राजस्थान में सिंचाई पानी पर भड़का किसानों का गुस्सा, 4 मंडियां ठप और 24 सितंबर को चक्का जाम बीकानेर और आसपास के क्षेत्रों में रबी फसलों के लिए सिंचाई पानी की मांग पर किसानों ने प्रदर्शन तेज कर दिया है, वार्ता विफल होने पर 24 सितंबर को चक्का जाम की चेतावनी दी गई है। राजस्थान के बीकानेर जिले अंतर्गत खाजूवाला और निकटवर्ती ग्रामीण अंचलों में खेतों की प्यास बुझाने को लेकर किसानों का आक्रोश सड़कों पर उतर आया है। रबी सत्र की बुवाई और फसलों की सुरक्षा के लिए सिंचाई जल की पुख्ता व्यवस्था की मांग को लेकर काश्तकारों ने अपना विरोध प्रदर्शन व्यापक कर दिया है। इस आंदोलन के प्रभाव से क्षेत्र की चार प्रमुख कृषि उपज मंडियां पूरी तरह बंद रहीं, जहां स्थानीय व्यापारिक संगठनों ने भी अपनी दुकानें और व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रखकर किसानों की मांगों का खुला समर्थन किया है। व्यापारियों का समर्थन और कृषि मंडियों में पसरा सन्नाटा आंदोलन की लामबंदी का असर खाजूवाला, रावला, घड़साना और अनूपगढ़ क्षेत्रों में साफ देखा गया, जहां की सभी मंडियों में कामकाज पूरी तरह ठप रहा। धान मंडियों से लेकर कस्बों के मुख्य बाजारों तक दुकानों के शटर गिरे रहे और रोजमर्रा की व्यावसायिक गतिविधियां थम जाने से चारों तरफ सन्नाटा पसरा रहा। व्यापारिक बिरादरी द्वारा दिए गए इस बंद के समर्थन ने आंदोलन को जमीनी स्तर पर मजबूती प्रदान की है। चीफ इंजीनियर के साथ वार्ता विफल, रबी सिंचाई पर टकराव बरकरार इस पूरे गतिरोध की मुख्य जड़ आगामी रबी फसल के लिए सिंचाई पानी का एक तय और स्थाई रेगुलेशन लागू कराने की मांग है। काश्तकारों का कहना है कि जल वितरण की अनिश्चितता के चलते उनकी मेहनत और लागत दोनों पर संकट मंडराता रहता है। इसी मसले को सुलझाने के लिए देर रात तक किसान प्रतिनिधियों और जल संसाधन विभाग के चीफ इंजीनियर के मध्य मैराथन बैठक चली। घंटों तक चली यह वार्ता बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गई, जिसके बाद किसानों में असंतोष और गहरा गया है। घड़साना और अनूपगढ़ बने केंद्र, 24 सितंबर को चक्का जाम की तैयारी प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बातचीत बेनतीजा रहने के बाद आंदोलनकारी किसानों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी समस्याओं का कोई ठोस और स्थाई हल नहीं निकाला जाता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। घड़साना और अनूपगढ़ को इस आंदोलन का मुख्य केंद्र बनाते हुए किसान संगठन लगातार बैठकें कर रहे हैं। प्रशासन तथा सरकार पर दबाव बनाने के उद्देश्य से अब 24 सितंबर को व्यापक स्तर पर चक्का जाम करने की घोषणा की गई है, जिससे आने वाले दिनों में यातायात और सामान्य आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है। इसका आप पर असर सिंचाई जल विवाद और मंडियों की हड़ताल से क्षेत्रीय कृषि उपज व्यापार एवं सामान्य जनजीवन सीधे प्रभावित हो रहा है। • राजस्थान में: राज्य के बीकानेर और अनूपगढ़ जिलों में कृषि मंडियों के बंद रहने से किसानों की उपज की खरीद-बिक्री तथा नकदी प्रवाह रुक गया है। 24 सितंबर को घोषित चक्का जाम के कारण प्रमुख राजमार्गों पर आवागमन बाधित होने की संभावना है, इसलिए यात्रियों और मालवाहकों को वैकल्पिक मार्गों की योजना पहले से बनानी चाहिए। • किसानों और व्यापारियों के लिए: रबी फसल की बुवाई से पहले सिंचाई पानी का अनिश्चित रहना आगामी कृषि उत्पादन को जोखिम में डाल रहा है। मंडियों के बंद होने से दैनिक मजदूरी करने वाले श्रमिकों और आढ़तियों की दैनिक कमाई भी पूरी तरह थम गई है। • आपूर्ति और दैनिक बाजार: स्थानीय स्तर पर खाद्यान्न एवं जरूरी जिंसों की आवक प्रभावित होने से थोक व्यापार पर असर पड़ रहा है। यदि यह गतिरोध लंबा खिंचता है, तो निकटवर्ती कस्बों में कृषि उपभोग्य सामग्रियों की आपूर्ति में देरी देखने को मिल सकती है। • प्रशासन और आम नागरिक: 24 सितंबर के प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस और प्रशासन सुरक्षा इंतजामों में जुटा है। आम नागरिकों को उस दिन आपातकालीन यात्राओं के अलावा गैर-जरूरी आवागमन टालने की सलाह दी जाती है। ऐसा क्यों हुआ यह आंदोलन आगामी रबी फसल के लिए सिंचाई जल के स्थाई वितरण नियम तय न होने और विभागीय वार्ता विफल होने के कारण भड़का है। • सिंचाई पानी का स्थाई नियमन न होना: किसान लंबे समय से रबी फसल की जरूरतों को देखते हुए नहरी पानी के वितरण का एक स्थायी और निश्चित रोस्टर तय करने की मांग कर रहे हैं। इस संबंध में कोई ठोस नीति न होने से बुवाई चक्र पर अनिश्चितता का संकट बना हुआ है। • चीफ इंजीनियर के साथ वार्ता की विफलता: गतिरोध खत्म करने के लिए जल संसाधन विभाग के चीफ इंजीनियर और किसान नेताओं के बीच देर रात तक बातचीत हुई। किसी सहमति पर न पहुंच पाने के कारण किसान प्रतिनिधि नाराज होकर बैठक से बाहर आ गए और आंदोलन तेज कर दिया। • क्षेत्रीय बंद और संगठित विरोध का प्रसार: खाजूवाला, रावला, घड़साना और अनूपगढ़ क्षेत्रों के व्यापारियों ने एकजुट होकर बंद का आह्वान किया, जिसने इसे केवल कृषक आंदोलन के बजाय एक व्यापक नागरिक और व्यापारिक हड़ताल में बदल दिया। सवाल-जवाब 1. किसानों के आंदोलन का मुख्य कारण क्या है? किसान रबी फसल की बुवाई के लिए सिंचाई पानी का एक स्थाई और सुनिश्चित रेगुलेशन लागू करने की मांग कर रहे हैं। 2. किन-किन क्षेत्रों की कृषि मंडियां बंद रखी गई हैं? खाजूवाला, रावला, घड़साना और अनूपगढ़ की चार प्रमुख कृषि मंडियों में कामकाज पूरी तरह बंद रखा गया है। 3. चीफ इंजीनियर के साथ हुई बातचीत का क्या परिणाम निकला? देर रात तक चली यह बैठक पूरी तरह बेनतीजा रही, क्योंकि किसी भी मुद्दे पर सहमति नहीं बन सकी। 4. किसानों ने आगे किस बड़े प्रदर्शन की घोषणा की है? मांगें न माने जाने के विरोध में किसानों ने 24 सितंबर को चक्का जाम करने का ऐलान किया है। https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-men-sinchai-pani-para-bharaka-kisanon-ka-gussa-4-mndiyan-thapa-aura-24-sitnbara-ko-chakka-jama-36204 TrendKia — Har trend, sabse pehle.