\nइस प्रशासनिक फैसले से राज्य की डेयरी आपूर्ति श्रृंखला और ग्रामीण दुग्ध उत्पादक तंत्र पर सीधा प्रभाव पड़ेगा।\n\n• राजस्थान में: राजस्थान कॉपरेटिव डेयरी फेडरेशन में अनुभवी नेतृत्व की वापसी से दुग्ध संकलन, वितरण और ग्रामीण पशुपालकों के भुगतान की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित रहने की उम्मीद है। इससे सरस ब्रांड के तहत दूध और दुग्ध उत्पादों की बाजार आपूर्ति सुचारू बनी रहेगी।\n• भारत में: यह निर्णय इस बात का उदाहरण है कि विशिष्ट क्षेत्रों के संचालन के लिए सेवानिवृत्ति के बाद भी अनुभवी अधिकारियों की सेवा ली जा सकती है। इससे अन्य राज्यों के सार्वजनिक उपक्रमों में भी आवश्यकता पड़ने पर ऐसी प्रशासनिक व्यवस्था को गति मिल सकती है।\n• सहकारी समितियों के लिए: ग्रामीण स्तर के दुग्ध संघों को नीतिगत निर्णयों में विलंब से राहत मिलेगी। प्रशासनिक स्थिरता रहने से स्थानीय समितियों के कामकाज में निरंतरता आएगी।\n• प्रशासनिक सेवाओं के लिए: यह आदेश स्पष्ट करता है कि विशिष्ट विशेषज्ञता होने पर शासन नियमों में शिथिलता प्रदान कर सकता है। सेवानिवृत्त अधिकारियों के लिए तय शर्तों के तहत काम करने के अवसर बने रहते हैं।\n\nऐसा क्यों हुआ\nआरसीडीएफ के प्रबंध निदेशक पद पर सेवानिवृत्ति के तुरंत बाद हुई यह पुनर्नियुक्ति कई प्रशासनिक परिस्थितियों और आवश्यकताओं का परिणाम है।\n\n• पद का रिक्त रहना: 31 अगस्त 2026 को श्रुति भारद्वाज के सेवानिवृत्त होने के बाद से यह महत्वपूर्ण पद करीब एक महीने से खाली था। डेयरी संघ के दैनिक संचालन और नीतिगत फैसलों के लिए सक्षम नेतृत्व की त्वरित आवश्यकता थी।\n• विशाल और जटिल ढांचा: डेयरी फेडरेशन का संबंध राज्य भर के लाखों पशुपालकों, सैकड़ों ग्रामीण सहकारी संघों और शहरी उपभोक्ताओं से जुड़ा है। ऐसे वृहद नेटवर्क को संभालने के लिए सरकार को तत्काल कोई अन्य उपयुक्त और अनुभवी विकल्प नहीं मिल रहा था।\n• संबंधित अधिकारी का ट्रैक रिकॉर्ड: श्रुति भारद्वाज का तीन दशकों का प्रशासनिक करियर और आरसीडीएफ में पिछला कार्यकाल काफी प्रभावी माना गया। इसी कार्यकुशलता को देखते हुए सरकार ने पात्रता नियमों को शिथिल करते हुए 'पे-माइनस-पेंशन' व्यवस्था के तहत उन्हें छह माह का सेवा विस्तार दिया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. श्रुति भारद्वाज कौन हैं और सरकार ने उन्हें क्या जिम्मेदारी सौंपी है?\nश्रुति भारद्वाज 2013 बैच की आईएएस अधिकारी हैं, जिन्हें सेवानिवृत्ति के एक माह बाद राजस्थान कॉपरेटिव डेयरी फेडरेशन (आरसीडीएफ) का मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त किया गया है।\n\n2. श्रुति भारद्वाज आधिकारिक रूप से कब सेवानिवृत्त हुई थीं?\nवे 31 अगस्त 2026 को अपनी नियमित सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त हुई थीं।\n\n3. आरसीडीएफ के एमडी पद पर उनकी नई नियुक्ति कितने समय के लिए की गई है?\nराज्य सरकार ने उन्हें अगले छह महीने की अवधि के लिए इस पद की कमान सौंपी है।\n\n4. उनकी इस नियुक्ति की वित्तीय और सेवा शर्तें क्या हैं?\nसरकार ने पात्रता नियमों को शिथिल करते हुए उन्हें 'पे-माइनस-पेंशन' (वेतन में से पेंशन घटाकर भुगतान) के आधार पर नियुक्त किया है।\n\n5. श्रुति भारद्वाज ने अपने करियर की शुरुआत कब और किस सेवा से की थी?\nउन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1994 में राजस्थान प्रशासनिक सेवा (आरएएस) के अधिकारी के रूप में की थी।\n\n6. वे किन जिलों में कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट के पद पर रह चुकी हैं?\nवे राजस्थान के नवगठित जिलों नीमकाथाना और डीग की कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट रह चुकी हैं।",
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  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-10-01",
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