# राजस्थान में संगठन फेरबदल के तहत राधामोहनदास अग्रवाल की छुट्टी, संजय भाटिया बने नए प्रभारी

> बीजेपी ने राजस्थान के प्रदेश प्रभारी पद पर बदलाव करते हुए राधामोहनदास अग्रवाल की जगह हरियाणा के नेता संजय भाटिया को कमान सौंपी है। अग्रवाल का कार्यकाल महज 26 महीने का रहा, जो पूर्व प्रभारियों की तुलना में सबसे छोटा साबित हुआ।

**Type:** article · **Category:** राजस्थान · **Published:** 2026-09-24 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-men-sngathana-pherabadala-ke-tahata-radhamohan-das-agrawal-ki-chhutti-sanjay-bhatia-bane-nae-prabhari-37769 · **Language:** Hindi
**Tags:** बीजेपी, राजस्थान राजनीति, राधामोहनदास अग्रवाल, संजय भाटिया, राजेंद्र राठौड़, सचिन पायलट, बी एल संतोष

जयपुर में भारतीय जनता पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में एक महत्वपूर्ण फेरबदल देखने को मिला है, जिसके तहत राजस्थान के प्रदेश प्रभारी पद पर नई नियुक्ति की गई है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने राधामोहनदास अग्रवाल को इस जिम्मेदारी से मुक्त करते हुए हरियाणा के वरिष्ठ नेता संजय भाटिया को राज्य का नया प्रभारी नियुक्त किया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पृष्ठभूमि से आने वाले संजय भाटिया हरियाणा बीजेपी संगठन में महामंत्री जैसे महत्वपूर्ण सांगठनिक पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। सांगठनिक लिहाज से देखें तो राजस्थान में पिछले तीन प्रभारियों के दौर में राधामोहनदास अग्रवाल का कार्यकाल सबसे संक्षिप्त रहा है। वे कुल मिलाकर लगभग 26 महीने ही इस पद पर अपनी जिम्मेदारी निभा पाए।

यदि पिछले कार्यकालों से तुलना की जाए, तो अग्रवाल से ठीक पहले अरुण सिंह साढ़े तीन साल से अधिक यानी कुल 44 महीने तक राजस्थान के प्रभारी पद पर रहे थे। वहीं उनसे पूर्व अविनाश राय खन्ना ने पांच वर्ष से भी अधिक समय तक राज्य में पार्टी संगठन का मार्गदर्शन किया था और उनका कार्यकाल करीब 64 महीने का रहा था। इस पृष्ठभूमि में राधामोहनदास अग्रवाल की केवल 26 महीनों में विदाई के पीछे कई संगठनात्मक और राजनीतिक कारण सामने आ रहे हैं। राज्य के राजनीतिक जानकारों के अनुसार, उनके हटने की सबसे प्रमुख वजह राजस्थान बीजेपी इकाई के साथ आवश्यक समन्वय और तालमेल का स्पष्ट अभाव रही। वे प्रांतीय स्तर के प्रमुख नेताओं के साथ सामंजस्य स्थापित करने में पूरी तरह सफल नहीं हो सके थे, जिससे संगठन के भीतर असंतोष पनप रहा था।

## सहयोगियों के साथ समन्वय की कमी और सार्वजनिक बयानबाजी
राजस्थान संगठन के भीतर कई वरिष्ठ नेताओं में प्रभारी के कामकाज की शैली को लेकर भारी नाराजगी देखने को मिल रही थी। पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व इस आंतरिक खींचतान को और लंबा खींचने के पक्ष में नहीं था। इसके साथ ही, समय-समय पर राधामोहनदास अग्रवाल द्वारा सार्वजनिक मंचों पर की गई सख्त और तीखी बयानबाजी ने भी संगठन के लिए बार-बार असहज परिस्थितियां पैदा कीं। पार्टी के भीतर यह संदेश गया कि सार्वजनिक रूप से दिए गए इन बयानों से दल की छवि को नुकसान पहुंच रहा है। इन दोनों प्रमुख वजहों के अतिरिक्त, उनका व्यक्तिगत रुझान और राजनीतिक लगाव उत्तर प्रदेश की राजनीति में कहीं अधिक बना रहा। उत्तर प्रदेश में चुनावों और राजनीतिक गतिविधियों के चलते वे वहीं पर अधिक सक्रिय भूमिका निभाने के इच्छुक थे, जिससे राजस्थान में उनका ध्यान और समय लगातार घटता गया।

## राजेंद्र राठौड़ को लेकर दिया गया बयान बना बड़ा विवाद
राजस्थान की कमान संभालने के शुरुआती दौर में ही राधामोहनदास अग्रवाल का एक विवादित बयान पार्टी के लिए भारी सिरदर्द बन गया था। यह घटनाक्रम अगस्त 2024 का है, जब प्रदेश में पार्टी की सदस्यता अभियान से जुड़ी एक महत्वपूर्ण कार्यशाला आयोजित की गई थी। इस बैठक के दौरान राज्य के दिग्गज नेता राजेंद्र राठौड़ किसी जरूरी फोन कॉल पर बात करने के लिए सभागार से कुछ पलों के लिए बाहर निकले थे। इस पर अग्रवाल मंच पर ही नाराज हो गए और उन्होंने सार्वजनिक रूप से राठौड़ पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने मंच से कहा कि कोई भी व्यक्ति पार्टी से बड़ा नहीं हो सकता। अग्रवाल ने साफ तौर पर कहा कि वे सभी पर नजर रख रहे हैं, चाहे कोई बैठक में उपस्थित हो या फिर अनुपस्थित रहे।

## राठौड़ समर्थकों का तीखा विरोध और बैकफुट पर आए प्रभारी
बैठक के दौरान मंच से बोलते हुए राधामोहनदास ने राजेंद्र राठौड़ के इस कदम को अनुशासनहीनता करार दिया और उनके वहां न होने पर कड़ी आपत्ति जताई। अग्रवाल द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्दों और लहजे के चलते राठौड़ के समर्थक गहरे आक्रोश में आ गए। इसके विरोध में राजस्थान के विभिन्न हिस्सों में तीखे प्रदर्शन हुए और जगह-जगह राधामोहनदास अग्रवाल के पुतले तक फूंके गए। मामले को तूल पकड़ता देख स्वयं राजेंद्र राठौड़ को आगे आना पड़ा। उन्होंने कार्यकर्ताओं के विरोध प्रदर्शन को अनुचित बताते हुए कहा कि वे पार्टी के एक अनुशासित कार्यकर्ता हैं। इस पूरे हंगामे के बाद राधामोहनदास अग्रवाल को भी बैकफुट पर आना पड़ा और उन्होंने सार्वजनिक तौर पर अपने बयान पर स्पष्टीकरण पेश किया।

## सचिन पायलट पर टिप्पणी से गरमाई थी राज्य की राजनीति
अग्रवाल से जुड़ा दूसरा बड़ा सियासी विवाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट को लेकर दिए गए एक बयान से पैदा हुआ था। टोंक में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान राधामोहनदास ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि सचिन पायलट न तो टोंक के रहने वाले हैं और न ही वे राजस्थान के मूल निवासी हैं। उन्होंने यह सवाल भी खड़ा किया कि एक बाहरी व्यक्ति को विधानसभा सदस्य चुनकर राजस्थान का अपमान किया गया है। इसके साथ ही उन्होंने पायलट की राजनीतिक निष्ठा पर भी सवालिया निशान लगाए थे। इस टिप्पणी के बाद कांग्रेस ने कड़ा विरोध जताया और आरोप लगाया कि राधामोहनदास अग्रवाल को राजस्थान की राजनीतिक और सामाजिक संस्कृति की बुनियादी समझ तक नहीं है।

## प्रदेश इकाई से बढ़ती दूरी और अंततः नेतृत्व में बदलाव
लगातार विवादित बयानों और आक्रामक तेवरों के कारण पार्टी का प्रांतीय नेतृत्व असहज होता चला गया और वरिष्ठ नेताओं में दूरियां गहरी होती गईं। जब पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बी एल संतोष जयपुर प्रवास पर पहुंचे थे, तब भी स्थानीय नेताओं ने इस असंतोष और समन्वय की कमी का मुद्दा उनके समक्ष उठाया था। इसके बाद राजस्थान इकाई और प्रभारी के बीच दूरियां और अधिक बढ़ गईं। स्थिति यह बनी कि अग्रवाल ने राजस्थान के दौरे काफी कम कर दिए और वे कई महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठकों तथा कार्यक्रमों से नदारद रहने लगे। उनका अधिकांश समय उत्तर प्रदेश में बीतने लगा और वे वहीं सक्रिय रहने का मन बना चुके थे। पार्टी हलकों में कई महीने पहले से ही यह माना जा रहा था कि राजस्थान में प्रभारी बदला जाना तय है, केवल निकाय चुनावों के संपन्न होने की प्रतीक्षा की जा रही थी। अब संजय भाटिया की नियुक्ति के साथ इस प्रक्रिया को पूरा कर लिया गया है।

## इसका आप पर असर
राजस्थान बीजेपी में प्रभारी बदलने से राज्य के राजनीतिक समीकरणों और संगठन के कामकाज पर सीधा प्रभाव पड़ेगा।

- **राजस्थान में:** पार्टी कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं के बीच सांगठनिक तालमेल अब नए सिरे से तय होगा। विवादित बयानबाजियों पर लगाम लगने से संगठन में अनुशासन और स्थानीय समन्वय को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
- **भारत में:** राष्ट्रीय स्तर पर बीजेपी का ध्यान अपने राज्य प्रभारियों और स्थानीय इकाइयों के आपसी समन्वय को दुरुस्त रखने पर केंद्रित दिखता है। हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों के वरिष्ठ नेताओं की सांगठनिक भूमिकाओं में संतुलन स्थापित किया जा रहा है।
- **कार्यकर्ताओं पर प्रभाव:** जमीनी स्तर पर काम कर रहे पार्टी कार्यकर्ताओं को अब नए प्रभारी के साथ संवाद स्थापित करना होगा। इससे आगामी सांगठनिक कार्यक्रमों और स्थानीय अभियानों की प्राथमिकताओं में बदलाव आ सकता है।
- **विपक्षी रणनीति:** बाहरी और स्थानीय नेतृत्व के मुद्दे पर होने वाली राजनीतिक बहस का रुख अब बदल सकता है। कांग्रेस को पूर्व प्रभारी के विवादित बयानों से जो सियासी मुद्दा मिलता था, उस पर विराम लग सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
राधामोहनदास अग्रवाल को राजस्थान प्रभारी पद से हटाने का फैसला कई महीनों से चले आ रहे सांगठनिक तनाव, स्थानीय नेताओं से तालमेल के अभाव और लगातार उपजे विवादों के बाद लिया गया है।

- **स्थानीय नेताओं से समन्वय का अभाव:** अग्रवाल राजस्थान बीजेपी इकाई के प्रमुख नेताओं के साथ सामंजस्य स्थापित नहीं कर सके थे। कई वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी के कारण संगठन में असहजता की स्थिति लगातार बनी हुई थी।
- **विवादित सार्वजनिक बयान:** अगस्त 2024 में राजेंद्र राठौड़ को लेकर सार्वजनिक मंच से की गई टिप्पणी और बाद में सचिन पायलट पर बाहरी होने का बयान भारी सियासी विवाद का कारण बने। इससे पार्टी को बार-बार सफाई देनी पड़ी और कार्यकर्ताओं में रोष फैला।
- **उत्तर प्रदेश पर बढ़ता ध्यान:** अग्रवाल का व्यक्तिगत झुकाव और राजनीतिक व्यस्तता अपने गृह राज्य उत्तर प्रदेश में अधिक बनी हुई थी। यूपी में सक्रिय होने की इच्छा के कारण उन्होंने राजस्थान के दौरे और अहम बैठकों में उपस्थिति कम कर दी थी।
- **केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंची शिकायत:** पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बी एल संतोष के जयपुर दौरे के दौरान प्रदेश नेताओं ने प्रभारी के साथ दूरी का मुद्दा उठाया था। निकाय चुनावों के पूरा होने के इंतजार के बाद आखिरकार नेतृत्व ने संजय भाटिया को कमान सौंप दी।

## सवाल-जवाब

### 1. राजस्थान बीजेपी का नया प्रभारी किसे बनाया गया है?
हरियाणा बीजेपी के वरिष्ठ नेता और आरएसएस कैडर से जुड़े संजय भाटिया को राजस्थान का नया प्रभारी बनाया गया है।

### 2. राधामोहनदास अग्रवाल कितने समय तक राजस्थान के प्रभारी रहे?
वे लगभग 26 महीने तक राजस्थान बीजेपी के प्रभारी रहे, जो पिछले तीन प्रभारियों में सबसे छोटा कार्यकाल है।

### 3. अग्रवाल से पहले राजस्थान के प्रभारी कौन थे और उनका कार्यकाल कितना था?
उनसे पहले अरुण सिंह 44 महीने और अविनाश राय खन्ना करीब 64 महीने तक राजस्थान के प्रभारी रहे थे।

### 4. राजेंद्र राठौड़ को लेकर क्या विवाद हुआ था?
अगस्त 2024 में एक कार्यशाला के दौरान फोन पर बात करने बाहर जाने पर अग्रवाल ने मंच से राठौड़ के खिलाफ अनुशासनहीनता की टिप्पणी कर दी थी, जिससे उनके समर्थक भड़क गए थे।

### 5. सचिन पायलट को लेकर अग्रवाल ने क्या बयान दिया था?
टोंक में अग्रवाल ने पायलट को बाहरी बताते हुए कहा था कि वे न तो टोंक के हैं और न ही राजस्थान के मूल निवासी।

### 6. प्रभारी बदलने का फैसला कब से विचाराधीन था?
बीजेपी नेतृत्व में यह बदलाव कई महीने पहले से तय माना जा रहा था और पार्टी स्थानीय निकाय चुनावों के पूरा होने का इंतजार कर रही थी।

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