राजस्थान निकाय चुनाव में नामांकन का अंतिम दिन: जयपुर में सुनील कोठारी और जोधपुर में प्रसन्न चंद मेहता बने भाजपा प्रत्याशी राजस्थान में नगर निगम प्रमुखों के निर्वाचन को लेकर अंतिम दिन तेज सियासी हलचल दिखी, जहां भाजपा ने जयपुर में सुनील कोठारी और जोधपुर में प्रसन्न चंद मेहता को मैदान में उतारा। वहीं कई जिलों में पार्षदों की बाड़ेबंदी, गुमशुदगी और धरने प्रदर्शन के मामले सामने आए। राजस्थान के विभिन्न नगर निकायों में शीर्ष पदों के चयन की उल्टी गिनती शुरू होने के साथ ही सियासी सरगर्मियां चरम पर पहुंच गई हैं। नामांकन प्रक्रिया के अंतिम दिन राज्य के दो बड़े शहरों जयपुर और जोधपुर में भारतीय जनता पार्टी ने अपने उम्मीदवारों के चेहरे तय कर चुनावी जंग को पूरी तरह खोल दिया है। राजधानी जयपुर में जहां वार्ड 112 के विजयी प्रतिनिधि सुनील कोठारी को मैदान में उतारा गया है, वहीं मारवाड़ के केंद्र जोधपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पृष्ठभूमि के प्रसन्न चंद मेहता पर पार्टी ने भरोसा जताया है। इन नामांकनों के समानांतर राज्य के कई संभागों में पार्षदों की घेराबंदी, राजनीतिक टकराव, पुलिस हस्तक्षेप और कानून व्यवस्था को लेकर प्रदर्शनों का दौर भी जारी रहा। जयपुर में सुनील कोठारी पर सहमति, कांग्रेस में तीन नामों पर मंथन जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों के गणित के बीच अध्यक्ष पद सामान्य श्रेणी के लिए सुरक्षित है। इस पद हेतु नामांकन प्रक्रिया पंडित दीनदयाल उपाध्याय सभागार में कमरा नंबर 204 में संचालित की गई। सुबह 10:30 बजे से दोपहर 3 बजे तक पर्चे दाखिल करने की समयसीमा निर्धारित थी, जबकि 18 सितंबर तक एक भी पर्चा दाखिल नहीं हुआ था। पार्टी के रणनीतिकारों ने काफी रायशुमारी के बाद वैश्य समुदाय से आने वाले सुनील कोठारी के नाम पर अपनी पसंद तय की। संगठन में लंबे अरसे से जिम्मेदारी संभाल रहे कोठारी दोपहर करीब 2 बजे अपना पर्चा दाखिल करने पहुंचे। चुनाव कार्यक्रम के तहत 21 सितंबर को दोपहर 3 बजे तक नामांकन पत्रों की जांच पूरी होगी, जिसके बाद 22 सितंबर दोपहर 3 बजे तक नाम वापस लिए जा सकेंगे। यदि मतदान की आवश्यकता पड़ी तो 25 सितंबर को सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक निर्वाचित सदस्य अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। दूसरी ओर विपक्षी दल कांग्रेस के खेमे में भी उम्मीदवारी को लेकर खींचतान जारी रही। शहर कांग्रेस इकाई के अध्यक्ष सुनील शर्मा की ओर से सिंबल आवंटन से पहले तीन प्रमुख चेहरों भरत मेघवाल, धर्म सिंह सिंघानिया और सुनीता मावर के नामों पर गहन विचार विमर्श चला। कांग्रेस प्रत्याशी भी समयसीमा समाप्त होने से पहले दोपहर 2 बजे तक पर्चा दाखिल करने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़े। पुष्कर के होटल में 78 पार्षदों का पहरा राजधानी के निगम सदन में किसी भी उलटफेर की आशंका को टालने के लिए रणनीतिक बाड़ेबंदी का सहारा लिया गया। अजमेर जिले के गंज थाना इलाके में पुष्कर रोड पर खरखेड़ी के एक निजी रिसॉर्ट में भाजपा के 78 जीते हुए पार्षदों को कुछ निर्दलीय सदस्यों के साथ ठहराया गया है। निगम के कुल 150 वार्डों में भाजपा अपने पास निर्णायक संख्याबल का दावा कर रही है, जबकि कांग्रेस के 57 और 15 निर्दलीय सदस्य चुनकर आए हैं। क्रॉस वोटिंग या जोड़-तोड़ के प्रयासों को नाकाम करने के लिए सभी पार्षदों को मतदान प्रक्रिया संपन्न होने तक एकजुट रखने की रणनीति बनाई गई है। जोधपुर में प्रसन्न चंद मेहता ने मंदिर दर्शन के बाद दाखिल किया पर्चा जोधपुर नगर निगम में महापौर की कुर्सी के लिए भाजपा ने वरिष्ठ कार्यकर्ता प्रसन्न चंद मेहता को अधिकृत प्रत्याशी बनाया। नामांकन दाखिल करने से पूर्व मेहता ने पाल बालाजी मंदिर पहुंचकर विशेष पूजा-अर्चना की और शीश नवाकर विजय का संकल्प लिया। इसके पश्चात वे भाजपा प्रदेश महामंत्री एवं संभाग प्रभारी भूपेंद्र सैनी तथा जिलाध्यक्ष राजेंद्र पालीवाल के साथ नगर निगम के कमरा नंबर 307 पहुंचे, जो तीसरे तल के सभा भवन में स्थित है। उनके साथ विधायक देवेंद्र जोशी और अतुल भंसाली सहित पार्टी के प्रमुख पदाधिकारी मौजूद रहे। जोधपुर सदन के 100 वार्डों में बेहद करीबी मुकाबला देखने को मिला था, जहां भाजपा ने 45 और कांग्रेस ने 44 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इसके अतिरिक्त 10 निर्दलीय और एक सीट राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के खाते में गई थी। स्पष्ट बहुमत हासिल करने के लिए भाजपा को 6 और कांग्रेस को 7 अतिरिक्त सदस्यों के समर्थन की दरकार थी। भाजपा ने 7 निर्दलीय पार्षदों को अपने पाले में जोड़कर संख्याबल को अनुकूल बना लिया। नामांकन की औपचारिक समयसीमा समाप्त होने के बाद 21 सितंबर को स्क्रूटनी और 22 सितंबर तक नाम वापसी का समय तय है। संगरिया और नाथद्वारा में बाड़ेबंदी पर सियासी घमासान हनुमानगढ़ जिले की संगरिया नगरपालिका के अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर पड़ोसी राज्य पंजाब में तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई। दो स्थानीय पार्षदों ओमप्रकाश स्वामी और साहिल स्वामी की गुमशुदगी अथवा कथित अगवा किए जाने की शिकायत दर्ज होने पर संगरिया पुलिस दल पंजाब में कांग्रेस के बाड़ेबंदी स्थल पर पहुंचा। वहां संगरिया विधायक अभिमन्यु पूनिया और पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी तकरार हुई। पूनिया ने सत्ता पक्ष द्वारा सरकारी तंत्र के अनुचित इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए कहा कि निर्दोष जन प्रतिनिधियों को झूठी शिकायतों के बहाने निशाना बनाया जा रहा है। हालांकि पुलिस ने दोनों पार्षदों के बयान दर्ज किए, जिसमें उन्होंने अपनी मर्जी से वहां मौजूद होने की बात कही और किसी भी तरह के अपहरण से इनकार किया। उधर राजसमंद जिले के नाथद्वारा में वार्ड-4 के भाजपा पार्षद प्रदीप काबरा को लेकर चल रहा विवाद एक नए मोड़ पर पहुंचा। काबरा के परिजनों ने पहले उनके अपहरण की आशंका जताई थी और उनके पुत्र ने आत्मदाह की चेतावनी तक दे दी थी। इस बीच काबरा का अन्य विजयी भाजपा पार्षदों के साथ नया वीडियो सामने आया, जिसमें वे साथियों के बीच बैठे दिखे। काबरा ने पुलिस पर पूर्व में नामांकन न भरने देने के लिए दबाव बनाने का आरोप दोहराया, लेकिन साथ ही यह स्पष्ट किया कि भाजपा के सभी विजयी सदस्य एकजुट हैं और 21 सितंबर को नाथद्वारा में पार्टी का बोर्ड गठित करने जा रहे हैं। हनुमानगढ़ में कलेक्ट्रेट घेराव, पाली में विधायक का धरना हनुमानगढ़ नगर परिषद के सभापति चुनाव से ठीक पहले निर्दलीय विधायक गणेशराज बंसल पर जंक्शन थाने में जाली पट्टे बांटने के आरोप में दो मुकदमे दर्ज किए गए। इसके अतिरिक्त उनके करीबी प्रतिष्ठानों, जिनमें एक होटल और उर्वरक विक्रय केंद्र शामिल हैं, पर खाद्य एवं कृषि महकमों द्वारा छापेमारी की गई। इन प्रशासनिक कार्यवाहियों से आक्रोशित होकर माकपा कार्यकर्ताओं और बंसल के समर्थकों ने जिला कलेक्ट्रेट परिसर का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि स्थानीय निकाय में विधायक गुट के पास स्पष्ट बहुमत होने के कारण उन्हें प्रताड़ित करने की नीयत से यह झूठे मामले बनाए गए हैं। इधर पाली जिले में कानून व्यवस्था की स्थिति को लेकर कांग्रेस विधायक भीमराज भाटी जिला कलेक्ट्रेट के सामने बेमियादी धरने पर बैठ गए। शुक्रवार दोपहर शुरू हुआ यह प्रदर्शन पूरी रात चला और विधायक ने रात भी धरना स्थल पर ही काटी। यह विवाद तब उपजा जब कांग्रेस के महापौर प्रत्याशी का अधिकृत फॉर्म जमा करवाकर लौट रहे विधायक के भाई के साथ कुछ लोगों ने मारपीट की। भाटी ने आरोप लगाया कि पहचान उजागर होने के बावजूद हमलावरों को पुलिस अब तक गिरफ्तार नहीं कर पाई है। उन्होंने प्रशासन पर सुरक्षा देने में विफल रहने का आरोप लगाते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की। सूरतगढ़, अलवर और भिवाड़ी में हिंसा व तनाव श्रीगंगानगर के सूरतगढ़ क्षेत्र के वार्ड-43 से हाल ही में निर्वाचित पार्षद कृष्ण बेनीवाल अपने भाई के साथ बीकानेर से वापसी के दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गए। दोनों से संपर्क टूटने के बाद आक्रोशित वार्डवासियों और परिजनों ने सूरतगढ़ सिटी थाने का घेराव कर प्रदर्शन किया और अविलंब सुराग लगाने की गुहार लगाई। पुलिस दोनों की तलाश के लिए विभिन्न मार्गों पर जांच कर रही है। अलवर के वैशाली नगर थाना क्षेत्र स्थित बेलाका गांव में वार्ड-40 की निर्दलीय विजेता अनीता द्वारा भाजपा को समर्थन दिए जाने की खबर के बाद दो पक्षों में खूनी संघर्ष हो गया। अब्दुल रज्जाक और उसके परिजनों पर आरोप लगा कि उन्होंने अनीता समर्थकों पर लाठियों और लोहे की छड़ों से हमला कर दिया। इस मारपीट में बेलाका निवासी अब्बास और याकूब गंभीर रूप से चोटिल हुए, जिनमें अब्बास के सिर में गहरी चोटें आई हैं। दोनों घायलों को अलवर के सामान्य चिकित्सालय में भर्ती कराया गया है। उधर खैरथल-तिजारा जिले के औद्योगिक कस्बे भिवाड़ी के यूआईटी सेक्टर-9 में वार्ड-25 के भाजपा पार्षद देवेंद्र यादव पर गंभीर आरोप लगे। उनके प्रतिद्वंद्वी रहे निर्दलीय उम्मीदवार महेंद्र कुमार शर्मा ने आरोप लगाया कि नगर परिषद की अर्थमूवर मशीन की मदद से उनके समर्थकों के घरों के पीछे मृत मवेशी को गड्ढा खोदकर दबा दिया गया। स्थानीय निवासियों के कड़े विरोध के बाद प्रशासन ने मवेशी के अवशेषों को वहां से निकलवाकर अन्यत्र स्थानांतरित करवाया। झालावाड़ कोर्ट का दोहरे हत्याकांड में आजीवन कारावास का फैसला इधर अदालती हलचल में झालावाड़ जिले की अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत ने सारोला थाना क्षेत्र के मालनवासा गांव में घटित करीब दो वर्ष पुराने जीजा-साले दोहरे हत्याकांड पर अपना अंतिम फैसला सुना दिया। पुरानी रंजिश के चलते किए गए इस अपराध में अदालत ने तीन आरोपियों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। इसके साथ ही प्रत्येक दोषी पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। अभियोजन पक्ष ने सुनवाई के दौरान कुल 25 गवाहों के बयान और 71 दस्तावेजी साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए थे, जिनके आधार पर अदालत ने यह कठोर फैसला सुनाया। इसका आप पर असर राजस्थान के विभिन्न शहरों में नगर निगम और नगर पालिका प्रमुखों के निर्वाचन से आम नागरिकों के दैनिक जीवन और स्थानीय विकास कार्यों की दिशा तय होगी। • जयपुर और जोधपुर में: नए महापौर और बोर्ड के गठन से अटकी हुई नागरिक सुविधाओं, स्वच्छता प्रबंधन और सड़क परियोजनाओं को गति मिलेगी। स्थानीय निवासियों को वार्ड स्तर पर बजट आवंटन और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में स्पष्टता देखने को मिलेगी। • वार्ड प्रतिनिधियों के मतदाताओं पर: चुने गए पार्षदों की बाड़ेबंदी और खींचतान के चलते आम लोगों के नियमित प्रमाणपत्र और स्थानीय शिकायत निवारण कार्य कुछ दिनों के लिए प्रभावित हो सकते हैं। एक बार औपचारिक पदभार ग्रहण होने के बाद ही नगर निगम मुख्यालयों में आम जनता की जनसुनवाई सुचारू हो सकेगी। • कानून व्यवस्था और सुरक्षा: चुनावी रंजिश और प्रदर्शनों वाले कस्बों में पुलिस की निगरानी और जांच प्रक्रिया कड़ी रहेगी। स्थानीय व्यापारियों और निवासियों को विरोध प्रदर्शनों के दौरान आवागमन में सावधानी बरतनी होगी। • नगरपालिका सेवाओं की समयसीमा: 25 सितंबर तक चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही नए बोर्ड का विधिवत कार्यभार शुरू हो जाएगा। इसके बाद रुके हुए आवासीय पट्टे, सफाई अनुबंध और स्ट्रीट लाइट मरम्मत जैसे कार्य दोबारा रफ्तार पकड़ेंगे। ऐसा क्यों हुआ यह राजनीतिक टकराव और उठापटक नगर निगमों में किसी भी पार्टी को भारी अंतर से एकतरफा बहुमत न मिलने और महापौर पद पर कब्जे की आपाधापी के कारण पैदा हुआ है। • खंडित जनादेश और निर्दलीय पार्षदों की भूमिका: जोधपुर और संगरिया जैसे निकायों में दोनों प्रमुख दलों के बीच केवल एक-दो सीटों का अंतर रहने के कारण निर्दलीयों की अहमियत अचानक बढ़ गई। इसी संख्याबल को सुरक्षित करने के लिए राजनीतिक दलों ने अपने पार्षदों की गुप्त बाड़ेबंदी शुरू की। • स्थानीय स्तर पर चुनावी रंजिश: परिणाम घोषित होने के बाद निर्दलीय पार्षदों द्वारा पाला बदलने से नाराज विरोधी गुटों में टकराव हुआ, जिससे अलवर और भिवाड़ी जैसी घटनाएं सामने आईं। असंतुष्ट राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने मारपीट और अपमानजनक कृत्यों का सहारा लिया। • प्रशासनिक मुकदमों पर टकराव: स्थानीय निकायों पर राजनीतिक दबदबे की लड़ाई में विपक्ष ने सत्ता पक्ष पर पुलिस और विभागीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया। संगरिया में पुलिस द्वारा पंजाब में बाड़ेबंदी की जांच और हनुमानगढ़ में विधायक पर मुकदमे इसी सियासी अविश्वास की कड़ी हैं। सवाल-जवाब 1. जयपुर नगर निगम में भाजपा की ओर से महापौर प्रत्याशी कौन हैं? भाजपा ने वार्ड 112 से नवनिर्वाचित पार्षद और संगठन के वरिष्ठ कार्यकर्ता सुनील कोठारी को अपना प्रत्याशी बनाया है। 2. जोधपुर में भाजपा ने महापौर पद के लिए किसे टिकट दिया है? जोधपुर नगर निगम के महापौर पद के लिए भाजपा ने प्रसन्न चंद मेहता को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। 3. जयपुर में महापौर पद के लिए मतदान कब होगा? यदि चुनाव की आवश्यकता पड़ती है, तो निर्वाचित पार्षदों के बीच 25 सितंबर को सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक मतदान कराया जाएगा। 4. जोधपुर नगर निगम में दलों की दलीय स्थिति क्या है? जोधपुर के 100 वार्डों में भाजपा को 45, कांग्रेस को 44, निर्दलीयों को 10 और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी को 1 सीट मिली है। 5. पाली में विधायक भीमराज भाटी धरने पर क्यों बैठे? कांग्रेस प्रत्याशी का सिंबल जमा कर लौट रहे विधायक के भाई के साथ हुई मारपीट के आरोपियों की गिरफ्तारी न होने के विरोध में वे धरने पर बैठे। 6. झालावाड़ जिला अदालत ने दोहरे हत्याकांड में क्या सजा सुनाई? सारोला के मालनवासा में दो साल पुराने जीजा-साले हत्याकांड में कोर्ट ने तीन अभियुक्तों को आजीवन कारावास और 25-25 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी। https://trendkia.com/rajasthan/rajasthan-nikay-chunav-2026-jaipur-mein-sunil-kothari-aur-jodhpur-mein-prasann-chand-mehta-bane-bjp-candidate-33734 TrendKia — Har trend, sabse pehle.