राजस्थान में तीर्थयात्रियों को मिलेंगी हाईटेक सुविधाएं, मुख्य सचिव ने दिए ऑनलाइन दर्शन और अतिक्रमण हटाने के कड़े आदेश राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने देवस्थान विभाग की समीक्षा करते हुए प्रमुख मंदिरों में लाइव दर्शन शुरू करने, मंदिर भूमि से अतिक्रमण हटाने और वित्तीय पारदर्शिता बनाए रखने के निर्देश दिए हैं. राजस्थान सरकार ने राज्य भर के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों पर दर्शनार्थियों के अनुभव को सुगम बनाने और ऐतिहासिक धरोहरों को सहेजने के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है. शासन सचिवालय में आयोजित देवस्थान विभाग की एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने वरिष्ठ नागरिकों और देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की सहूलियत को प्राथमिकता देने के स्पष्ट निर्देश दिए. उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि धार्मिक स्थलों के बुनियादी ढांचे में आधुनिक तकनीकों का समावेश किया जाए, जिससे श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के सुचारू दर्शन कर सकें. मंदिर भूमि से हटेगा अवैध कब्जा, विभागों का संयुक्त अभियान समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्य सचिव ने मंदिरों के स्वामित्व वाली बेशकीमती जमीनों के संरक्षण पर गहरा रुख अपनाया. उन्होंने निर्देश दिया कि मंदिर परिसरों और उनकी संपत्तियों पर किए गए किसी भी तरह के अवैध अतिक्रमण को अविलंब हटाया जाए. इस मुहिम को बिना किसी रुकावट के तेज गति से चलाने के लिए राजस्व विभाग, गृह विभाग और देवस्थान विभाग के अधिकारियों को आपसी तालमेल बैठाकर संयुक्त रूप से सख्त कार्रवाई करने को कहा गया है. इसके साथ ही सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में नए और अब तक सूची से छूटे हुए सभी मंदिरों की एक प्रामाणिक सूची तैयार करें, जिससे आगामी समय में उनके संरक्षण और संवर्धन की रूपरेखा बनाई जा सके. प्रसिद्ध देवालयों में डिजिटल तकनीक से होंगे दर्शन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और दूर-दराज रहने वाले भक्तों की सुविधा को देखते हुए मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि राज्य के प्रमुख और ख्यातिप्राप्त मंदिरों में लाइव दर्शन की आधुनिक व्यवस्था स्थापित की जाए. इस डिजिटल पहल के जरिए लोग घर बैठे ही अपने आराध्य के दर्शन प्राप्त कर सकेंगे. इसके साथ ही मंदिर प्रांगणों में साफ-सफाई के उच्च मानक बनाए रखने, कचरा प्रबंधन दुरुस्त करने और व्यापक सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया गया, ताकि वहां पहुंचने वाले हर तीर्थयात्री को सुखद माहौल मिल सके. दान प्रबंधन में शुचिता और पुजारियों के पदों पर भर्ती देवस्थान विभाग की कार्यप्रणाली को चुस्त-दुरुस्त बनाने के मकसद से मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि कामकाज में किसी भी स्तर पर वित्तीय या प्रशासनिक शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उन्होंने मंदिरों में आने वाले दान और चढ़ावे के प्रबंधन में पूर्ण पारदर्शिता बरतने के निर्देश दिए. विभाग के अधीन आने वाले सभी ट्रस्टों के पंजीकरण का काम प्राथमिकता से पूरा करने को कहा गया है. इसके अलावा मंदिरों में पुजारियों के खाली पड़े पदों को तत्काल भरने और पूरे पुजारी संवर्ग की व्यापक समीक्षा करने के निर्देश भी जारी किए गए. वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा और पंजीकृत ट्रस्टों का ब्योरा बैठक में देवस्थान विभाग की शासन सचिव शुचि त्यागी ने विभागीय प्रगति का विवरण रखा. उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना के अंतर्गत अब तक कुल 22,265 बुजुर्गों को विभिन्न तीर्थों के दर्शन कराए जा चुके हैं. इस आंकड़े में 21 विशेष रेलगाड़ियों के जरिए 20,591 बुजुर्गों को देश के अलग-अलग तीर्थ स्थलों तक पहुंचाया गया, जबकि 1,674 यात्रियों को हवाई जहाज से नेपाल स्थित प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर की यात्रा कराई गई. बैठक के दौरान देवस्थान आयुक्त प्रज्ञा केवलरमानी ने विभाग के प्रशासनिक ढांचे की जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान समय में विभाग 936 राजकीय प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष प्रभार वाले मंदिरों की देखरेख कर रहा है. इसके अलावा विभाग के पास 14,447 ट्रस्ट पंजीकृत हैं, जिनकी ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया को और अधिक सरल बनाया जा रहा है. इसका आप पर असर इस प्रशासनिक फैसले से राजस्थान के धार्मिक स्थलों पर जाने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और दूर-दराज के भक्त घर बैठे दर्शन कर सकेंगे. • भारत में: देश भर के श्रद्धालु अब राजस्थान के प्रमुख मंदिरों के ऑनलाइन दर्शन आसानी से कर पाएंगे. इसके साथ ही राजस्थान आने वाले तीर्थयात्रियों को पहले से अधिक स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण मिलेगा. • राजस्थान में: राज्य में मंदिर संपत्तियों से अवैध कब्जे हटाए जाने से स्थानीय धरोहर सुरक्षित होगी. वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना के सुचारू संचालन से प्रदेश के हजारों बुजुर्गों को मुफ्त धार्मिक यात्रा का लाभ मिलता रहेगा. • पुजारियों और ट्रस्टों के लिए: रिक्त पदों पर भर्ती शुरू होने से स्थानीय योग्य पुजारियों को रोजगार मिलेगा. ऑनलाइन पंजीकरण व्यवस्था सुदृढ़ होने से मंदिर ट्रस्टों को कागजी प्रक्रियाओं से मुक्ति मिलेगी और दान प्रबंधन पारदर्शी होगा. • वरिष्ठ नागरिकों के लिए: तीर्थ स्थलों पर विशेष देखभाल और रेल-हवाई यात्रा के बेहतर समन्वय से बुजुर्ग यात्रियों का सफर अधिक सुरक्षित बनेगा. यात्रा प्रबंधन में पारदर्शिता आने से आवेदकों को बिना रुकावट सुविधाएं मिलेंगी. ऐसा क्यों हुआ राजस्थान सरकार ने धार्मिक स्थलों की सुरक्षा, श्रद्धालुओं के बढ़ते दबाव और संपत्तियों के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए यह समीक्षा बैठक बुलाई. • अतिक्रमण और संपत्ति विवाद: मंदिर भूमि पर अनधिकृत कब्जों की लगातार शिकायतों के बाद राजस्व और गृह विभाग के साथ मिलकर सख्त कानूनी अभियान चलाना जरूरी हो गया था. जमीन के नुकसान को रोकने और वास्तविक परिसंपत्तियों के दस्तावेजीकरण के लिए यह कदम उठाया गया. • श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और तकनीकी जरूरत: देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की भीड़ को देखते हुए मंदिरों में आधुनिक प्रबंधन, सुरक्षा और स्वच्छता के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना आवश्यक था. बुजुर्ग और दूरस्थ भक्तों को सीधे जोड़ने के लिए ऑनलाइन स्ट्रीमिंग की मांग लगातार बढ़ रही थी. • प्रशासनिक जवाबदेही और रिक्तियां: पुजारियों के रिक्त पदों और दान राशि में पारदर्शिता की कमी के कारण मंदिर प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर असर पड़ रहा था. इसलिए विभाग ने ट्रस्टों के ऑनलाइन पंजीकरण और प्रशासनिक समीक्षा के जरिए अनियमितताओं पर रोक लगाने की पहल की. सवाल-जवाब 1. समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव ने प्रमुख मंदिरों के लिए क्या निर्देश दिए? मुख्य सचिव ने प्रमुख मंदिरों में लाइव दर्शन की आधुनिक सुविधा शुरू करने और वहां सफाई तथा सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करने के निर्देश दिए हैं. 2. मंदिर की जमीनों से अतिक्रमण हटाने के लिए किन विभागों को जिम्मेदारी दी गई है? राजस्व, गृह और देवस्थान विभाग को आपस में समन्वय बनाकर संयुक्त रूप से अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई करने को कहा गया है. 3. वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक कितने वरिष्ठ नागरिकों ने तीर्थ यात्रा की है? वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक 22,265 वरिष्ठ नागरिकों को तीर्थयात्रा कराई जा चुकी है. 4. नेपाल स्थित पशुपतिनाथ मंदिर की यात्रा कितने यात्रियों ने हवाई मार्ग से की? कुल 1,674 वरिष्ठ नागरिकों ने हवाई मार्ग के जरिए नेपाल स्थित पशुपतिनाथ मंदिर के दर्शन किए हैं. 5. देवस्थान विभाग वर्तमान में कितने मंदिरों का प्रबंधन संभालता है? देवस्थान विभाग वर्तमान में 936 राजकीय प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष प्रभार के मंदिरों की व्यवस्था संभालता है. 6. विभाग में कुल कितने ट्रस्ट पंजीकृत हैं? विभाग के अंतर्गत कुल 14,447 ट्रस्ट पंजीकृत हैं. https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-men-tirthayatriyon-ko-milengi-haiteka-suvidhaen-mukhya-sachiva-ne-die-nalaina-darshana-aura-atikramana-hatane-ke-kare-ad-53726 TrendKia — Har trend, sabse pehle.