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  "title": "राजस्थान नगर निकाय चुनाव: कहीं आरएलपी प्रत्याशी को मिला शून्य, तो कहीं बीजेपी उम्मीदवार के खाते में आया सिर्फ एक वोट",
  "summary": "राजस्थान के हालिया नगर निकाय चुनाव के नतीजों में बालोतरा में आरएलपी उम्मीदवार को शून्य वोट मिले, वहीं परबतसर में बीजेपी उम्मीदवार को केवल एक वोट मिला क्योंकि दोनों अपने वार्ड के वोटर नहीं थे।",
  "content": "राजस्थान के नगर निकाय चुनाव के हालिया नतीजों में कई ऐसे हैरान करने वाले परिणाम सामने आए हैं, जिन्होंने राजनीतिक विश्लेषकों और आम जनता दोनों को पूरी तरह से चौंका दिया है। सोमवार को हुई मतों की गिनती के दौरान दो उम्मीदवारों की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है। इनमें से एक प्रत्याशी को इस चुनाव में शून्य वोट मिले हैं, जबकि राज्य की सत्ता में काबिज भारतीय जनता पार्टी के एक उम्मीदवार को केवल एक वोट से संतोष करना पड़ा है। इन अजीबोगरीब और अनोखे चुनावी नतीजों के सामने आने के बाद हर तरफ यह जानने के लिए उत्सुकता बनी हुई है कि आखिर ऐसा कैसे संभव हुआ और इन दोनों उम्मीदवारों को अपने ही क्षेत्र में जनता का समर्थन क्यों नहीं मिल सका।\n\n \n\nसिणधरी में आरएलपी उम्मीदवार को मिला शून्य वोट\n\nसबसे चौंकाने वाला मामला बालोतरा जिले की सिणधरी नगरपालिका के वार्ड संख्या 3 से सामने आया है। इस सीट पर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) ने ओम प्रकाश को अपना उम्मीदवार बनाकर चुनावी मैदान में उतारा था। सोमवार को जब मतगणना कर्मियों ने वोटों की गिनती शुरू की, तो वहां मौजूद सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि दंग रह गए। आरएलपी के प्रत्याशी ओम प्रकाश के खाते में एक भी वोट दर्ज नहीं हुआ और वे शून्य वोट पर सिमट गए। इस परिणाम के बाद तुरंत यह सवाल उठने लगा कि क्या उम्मीदवार ने स्वयं को भी वोट नहीं दिया था। इस रहस्य का जवाब यह है कि ओम प्रकाश खुद इस वार्ड के पंजीकृत मतदाता नहीं हैं। उनका नाम इस वार्ड की वोटर लिस्ट में शामिल नहीं होने के कारण वे खुद को वोट देने के पात्र नहीं थे। सिणधरी नगरपालिका के वार्ड संख्या 3 में मुख्य मुकाबला कांग्रेस और बीजेपी के बीच ही सिमटा रहा। इस सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवार भंवरा राम ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 133 वोट हासिल किए और जीत की ट्राफी अपने नाम की। वहीं बीजेपी के उम्मीदवार खेमाराम 93 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे। इस वार्ड में कुल 226 वोट डाले गए थे, लेकिन आरएलपी उम्मीदवार एक भी मतदाता को रिझाने में सफल नहीं हो सके।\n\n \n\nपरबतसर में बीजेपी प्रत्याशी को मिला महज एक वोट\n\nइसी तरह का एक और दिलचस्प और हैरान करने वाला चुनावी मामला डीडवाना-कुचामन जिले की परबतसर नगरपालिका के वार्ड नंबर 13 में देखने को मिला। इस वार्ड से बीजेपी के सिंबल पर चुनाव लड़ने वाले कैलाशचंद को कुल मिलाकर सिर्फ एक वोट प्राप्त हुआ। इस पूरे चुनावी घटनाक्रम में सबसे मजेदार बात यह रही कि यह एकमात्र वोट भी खुद कैलाशचंद का अपना नहीं था। बालोतरा की घटना की तरह ही, कैलाशचंद भी उस वार्ड के मतदाता नहीं थे जहां से वे चुनाव लड़ रहे थे। उनका नाम वार्ड नंबर 12 की मतदाता सूची में दर्ज है, जिसके कारण वे वार्ड नंबर 13 में खुद के लिए मतदान नहीं कर पाए। कैलाशचंद ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि उनका परिवार वार्ड नंबर 12 में रहता है और वहां उनके परिवार के कुल 12 वोट हैं। हालांकि, पार्टी के आधिकारिक फैसले के कारण उन्हें वार्ड नंबर 13 से उम्मीदवार बनाया गया था, जहां उन्हें खुद को वोट देने का अधिकार नहीं था। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, वार्ड नंबर 13 में कांग्रेस उम्मीदवार हिना खानम ने बंपर जीत हासिल की और उन्हें 376 वोट मिले। इस मुकाबले में निर्दलीय प्रत्याशी राशिद खान 195 वोटों के साथ दूसरे नंबर पर रहे, जबकि बीजेपी के कैलाशचंद केवल एक वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे। यह परिणाम सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर इस बात की जमकर चर्चा हो रही है।\n\n \n\nपरबतसर नगरपालिका में कांग्रेस का कब्जा\n\nअगर हम परबतसर नगरपालिका के कुल चुनावी समीकरणों पर नजर डालें, तो यहां कुल 25 वार्ड हैं। इन चुनाव परिणामों में कांग्रेस पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 13 वार्डों में जीत हासिल की है और इसके साथ ही नगरपालिका में अपना स्पष्ट बहुमत साबित कर दिया है। दूसरी तरफ, बीजेपी के प्रत्याशी केवल 12 वार्डों में ही जीत हासिल करने में सफल हो सके, जिससे वे बहुमत के आंकड़े से एक कदम पीछे रह गए। राजस्थान में कुल 309 नगर निकायों के लिए हुए चुनावों की मतगणना सोमवार को आयोजित की गई थी। हालांकि प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से कई अन्य दिलचस्प परिणाम भी सामने आए हैं, लेकिन परबतसर के वार्ड नंबर 13 का यह नतीजा सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोर रहा है क्योंकि यहां सत्ताधारी पार्टी के उम्मीदवार को मात्र एक वोट मिला और वह भी किसी बाहरी मतदाता का था।\n\nइसका आप पर असर\nइस चुनावी नतीजे का असर स्थानीय राजनीतिक समीकरणों और पार्टी टिकट वितरण रणनीतियों पर पड़ना तय है।\n\n• राजनीतिक दलों के लिए सबक: राजनीतिक पार्टियों को अब उम्मीदवार चुनते समय स्थानीय मतदाता सूची का बारीकी से विश्लेषण करना होगा। बाहरी वार्ड के उम्मीदवारों को टिकट देने से कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरता है और ऐसे शर्मनाक चुनावी परिणाम सामने आते हैं।\n\n• स्थानीय मतदाताओं की जागरूकता: स्थानीय मतदाताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि वे केवल पार्टी के नाम पर नहीं बल्कि स्थानीय जुड़ाव रखने वाले चेहरे को ही पसंद करेंगे। उम्मीदवारों का क्षेत्र से न होना उनकी हार का सबसे बड़ा कारण बनता है।\n\n• पार्टी संगठन पर सवाल: सत्तारूढ़ बीजेपी के लिए यह परिणाम संगठनात्मक कमजोरी को दर्शाता है जहां वे बूथ स्तर पर अपने ही प्रत्याशी के लिए वोट सुरक्षित नहीं कर पाए। इससे भविष्य के चुनावों में जमीनी स्तर पर पकड़ मजबूत करने का दबाव बढ़ेगा।\n\n• कांग्रेस का बढ़ता प्रभाव: परबतसर में कांग्रेस को मिला बहुमत यह दिखाता है कि स्थानीय स्तर पर उसकी पकड़ मजबूत हुई है। इसका फायदा पार्टी को आने वाले स्थानीय विकास कार्यों और जिला स्तर की राजनीति में मिलेगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nइन अजीबोगरीब चुनावी नतीजों के पीछे उम्मीदवारों का अपने ही निर्वाचन क्षेत्र में मतदाता न होना और स्थानीय संगठन का तालमेल न होना सबसे मुख्य कारण रहे हैं।\n\n• बाहरी उम्मीदवार होना: बालोतरा के सिणधरी वार्ड 3 से आरएलपी के ओम प्रकाश और परबतसर वार्ड 13 से बीजेपी के कैलाशचंद दोनों ही उन वार्डों के मतदाता नहीं थे जहां से वे चुनाव लड़ रहे थे। इस कारण वे खुद के लिए भी मतदान करने के पात्र नहीं थे।\n\n• संगठनात्मक तालमेल की कमी: दोनों ही दलों के स्थानीय संगठन और बूथ कार्यकर्ता अपने उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम वोट जुटाने में भी असफल रहे। बीजेपी जैसी बड़ी कैडर-आधारित पार्टी के प्रत्याशी को केवल एक बाहरी वोट मिलना कार्यकर्ताओं की निष्क्रियता को दर्शाता है।\n\n• मतदाताओं का ध्रुवीकरण: सिणधरी और परबतसर दोनों ही जगहों पर मतदाताओं ने तीसरे विकल्प को पूरी तरह से नकार दिया। उन्होंने अपनी पसंद को मुख्य रूप से कांग्रेस और बीजेपी या मजबूत निर्दलीय उम्मीदवारों तक ही सीमित रखा, जिससे छोटे प्रत्याशियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. राजस्थान नगर निकाय चुनाव में किस उम्मीदवार को शून्य वोट मिले?\nबालोतरा जिले की सिणधरी नगरपालिका के वार्ड संख्या 3 से राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के उम्मीदवार ओम प्रकाश को शून्य यानी एक भी वोट नहीं मिला।\n\n2. आरएलपी उम्मीदवार ओम प्रकाश को एक भी वोट क्यों नहीं मिला?\nओम प्रकाश सिणधरी नगरपालिका के वार्ड संख्या 3 के पंजीकृत मतदाता नहीं थे, इसलिए वे खुद को भी वोट नहीं दे सके, और वार्ड के किसी अन्य वोटर ने भी उन्हें वोट नहीं दिया।\n\n3. बीजेपी के किस उम्मीदवार को केवल एक वोट मिला?\nडीडवाना-कुचामन जिले की परबतसर नगरपालिका के वार्ड नंबर 13 से बीजेपी उम्मीदवार कैलाशचंद को सिर्फ एक वोट मिला।\n\n4. क्या बीजेपी उम्मीदवार कैलाशचंद ने खुद को वोट दिया था?\nनहीं, कैलाशचंद खुद को वोट नहीं दे सके क्योंकि उनका नाम वार्ड नंबर 12 की मतदाता सूची में पंजीकृत है, जबकि वे वार्ड 13 से चुनाव लड़ रहे थे।\n\n5. परबतसर नगरपालिका के वार्ड नंबर 13 में किस उम्मीदवार ने जीत हासिल की?\nवार्ड नंबर 13 में कांग्रेस उम्मीदवार हिना खानम ने 376 वोट हासिल कर शानदार जीत दर्ज की, जबकि निर्दलीय राशिद खान 195 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे।\n\n6. परबतसर नगरपालिका चुनाव में किस पार्टी को बहुमत मिला?\nपरबतसर नगरपालिका के कुल 25 वार्डों में से कांग्रेस ने 13 वार्डों में जीत दर्ज कर स्पष्ट बहुमत हासिल किया, जबकि बीजेपी को 12 वार्डों में जीत मिली।",
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  "publishedAt": "2026-09-14",
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