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  "type": "article",
  "title": "राजस्थान में शहरों के मुखिया चुनने की जंग तेज, 273 निकायों में वोटिंग और नतीजों का दिन",
  "summary": "राजस्थान के 273 नगरीय निकायों में सोमवार को मेयर, सभापति और पालिका अध्यक्ष चुनने के लिए मतदान और मतगणना का दौर शुरू हो गया है, जहां निर्दलीय पार्षद कई सीटों पर नतीजों की दिशा तय कर रहे हैं।",
  "content": "राजस्थान के शहरी इलाकों में स्थानीय सत्ता की कमान संभालने के लिए राजनीतिक घमासान अपने निर्णायक मोड़ पर आ चुका है। प्रदेश भर के 273 नगरीय निकायों में शीर्ष पदों को भरने के लिए पार्षद मतदान कर रहे हैं, जिसके तुरंत बाद मतगणना कर परिणामों की घोषणा की जाएगी। इस चुनावी कवायद के तहत पांच प्रमुख नगर निगमों में महापौर, 41 नगर परिषदों में सभापति और 262 नगर पालिकाओं में अध्यक्ष चुने जाने हैं। इससे पहले प्रदेश के 305 नगरीय निकायों में 9 और 11 सितंबर को वार्ड पार्षदों के लिए वोट डाले गए थे। हालांकि, 32 निकायों में शीर्ष पदों पर निर्विरोध निर्वाचन पहले ही संपन्न हो चुका है, जबकि कुछ बड़े शहरों में दोबारा मतदान की जरूरत के चलते तारीख आगे बढ़ाई गई है। अधिकांश शहरों में दोपहर तक मतदान और उसके बाद गिनती पूरी होते ही स्थानीय बोर्ड के गठन की तस्वीर साफ हो जाएगी।\n\nनिर्दलीय पार्षदों के इर्द-गिर्द घूमती सत्ता की चाबी\nइस बार के निकाय चुनाव परिणामों ने कई शहरों में दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों, भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस, के सामने जटिल समीकरण खड़े कर दिए हैं। बड़ी तादाद में निर्दलीय उम्मीदवारों की जीत की वजह से कई निकायों में किसी भी दल को अपने दम पर पूर्ण बहुमत हासिल नहीं हो सका है। नतीजा यह है कि सत्ता की बागडोर अपने हाथ में लेने के लिए दोनों खेमों ने पार्षदों की बाड़ाबंदी की और निर्दलीयों के साथ-साथ बागियों को साधने में पूरी ताकत झोंक दी। कई क्षेत्रों में यह निर्दलीय पार्षद ही निर्णायक भूमिका निभाते हुए तय कर रहे हैं कि नगर की सरकार किस पार्टी की बनेगी।\n\nपांच नगर निगमों में महापौर पद की दिलचस्प जंग\nसोमवार को प्रदेश के पांच नगर निगमों, जिनमें उदयपुर, बीकानेर, अलवर, पाली और अजमेर शामिल हैं, में महापौर चुनने के लिए वोटिंग कराई जा रही है। इन सभी जगहों पर सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक पार्षद अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं।\n\nउदयपुर नगर निगम के कुल 80 वार्डों में भारतीय जनता पार्टी काफी मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है। यहां भाजपा के 53, कांग्रेस के 23 और अन्य के 4 पार्षद जीतकर आए हैं। भाजपा ने महापौर पद के लिए पारस सिंघवी को मैदान में उतारा है, जबकि कांग्रेस की ओर से डॉ. पूनम कंवर दावेदारी पेश कर रही हैं।\n\nबीकानेर नगर निगम में समीकरण इसके विपरीत हैं, जहां कांग्रेस बढ़त बनाए हुए है। कुल पार्षदों में कांग्रेस के 42, भाजपा के 27 और अन्य श्रेणी के 11 पार्षद निर्वाचित हुए हैं। यहां बोर्ड बनाने के लिए आवश्यक संख्या बल जुटाने की होड़ मची हुई है।\n\nअलवर नगर निगम के इतिहास में पहली बार महापौर का चुनाव हो रहा है, जिसे लेकर जबरदस्त उत्साह है। 80 सदस्यीय निगम में भाजपा के 28, कांग्रेस के 23 और 14 निर्दलीय पार्षद हैं। भाजपा की सुमनलता अग्रवाल और कांग्रेस की कमलेश शर्मा के बीच सीधा मुकाबला बना हुआ है। यहां मतदान मतपत्र के जरिए कराया जा रहा है, जिसमें नोटा का विकल्प भी मौजूद है। जिन निर्वाचित पार्षदों का शपथ ग्रहण बाकी था, उन्हें वोट डालने से पहले शपथ दिलाई गई। जिले की नौ अन्य पालिकाओं में भी चुनाव जारी है, जबकि खेड़ली और गोविंदगढ़ में निर्विरोध निर्वाचन पहले ही हो चुका है।\n\nपाली नगर निगम में मुकाबला त्रिकोणीय रूप ले चुका है। 65 सदस्यीय सदन में कांग्रेस के 29, भाजपा के 21 और 15 निर्दलीय पार्षद हैं। भाजपा की नमिता बुबकिया और कांग्रेस की सुमित्रा जैन के अलावा कांग्रेस की बागी निर्दलीय प्रत्याशी राजबाला हिंगड़ भी मुकाबले में डटी हुई हैं। तीनों ही उम्मीदवार अपनी जीत और बोर्ड बनाने का पक्का दावा कर रहे हैं, जिससे 15 निर्दलीयों का रुख सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है।\n\nअजमेर नगर निगम में भी किसी दल के पास अपने बूते बहुमत का आंकड़ा नहीं है। कुल पार्षदों में कांग्रेस के पास 37, भाजपा के पास 32 और 11 निर्दलीय सदस्य हैं। कांग्रेस का दावा है कि पांच निर्दलीय उसके पाले में हैं, वहीं भाजपा भी पूरा जोर लगा रही है। कड़े मुकाबले को देखते हुए निगम दफ्तर पर सुरक्षा के सख्त पहरे लगाए गए हैं और बाहरी लोगों की आवाजाही पर पाबंदी लागू है।\n\nजयपुर, जोधपुर और कोटा में 25 सितंबर को होगा फैसला\nप्रदेश के तीन बड़े नगर निगमों, जयपुर, जोधपुर और कोटा में मेयर पद का चुनाव आज नहीं हो रहा है। इन शहरों के कुछ वार्डों में दोबारा मतदान कराए जाने के कारण निर्वाचन कार्यक्रम में बदलाव किया गया है और अब यहां 25 सितंबर को महापौर चुने जाएंगे। सुकेत नगर पालिका में भी पुनर्मतदान के चलते चुनाव इसी दिन होगा।\n\nसंख्या बल की बात करें तो जयपुर के 150 वार्डों में भाजपा के 78, कांग्रेस के 57 और 15 निर्दलीय पार्षद हैं। यहां भाजपा ने सुनील कोठारी को और कांग्रेस ने सुनीता मावर को टिकट दिया है। जोधपुर में बेहद करीबी स्थिति है, जहां भाजपा के 45, कांग्रेस के 44 और 10 निर्दलीय पार्षद हैं। कोटा नगर निगम में भाजपा के 57, कांग्रेस के 39 और 4 निर्दलीय पार्षद चुनकर आए हैं।\n\n32 निकायों में निर्विरोध निर्वाचन, दो नगर निगमों को मिलीं महिला मेयर\nराज्य निर्वाचन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 32 निकायों में बिना किसी मतदान के ही अध्यक्ष चुन लिए गए हैं। इनमें से 28 निकायों में भाजपा के प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं, जबकि दो पदों पर कांग्रेस और दो पर भाजपा समर्थित निर्दलीयों को जीत मिली है।\n\nभरतपुर और भीलवाड़ा नगर निगम में महापौर का चुनाव सर्वसम्मति से निर्विरोध संपन्न हुआ, जहां दोनों जगह महिलाओं ने कमान संभाली है। भरतपुर में अनुराधा और भीलवाड़ा में जसवंत कंवर निर्विरोध महापौर बनी हैं। इसके अलावा कई अन्य नगर परिषदों और पालिकाओं में भी शीर्ष पदों का निर्विरोध फैसला हो चुका है।\n\nकोटा जिले की चार पालिकाओं का चुनावी गणित\nकोटा जिले की सांगोद, सुल्तानपुर, इटावा और रामगंजमंडी नगर पालिकाओं में अध्यक्ष पद के लिए मतदान कराया जा रहा है। रामगंजमंडी में भाजपा के पास पर्याप्त बहुमत होने से वहां की स्थिति बिल्कुल साफ मानी जा रही है। इसके उलट, इटावा नगर पालिका में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला, जिसके चलते वहां निर्दलीय पार्षदों का समर्थन सबसे बड़ा कारक बन गया है और वे सीधे तौर पर किंगमेकर बन चुके हैं।\n\nराजसमंद और झालावाड़ में स्थानीय समीकरण\nराजसमंद जिले की पांच नगरीय निकायों में सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक सभापति और अध्यक्ष पद के लिए वोट डाले जा रहे हैं। यहां नगर परिषद और पालिकाओं में मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच ही सिमटा हुआ है। दोपहर बाद परिणाम आते ही यहां की राजनीतिक तस्वीर साफ हो जाएगी।\n\nझालावाड़ जिले के आठ नगरीय निकायों में भी चुनाव प्रक्रिया चल रही है। जिले के सात निकायों में स्थिति काफी हद तक स्पष्ट है। झालावाड़, डग, खानपुर और भवानीमंडी में कांग्रेस के पास बहुमत मौजूद है, जबकि झालरापाटन, अकलेरा और मनोहरथाना में भाजपा को स्पष्ट बढ़त हासिल है। हालांकि, पिड़ावा नगर पालिका में दोनों में से किसी भी दल के पास पर्याप्त आंकड़े नहीं हैं, जिससे वहां आम आदमी पार्टी के पार्षदों की भूमिका निर्णायक बन गई है।\n\nडूंगरपुर और सागवाड़ा में आदिवासी पार्टी की मौजूदगी\nडूंगरपुर नगर परिषद और सागवाड़ा नगर पालिका में भी मतदान जारी है। डूंगरपुर नगर परिषद में भाजपा की सुशीला गुप्ता और कांग्रेस के भरत नागदा आमने-सामने हैं। यहां के 40 पार्षदों में भाजपा के 24, कांग्रेस के 12, भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) के 3 और भाजपा के एक बागी निर्दलीय पार्षद शामिल हैं।\n\nसागवाड़ा नगर पालिका में अध्यक्ष का चुनाव एसडीएम कार्यालय में कराया जा रहा है। यहां भाजपा की आशा पाटीदार का मुकाबला कांग्रेस की भूमिका पंचाल से है। सदन के 35 पार्षदों में भाजपा के पास 23, कांग्रेस के पास 8 और बीएपी के पास 4 सदस्य हैं।\n\nकरौली जिले की पांच निकायों में घमासान\nकरौली जिले में हिंडौन नगर परिषद में सभापति का निर्विरोध निर्वाचन पहले ही हो चुका है। शेष पांच निकायों, जिनमें करौली नगर परिषद, सपोटरा, मंडरायल, टोडाभीम और सूरौठ शामिल हैं, में सोमवार को मतदान हो रहा है। करौली नगर परिषद में 55 पार्षद मतदान कर रहे हैं। सपोटरा, मंडरायल और सूरौठ में 20-20 पार्षद तथा टोडाभीम में 35 पार्षद अपने अध्यक्ष का चुनाव कर रहे हैं।\n\nकरौली नगर परिषद के 55 वार्डों में कांग्रेस के 28, भाजपा के 11, बसपा का एक और 15 निर्दलीय पार्षद हैं। कांग्रेस ने सुनील सैनी को और भाजपा ने वीरेंद्र शर्मा को सभापति पद का उम्मीदवार बनाया है। सपोटरा नगर पालिका में कुल 20 पार्षदों में से भाजपा के पास 15, कांग्रेस के पास 3 और 2 निर्दलीय हैं। यहां भाजपा की सपना और कांग्रेस की कविता के बीच मुकाबला है और राजकीय महाविद्यालय सपोटरा में मतदान कराया गया।\n\nझुंझुनूं, जैसलमेर, पोकरण और हनुमानगढ़ का माहौल\nझुंझुनूं जिले के 18 नगरीय निकायों में कुल 530 वार्ड पार्षद अपने निकाय प्रमुखों को चुन रहे हैं। चुनाव से ऐन पहले झुंझुनूं में कांग्रेस पार्षद सुमन खान को अतिक्रमण के मामले में तहसीलदार की ओर से तीन दिन का नोटिस जारी किए जाने से सियासी हलकों में हलचल मच गई है, जिसमें जवाब न देने पर एकतरफा कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।\n\nजैसलमेर नगर परिषद के 45 वार्ड पार्षद सभागार में मतदान कर नए सभापति का चुनाव कर रहे हैं। वहीं पोकरण नगर पालिका सभागार में 25 पार्षद अध्यक्ष पद के लिए वोट डाल रहे हैं, जहां कांग्रेस अपने बोर्ड गठन का दावा कर रही है।\n\nहनुमानगढ़ नगर परिषद में सभापति चुनाव के दिन सुबह ट्रेन से निर्दलीय पार्षदों का जत्था जंक्शन पहुंचा। विधायक गणेशराज बंसल के समर्थक यह पार्षद पूर्व सभापति सुमित रिणवा के नेतृत्व में पहुंचे, जिसके बाद गहमागहमी तेज हो गई। पार्षदों ने अदालत के निर्देशों के बावजूद प्रशासनिक दबाव और वोटिंग से वंचित किए जाने की आशंका जताई है। इन सभी निकायों में मतदान खत्म होते ही मतगणना कर नतीजे जारी कर दिए जाएंगे।\n\nइसका आप पर असर\nराजस्थान के 273 शहरी क्षेत्रों में नए बोर्ड और अध्यक्षों के गठन से स्थानीय नागरिक विकास और बुनियादी सेवाओं के फैसलों में तेजी आएगी।\n\n• शहरी विकास कार्य: नए मेयर और पालिका अध्यक्षों के शपथ लेने के बाद रुके हुए सड़क, नाली, प्रकाश और सफाई कार्यों के बजट को हरी झंडी मिलेगी। इससे नागरिकों को लंबे समय से अटके स्थानीय विकास कार्यों के शुरू होने से राहत मिलेगी।\n• प्रशासनिक कामकाज: नगर परिषदों और पालिकाओं में राजनीतिक नेतृत्व स्थापित होने से पट्टा वितरण और भवन निर्माण स्वीकृति जैसे जनता से जुड़े कार्य सुचारू हो सकेंगे। आम लोगों को अपनी स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए अब चुने हुए जन प्रतिनिधियों का मंच उपलब्ध होगा।\n• स्थानीय राजनीति: कई निकायों में निर्दलीय पार्षदों के निर्णायक होने से आगामी पांच वर्षों तक बोर्ड चलाने में स्थानीय समझौतों की भूमिका अहम रहेगी। इसका असर शहरों की विकास प्राथमिकताओं और स्थानीय नीतियों पर साफ तौर पर दिखाई देगा।\n• बड़े शहरों में इंतजार: जयपुर, जोधपुर और कोटा के नागरिकों को अपने महापौर के लिए 25 सितंबर तक इंतजार करना होगा। वहां पुनर्मतदान संपन्न होने के बाद ही नगर निगम की नई सरकार अपना काम शुरू करेगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nराजस्थान के शहरों में स्थानीय सरकार के शीर्ष पदों को भरने के लिए यह अप्रत्यक्ष चुनाव आयोजित किया गया है, जहां हाल ही में चुनकर आए वार्ड पार्षद अपने-अपने निकाय के प्रमुख का चयन करते हैं।\n\n• संवैधानिक प्रक्रिया: प्रदेश के 305 नगरीय निकायों में 9 और 11 सितंबर को जनता द्वारा सीधे वार्ड पार्षदों का निर्वाचन संपन्न हुआ था। तय नियमों के अनुसार, इन्हीं निर्वाचित पार्षदों को अपने बीच से महापौर, सभापति या अध्यक्ष चुनने के लिए मतदान करना होता है।\n• खंडित जनादेश और निर्दलीय: आम निकाय चुनावों में कई शहरों में किसी भी बड़े राजनीतिक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। इस स्थिति के चलते बागियों और निर्दलीय पार्षदों की भूमिका निर्णायक बन गई और दलों को बाड़ाबंदी करनी पड़ी।\n• निर्विरोध चुनाव और पुनर्मतदान: 32 निकायों में आपसी सहमति या एकतरफा संख्या बल के चलते चुनाव निर्विरोध तय हो गए। वहीं जयपुर, जोधपुर, कोटा और सुकेत के कुछ वार्डों में गड़बड़ियों के चलते दोबारा मतदान की आवश्यकता पड़ी, जिससे वहां की तिथि 25 सितंबर तय की गई।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. राजस्थान में कितने नगरीय निकायों में सोमवार को मतदान हो रहा है?\nप्रदेश के 273 नगरीय निकायों में अध्यक्ष, सभापति और महापौर चुनने के लिए सोमवार को मतदान और मतगणना हो रही है।\n\n2. जयपुर, जोधपुर और कोटा में महापौर पद का चुनाव आज क्यों नहीं हुआ?\nइन तीनों बड़े नगर निगमों के कुछ वार्डों में दोबारा मतदान होने के कारण मेयर पद के चुनाव की तारीख 25 सितंबर तय की गई है।\n\n3. कितने नगरीय निकायों में अध्यक्ष पद पर निर्विरोध निर्वाचन हुआ है?\nराज्य के 32 नगरीय निकायों में निर्विरोध निर्वाचन हो चुका है, जिनमें 28 पदों पर भाजपा, दो पर कांग्रेस और दो पर भाजपा समर्थित निर्दलीय जीते हैं।\n\n4. किन दो नगर निगमों में निर्विरोध महिला मेयर चुनी गई हैं?\nभरतपुर नगर निगम में अनुराधा और भीलवाड़ा नगर निगम में जसवंत कंवर निर्विरोध महापौर चुनी गई हैं।\n\n5. सोमवार को किन पांच नगर निगमों में महापौर के लिए मतदान हो रहा है?\nउदयपुर, बीकानेर, अलवर, पाली और अजमेर नगर निगमों में सोमवार को महापौर चुनने के लिए वोट डाले जा रहे हैं।\n\n6. अलवर नगर निगम चुनाव में कौन-कौन से प्रत्याशी मैदान में हैं?\nअलवर नगर निगम में भाजपा की सुमनलता अग्रवाल और कांग्रेस की कमलेश शर्मा के बीच महापौर पद के लिए मुकाबला है।",
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  "category": "राजस्थान",
  "publishedAt": "2026-09-21",
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    "राजस्थान निकाय चुनाव",
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