राजस्थान नगर निकाय चुनाव में बीजेपी की बड़ी जीत के बीच जयपुर के वार्ड 110 से ज्योति खंडेलवाल की हैरान करने वाली हार राजस्थान के नगर निकाय चुनावों में सत्तारूढ़ भाजपा ने कई जगहों पर शानदार प्रदर्शन किया है, लेकिन जयपुर के किशनपोल क्षेत्र के वार्ड 110 से दिग्गज नेता ज्योति खंडेलवाल की पराजय सबसे बड़ी चर्चा का विषय बनी हुई है। राजस्थान के नगर निकाय चुनाव के नतीजों ने राज्य की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है। पूरे सूबे में जहां भारतीय जनता पार्टी शानदार प्रदर्शन करते हुए आगे बढ़ रही है, वहीं जयपुर नगर निगम के वार्ड नंबर 110 से भाजपा प्रत्याशी ज्योति खंडेलवाल की हार ने राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया है। इस पराजय की गूंज सिर्फ जयपुर की गलियों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स से लेकर विभिन्न राजनीतिक मंचों पर इस पर गहन मंथन हो रहा है। जयपुर नगर निगम में भाजपा बहुमत हासिल करने के बेहद करीब है, लेकिन इस बड़ी कामयाबी के बीच किशनपोल क्षेत्र के एक छोटे से वार्ड में पार्टी के एक सबसे बड़े चेहरे की शिकस्त ने सभी को हैरान कर दिया है। इसके बाद से ही राजनीतिक हलकों में यह सवाल तैर रहा है कि आखिर ज्योति खंडेलवाल का राजनीतिक कद क्या है और उनकी इस हार के पीछे के समीकरण क्या रहे हैं। किशनपोल का सियासी मिजाज और ज्योति खंडेलवाल का सफर जयपुर के किशनपोल इलाके में आने वाला वार्ड नंबर 110 इस बार के स्थानीय चुनावों का सबसे हॉट सीट बन चुका था। यहां से भाजपा ने पूर्व महापौर ज्योति खंडेलवाल को अपना उम्मीदवार बनाया था। ज्योति खंडेलवाल कोई साधारण नाम नहीं हैं, बल्कि वे जयपुर की राजनीति का एक अत्यंत प्रभावशाली और जाना-माना चेहरा हैं। वह वर्ष 2009 में राजस्थान नगरीय निकाय चुनावों के बाद जयपुर की महापौर चुनी गई थीं और इससे पहले साल 2005 में उन्होंने पहली बार पार्षद का चुनाव जीतकर अपने सक्रिय राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी। लगभग 25 वर्षों से सक्रिय राजनीति का हिस्सा रहीं ज्योति की छवि जयपुर में एक बेहद दबंग और मुखर नेता की रही है। जब वह जयपुर की मेयर थीं, तब जनहित के मुद्दों को लेकर वह प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर राज्य सरकार के मंत्रियों तक से सीधे मोर्चा लेने के लिए पहचानी जाती थीं। कांग्रेस से नाता तोड़ने और भाजपा में शामिल होने की कहानी ज्योति खंडेलवाल की इस हार की चर्चा इसलिए भी इतनी ज्यादा हो रही है क्योंकि वे लंबे समय तक कांग्रेस की अग्रिम पंक्ति की नेता रही हैं। साल 2018 के राजस्थान विधानसभा चुनावों के दौरान उन्होंने कांग्रेस पार्टी से टिकट की मांग की थी, लेकिन तब उन्हें सफलता नहीं मिली। इसके बाद कांग्रेस आलाकमान ने उनके राजनीतिक कद को देखते हुए वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में जयपुर शहर की मुख्य संसदीय सीट से उन्हें अपना उम्मीदवार बनाकर मैदान में उतारा था। हालांकि, उस आम चुनाव में उन्हें करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा था। इसके बाद साल 2023 के विधानसभा चुनाव में ज्योति एक बार फिर किशनपोल विधानसभा सीट से कांग्रेस का टिकट पाना चाहती थीं, लेकिन पार्टी ने उनकी इस मांग को तवज्जो नहीं दी। कांग्रेस द्वारा बार-बार उपेक्षा किए जाने से नाराज होकर उन्होंने पाला बदल लिया और भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली थी। भाजपा में आने के बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि यदि वह वार्ड 110 से पार्षद का चुनाव जीतती हैं, तो उन्हें पार्टी जयपुर नगर निगम में महापौर पद की मजबूत दावेदार के रूप में पेश कर सकती है, लेकिन चुनावी नतीजों ने उनकी इन उम्मीदों पर पानी फेर दिया। राजस्थान के विभिन्न नगर निकायों के संपूर्ण चुनावी आंकड़े राजस्थान के इस नगर निकाय चुनाव में राज्य के विभिन्न शहरों से जो आंकड़े सामने आए हैं, वे बेहद दिलचस्प हैं और राज्य के बदलते राजनीतिक मिजाज को दर्शाते हैं। प्रमुख नगर निकायों की स्थिति इस प्रकार रही - अजमेर: कुल 80 वार्डों में से भाजपा ने 32 सीटों पर कब्जा किया है, जबकि कांग्रेस 37 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। अन्य उम्मीदवारों के खाते में 11 सीटें गई हैं। - बीकानेर: यहां की 80 सीटों में से कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 42 वार्डों में जीत दर्ज की है, जबकि भाजपा को 27 सीटों से संतोष करना पड़ा है। इसके अलावा अन्य के खाते में 10 सीटें और आरएलपी को 1 सीट मिली है। - उदयपुर: भाजपा ने यहां एकतरफा प्रदर्शन करते हुए 80 में से 53 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। वहीं कांग्रेस को महज 23 सीटें मिली हैं, जबकि मारपा को 1 और अन्य के हिस्से में 3 सीटें आई हैं। - पाली: कुल 65 सीटों में से भाजपा को 21 और कांग्रेस को 29 सीटें प्राप्त हुई हैं, जबकि 15 सीटों पर अन्य उम्मीदवारों ने कब्जा जमाया है। - अलवर: इस नगर निकाय की 65 सीटों में से भाजपा को 28, कांग्रेस को 23, बीएसपी को 1 और निर्दलीय तथा अन्य उम्मीदवारों को 13 सीटें मिली हैं। - भरतपुर: कुल 65 वार्डों में से भाजपा को 20, कांग्रेस को 7, बीएसपी को 1, आरएलपी को 1 सीट मिली है, जबकि निर्दलीयों ने सबसे बड़ा धमाका करते हुए 36 सीटों पर जीत दर्ज की है। - जोधपुर: यहां की 100 सीटों में से 99 के परिणाम घोषित हो चुके हैं, जिसमें भाजपा और कांग्रेस दोनों ने 44-44 सीटों पर बराबरी का मुकाबला किया है, जबकि अन्य के खाते में 11 सीटें गई हैं। - कोटा: 100 में से 78 सीटों के आए नतीजों में भाजपा 47 सीटों के साथ बेहद मजबूत स्थिति में है, जबकि कांग्रेस को 29 और अन्य को 2 सीटें मिली हैं। - जयपुर: कुल 150 वार्डों में से 131 सीटों के परिणाम घोषित हुए हैं, जिसमें भाजपा ने 68 सीटों पर कब्जा कर लिया है, कांग्रेस के खाते में 48 सीटें गई हैं, जबकि अन्य को 14 और एआईएमआईएम को 1 सीट हासिल हुई है। - भीलवाड़ा: कुल 70 में से 58 सीटों के परिणाम सामने आए हैं, जिसमें भाजपा ने 37 सीटों पर बढ़त बनाई है, कांग्रेस को केवल 9 सीटें मिली हैं और अन्य के खाते में 12 सीटें गई हैं। दिग्गज की हार के बाद भी भाजपा मुख्यालय में जश्न का माहौल यद्यपि ज्योति खंडेलवाल जैसी बड़ी और अनुभवी नेता का पार्षद चुनाव हार जाना भाजपा के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन इसका असर पार्टी के प्रदेश मुख्यालय के उत्साह पर बिल्कुल नहीं पड़ा है। जयपुर स्थित भाजपा कार्यालय में माहौल बेहद सकारात्मक और उल्लासपूर्ण बना हुआ है। पार्टी के शीर्ष रणनीतिकारों और पदाधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि किसी एक वार्ड के स्थानीय परिणाम से पार्टी के समग्र प्रदर्शन का आकलन नहीं किया जा सकता। भाजपा जयपुर नगर निगम के 100 से अधिक वार्डों में जीत हासिल करने के अपने विशाल लक्ष्य की ओर मजबूती से आगे बढ़ रही है और उन्हें पूरा भरोसा है कि वे जयपुर में पूर्ण बहुमत के साथ अपना नगर निगम बोर्ड बनाने में सफल होंगे। चोमू और कालाडेरा में विकास कार्यों के दम पर भाजपा की एकतरफा जीत जयपुर जिले के चोमू और कालाडेरा क्षेत्रों से भाजपा के लिए बेहद सुखद और उत्साहवर्धक परिणाम सामने आए हैं। चोमू विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक और भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता रामलाल शर्मा ने इस ऐतिहासिक जीत पर प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि चोमू क्षेत्र में वर्तमान में कांग्रेस के विधायक और सांसद होने के बावजूद वहां की जागरूक जनता ने नकारात्मक राजनीति को नकार कर विकास के एजेंडे को चुना है। चोमू नगर पालिका के कुल 45 वार्डों में से भाजपा ने रिकॉर्ड 30 वार्डों पर अपनी जीत दर्ज की है। इसी तरह कालाडेरा क्षेत्र के कुल 20 वार्डों में से 12 वार्डों में भाजपा उम्मीदवारों ने जीत का परचम लहराया है। रामलाल शर्मा के अनुसार, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा चोमू क्षेत्र के विकास के लिए स्वीकृत किए गए 500 करोड़ रुपये से अधिक के बजट और विकास कार्यों के कारण ही जनता ने भाजपा पर अपना अटूट विश्वास जताया है। गढ़ों को बचाने और निर्दलीयों की भूमिका पर पार्टी का रुख पाली और झालावाड़ जैसे इलाकों में, जो पारंपरिक रूप से भाजपा के मजबूत गढ़ माने जाते रहे हैं, वहां शुरुआती रुझानों में कुछ उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं। इस विषय पर स्थिति स्पष्ट करते हुए भाजपा के प्रदेश महामंत्री श्रवण बगड़ी ने कहा कि अभी कई राउंड की मतगणना और अंतिम परिणाम आना बाकी है। उन्हें पूरा विश्वास है कि जब सभी सीटों के अंतिम परिणाम घोषित होंगे, तो इन क्षेत्रों में भाजपा का ही परचम शान से लहराएगा। इसके साथ ही कोटपूतली और रींगस जैसे क्षेत्रों में निर्दलीय उम्मीदवारों के बढ़ते दबदबे पर उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर कई बार पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ता किन्हीं कारणों से निर्दलीय चुनाव लड़ लेते हैं, लेकिन जीत हासिल करने के बाद वे अंततः भाजपा की विकासवादी विचारधारा के साथ ही वापस आते हैं। फिलहाल, भाजपा प्रदेश मुख्यालय को अंतिम दौर के नतीजों का इंतजार है, जिसके बाद पूरे राज्य में बड़ी जीत के जश्न की तैयारियां शुरू की जाएंगी। पार्टी नेताओं का दावा है कि राज्य के कुल 309 निकायों में से अधिकांश में 'ट्रिपल इंजन' सरकार बनने का सपना साकार होने जा रहा है। इसका आप पर असर इस नगर निकाय चुनाव के नतीजों का राजस्थान के शहरी मतदाताओं और स्थानीय विकास पर सीधा असर पड़ने वाला है। • राजस्थान में: राज्य के 309 निकायों में अधिकांश जगह भाजपा का बोर्ड बनने से शहरी बुनियादी ढांचे के विकास को नई रफ्तार मिलेगी। इसका मतलब है कि राज्य सरकार के विकास बजट का आवंटन और नगर पालिकाओं में विकास कार्यों की प्रशासनिक मंजूरी अब बिना किसी राजनीतिक अड़चन के तेजी से हो सकेगी। • जयपुर में: जयपुर के वार्ड 110 में ज्योति खंडेलवाल की हार से स्थानीय स्तर पर नए राजनीतिक नेतृत्व का उदय होगा। मतदाताओं को अब अपनी स्थानीय वार्ड समस्याओं जैसे सड़क, पानी और साफ-सफाई के लिए नए पार्षदों से संपर्क साधना होगा, जबकि भाजपा के भीतर भी जयपुर मेयर पद की दावेदारी के समीकरण बदल जाएंगे। ऐसा क्यों हुआ ज्योति खंडेलवाल की हार और विभिन्न निकायों के परिणाम स्थानीय स्तर पर गुटबाजी, उम्मीदवारों की दलबदल पृष्ठभूमि और विकास केंद्रित वोटिंग पैटर्न का नतीजा हैं। • लगातार दल बदलने से नाराजगी: ज्योति खंडेलवाल का कांग्रेस से भाजपा में जाना स्थानीय मतदाताओं के एक वर्ग को रास नहीं आया। कई पुराने भाजपा कार्यकर्ताओं और पारंपरिक समर्थकों ने बाहरी प्रत्याशी को टिकट दिए जाने का मौन विरोध किया, जिससे उन्हें पराजय झेलनी पड़ी। • विकास कार्यों का प्रभाव: चोमू और कालाडेरा जैसे क्षेत्रों में भाजपा की बंपर जीत का मुख्य कारण मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा स्वीकृत की गई 500 करोड़ रुपये से अधिक की विकास योजनाएं थीं। मतदाताओं ने स्थानीय स्तर पर कांग्रेस विधायक होने के बावजूद सत्तारूढ़ दल के विकास कार्यों पर भरोसा जताया। • निर्दलीयों का बढ़ता दबदबा: भरतपुर और कोटपूतली जैसे क्षेत्रों में बड़ी संख्या में बागियों और निर्दलीयों का जीतना यह दर्शाता है कि टिकट वितरण को लेकर स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं में असंतोष था, जिसके कारण उन्होंने स्वतंत्र चुनाव लड़कर जीत दर्ज की। सवाल-जवाब 1. जयपुर नगर निगम के वार्ड 110 से किसकी हार हुई है? जयपुर के किशनपोल क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले वार्ड 110 से भाजपा की दिग्गज नेता और पूर्व महापौर ज्योति खंडेलवाल चुनाव हार गई हैं। 2. ज्योति खंडेलवाल ने कांग्रेस कब छोड़ी और वे भाजपा में क्यों शामिल हुईं? ज्योति खंडेलवाल साल 2018 और 2023 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस से टिकट न मिलने के कारण नाराज थीं, जिसके बाद वे हाल ही में भाजपा में शामिल हो गई थीं। 3. चोमू नगर पालिका में भाजपा को कितनी सीटें मिली हैं? चोमू नगर पालिका के कुल 45 वार्डों में से भाजपा ने एकतरफा प्रदर्शन करते हुए 30 वार्डों पर जीत हासिल की है। 4. जयपुर नगर निगम में अब तक की घोषित सीटों पर भाजपा और कांग्रेस की क्या स्थिति है? जयपुर की 150 में से घोषित 131 सीटों में से भाजपा को 68 सीटें मिली हैं, जबकि कांग्रेस को 48 सीटों पर जीत मिली है। 5. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने चोमू को कितने करोड़ के विकास कार्यों की सौगात दी थी? मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने चोमू क्षेत्र के विकास कार्यों के लिए 500 करोड़ रुपये से अधिक के बजट की सौगात दी थी, जिसका फायदा भाजपा को चुनाव में मिला। https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-nagara-nikaya-chunava-men-bjp-ki-bari-jita-ke-bicha-jaipur-ke-varda-110-se-jyoti-khandelwal-ki-hairana-karane-vali-hara-32226 TrendKia — Har trend, sabse pehle.